05/02/2026
चौपाई 1
स्वायंभू मनु अरु सतरूपा । जिन्ह तें भै नरसृष्टि अनूपा ॥
दंपति धरम आचरन नीका। अजहुँ गाव श्रुति जिन्ह कै लीका।।
अर्थ ---
स्वायम्भुव मनु और (उनकी पत्नी) शतरूपा, जिनसे मनुष्यों की यह अनुपम सृष्टि हुई, इन दोनों पति-पत्नी के धर्म और आचरण बहुत अच्छे थे । आज भी वेद जिनकी मर्यादा का गान करते हैं ।
चौपाई 2
नृप उत्तानपाद सुत तासू । ध्रुव हरिभगत भयउ सुत जासू ॥
लघु सुत नाम प्रियब्रत ताही । बेद पुरान प्रसंसहिं जाही ॥ २
अर्थ ---
राजा उत्तानपाद उनके पुत्र थे, जिनके पुत्र (प्रसिद्ध) हरिभक्त ध्रुवजी हुए । उन (मनुजी) के छोटे लड़के का नाम प्रियव्रत था, जिनकी प्रशंसा वेद और पुराण करते हैं ॥
चौपाई 3
देवहूति पुनि तासु कुमारी । जो मुनि कर्दम कै प्रिय नारी ॥
आदि देव प्रभु दीनदयाला । जठर धरेउ जेहिं कपिल कृपाला ॥ ३
अर्थ ---
पुनः देवहूति उनकी कन्या थी, जो कर्दम मुनि की प्यारी पत्नी हुई और जिन्होंने आदि देव, दीनों पर दया करने वाले समर्थ एवं कृपालु भगवान कपिल को गर्भ में धारण किया ॥
धन्यवाद 🎖️🎖️🎖️🎖️🎖️🎖️🎖️🎖️🎖️🎖️🪩🪩🪩🪩🎍🏆🏆🏆🏆🏆🏆🏆🏆🏆🏆🏆🏆🏆🏆🏆🏆🎀🎀🎀🎀🎀🎀🎀🎀🎀🎀🎀🎀🎀🎀🎀