07/08/2025
भादो में शादी क्यों नही करना चाहिए ?
1. भाद्रपद मास का धार्मिक महत्व
भाद्रपद मास (भादो) भगवान विष्णु और शिव की आराधना का महीना माना जाता है। इस महीने में कई व्रत, पूजा, और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं, जैसे:
हरितालिका तीज
गणेश चतुर्थी
ऋषि पंचमी
अनंत चतुर्दशी
👉 इसलिए इसे साधना और भक्ति का समय माना जाता है, न कि मांगलिक कार्यों का।
🔹 2. ज्योतिषीय दृष्टिकोण
भादो में सूर्य की स्थिति और ग्रहों की चाल ऐसी मानी जाती है कि यह शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं होती:
बहुत सारे अशुभ योग (दोष) बनते हैं।
"चातुर्मास" का यह हिस्सा होता है, जिसमें शादी-ब्याह, गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।
🔹 3. पारंपरिक एवं सामाजिक मान्यता
ग्रामीण और ब्राह्मण समाजों में यह मान्यता रही है कि भादो में विवाह करने से वैवाहिक जीवन में समस्याएं, कलह या अशांति आ सकती है।
वर्षा ऋतु होने के कारण परिवहन, यात्रा, आयोजन आदि में भी कठिनाई होती थी — इसलिए भी लोग भादो को टालते थे।
🔹 4. चातुर्मास में व्रत और संयम
भाद्रपद मास चातुर्मास का हिस्सा है (आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक)। इस दौरान:
साधु-संत एक स्थान पर रहते हैं।
विवाह, यज्ञ, उपनयन आदि वर्जित माने जाते हैं।
✅ निष्कर्ष:
ब्राह्मण या पंडित भादो में शादी न करने की सलाह इसलिए देते हैं क्योंकि यह:
धार्मिक रूप से वर्जित माना गया है,
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से अशुभ है,
और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार नुकसानदेह माना जाता है।