Afzal Shaikh The Express magazine

Afzal Shaikh The Express magazine ( मंदसौर ध्वज ) पत्रकार & समाज सेवी सीतामऊ जिला मंदसौर ( म. प्र. )

सत्ता को आईना दिखाने वाली पत्रकारिता का कॉरपोरेट और राजनीति, दोनों के नियंत्रण से मुक्त होना बुनियादी ज़रूरत है. और ये तभी संभव है जब जनता ऐसी पत्रकारिता का हर मोड़ पर साथ दे. फ़ेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियों के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद करें.

22/11/2025
21/10/2025

समस्त देशवासियों को दीपावली की बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। यह पावन पर्व आपके जीवन में सुख शांति समृद्धि, स्वास्थ्य और उजाला लेकर आए। अंधकार पर प्रकाश की विजय का यह त्यौहार
आपके घर-आँगन को खुशियों से भर दे।

 #सीतामऊ में गरीब बच्चों के बीच  #थाना  #प्रभारी  #मोहन  #मालवीय ने  #बांटी  #खुशियाँ।  दीपावली के अवसर पर सीतामऊ में था...
21/10/2025

#सीतामऊ में गरीब बच्चों के बीच #थाना #प्रभारी #मोहन #मालवीय ने #बांटी #खुशियाँ। दीपावली के अवसर पर सीतामऊ में थाना प्रभारी मोहन मालवीय और पुलिस स्टॉप ने बच्चों को पटाखे और मिठाई वितरित कीं, चेहरे पर झलकी मुस्कान सीतामऊ में दीपावली के पावन अवसर पर थाना प्रभारी मोहन मालवीय ने मानवता और सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए आज गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चा-बच्चियों को पटाखे और मिठाइयाँ वितरित कीं। इस कार्यक्रम में पुलिस स्टाफ भी उपस्थित रहे। सीतामऊ थाना प्रभारी मोहन मालवीय ने सभी से शांति, सद्भावना और भाईचारे के साथ त्यौहार मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था संभालने के लिए नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के साथ जुड़कर सेवा के कार्यों में भी आगे रहती है। गरीब परिवारों और बच्चों के लिए यह दीपावली यादगार बन गई। मिठाइयों और पटाखों के साथ बच्चा बच्चियों की हँसी और खुशियों से गूंज उठा।

16/10/2025

हमारा संकल्प #निष्पक्ष और #सत्य लिखेंगे जनता के लिए हम #कलम के #सिपाही हैं, सत्ता या पद के नहीं, सत्य और न्याय के सेवक हैं। हमारा मकसद किसी के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि जनता के हित में सच्चाई को उजागर करना है। जब समाज में झूठ, लालच और अन्याय हावी हो जाता है, तब कलम की ताक़त ही सच को आवाज़ देती है। हम उस आवाज़ को कभी दबने नहीं देंगे। हम लिखेंगे गरीब के हक़ की बात, किसान की पीड़ा, मज़दूर का दर्द और आम जनता की सच्चाई। हम झूठे प्रचार और पक्षपात से दूर रहकर निष्पक्ष, ईमानदार और निर्भीक पत्रकारिता करेंगे। क्योंकि हमारा विश्वास है सत्य की कलम कभी झुकती नहीं, और न्याय की आवाज़ कभी रुकती नहीं।

 #कांग्रेस  #पार्टी से  #महिला  #नेत्री  #नूरी  #खान को  #अधिवक्ता ( #वकील) बनने पर दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद! यह सफलता...
16/10/2025

#कांग्रेस #पार्टी से #महिला #नेत्री #नूरी #खान को #अधिवक्ता ( #वकील) बनने पर दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद! यह सफलता आपकी मेहनत, लगन और हौसले का परिणाम है। आपने हमेशा गरीबों, पीड़ितों और महिलाओं की आवाज उठाई है, और अब न्याय के क्षेत्र में कदम रखकर आपने समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है। नूरी खान जैसी ईमानदार, निडर और जनता की हितैषी महिला पर समाज को गर्व है। आपकी वकालत गरीब और बेबस लोगों के लिए उम्मीद की किरण बने, आपका हर कदम न्याय और इंसाफ की राह पर आगे बढ़े इसी दुआ के साथ आपको बहुत बहुत मुबारकबाद। 🌹💐 अल्लाह तआला आपको कामयाबी दे, आपकी उम्र में बरकत दे, और हर कदम पर रहनुमाई फरमाए।🤲🤲 Noori Khan

16/10/2025

#पैसा #ज़रूरत #भी, #और #ज़हर #भी
पैसा इंसान की ज़िंदगी की अहम ज़रूरत है। बिना पैसे के कोई काम चल नहीं सकता खाने से लेकर इलाज तक, शिक्षा से लेकर सम्मान तक, हर जगह पैसे की अहमियत है। मगर जब यही पैसा ज़रूरत से ज़्यादा अहमियत लेने लगता है, तो इंसान का चरित्र, #ईमान #और #इंसानियत सब कुछ पीछे #छूट #जाता है। आज के दौर में लोग इंसान को नहीं, उसके पास के पैसों को देखते हैं। #रिश्ते, #दोस्ती, #मोहब्बत सब कुछ पैसों की #तौल पर आ गया है। जो अमीर है, वही इज़्ज़तदार कहलाता है, और जो गरीब है, उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं। पैसा अपने आप में बुरा नहीं है, लेकिन जब इंसान पैसे का गुलाम बन जाता है, तब वह अपनी असली पहचान खो देता है। थोड़ा पैसा मिलते ही इंसान का लहजा बदल जाता है, घमंड और गुरूर उसमें ऐसा भर जाता है कि वह भूल जाता है कि कभी वही दूसरों की मदद का मोहताज था ? असल में, पैसा इंसान की असलियत दिखाता है। जिसे समझ होती है, वह पैसा आने पर भी विनम्र रहता है और जिसे अक़्ल नहीं, वह पैसे के नशे में अंधा हो जाता है ? हमें याद रखना चाहिए पैसा कब्र तक नहीं जाता, लेकिन कर्म और चरित्र हमेशा याद रखे जाते हैं। #पैसा #कमाना #बुरा #नहीं है, लेकिन पैसे के पीछे इंसानियत खो देना सबसे बड़ी गलती है। दौलत आए या जाए, दिल की अमीरी बनाए रखना ही असली सफलता है। पैसे की सत्ता #अख़लाक, #तहज़ीब और #इज़्ज़त सब कुछ #खरीद का #खेल ? आज का समाज ऐसा हो गया है कि अख़लाक, तहज़ीब, इज्जत सब कुछ पैसों की तौल पर आ गया है ? जिसके पास पैसा है, वही सम्मान और इज्जत पाता है, और जिसके पास पैसा नहीं, उसकी बात सुनने वाला कम ही है। पहले इंसान की ईमानदारी, संस्कार और व्यवहार उसकी पहचान बनाते थे, आज वही कुछ नहीं रह गया। रिश्तों की गरिमा, दोस्ती की सच्चाई और समाजिक तहज़ीब सब कुछ अब पैसे की चमक और ताकत के पीछे छिप गया है। असली दुख तब होता है जब इंसान अपने चरित्र और इंसानियत को ही भूलकर सिर्फ़ पैसा कमाने और दिखावे में लगा रहता है ? धन अस्थायी है, लेकिन #अख़लाक और #तहज़ीब #हमेशा याद #रखी #जाती है।

16/10/2025

#विधायक #और #सांसद #को #भी #लगाना #चाहिए #जनता #दरबार लोकतंत्र की असली ताक़त जनता होती है। जनता के वोट से ही विधायक और सांसद सत्ता तक पहुँचते हैं, इसलिए यह उनका कर्तव्य बनता है कि वे जनता की #समस्याएँ #सुनें, समझें और उनका समाधान करें। लेकिन आज स्थिति यह है कि जनता अपने प्रतिनिधियों से मिलने के लिए तरस जाती है। यही वजह है कि लोगों में निराशा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। जनता दरबार क्यों ज़रूरी है जनता दरबार एक ऐसा माध्यम है जहाँ आम नागरिक सीधे अपने जनप्रतिनिधि से मिलकर अपनी बात रख सकता है। इससे न केवल जनता को न्याय और समाधान की उम्मीद मिलती है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही पर भी नियंत्रण रहता है। यदि हर विधायक और सांसद महीने में कम से कम एक दिन जनता दरबार लगाएँ, तो उन्हें अपने क्षेत्र की असली समस्याओं का अंदाज़ा होगा कौन-सा रास्ता टूटा है, कहाँ पानी नहीं पहुँच रहा, कौन-सा अधिकारी लापरवाह है। वर्तमान हालात अक्सर विधायक और सांसद चुनाव जीतने के बाद जनता से दूर हो जाते हैं ? जनता जिन उम्मीदों के साथ वोट देती है, वही जनता बाद में उनके दफ्तरों के चक्कर लगाती रहती है। अधिकारी अपनी मनमानी करते हैं और जनता बेबस रह जाती है। अगर जनप्रतिनिधि नियमित जनता दरबार लगाएँ, तो जनता और प्रशासन के बीच एक भरोसे का पुल बनेगा। जनता दरबार के लाभ सीधा संवाद जनता और प्रतिनिधि के बीच दूरी घटती है। त्वरित समाधान छोटी-छोटी शिकायतें मौके पर ही निपट सकती हैं। जनता का विश्वास जब जनता को महसूस होता है कि उनकी आवाज़ सुनी जा रही है, तो लोकतंत्र मजबूत होता है। भ्रष्टाचार पर रोक जनता की निगरानी से अधिकारी भी ईमानदारी से काम करते हैं। निष्कर्ष विधायक और सांसद जनता के सेवक हैं, शासक नहीं ?उन्हें जनता के बीच जाकर, जनता दरबार लगाकर, जनता की समस्याओं को अपनी प्राथमिकता बनाना चाहिए। सच्चा नेता वही है जो चुनाव के बाद भी जनता से जुड़ा रहे क्योंकि कुर्सी जनता के भरोसे पर चलती है, और जनता का भरोसा तभी बनता है जब उसकी बात सुनी जाए।

16/10/2025

#भूतपूर्व #विधायक #कांग्रेस #प्रत्याशी #भारत #सिंह #दीपाखेड़ा की #कार्यशैली #अमन, #चैन #और #भाईचारे की #मिसाल #रही #हैं। राजनीति में बहुत से नेता आते-जाते रहते हैं, लेकिन कुछ ऐसे जनप्रतिनिधि होते हैं जो अपनी ईमानदारी, सादगी और जनता के प्रति समर्पण से लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ जाते हैं। ऐसे ही एक भूतपूर्व विधायक कांग्रेस प्रत्याशी #भारत #सिंह #दीपाखेड़ा थे, जिन्होंने अपने कार्यकाल में #अमन- #चैन और #भाईचारे की #मिसाल #कायम की। जनता के बीच का नेता यह विधायक हमेशा जनता के बीच रहते थे न कोई अहंकार, न दूरी। गाँव हो या शहर, गरीब हो या अमीर, हर व्यक्ति तक उनकी पहुँच थी। वे हर किसी की बात धैर्य से सुनते थे और समस्या का समाधान तुरंत कराने की कोशिश करते थे। उनके दरवाजे जनता के लिए हमेशा खुले रहते थे। यही वजह थी कि लोग उन्हें सिर्फ़ नेता नहीं, अपना आदमी मानते थे। अमन और भाईचारे की नीति विधानसभा में भी उनकी पहचान एक शांतिप्रिय, समझदार और संतुलित नेता की रही। उन्होंने हमेशा #साम्प्रदायिक #सौहार्द और एकता की बात की। धर्म, जाति या वर्ग के नाम पर राजनीति करने वालों से उन्होंने दूरी बनाई और कहा अगर जनता में भाईचारा रहेगा तो राजनीति अपने आप मजबूत होगी। उनके कार्यकाल में क्षेत्र में न तो कोई बड़ा विवाद हुआ, न आपसी झगड़े। हर फैसले में उन्होंने न्याय और समानता को प्राथमिकता दी। विकास और जनता का विश्वास उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर काम किया। हर विकास कार्य में पारदर्शिता रखी और जनता से राय लेकर निर्णय लिया। इसलिए आज भी लोग कहते हैं वो #विधायक नहीं, हमारे परिवार के सदस्य थे। जनता की यादों में जिंदा नाम आज भी जब लोग उनकी चर्चा करते हैं, तो गर्व के साथ कहते हैं कि ऐसे नेता अब बहुत कम मिलते हैं। उनकी कार्यशैली, सादगी और जनता के लिए समर्पण उन्हें जनता के दिलों में ज़िंदा रखे हुए है। समय बीत गया, पद चला गया, लेकिन उनका नाम आज भी हर #जुबान पर #सम्मान के #साथ #लिया #जाता #है। निष्कर्ष भूतपूर्व विधायक भारत सिंह दीपाखेड़ा की कार्यशैली हर जनप्रतिनिधि के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने दिखा दिया कि राजनीति सत्ता का खेल नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है। उनकी विरासत अमन, चैन और भाईचारे की थी और यही वह नींव है जिस पर एक मजबूत समाज और सच्चा लोकतंत्र खड़ा होता है।

दबंग और  #ईमानदार  #कांग्रेस  #महिला  #नेत्री   #नूरी  #खान कांग्रेस पार्टी में अगर किसी महिला नेता ने अपनी ईमानदारी, नि...
16/10/2025

दबंग और #ईमानदार #कांग्रेस #महिला #नेत्री #नूरी #खान कांग्रेस पार्टी में अगर किसी महिला नेता ने अपनी ईमानदारी, निडरता और संघर्ष से जनता के दिलों में जगह बनाई है, तो वह नाम है कांग्रेस नूरी खान। वे न सिर्फ़ मध्यप्रदेश की, बल्कि पूरे देश की एक दबंग और निर्भीक महिला नेत्री के रूप में पहचानी जाती हैं। #कांग्रेस #महिला #नेत्री #नूरी #खान का राजनीति में सफर हमेशा जनता की सेवा और न्याय के लिए संघर्ष पर आधारित रही है। उन्होंने गरीबों, मजदूरों, महिलाओं और अल्पसंख्यक समाज के अधिकारों के लिए लगातार आवाज़ उठाई है। जब भी किसी गरीब या वंचित वर्ग के साथ अन्याय हुआ, #कांग्रेस #नेत्री #नूरी #खान सबसे पहले मैदान में उतरकर उनका साथ देती दिखती हैं। उनकी राजनीति का मूल सिद्धांत है सच्चाई, सेवा और साहस। नूरी खान ने यह साबित किया है कि राजनीति सिर्फ कुर्सी की नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ बनने की कला है। वे हर मुद्दे पर खुलकर बोलती हैं चाहे वह महिला उत्पीड़न का मामला हो, किसानों की परेशानी हो या प्रशासन की लापरवाही। #नूरी #खान ने हमेशा यह दिखाया है कि कांग्रेस की विचारधारा सिर्फ़ भाषणों तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर जनता के साथ खड़े रहने का वादा है। वे समय-समय पर पूरे प्रदेश और केंद्र स्तर तक सक्रिय रहकर समाज के हर वर्ग की आवाज़ को शासन तक पहुँचाने का काम करती हैं। उनकी बेबाकी और ईमानदारी ने उन्हें जनता के बीच गरीबों की बहन और आवाज़ बना दिया है। राजनीति में जहाँ समझौते आम बात हैं, वहीं नूरी खान अपने सिद्धांतों पर डटी रहती हैं। यही उनकी सबसे बड़ी पहचान है। आज #कांग्रेस #महिला #नेत्री #नूरी #खान जैसी महिला नेताओं की ज़रूरत देश और समाज दोनों को है, ताकि राजनीति फिर से सेवा, सच्चाई और जनहित का माध्यम बन सके। महिलाओं को राजनीति में आगे आना चाहिए, तभी समाज का विकास होगा समाज के विकास और देश की प्रगति के लिए जरूरी है कि महिलाएं राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएँ। जब तक राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी नहीं, तब तक समाज में वास्तविक समानता और संतुलन नहीं आ सकता। महिलाएं घर की जिम्मेदारियों से लेकर समाज के हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर चुकी हैं। अब समय आ गया है कि वे निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बनें, ताकि नीतियाँ सिर्फ़ पुरुष दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनें। राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से प्रशासन में संवेदनशीलता, ईमानदारी और मानवता जैसी भावनाएँ मजबूत होती हैं। महिला नेत्रियाँ जनता के दर्द को बेहतर समझती हैं, क्योंकि वे स्वयं संघर्षों से गुज़रकर आई होती हैं। जब महिलाएं पंचायत से लेकर संसद तक पहुँचती हैं, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे प्राथमिकता में आते हैं। आज देश को नूरी खान जैसी साहसी, ईमानदार और जनता की आवाज़ बनने वाली महिला नेताओं की जरूरत है जो बिना किसी डर या स्वार्थ के, सच्चाई और न्याय के लिए आवाज़ उठाएँ। महिलाओं को आगे आने से रोकना समाज को पीछे खींचने के समान है। इसलिए हर राजनीतिक दल और हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वे महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर दें, ताकि देश का भविष्य सशक्त और सुरक्षित बने। क्योंकि सच्चाई यही है जहाँ महिलाओं की भागीदारी होती है, वहीं विकास की असली गूँज सुनाई देती है ? Noori Khan

 #जुआ  #एक्ट में  #सीतामऊ  #पुलिस  #प्रशासन की  #प्रभावी  #कार्यवाही  पुलिस अधीक्षक मंदसौर श्री विनोद कुमार मीणा के द्वा...
14/10/2025

#जुआ #एक्ट में #सीतामऊ #पुलिस #प्रशासन की #प्रभावी #कार्यवाही पुलिस अधीक्षक मंदसौर श्री विनोद कुमार मीणा के द्वारा समस्त थाना प्रभारी को जुआ सट्टा व अन्य अवैध गतिवीधी करने वाले अपराधीयो के विरुद्ध कठोरतम कार्यवाही करने के निर्देश दिये थे जो इसी तारतम्य मे आज दिनांक 13.10.25 को श्रीमान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गरोठ सुश्री हेमलता कुरील व एसडीओपी सीतामऊ श्री दिनेश प्रजापति के नेतृत्व मे थाना प्रभारी सीतामऊ निरीक्षक मोहन मालवीय के द्वारा गठित टीम के द्वारा कस्बा सीतामऊ के होटल पल्लवी मे दबीश देकर 10 आरोपीगणो को जुआ खेलते रंगे हाथ पकडा व आरोपीयो के कब्जे से 47,120 रु. राशी व ताश के पत्ते जप्त कर धारा 13 जुआ एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर प्रभावी कार्यवाही की गई। नाम आरोपी प्रभु पिता सालगराम माली उम्र 41 साल निवासी क्यामपुर पवन पिता हिरादास बैरागी उम्र 34 साल निवासी पतलासी कला गोविन्द पिता दशरथ टांक उम्र 39 साल निवासी लदुसा राधेश्याम पिता शोभाराम पाटीदार उम्र 41 साल निवासी सुरजनी हमीद पिता शेरअली खान उम्र 50 साल निवासी सुरजनी घनश्याम पिता मांगु राठोर उम्र 45 साल निवासी लदुना कैलाश पिता जादवराम उम्र 42 साल निवासी सेमलिया काजी बिड्डु उर्फ धिरज पिता मनोहरदास बैरागी उम्र 24 साल निवासी सीतामऊ राधेश्याम पिता विनोद पोरवाल उम्र 32 साल निवासी गाडरीया थाना नाहरगढ चंचल पिता रमेशचन्द्र गुप्ता उम्र 37 साल निवासी नई आबादी मन्दसौर जप्त मश्रुका 47,120 रु. प्रतिलिपि व 52 ताश के पत्ते सराहनीय कार्य कार्य मे निरीक्षक मोहन मालवीय, उपनिरीक्षक विकास गेहलोत, उपनिरीक्षक रामलाल दडींग, आर.179 नवनीत उपाध्याय, प्र.आर. 139 मनोहर मसानिया आर. 416 अनिल शर्मा, आर.519 इन्द्रजितसिंह, आर. 17 नरेन्द्रसिंह, आर.397 राहुलसिंह, आर.378 नन्दकिशोर वर्मा आर.839 मनिष पाटीदार, आर. 832 राहुल सियार, आर. 705 लखन धनगर, आर. 70 अरविन्द सुरावत, सेनिक 1003 नरेन्द्रसिंह का विशेष योगदान रहा। *जुए-सट्टे से बर्बाद होता समाज और पुलिस प्रशासन की भूमिका पुलिस प्रशासन लगातार जुए और सट्टे खेलने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है।* यह कदम सराहनीय है क्योंकि जुआ और सट्टा सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज और परिवार को अंदर से तोड़ देने वाली बुराई है। सट्टेबाज़ी ने आज युवाओं को गलत राह पर डाल दिया है। आसान पैसे की लालच में लोग अपनी मेहनत इज़्जत और परिवार की खुशियाँ सब दाँव पर लगा देते हैं। कई परिवार ऐसे हैं जो सट्टे की लत के कारण कर्ज़ में डूब गए, रिश्ते टूट गए और घर बर्बाद हो गए हैं? जुआ और सट्टा केवल पैसे की हानि नहीं करते, बल्कि इंसान के चरित्र, मानसिक संतुलन और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी नष्ट कर देते हैं। यह लत व्यक्ति को धीरे-धीरे अपराध और निराशा की ओर ले जाती है। पुलिस प्रशासन का यह प्रयास कि ऐसे अवैध कार्यों में लिप्त लोगों को पकड़ा जाए, समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है। लेकिन केवल कार्रवाई काफी नहीं है समाज को भी जागरूक होना होगा। परिवारों को अपने बच्चों और युवाओं को इन गलत रास्तों से दूर रखने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। जुआ और सट्टा समाज की जड़ें खोखली कर रही हैं। इन्हें रोकने के लिए पुलिस की सख्ती के साथ-साथ जनता की जागरूकता भी जरूरी है। जब हर नागरिक यह ठान ले कि वह किसी भी रूप में सट्टे या जुए में भाग नहीं लेगा, तभी एक स्वच्छ, सुरक्षित और स्वस्थ समाज का निर्माण संभव होगा। *पुलिस प्रशासन की सराहना* समाज की सुरक्षा के सच्चे प्रहरी पुलिस प्रशासन किसी भी राज्य या देश की कानून व्यवस्था की रीढ़ होता है। यह वह संस्था है जो दिन-रात जनता की सुरक्षा शांति और न्याय सुनिश्चित करने में लगी रहती है। चाहे गर्मी की तपती दोपहर हो या सर्दी की ठिठुरती रात पुलिसकर्मी हर परिस्थिति में अपने कर्तव्य का पालन करते हैं।पुलिस प्रशासन केवल अपराधियों को पकड़ने का ही काम नहीं करती बल्कि समाज में शांति, भाईचारा और व्यवस्था बनाए रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी निभाती है। त्योहारों, रैलियों, भीड़भाड़ वाले आयोजनों या आपात स्थितियों में पुलिस सबसे पहले मोर्चा संभालती है और जनता की सेवा में तत्पर रहती है। आज के समय में जब अपराध के तरीके बदल रहे हैं, साइबर अपराध बढ़ रहे फिर भी, पुलिस बल अपनी मेहनत, ईमानदारी और साहस से जनता पर भरोसा बनाए हुए है। सेवा सुरक्षा और समर्पण। हम सभी का यह नैतिक कर्तव्य है कि हम पुलिस
प्रशासन का सम्मान करें और उनके सहयोगी बनें। सच्ची सराहना वही है जब जनता और पुलिस एक-दूसरे के साथ मिलकर समाज को अपराध-मुक्त और सुरक्षित बनाएँ।

09/10/2025

#पुलिस #प्रशासन #की #सेवा #जनता #की #सेवा #पुलिस #सिर्फ #वर्दी #नहीं #जिम्मेदारी का #प्रतीक #है। यह वाक्य तब और सच्चा लगता है जब हम किसी पुलिसकर्मी को धूप बारिश या रात के अंधेरे में ड्यूटी निभाते देखते हैं। पुलिस प्रशासन का असली उद्देश्य सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा और सेवा करना है। हर हालात में हर परिस्थिति में। कानून और व्यवस्था का प्रहरी पुलिस प्रशासन समाज का वह स्तंभ है जो कानून और व्यवस्था को बनाए रखता है। छोटी-छोटी घटनाओं से लेकर बड़े अपराधों तक, पुलिस का काम केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समाज में शांति और विश्वास बनाए रखना भी है। जब जनता निडर होकर अपने घरों में सो पाती है, तब कहीं न कहीं कोई पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी निभा रहा होता है। जनता और पुलिस का रिश्ता भरोसे पर आधारित
अक्सर लोग पुलिस को केवल सख्त रूप में देखते हैं, लेकिन असल में पुलिस का चेहरा संवेदनशील और सहयोगी भी है। चाहे ट्रैफिक में फंसे नागरिकों की मदद हो, लापता बच्चों की खोज हो, या बाढ़-संकट जैसी आपदाएँ पुलिस सबसे पहले मौके पर पहुँचती है। पुलिस का असली बल उसकी वर्दी में नहीं, बल्कि उसकी नीयत में है। सेवा, सुरक्षा और सम्मान तीन स्तंभ हर पुलिसकर्मी की शपथ में यही तीन शब्द गूंजते हैं सेवा, सुरक्षा और सम्मान। पुलिस प्रशासन जनता की सेवा में तब तक लगा रहता है जब तक समाज सुरक्षित न हो जाए।
अक्सर ड्यूटी के दौरान त्याग, परिवार से दूरी, और खतरे के बावजूद वे अपने फर्ज से पीछे नहीं हटते। बदलते समय में नई जिम्मेदारियाँ आज के डिजिटल युग में साइबर अपराध, नशे का प्रसार और सामाजिक तनाव जैसे नए खतरे सामने हैं। ऐसे में पुलिस प्रशासन का काम और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। पुलिस अब सिर्फ डंडा नहीं चलाती, बल्कि तकनीक, जागरूकता और संवाद के जरिए समाज से जुड़ रही है। जनता का सहयोग पुलिस की ताकत पुलिस अकेले नहीं लड़ सकती। जब जनता कानून का सम्मान करती है, सच बोलती है और अपराध के खिलाफ खड़ी होती है, तभी असली जन-पुलिस भागीदारी बनती है। हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह पुलिस की मदद करे, न कि उससे दूरी बनाए। निष्कर्ष
पुलिस प्रशासन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा का आत्मबल है। जब हम पुलिस हमारी सेवा में” कहते हैं, तो यह केवल नारा नहीं — एक सच्चाई है, जो हर दिन हजारों वर्दियों के त्याग और समर्पण से लिखी जाती है। जनता की सुरक्षा, पुलिस की प्राथमिकता यही है असली सेवा।

 #मान्यवर  #कांशीराम जी की  #जयंती पर उन्हें सत सत नमन । भारत के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हुए ह...
09/10/2025

#मान्यवर #कांशीराम जी की #जयंती पर उन्हें सत सत नमन । भारत के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने समाज की दिशा बदल दी। मान्यवर कांशीराम जी उन्हीं महान हस्तियों में से एक थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन दलित, पिछड़े, वंचित और शोषित वर्गों को उनका हक़ दिलाने के लिए समर्पित कर दिया। उनकी जयंती केवल एक नेता को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय के उस संघर्ष को दोहराने का समय है जिसे उन्होंने जनआंदोलन का रूप दिया। कांशीराम जी का जन्म 15 मार्च 1934 को पंजाब के रोपड़ ज़िले में एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनमें अन्याय और भेदभाव के खिलाफ़ एक आग थी। उन्होंने सरकारी नौकरी से शुरुआत की, लेकिन जब उन्होंने समाज में फैले जातिगत भेदभाव और अन्याय को करीब से देखा, तो उन्होंने नौकरी छोड़कर समाजसेवा का रास्ता चुना। उन्होंने कहा था हमारी राजनीति, सत्ता के लिए नहीं समाज परिवर्तन के लिए है। #कांशीराम जी ने भारतीय राजनीति को नई दिशा दी। उन्होंने उन वर्गों को राजनीतिक चेतना दी जो सदियों से हाशिए पर थे। उनका नारा जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी ने लोकतंत्र के असली अर्थ को जनता के बीच पहुँचाया। उन्होंने समाज को यह सिखाया कि वोट सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि सम्मान का हथियार है। उनके मार्गदर्शन में बहुजन आंदोलन एक जनशक्ति बन गया, जिसने सत्ता और समाज की संरचना को चुनौती दी। आज जब हम कांशीराम जी की जयंती मना रहे हैं, तो यह जरूरी है कि हम उनके विचारों को केवल भाषणों में नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और राजनीति में उतारें। उन्होंने जो सपना देखा था एक समानता, भाईचारे और आत्मसम्मान से भरे समाज का उसे साकार करने की जिम्मेदारी हम सबकी है। कांशीराम जी ने भले ही 2006 में यह संसार छोड़ दिया हो, लेकिन उनका विचार, उनका संघर्ष और उनकी प्रेरणा आज भी ज़िंदा है। वे हमें याद दिलाते हैं कि सत्ता नहीं, समाज परिवर्तन ही सच्ची क्रांति है।

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