14/06/2026
वंदे भारत के दौर में भी '2006' में जी रहा आम रेल यात्री, खचाखच भरी ट्रेनों में सुरक्षा भगवान भरोसे
देश में बुलेट ट्रेन और वंदे भारत जैसी आधुनिक और प्रीमियम ट्रेनों का जाल बिछाया जा रहा है, लेकिन भारतीय रेलवे की असली रीढ़ कहे जाने वाले आम यात्रियों का सफर आज भी किसी बुरे सपने जैसा है। साल 2006 से 2026 आ गया, तकनीक बदल गई, पर आम जनता के हिस्से में आने वाले जेनरल और स्लीपर क्लास की सूरत आज तक नहीं सुधरी। आज भी ऐसा महसूस होता है कि आम यात्री दो दशक पुरानी व्यवस्था में जीने को मजबूर है। विशेष रूप से दिल्ली से बिहार और उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाली ट्रेनों में स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। इन रूट्स पर चलने वाली ट्रेनों में स्लीपर और जेनरल कोच का अंतर पूरी तरह समाप्त हो चुका है। महीनों पहले कन्फर्म टिकट लेने वाले यात्री भी अपनी सीटों पर बैठने के लिए तरस रहे हैं। कोचों के अंदर पैर रखने तक की जगह नहीं है, शौचालयों के पास से लेकर सीटों के बीच के रास्तों में लोग भेड़-बकरियों की तरह ठुंसकर सफर करने को मजबूर हैं। यात्रियों का आरोप है कि इस पूरी अव्यवस्था के पीछे कुछ रेल कर्मियों और टिकट चेकिंग स्टाफ TTE की मिलीभगत है। चंद रुपयों की अवैध वसूली के चक्कर में बिना रिजर्वेशन वाले यात्रियों को स्लीपर कोचों में घुसा दिया जाता है। इसके कारण वैध टिकट धारकों का हक तो मारा ही जाता है, साथ ही यात्रा के दौरान आए दिन विवाद और मारपीट की नौबत आ जाती है। जानकारों का कहना है कि रेलवे द्वारा पिछले कुछ समय में ट्रेनों से जनरल और स्लीपर कोचों की संख्या कम करके AC कोचों को बढ़ाया गया है। इस फैसले ने इस संकट को और ज्यादा गहरा कर दिया है। कम आय वर्ग और मजदूर तबके के यात्रियों के लिए अब ट्रेन में पैर रखने की जगह भी नहीं बची है। खचाखच भरे इन डिब्बों में सफ़र करना न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि किसी बड़ी दुर्घटना की स्थिति में सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है। आम जनता का सवाल है कि क्या रेलवे का आधुनिकीकरण सिर्फ प्रीमियम क्लास के लिए है ? क्या करोड़ों आम रेल यात्रियों को कभी एक सुरक्षित, सम्मानजनक और आरामदायक सफर का अधिकार मिल पाएगा ? बचपन में जिस भीड़ का सामना करते थे, आज जवानी में भी वही देख रहे हैं। बदलाव सिर्फ दावों में हुआ है, ट्रेनों की जमीनी हकीकत आज भी 20 साल पुरानी ही है । स्लीपर क्लास के पैसे देकर भी हमें जनरल से बदतर स्थिति में यात्रा करनी पड़ती है । Ministry of Railways, Government of India Ashwini Vaishnaw Narendra Modi