Chopta Plus

Chopta Plus हरियाणा, राजस्थान, पंजाब सहित देश प्रदेश की महत्वपूर्ण ख़बरों का खजाना, chopta plus,

हरियाणा। हरियाणवी लोक कला और रागनी गायन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। मशहूर हरियाणवी रागनी गायक एवं लोक कलाकार यशपाल श...
08/06/2026

हरियाणा। हरियाणवी लोक कला और रागनी गायन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। मशहूर हरियाणवी रागनी गायक एवं लोक कलाकार यशपाल शर्मा उर्फ पेप्सी शर्मा का निधन हो गया। बताया जा रहा है कि अचानक सीने में दर्द उठने के बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी उम्र मात्र 38 वर्ष थी। पेप्सी शर्मा अपने पीछे पत्नी, 10 वर्षीय बेटी और 7 वर्षीय बेटे सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन की खबर से हरियाणवी संगीत और लोक कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। गाजियाबाद जिले के निवाड़ी क्षेत्र स्थित पतला गांव के निवासी यशपाल शर्मा ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में विशेष पहचान बनाई थी। मंचीय कार्यक्रमों में उनकी प्रस्तुति को दर्शक बेहद पसंद करते थे। हालांकि उनका वास्तविक नाम यशपाल शर्मा था, लेकिन मंचों पर वे "पेप्सी शर्मा" के नाम से प्रसिद्ध हुए। हरियाणा में आयोजित होने वाले रागनी कार्यक्रमों और गोशालाओं के सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। उनकी दमदार आवाज और हरियाणवी लोक संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियों ने उन्हें लाखों लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया। पेप्सी शर्मा ने मशहूर हरियाणवी कलाकार सपना चौधरी के साथ कई मंचीय कार्यक्रम किए। एक कार्यक्रम में उनके नागिन डांस की प्रस्तुति काफी चर्चा में रही थी, जिसका वीडियो करोड़ों लोगों ने देखा। उनकी लोकप्रिय रागनी "पतला दुपट्टा तेरा मुंह दिख्यै से" को भी दर्शकों ने खूब सराहा और इस पर लाखों व्यूज आए। मंचीय प्रस्तुतियों के अलावा पेप्सी शर्मा ने टीवी जगत में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने लोकप्रिय कार्यक्रम "यह दिल है हिंदुस्तानी" सहित कई टीवी मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उनकी गायकी और प्रस्तुति शैली ने उन्हें हरियाणवी लोक संगीत की दुनिया में अलग पहचान दिलाई। परिजनों के अनुसार, पेप्सी शर्मा को बचपन से ही गायन का शौक था। करीब 20 साल पहले उन्होंने परिवार को बताए बिना गायन की दुनिया में कदम रखा था। जब उनका पहला कार्यक्रम टेलीविजन पर प्रसारित हुआ, तब परिवार को उनकी इस प्रतिभा के बारे में पता चला। धीरे-धीरे उन्होंने रागनी गायन में अपनी अलग पहचान स्थापित कर ली। छह भाइयों में सबसे छोटे पेप्सी शर्मा ने हरियाणवी लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निधन की सूचना मिलते ही कलाकारों, प्रशंसकों और सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने छोटे से गांव से निकलकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया था। पेप्सी शर्मा का निधन हरियाणवी लोक कला और रागनी जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके गीत और प्रस्तुतियां हमेशा उनके प्रशंसकों के दिलों में जीवित रहेंगी।

नाथूसरी चौपटा। दिल्ली स्थित डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित 11वीं हरियाणा स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में नाथूसरी चौपट...
07/06/2026

नाथूसरी चौपटा। दिल्ली स्थित डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित 11वीं हरियाणा स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में नाथूसरी चौपटा की जोरा शूटिंग स्पोर्ट्स अकादमी के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्री-नेशनल प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई किया है। अकादमी के सभी खिलाड़ियों की इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। अकादमी के संचालक संदीप देहड़ू (बिल्लू) और कोच प्रहलाद कासनियां ने सभी खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण का ही परिणाम है कि वे राज्य स्तर की प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्री-नेशनल के लिए चयनित हुए हैं।
प्री-नेशनल के लिए क्वालीफाई करने वाले शूटर:
आरजू (मखोसरानी), हंसिका (मखोसरानी), सिद्धार्थ (अली मोहम्मद), जतिन (कुसुंभी), इशिका बेनीवाल (कैरावाली), स्नेहा पारीक (चौपटा), रजत सोनी (चौपटा), मकसूद खान (कागदाना), योगेश बेनीवाल (कागदाना), दिव्य बेनीवाल (कागदाना), निशु बेनीवाल (कुम्हारिया), साहिल खिलेरी (एयर फोर्स, चाहरवाला)

हांसी। क्षेत्र के गांव खेड़ी चौपटा में रविवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक महिला की मौत हो गई, जबकि दूसरी महिला गंभ...
07/06/2026

हांसी। क्षेत्र के गांव खेड़ी चौपटा में रविवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक महिला की मौत हो गई, जबकि दूसरी महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसा उस समय हुआ जब दोनों महिलाएं लकड़ी लेने के लिए जा रही थीं। इसी दौरान एक पानी का टैंकर अनियंत्रित होकर उनके ऊपर पलट गया। मृतक महिला की पहचान गांव खेड़ी जालब निवासी 44 वर्षीय सरोज के रूप में हुई है, जबकि हादसे में घायल 40 वर्षीय संध्या को उपचार के लिए हांसी के सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार सुबह करीब 9:30 बजे खेड़ी चौपटा-बरवाला रोड पर स्थित राजकीय विद्यालय के निकट यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि दोनों महिलाएं सड़क किनारे लकड़ी लेने जा रही थीं। इसी दौरान पानी से भरा एक टैंकर अचानक अनियंत्रित हो गया और पलटकर महिलाओं पर जा गिरा। हादसा इतना भीषण था कि सरोज की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि संध्या गंभीर रूप से घायल हो गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया। जानकारी के अनुसार सरोज अपने पति की मृत्यु के बाद अपने मायके खेड़ी जालब में अपनी मां के साथ रह रही थी। उसका एक बेटा भी है। हादसे की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पताल पहुंच गए। घटना की सूचना मिलते ही खेड़ी चौपटा पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए हांसी के सामान्य अस्पताल के शवगृह में रखवा दिया है। मामले की जांच कर रहे हेड कांस्टेबल प्रदीप ने बताया कि पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज करने शुरू कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में यह सड़क दुर्घटना का मामला प्रतीत हो रहा है। परिजनों के बयानों और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगामी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सभी ट्यूबेल लाइनो का समय व टाइम टेबल बदल गया जो इस प्रकार है:-👉 दिनांक 08/06/2026 से 10/06/2026 तकGroup - A 👉         चा...
07/06/2026

सभी ट्यूबेल लाइनो का समय व टाइम टेबल बदल गया जो इस प्रकार है:-👉 दिनांक 08/06/2026 से 10/06/2026 तक

Group - A 👉
चाहरवाला, जसानिया (आज डबल चलेगी)
*रात 03:00 बजे से सुबह 11:00 बजे तक*

*Group - B* 👉
*खेड़ी*
*सुबह 11:00 बजे से शाम 07:00 बजे तक*

आज रात्री ⏰ से लागू

33 केवी कागदाना बिजलीघर से चलने वाली ट्यूबेल लाइनो का समय

सिरसा जिले के डबवाली क्षेत्र के गांव रिसालिया खेड़ा में एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़के का शव गांव से लगभग 2 किलोमीटर दूर खेत ...
07/06/2026

सिरसा जिले के डबवाली क्षेत्र के गांव रिसालिया खेड़ा में एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़के का शव गांव से लगभग 2 किलोमीटर दूर खेत में बनी पानी की डिग्गी से बरामद हुआ। नाबालिग 6 जून से लापता था, जिसकी तलाश में परिजन और ग्रामीण जुटे हुए थे। शव मिलने के बाद गांव में शोक का माहौल है। जानकारी के अनुसार, गांव निवासी भूप सिंह का पुत्र गुरदीप (17) 6 जून को खेतों की ओर गया था। शाम तक घर नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई। परिवार ने पहले आसपास के क्षेत्रों और रिश्तेदारों के यहां उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद गोरीवाला पुलिस चौकी में सूचना दी गई। पूरी रात परिजन और ग्रामीण गुरदीप की खोजबीन करते रहे। अगले दिन यानी रविवार सुबह ग्रामीणों को गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर एक खेत में बनी पानी की डिग्गी के पास उसकी बाइक और चप्पलें मिलीं। इससे आशंका जताई गई कि गुरदीप संभवतः डिग्गी में गिर गया होगा। गुरदीप अपनी पांच बहनों का इकलौता भाई था। ग्रामीणों ने तुरंत डिग्गी का पानी निकलवाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद पानी कम होने पर गुरदीप का शव डिग्गी से बरामद हुआ। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।

कहते हैं कि उम्मीद कभी नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि कभी-कभी चमत्कार भी हकीकत बन जाते हैं। ऐसा ही एक भावुक कर देने वाला माम...
06/06/2026

कहते हैं कि उम्मीद कभी नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि कभी-कभी चमत्कार भी हकीकत बन जाते हैं। ऐसा ही एक भावुक कर देने वाला मामला हरियाणा के यमुनानगर जिले से सामने आया है, जहां 12 वर्षों से लापता एक महिला अपने बेटों से दोबारा मिल पाई। परिवार ने उन्हें मृत मानकर उनकी सभी अंतिम रस्में तक निभा दी थीं, लेकिन अब मां के जीवित मिलने से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। हरियाणा के जगाधरी मानव सेवा के क्षेत्र में समर्पित संस्था “नी आसरे दा आसरा” (मगरपुर, जिला यमुनानगर) ने एक बार फिर बिछड़े परिवार को मिलाकर मानवता की मिसाल पेश की है। वर्ष 2014 से अपने परिवार से बिछड़ी एक महिला को संस्था ने पूरे 12 वर्ष बाद उसके बेटों से मिलाया।

संस्था के रिकॉर्ड के अनुसार, स्थानीय ग्रामीणों की सूचना पर साहा पुलिस थाना द्वारा महिला को गांव सबगा से 4 मई 2026 को आश्रम लाया गया था। उस समय वह अपनी पहचान और पता स्पष्ट रूप से बताने की स्थिति में नहीं थीं। करीब एक माह तक आश्रम में उनकी देखभाल, भोजन, चिकित्सा एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, और संस्था की टीम लगातार उनके परिवार की खोज में जुटी रही। आधुनिक तकनीक की सहायता से अंततः परिजनों तक पहुँचने में सफलता मिली।

परिजनों के अनुसार, महिला वर्ष 2014 में पति से हुई कहासुनी के बाद घर से निकल गई थीं। पीछे तीन छोटे बच्चे छूट गए। परिवार ने वर्षों तक उन्हें ढूँढा, परंतु कोई सुराग न मिलने पर यह मान लिया गया कि शायद उनकी कहीं मृत्यु हो चुकी है। दुखी मन से परिवार ने उन्हें मृत मानकर सारी रस्में भी निभा दीं।

ऐसे में जब आश्रम से परिवार के पास फोन पहुँचा कि उनकी माँ जीवित एवं सुरक्षित हैं, तो बच्चों की ख़ुशी का ठिकाना न रहा। दिनांक 3 जून 2026 को महिला के बेटे सोनू कुमार सिंह, रोहित कुमार एवं कपिल कुमार (निवासी शहजादपुर, जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश) आश्रम पहुँचे और आवश्यक पहचान एवं सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने के बाद अपनी माँ को सम्मानपूर्वक घर ले गए।

बरसों बाद माँ को सामने पाकर भावुक हुए बच्चों ने “नी आसरे दा आसरा” की पूरी टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया।

संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि “नी आसरे दा आसरा” वर्तमान में 250 से अधिक निराश्रित, मानसिक रूप से अस्वस्थ, बेसहारा एवं जरूरतमंद लोगों की सेवा कर रहा है। संस्था का उद्देश्य केवल आश्रय देना ही नहीं, बल्कि बिछड़े लोगों को उनके परिवारों से पुनः मिलाना और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करना भी है। 12 साल बाद मिली मां
लापता महिला मिली
यमुनानगर न्यूज
Reunion Story
Woman Found
Haryana News
Human Interest News
Family Reunion Story
Viral News Hindi
Haryana News

मेहुवाला और डिंग के बीच रोड पर चलती कार में लगी आग,हरियाणा के भट्टूकलां क्षेत्र के गांव मेहुवाला निवासी पंकज पुत्र साधु ...
06/06/2026

मेहुवाला और डिंग के बीच रोड पर चलती कार में लगी आग,

हरियाणा के भट्टूकलां क्षेत्र के गांव मेहुवाला निवासी पंकज पुत्र साधु राम सिहाग अपने दोस्त विक्रम बैनीवाल पुत्र छोटूराम निवासी चूली खुर्द के साथ शनिवार को दवाई लेने के लिए सिरसा जा रहे थे।
जानकारी के अनुसार जब वे मेहुवाला और डिंग के बीच पहुंचे तो अचानक कार के बोनट से शॉर्ट सर्किट जैसी आवाज सुनाई दी। स्थिति को भांपते हुए पंकज ने तुरंत वाहन सड़क किनारे रोक दिया। इसके बाद दोनों ने नीचे उतरकर बोनट खोलकर जांच की तो उसमें तेज स्पार्किंग होने लगी और देखते ही देखते आग भड़क उठी।
आग लगने से कार को नुकसान पहुंचा, हालांकि समय रहते दोनों युवक वाहन से बाहर निकल गए, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। प्रारंभिक तौर पर आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है।
गनीमत रही कि हादसे में दोनों कार सवार सुरक्षित रहे और कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

हरियाणा के गांवों में जोहड़ों को लेकर पंचायत के लिए बड़ा आदेश, कचरा मिला तो सरपंचों को भरना पड़ेगा इतना जुर्मानाचंडीगढ़।...
06/06/2026

हरियाणा के गांवों में जोहड़ों को लेकर पंचायत के लिए बड़ा आदेश, कचरा मिला तो सरपंचों को भरना पड़ेगा इतना जुर्माना

चंडीगढ़। हरियाणा में 'स्वच्छ गांव, स्वच्छ जलवायु अभियान' के तहत अब गांवों के जोहड़ों (तालाबों) को पूरी तरह से कचरा मुक्त बनाया जाएगा। जमीन के नीचे के पानी (भूजल) को प्रदूषित होने से बचाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पहली बार गांवों की तरफ रुख किया है। बोर्ड ने पंचायतों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अगर जोहड़ों में कचरा मिला, तो सीधे पंचायत पर जुर्माना लगाया जाएगा। यह अभियान अप्रैल 2026 से शुरू होकर अप्रैल 2027 तक पूरे एक साल चलेगा।

गांवों में बारिश और नालियों के पानी को इकट्ठा करने का सबसे बड़ा जरिया जोहड़ ही होते हैं। अक्सर लोग इनमें घरों का कचरा डाल देते हैं, जिससे पानी दूषित होता है और इसका सीधा असर भूजल स्तर पर पड़ता है। अभी तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सिर्फ शहरों के प्रदूषण पर नजर रखता था, लेकिन अब गांवों के जोहड़ों को बचाने के लिए भी बोर्ड ने पंचायतों की जिम्मेदारी तय कर दी है। इस पूरे अभियान की देखरेख के लिए ब्लॉक स्तर पर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं, गांव के स्तर पर पंचायत सचिव, सरपंच और वार्ड पंच इस काम को संभालेंगे।

जोहड़ों में कचरा गिरने से रोकने के लिए पंचायतें अपने बजट के हिसाब से कड़े कदम उठा सकती हैं। पंचायत चाहे तो जोहड़ के चारों तरफ जाली लगवा सकती है। अगर पंचायत के पास अच्छा फंड है, तो पक्की चारदीवारी भी करवाई जा सकती है। कचरा जोहड़ तक न पहुंचे, इसके लिए हर घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए पंचायत खुद या किसी प्राइवेट एजेंसी के साथ समझौता करके घर-घर से कचरा उठवा सकती है। एक साल तक चलने वाले इस जागरूकता अभियान के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड खुद गांवों में जाकर जोहड़ों की जांच करेगा। जांच के दौरान अगर किसी जोहड़ में कचरा तैरता हुआ मिला, तो संबंधित पंचायत पर 500 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शिखा ने बताया कि इस अभियान को लेकर जल्द ही सरकार की तरफ से पक्की गाइडलाइन आने वाली हैं, जिन्हें तुरंत लागू कर दिया जाएगा। फिलहाल ग्राम सभा की बैठकों में पंचायतें एमओयू (समझौता पत्र) पर साइन कर रही हैं। वहीं, आम नागरिक छवि कौशिक का कहना है कि यह एक बहुत अच्छी शुरुआत है। जोहड़ों में कचरा नहीं जाएगा तो भूजल भी साफ रहेगा और लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी मिल सकेगा।

पूरी कहानी अवश्य पढ़ें 👉👉मेहनत की कमाई और बेटों की लापरवाही, एक छोटे से गांव में एक किसान रहता था। वह साधारण किसान था, ल...
06/06/2026

पूरी कहानी अवश्य पढ़ें 👉👉मेहनत की कमाई और बेटों की लापरवाही, एक छोटे से गांव में एक किसान रहता था। वह साधारण किसान था, लेकिन उसकी सोच बहुत बड़ी थी। उसके पास ज्यादा जमीन भी थी, फिर भी वह दिन-रात मेहनत करता था। खेतों में खेती-बाड़ी के साथ-साथ उसने एक छोटा सा अनाज और खाद-बीज का व्यापार भी शुरू कर दिया। गांव के लोग उसकी ईमानदारी और मेहनत की मिसाल देते थे।
किसान सुबह सूरज निकलने से पहले उठ जाता और देर रात तक काम करता। उसकी पत्नी भी हर कदम पर उसका साथ देती थी। दोनों का एक ही सपना था कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और जीवन में सफल बनें।

समय बीतता गया। मेहनत रंग लाने लगी। खेती से अच्छी पैदावार होने लगी और व्यापार भी बढ़ने लगा। धीरे-धीरे किसान ने गांव में पक्का मकान बनवा लिया। और जमीन खरीद ली। घर में ट्रैक्टर, कार और अन्य सुविधाएं भी आ गईं। लोग कहते थे, "देखो, मेहनत करने वाला इंसान कभी खाली हाथ नहीं रहता।"

किसान के तीन बेटे थे। उसने अपने बेटों को शहर के अच्छे स्कूलों में पढ़ाया। बच्चों की पढ़ाई के लिए उसने कभी पैसों की कमी नहीं होने दी। कई बार खुद पुराने कपड़े पहन लिए लेकिन बच्चों की फीस समय पर भरी। बेटों ने भी पढ़ाई पूरी कर ली और अच्छे कॉलेजों से डिग्रियां हासिल कर लीं।

जब बेटे बड़े हुए तो किसान ने सोचा कि अब उसकी मेहनत सफल हो गई है। उसने अपने बेटों को व्यापार और खेती की जिम्मेदारी सौंपनी शुरू कर दी। वह चाहता था कि बेटे उसके बनाए हुए काम को और आगे बढ़ाएं।

लेकिन धीरे-धीरे हालात बदलने लगे।

बेटों को पिता की मेहनत का मूल्य समझ नहीं आया। वे आसान जिंदगी के आदी हो गए थे। उन्हें लगता था कि पैसा तो घर में बहुत है, इसलिए मेहनत करने की क्या जरूरत है। खेती-बाड़ी में उनका मन नहीं लगता था। व्यापार की देखभाल भी वे ठीक से नहीं करते थे।

एक दिन बड़े बेटे ने कहा, "पिताजी, खेती और व्यापार में इतना समय खराब करने से अच्छा है कि हम बड़ा निवेश करें। शहर में नए प्रोजेक्ट आ रहे हैं। वहां पैसा लगाकर जल्दी अमीर बन सकते हैं।"

किसान ने समझाया, "बेटा, मेहनत से कमाया हुआ धन बहुत कीमती होता है। बिना समझे-बूझे कहीं भी पैसा लगाना ठीक नहीं।"

लेकिन बेटों ने उसकी बात को पुरानी सोच कहकर नजरअंदाज कर दिया।

धीरे-धीरे तीनों बेटों ने अलग-अलग व्यवसायों में पैसा लगाना शुरू कर दिया। किसी ने शेयर बाजार में बिना जानकारी के निवेश किया, किसी ने दोस्तों की बातों में आकर बड़ा कारोबार शुरू कर दिया, तो किसी ने महंगी गाड़ियां और दिखावे पर पैसा खर्च करना शुरू कर दिया।

किसान बार-बार उन्हें समझाता रहा, लेकिन बेटों को अपने फैसलों पर बहुत भरोसा था।

कुछ समय तक सब ठीक लगता रहा, लेकिन फिर मुश्किलें शुरू हो गईं। जिन लोगों पर भरोसा करके पैसा लगाया था, वे धोखा देकर भाग गए। कुछ व्यापार घाटे में चले गए। कई निवेश डूब गए।

देखते ही देखते लाखों रुपये का नुकसान हो गया।

बेटों ने नुकसान की भरपाई के लिए खेत बेचने शुरू कर दिए। फिर एक-एक करके कई जमीनें बिक गईं। व्यापार भी घाटे में चला गया। गांव में जो परिवार कभी समृद्धि की मिसाल माना जाता था, वह आर्थिक संकट में फंस गया।

किसान यह सब देखकर अंदर ही अंदर टूटने लगा। जिस संपत्ति को बनाने में उसने पूरी जिंदगी लगा दी थी, वह कुछ वर्षों में खत्म होती जा रही थी।

एक शाम वह अपने आंगन में बैठा था। उसकी आंखों में आंसू थे। उसने अपने बेटों को बुलाया और कहा,

"बेटों, मैं गरीब था। मैंने मेहनत करके यह सब बनाया। मुझे कभी धन का घमंड नहीं हुआ। मैं जानता था कि एक-एक रुपया कितनी मेहनत से आता है। लेकिन तुम लोगों ने बिना मेहनत के सब पाया, इसलिए उसकी कीमत नहीं समझ पाए।"

बेटे चुपचाप सिर झुकाकर सुनते रहे।

किसान आगे बोला, "धन कमाना मुश्किल है, लेकिन उसे संभालकर रखना उससे भी ज्यादा कठिन है। मैंने सोचा था कि तुम लोग मेरी मेहनत को आगे बढ़ाओगे, लेकिन तुमने जल्द अमीर बनने के चक्कर में सब कुछ दांव पर लगा दिया।"

उस दिन पहली बार बेटों को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्हें समझ आया कि पिता जो कह रहे थे, वह अनुभव की बात थी।

बड़े बेटे की आंखों में आंसू आ गए। उसने कहा, "पिताजी, हमने आपकी बात नहीं मानी। हमें लगा था कि हम आपसे ज्यादा समझदार हैं। लेकिन आज समझ आया कि मेहनत और अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता।"

बाकी दोनों बेटों ने भी अपनी गलती स्वीकार कर ली।

इसके बाद परिवार ने नया फैसला लिया। जो जमीन बची थी, उसी पर फिर से खेती शुरू की गई। पुराने व्यापार को धीरे-धीरे संभाला गया। बेटों ने पहली बार खेतों में जाकर मेहनत की। सुबह जल्दी उठना, मजदूरों के साथ काम करना और व्यापार का हिसाब रखना शुरू किया।

शुरुआत कठिन थी, लेकिन इस बार उन्हें हर कमाए हुए रुपये की कीमत समझ आने लगी थी।

कुछ वर्षों बाद परिवार की आर्थिक स्थिति फिर सुधरने लगी। पहले जैसी समृद्धि तो नहीं आई, लेकिन घर में संतोष और समझदारी लौट आई।

किसान अब बूढ़ा हो चुका था। एक दिन उसने अपने बेटों से कहा,

"मैं खुश हूं कि तुमने अपनी गलती से सीख ली। जीवन में धन का नुकसान फिर पूरा किया जा सकता है, लेकिन यदि इंसान सीखना छोड़ दे तो वह सबसे बड़ा नुकसान होता है।"

उसकी बात सुनकर तीनों बेटे भावुक हो गए।

उस दिन उन्हें समझ आया कि पिता की सबसे बड़ी विरासत जमीन, मकान या पैसा नहीं थी, बल्कि उनकी मेहनत, ईमानदारी और जीवन का अनुभव था।

सीख:
मेहनत से कमाया गया धन अमूल्य होता है। बिना सोचे-समझे निवेश और दिखावे की जिंदगी इंसान को बर्बादी की ओर ले जा सकती है। अनुभव और मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जो लोग अपने बड़ों की सीख को समझते हैं, वही जीवन में स्थायी सफलता प्राप्त करते हैं।

No file chosen

Address

Village-Kumharia Distt. Sirsa
Sirsa

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Chopta Plus posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Chopta Plus:

Share