14/10/2026
NSEIT मामले में बड़ा खुलासा: ₹3,464 करोड़ की संपत्तियां कुर्क, 5,682 निवेशकों को ₹1,950 करोड़ लौटाने का रास्ता साफ
विशेष पीएमएलए अदालत ने पुनर्स्थापन आदेश जारी किया, भुगतान में चूक से जुड़े मामले में निवेशकों को राहत मिलने की उम्मीद
नगरयात्रा न्यूज। नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) से जुड़े NSEIT मामले में निवेशकों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुंबई की विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत ने 12 अक्टूबर 2026 को पुनर्स्थापन संबंधी आदेश जारी करते हुए 5,682 निर्धारित निवेशकों को करीब 1,950 करोड़ रुपये की धनराशि लौटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अब तक लगभग 3,464 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क कर चुका है। मामले में हजारों निवेशकों की रकम फंसने के बाद से ही भुगतान और वसूली को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी थी।
उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, मुंबई स्थित विशेष पीएमएलए अदालत ने पीएमएलए विशेष मामला संख्या 4/2015 तथा ईसीआईआर संख्या 169/2026 से संबंधित प्रकरण में 8 अक्टूबर 2026 को पारित अपने आदेश के आधार पर यह कार्रवाई की। आदेश के तहत कुर्क की गई संपत्तियों के पुनर्स्थापन और निवेशकों को भुगतान सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया है। अदालत के इस कदम को लंबे समय से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
13 हजार निवेशकों को हुआ था नुकसान
एनएसईएल से जुड़े इस मामले की जड़ वर्ष 2013 में सामने आए भुगतान संकट से जुड़ी है। दस्तावेज में उल्लेख है कि वास्तविक स्टॉक की उपलब्धता के बिना कमोडिटी बाजार में कारोबार करने की अनुमति दिए जाने के आरोपों के बाद हजारों निवेशक प्रभावित हुए थे। इस मामले में करीब 13,000 निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा और लगभग 5,600 करोड़ रुपये की बकाया राशि का मामला सामने आया।
मामले में एनएसईएल प्लेटफॉर्म प्रदाता, उसके निदेशकों, प्रमुख अधिकारियों, 25 चूककर्ता सदस्यों तथा अन्य व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग और जालसाजी जैसे आरोप दर्ज किए गए थे। आरोपों की जांच के दौरान वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की पड़ताल की गई। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण संबंधित न्यायिक कार्यवाही के अधीन है।
ईडी ने कुर्क की 3,464 करोड़ रुपये की संपत्तियां
प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत मामले की जांच करते हुए अब तक 35 अनंतिम कुर्की आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों के माध्यम से करीब 3,464.03 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को कुर्क किया गया है। इसके अतिरिक्त, ईडी ने विशेष अदालत के समक्ष अभियोजन शिकायतें और अनुपूरक शिकायतें भी दायर की हैं।
जांच एजेंसी की कार्रवाई का उद्देश्य कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित संपत्तियों का पता लगाना और कानून के तहत उपलब्ध प्रक्रिया के माध्यम से प्रभावित निवेशकों के हितों की रक्षा करना है। कुर्की का अर्थ संपत्तियों पर कानूनी प्रतिबंध लगाना है; संपत्तियों की कुर्की और निवेशकों को वास्तविक भुगतान दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
5,682 निवेशकों के लिए बनी थी समझौता योजना
दस्तावेज के मुताबिक, राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी), मुंबई ने 28 नवंबर 2025 को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 230 से 232 के तहत एक समझौता योजना को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत 5,682 निर्धारित ऋणदाताओं के लिए कुल 1,950 करोड़ रुपये की समझौता राशि तय की गई थी।
योजना को 92 प्रतिशत से अधिक ऋणदाताओं की स्वीकृति प्राप्त हुई थी। इसके तहत प्रत्येक पात्र ऋणदाता को उसके सत्यापित दावे की कम से कम 42 प्रतिशत राशि वापस मिलने का प्रावधान बताया गया। इस योजना का उद्देश्य उपलब्ध राशि और निर्धारित शर्तों के आधार पर पात्र निवेशकों को भुगतान करना है।
हालांकि, योजना को लेकर कानूनी चुनौती भी दी गई थी। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (एनसीएलएटी) ने 15 जनवरी 2026 को योजना की मंजूरी को चुनौती देने वाली अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत चुनौती भी खारिज किए जाने का उल्लेख दस्तावेज में है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया
दस्तावेज के अनुसार, 13 अप्रैल 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने संबंधित न्यायालयों और प्राधिकारियों को निर्देश दिया था कि पात्र निवेशकों को भुगतान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से योजना के क्रियान्वयन के लिए उचित आदेश पारित किए जाएं। इसके बाद भुगतान और पुनर्स्थापन से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आधार तैयार हुआ।
अब अक्टूबर 2026 में विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा जारी पुनर्स्थापन आदेश को इसी प्रक्रिया की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। इससे कुर्क संपत्तियों और निर्धारित समझौता योजना के बीच कानूनी समन्वय स्थापित कर निवेशकों को राहत पहुंचाने की संभावना मजबूत हुई है।
क्या सभी निवेशकों को पूरी रकम वापस मिलेगी?
यह मामला निवेशकों के लिए राहत की उम्मीद जरूर जगाता है, लेकिन इसे सभी प्रभावित निवेशकों को पूरी रकम वापस मिलने की गारंटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। दस्तावेज में 5,682 निर्धारित ऋणदाताओं के लिए 1,950 करोड़ रुपये की समझौता राशि का उल्लेख है। वास्तविक भुगतान पात्रता, सत्यापित दावों, योजना की शर्तों और अदालत के आदेश के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
वहीं, मूल भुगतान संकट में प्रभावित निवेशकों की संख्या करीब 13,000 बताई गई है। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्धारित योजना के तहत भुगतान किस प्रकार और कितने समय में किया जाता है तथा शेष प्रभावित निवेशकों के दावों का निस्तारण किस प्रक्रिया से होगा।
2013 से जारी है कानूनी लड़ाई
एनएसईएल भुगतान संकट वर्ष 2013 में सामने आया था। इसके बाद आर्थिक अपराध शाखा और प्रवर्तन निदेशालय सहित विभिन्न एजेंसियों ने मामले की जांच की। वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों, संपत्तियों की कुर्की, अदालतों में कानूनी चुनौतियों और समझौता योजना की मंजूरी के बीच यह मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है।
करीब 13 वर्ष बाद भी निवेशकों की रकम की वसूली और भुगतान इस प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बना हुआ है। अब विशेष पीएमएलए अदालत के ताजा आदेश के बाद निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि तय प्रक्रिया के तहत भुगतान कब शुरू होता है और उन्हें वास्तविक रूप से कितनी राहत मिलती है।