16/10/2025
#पैसा #ज़रूरत #भी, #और #ज़हर #भी
पैसा इंसान की ज़िंदगी की अहम ज़रूरत है। बिना पैसे के कोई काम चल नहीं सकता खाने से लेकर इलाज तक, शिक्षा से लेकर सम्मान तक, हर जगह पैसे की अहमियत है। मगर जब यही पैसा ज़रूरत से ज़्यादा अहमियत लेने लगता है, तो इंसान का चरित्र, #ईमान #और #इंसानियत सब कुछ पीछे #छूट #जाता है। आज के दौर में लोग इंसान को नहीं, उसके पास के पैसों को देखते हैं। #रिश्ते, #दोस्ती, #मोहब्बत सब कुछ पैसों की #तौल पर आ गया है। जो अमीर है, वही इज़्ज़तदार कहलाता है, और जो गरीब है, उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं। पैसा अपने आप में बुरा नहीं है, लेकिन जब इंसान पैसे का गुलाम बन जाता है, तब वह अपनी असली पहचान खो देता है। थोड़ा पैसा मिलते ही इंसान का लहजा बदल जाता है, घमंड और गुरूर उसमें ऐसा भर जाता है कि वह भूल जाता है कि कभी वही दूसरों की मदद का मोहताज था ? असल में, पैसा इंसान की असलियत दिखाता है। जिसे समझ होती है, वह पैसा आने पर भी विनम्र रहता है और जिसे अक़्ल नहीं, वह पैसे के नशे में अंधा हो जाता है ? हमें याद रखना चाहिए पैसा कब्र तक नहीं जाता, लेकिन कर्म और चरित्र हमेशा याद रखे जाते हैं। #पैसा #कमाना #बुरा #नहीं है, लेकिन पैसे के पीछे इंसानियत खो देना सबसे बड़ी गलती है। दौलत आए या जाए, दिल की अमीरी बनाए रखना ही असली सफलता है। पैसे की सत्ता #अख़लाक, #तहज़ीब और #इज़्ज़त सब कुछ #खरीद का #खेल ? आज का समाज ऐसा हो गया है कि अख़लाक, तहज़ीब, इज्जत सब कुछ पैसों की तौल पर आ गया है ? जिसके पास पैसा है, वही सम्मान और इज्जत पाता है, और जिसके पास पैसा नहीं, उसकी बात सुनने वाला कम ही है। पहले इंसान की ईमानदारी, संस्कार और व्यवहार उसकी पहचान बनाते थे, आज वही कुछ नहीं रह गया। रिश्तों की गरिमा, दोस्ती की सच्चाई और समाजिक तहज़ीब सब कुछ अब पैसे की चमक और ताकत के पीछे छिप गया है। असली दुख तब होता है जब इंसान अपने चरित्र और इंसानियत को ही भूलकर सिर्फ़ पैसा कमाने और दिखावे में लगा रहता है ? धन अस्थायी है, लेकिन #अख़लाक और #तहज़ीब #हमेशा याद #रखी #जाती है।