08/12/2025
"जब दस्तूर का पहला सफ़ा ही ख़याल, इज़हार, अक़ीदा, दीन और इबादत की पूरी आज़ादी देता है, तो फ़िर किसी शहरी को किसी ख़ुदा, देवी-देवता की इबादत या सज्दा के लिए कैसे मजबूर किया जा सकता है?"
वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर लोकसभा में विशेष चर्चा के दौरान मेरी स्पीच।