02/07/2026
आखिर भगवान श्रीकृष्ण अपने मुकुट पर मोर पंख क्यों धारण करते हैं? एक बार वनवास के दौरान माता सीता को बहुत प्यास लगी। भगवान श्री राम ने चारों ओर देखा लेकिन उन्हें दूर-दूर तक कहीं भी पानी नजर नहीं आया, सिर्फ घना जंगल ही जंगल था। तब उन्होंने प्रकृति से प्रार्थना की: हे प्रकृति यदि आस-पास कहीं जल हो तो हमें वहां तक पहुंचने का मार्ग दिखाइए।
उसी समय एक मोर वहां आया। उसने भगवान राम से कहा: प्रभु जलाशय तो पास ही है लेकिन रास्ता कठिन है और आप भटक सकते हैं। मोर ने आगे कहा: मैं उड़ते हुए आगे-आगे जाऊंगा और रास्ते में अपने पंख गिराता जाऊंगा। उन पंखों के सहारे जलाशय तक पहुँच सकते हैं।
भगवान राम ने उसकी बात मान ली। मोर उड़ता गया और अपने पंख गिराता गया। श्री राम और माता सीता उन पंखों के निशान का अनुसरण करते हुए जलाशय तक पहुँच गए।
ऐसा माना जाता है कि मोर अपने पंख केवल एक विशेष मौसम में ही गिराता है। यदि वह किसी अन्य समय पर अपने पंख गिराए तो उसकी मृत्यु हो सकती है। भगवान राम की सहायता करते-करते उस मोर ने अपने प्राण त्याग दिए। यह देखकर भगवान राम भावुक हो गए। तब उन्होंने उस मोर से वचन दिया: तुमने मेरे लिए अपने प्राणों का त्याग किया है, अगले जन्म में मैं तुम्हारे इन पंखों को धारण करूंगा।
मान्यता है कि इसी कारण भगवान श्री कृष्ण अपने मुकुट में मोर पंख धारण करते हैं। बोलो जय श्री कृष्ण।