03/09/2026
स्वावलंबन की ओर कदम: अंगीकृत गाँव कमुआ में किसानों ने सीखीं उन्नत कृषि तकनीकें
बीजामृत, जीवामृत और पूरक व्यवसायों से समृद्ध होंगे किसान: कमुआ में कृषि वैज्ञानिकों की पहल
कटिया-सीतापुर -गाँव कमुआ - सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन (SMAE) योजना के तहत उप कृषि निदेशक (DD Ag) कार्यालय, सीतापुर द्वारा प्रायोजित एक विदिन इन डिस्ट्रिक ट्रेनिंग दिवसीय जिला स्तरीय कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफ़ल आयोजन अंगीकृत गांव कमुआ में किया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के 70 से अधिक किसानों, प्रगतिशील कृषकों और ग्रामीण युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और उन्नत कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का सफ़ल संचालन कार्यक्रम प्रभारी एवं मृदा वैज्ञानिक डॉ. सचिन प्रताप तोमर तथा प्रसार वैज्ञानिक डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह के संयुक्त मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
प्रशिक्षण के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों की आय दोगुनी करने, खेती की लागत घटाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष बल दिया। डॉ. सचिन तोमर ने किसानों को प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों से अवगत कराया और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की जैविक क्षमता प्रभावित हो रही है, इसलिए जीवामृत, बीजामृत और जैविक खादों के प्रयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार लाकर टिकाऊ उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण कराने की सलाह दी ताकि संतुलित मात्रा में पोषक तत्वों का प्रयोग किया जा सके।
तत्पश्चात प्रसार वैज्ञानिक डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह ने पूरक कृषि व्यवसायों के अंतर्गत मधुमक्खी पालन और मशरूम उत्पादन पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने मधुमक्खी पालन के वैज्ञानिक तरीकों को समझाते हुए बताया कि इससे न केवल शुद्ध शहद उत्पादन से अतिरिक्त आय प्राप्त होती है, बल्कि फसलों में पर-परागण बढ़ने से उत्पादन में भी काफी वृद्धि होती है। इसके साथ ही उन्होंने कम लागत और सीमित स्थान में मशरूम उत्पादन की तकनीक साझा करते हुए इसे ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वावलंबन तथा दैनिक आय बढ़ाने का एक बेहतरीन माध्यम बताया।
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में वैज्ञानिकों ने किसानों के प्रश्नों और समस्याओं का मौके पर ही व्यावहारिक समाधान किया। प्रशिक्षण सामग्री व उपयोगी जानकारी प्राप्त कर उपस्थित 70 से अधिक कृषकों ने इस पहल की प्रशंसा की!