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अब सडक़ पर एक-दूसरे से ‘बात’ करेंगी गाडिय़ां, सरकार ला रही वी2वी कम्युनिकेशन सिस्टम, 2028 से होगा लागूकेंद्र सरकार ला रही ...
05/08/2026

अब सडक़ पर एक-दूसरे से ‘बात’ करेंगी गाडिय़ां, सरकार ला रही वी2वी कम्युनिकेशन सिस्टम, 2028 से होगा लागू
केंद्र सरकार ला रही महत्त्वाकांक्षी वी2वी कम्युनिकेशन सिस्टम, 2028 से लागू होगा नया नियम
अगर आपके आगे चल रही गाड़ी अचानक ब्रेक लगा दे और उसकी जानकारी आपकी कार को पहले ही मिल जाए, तो हादसे का खतरा काफी कम हो सकता है। इसी सोच के साथ केंद्र सरकार देश में व्हीकल-टू-व्हीकल (वी2वी) कम्युनिकेशन सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रही है। सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें नई गाडिय़ों में वी2वी सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। बता दें कि वी2वी ऐसी तकनीक है, जिसमें आसपास चल रही गाडिय़ां वायरलेस तरीके से एक-दूसरे के साथ जरूरी जानकारी शेयर करेंगी। इसमें गाड़ी की स्पीड, दिशा, लोकेशन और एक्सेलरेशन जैसी जानकारी शामिल होगी। इसका फायदा यह होगा कि ड्राइवर को उन खतरों की भी पहले से चेतावनी मिल सकेगी, जो अभी उसकी नजर में नहीं हैं। जैसे कि आगे की गाडिय़ों का अचानक ब्रेक लगाना, कोई वाहन गलत दिशा से आना, एमरजेंसी वाहन का पास आना और असुरक्षित लेन बदलना आादि। सरकार का मानना है कि यह तकनीक मौजूदा एडास जैसे सेफ्टी फीचर्स को और बेहतर बनाएगी। नई गाडिय़ों में व्हीकल-टू-व्हीकल (वी2वी) कम्युनिकेशन सिस्टम को अनिवार्य करने का मकसद कारों, बसों, ट्रकों और दोपहिया वाहनों को रियल-टाइम जानकारी का आदान-प्रदान करने में सक्षम बनाना है, जिससे टक्करों को रोकने, ड्राइवरों को खतरों के दिखने से पहले ही चेतावनी देने और एक कनेक्टेड ट्रांसपोर्टेशन इकोसिस्टम की नींव रखने में मदद मिल सके।
उम्मीद है कि यह टेक्नोलॉजी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडास) की पूरक बनेगी और कनेक्टेड और इंटेलिजेंट मोबिलिटी की अगली पीढ़ी को सपोर्ट करेगी। मंत्रालय ने एल, एम और एन कैटेगरी की गाडिय़ों, जिनमें टू-व्हीलर, पैसेंजर व्हीकल और कॉमर्शियल व्हीकल शामिल हैं, उनके लिए दो चरणों वाला कार्यान्वयन रोडमैप प्रस्तावित किया है। इस प्रस्ताव के तहत पहली अक्तूबर, 2027 से वी2वी कम्युनिकेशन सिस्टम से लैस गाडिय़ों को ्रएआईएस-230 स्टैंडर्ड का पालन करना होगा। पहली अक्तूबर, 2028 से इन कैटेगरी में बनने वाली सभी नई गाडिय़ों में एआईएस-230 के अनुरूप वी2वी कम्युनिकेशन सिस्टम लगा होना चाहिए। बता दें कि एआईएस-230 गाड़ी-से-गाड़ी (वी2वी) कम्युनिकेशन सिस्टम के लिए भारत का नया टेक्निकल स्टैंडर्ड है। यह भारतीय सडक़ों पर चलने वाली वी2वी टेक्नोलॉजी के लिए कम से कम टेक्निकल, फंक्श

हिमाचल प्रदेश में बनेंगे 15 म्युनिसिपल शेयर्ड सर्विस सेंटर, एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी सेवाएंम्युनिसिपल शेयर्ड सर्विस ...
05/08/2026

हिमाचल प्रदेश में बनेंगे 15 म्युनिसिपल शेयर्ड सर्विस सेंटर, एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी सेवाएं
म्युनिसिपल शेयर्ड सर्विस सेंटर में एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी सेवाएं
मुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री के नेतृत्व में शहरी प्रशासन को आधुनिक बनाने की बड़ी पहल
प्रदेश सरकार शहरी स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिकों के अनुकूल बनाने के लिए बड़े स्तर पर सुधार कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और शहरी विकास मंत्री के नेतृत्व में शहरी विकास विभाग प्रदेशभर में 15 म्युनिसिपल शेयर्ड सर्विस सेंटर्स स्थापित कर रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से नगर परिषदों और नगर पंचायतों से जुड़ी विभिन्न सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे लोगों को बेहतर, तेज और पारदर्शी सेवाएं मिल सकेंगी। प्रदेश सरकार की यह पहल शहरी क्षेत्रों में सेवा वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इन केंद्रों को प्रत्येक अधिसूचित क्लस्टर में स्थापित किया जा रहा है, जहां से लगभग चार से पांच शहरी स्थानीय निकायों को एक साथ सेवाएं प्रदान की जाएंगी। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और नगर निकायों की कार्यप्रणाली में एकरूपता भी आएगी।
शहरी विकास विभाग इन म्युनिसिपल शेयर्ड सर्विस सेंटर्स को वन-स्टॉप फैसिलिटेशन हब के रूप में विकसित कर रहा है। यहां नागरिकों को संपत्ति कर, विभिन्न प्रमाणपत्रों एवं अनुमतियों से संबंधित जानकारी, आवेदन प्रक्रिया, शिकायत निवारण तथा अन्य नगर सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। इससे लोगों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और समय के साथ-साथ धन की भी बचत होगी। इन केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को निर्धारित समय सीमा में सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही सेवाओं की निगरानी और शिकायतों के त्वरित समाधान की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे लोगों का नगर प्रशासन पर विश्वास और मजबूत होगा।
सात केंद्र लगभग तैयार, हमीरपुर का राज्य कार्यान्वयन केंद्र अंतिम चरण में
विभाग के अनुसार प्रस्तावित 15 म्युनिसिपल शेयर्ड सर्विस सेंटर्स में से चंबा, धर्मशाला, मनाली, ऊना, बद्दी, नाहन और संतोखगढ़ में निर्माण एवं स्थापना का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके अलावा हमीरपुर में स्थापित किया जा रहा राज्य कार्यान्वयन केंद्र भी अंतिम चरण में है। यह केंद्र पूरे प्रदेश में इन सेवाओं के संचालन, समन्वय और तकनीकी सहायता का प्रमुख केंद्र होगा। शेष म्युनिसिपल शेयर्ड सर्विस सेंटर्स का निर्माण कार्य भी ते

हिमाचल 21 अगस्त से शुरू होगा हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र, कुल 10 बैठकें होंगीहिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 21...
01/08/2026

हिमाचल 21 अगस्त से शुरू होगा हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र, कुल 10 बैठकें होंगी
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त 2026 से शिमला में शुरू होगा। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने संविधान के अनुच्छेद 174(1) के तहत 14वीं विधानसभा के 12वें सत्र का आह्वान किया है। सत्र सुबह 11 बजे विधानसभा भवन में शुरू होगा। विधानसभा सचिवालय ने इसकी अधिसूचना जारी कर सभी विधायकों, सांसदों और संबंधित अधिकारियों को सूचित कर दिया है।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त 2026 से शुरू होगा। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए हिमाचल प्रदेश की 14वीं विधानसभा के 12वें सत्र का आह्वान किया है। यह सत्र 3 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान कुल 10 बैठकें आयोजित की जाएंगी। विधायक राज्य विधानसभा सचिवालय को अपने प्रश्नों व अन्य नियमों के तहत सूचनाएं भेज सकते हैं। राज्य विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने इसकी जानकारी दी। राज्यपाल की संस्तुति के बाद विधानसभा सचिवालय ने शनिवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी।
पठानिया ने कहा कि 22 अगस्त को शनिवार के दिन भी बैठक आयोजित होगी। हालांकि, 28, 29 और 30 अगस्त को भी कोई बैठक नहीं होगी। 28 अगस्त को रक्षाबंधन और 29 अगस्त को शनिवार होने की वजह से भी बैठक आयोजित नहीं की जाएगी। 30 अगस्त को रविवार है। इसके अतिरिक्त, 23 और 30 अगस्त को रविवार का अवकाश रहेगा। उन्होंने कहा कि 27 अगस्त का दिन गैर-सरकारी सदस्य कार्य दिवस के लिए निर्धारित है। सत्र की अधिसूचना जारी होने के बाद सदस्य अपने निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित सूचनाएं ऑफलाइन और ऑनलाइन राज्य विधानसभा सचिवालय को भेज सकते हैं।
अधिसूचना के अनुसार विधानसभा का 12वां सत्र शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को सुबह 11:00 बजे हिमाचल प्रदेश विधानसभा भवन, शिमला में प्रारंभ होगा। यह अधिसूचना 30 जुलाई 2026 को राज्यपाल द्वारा जारी आदेश के आधार पर एक अगस्त को सामान्य सूचना के लिए प्रकाशित की गई है।
विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी आदेश पर सचिव यश पाल शर्मा के हस्ताक्षर हैं। अधिसूचना की प्रतियां सभी विधायकों, हिमाचल से लोकसभा और राज्यसभा सांसदों, मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, उपमुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता, सभी विभागाध्यक्षों और अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजी गई हैं।
मानसून सत्र के दौरान प्रदेश सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक, वित्तीय प्रस्ताव और जनहित से जुड़े विषय सदन में रख सकती है। वहीं विपक्ष भी प्रदेश में आपदा प्रबंधन, सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, श

फ्लैश फ्लड का अब मिलेगा सटीक पूर्वानुमान, एचपीयू के वैज्ञानिकों ने विकसित किया हाइड्रोडायनामिक मॉडलएचपीयू के वैज्ञानिकों...
01/08/2026

फ्लैश फ्लड का अब मिलेगा सटीक पूर्वानुमान, एचपीयू के वैज्ञानिकों ने विकसित किया हाइड्रोडायनामिक मॉडल
एचपीयू के वैज्ञानिकों ने विकसित किया 95.34 प्रतिशत सटीकता वाला हाइड्रोडायनामिक मॉडल
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में हिमालयन सेंटर फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड रेजिलिएंस के उपनिदेशक डा. महेश शर्मा के नेतृत्व में एक अनुसंधान दल ने क्लाउडबस्र्ट (बादल फटने) से उत्पन्न फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) के दुष्प्रभावों का आकलन और उन्हें कम करने के लिए एक अत्याधुनिक सेटेलाइट आधारित हाइड्रोडायनामिक मॉडल विकसित किया है। यह मॉडल हिमाचली क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड की आशंका वाले इलाकों की पहचान करने के साथ-साथ समय रहते चेतावनी जारी करने और आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस शोध दल में एचपीयू के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय और इंग्लैंड के इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ता भी शामिल रहे। शोधकर्ताओं ने इस मॉडल का वैज्ञानिक सत्यापन वर्ष 2025 में मंडी जिला के थुनाग गांव में बादल फटने से आई फ्लैश फ्लड के आधार पर किया।
अध्ययन में नासा के सेटेलाइट रेनफॉल डाटा, उच्च-रिजोल्यूशन भू-भाग की जानकारी, क्षेत्र सर्वेक्षण, आधिकारिक क्षति रिकार्ड और दो-आयामी एचईसी-आरएएस जलगतिकीय मॉडलिंग को एकीकृत किया गया, ताकि बाढ़ के जलमग्न होने के मार्ग, जल की गहराई, प्रवाह वेग और भवन-स्तर पर प्रभावों का अनुकरण किया जा सके। शोध के दौरान विकसित मॉडल ने सरकारी क्षति रिकार्ड के विरुद्ध 95.34 प्रतिशत सत्यापन सटीकता प्राप्त की, जो आंकड़ों की कमी वाले पर्वतीय जलग्रहण क्षेत्रों में गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने, बुनियादी ढांचे के जोखिम का आकलन करने और प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाने में भी सक्षम साबित

असिस्टेंट स्टाफ नर्स भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट से राज्य सरकार को अंतरिम राहत। चयन और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होगी, ल...
30/07/2026

असिस्टेंट स्टाफ नर्स भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट से राज्य सरकार को अंतरिम राहत। चयन और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होगी, लेकिन नियुक्तियां हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार को असिस्टेंट स्टाफ नर्स भर्ती की चयन एवं नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की अंतरिम अनुमति दे दी है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सभी नियुक्तियां हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। चयनित उम्मीदवारों को इस शर्त की जानकारी देना अनिवार्य होगा। मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त और हाईकोर्ट में 13 अगस्त को होगी।
हिमाचल प्रदेश में लंबित असिस्टेंट स्टाफ नर्स भर्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट से राज्य सरकार को अंतरिम राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने स्वास्थ्य विभाग को भर्ती की चयन और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति दे दी है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सभी नियुक्तियां हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित रिट याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी।
न्यायमूर्ति संजय करोल और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि चयनित और नियुक्त किए जाने वाले प्रत्येक उम्मीदवार को यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि उनकी नियुक्ति हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन होगी। यह अंतरिम आदेश हिमाचल प्रदेश सरकार बनाम बालकृष्ण मामले में पारित किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के 18 मई 2026 और 16 जून 2026 के आदेशों के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए प्रतिवादी को नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित की गई है।
6 नवंबर 2025 की अधिसूचना के तहत आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने 6 नवंबर 2025 की अधिसूचना के तहत असिस्टेंट स्टाफ नर्स भर्ती की चयन और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की छूट दी है। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह पांच कार्य दिवस के भीतर हाईकोर्ट में अपना विस्तृत हलफनामा दाखिल करे।
शीर्ष अदालत ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से भी अनुरोध किया है कि वह इस मामले की शीघ्र सुनवाई कर जल्द अंतिम फैसला सुनाए। साथ ही राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर प्रतिवादी को नोटिस की तामील कराने और जवाब दाखिल कराने के निर्देश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट ने भी दिया दो सप्ताह का अंतिम अवसर
उधर, गुरुवार को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो

वाईएस परमार विश्वविद्यालय नौणी में एक झटके में 83% तक फीस वृद्धि, छात्र संगठनों ने तत्काल वापसी की मांग कीनौणी, सोलन। डॉ...
30/07/2026

वाईएस परमार विश्वविद्यालय नौणी में एक झटके में 83% तक फीस वृद्धि, छात्र संगठनों ने तत्काल वापसी की मांग की

नौणी, सोलन। डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए जारी नई शुल्क संरचना के खिलाफ छात्र संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे शिक्षा के निजीकरण और किसान विरोधी निर्णय करार दिया है। विश्वविद्यालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार स्नातक, स्नातकोत्तर तथा स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की फीस में 58 से 83 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है, जिससे विद्यार्थियों पर हजारों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। यह संशोधित शुल्क तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। 
छात्र संगठनों ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की एकमात्र बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय का उद्देश्य प्रदेश के किसान, बागवान और ग्रामीण परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण कृषि एवं बागवानी शिक्षा उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान फीस वृद्धि इस उद्देश्य के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन शिक्षा को सुलभ बनाने के बजाय इसे केवल आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग तक सीमित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
छात्र प्रतिनिधियों ने बताया कि स्नातक (यूजी) सामान्य श्रेणी के विद्यार्थियों की कुल वार्षिक फीस 43,350 रुपये से बढ़ाकर 68,700 रुपये कर दी गई है। यानी एक ही बार में 25,350 रुपये (लगभग 58 प्रतिशत) की बढ़ोतरी की गई है। इसी प्रकार स्ववित्तपोषित स्नातक सीटों की कुल फीस 83,350 रुपये से बढ़ाकर 1,27,200 रुपये कर दी गई है, जो 43,850 रुपये (करीब 53 प्रतिशत) की वृद्धि है। 
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में भी विद्यार्थियों को बड़ी राहत देने के बजाय भारी आर्थिक बोझ डाला गया है। सामान्य सीटों की कुल फीस 47,550 रुपये से बढ़ाकर 87,000 रुपये कर दी गई है, जो 39,450 रुपये (लगभग 83 प्रतिशत) की वृद्धि है। वहीं स्ववित्तपोषित स्नातकोत्तर सीटों की फीस 87,550 रुपये से बढ़ाकर 1,42,000 रुपये कर दी गई है, अर्थात 54,450 रुपये (करीब 62 प्रतिशत) की वृद्धि। 
छात्र संगठनों ने कहा कि केवल कुल फीस ही नहीं, बल्कि लगभग प्रत्येक शुल्क मद में भारी बढ़ोतरी की गई है।

टीचर अवार्ड पर अब मिलेंगे दो लाख रुपए, नई शिक्षक पुरस्कार योजना लागू, 31 शिक्षकों को मिलेगा सम्मानराज्य सरकार ने शिक्षको...
30/07/2026

टीचर अवार्ड पर अब मिलेंगे दो लाख रुपए, नई शिक्षक पुरस्कार योजना लागू, 31 शिक्षकों को मिलेगा सम्मान
राज्य सरकार ने शिक्षकों को मिलने वाले नेशनल और स्टेट अवार्ड की धनराशि बढ़ा दी है। कैबिनेट में हुए फैसले के बाद यह नोटिफिकेशन जारी हो गई है। अब नेशनल आबादी टीचर को दो लाख रुपए और स्टेट आबादी को एक लाख रुपए मिलेंगे। साथ ही यह बदलाव भी हुआ है कि अब आबादी टीचर को एक्सटेंशन नहीं मिलेगी। इन्हें पहले यह अवार्ड मिल चुका है, उन्हें अवार्ड या एक्सटेंशन के लिए ऑप्शन दिया जाएगा। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय और राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों के लिए नई नीति जारी कर दी है। छह फरवरी, 2025 की अधिसूचना के तहत राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों को दो वर्ष तथा राज्य पुरस्कार विजेता शिक्षकों को एक वर्ष का सेवा विस्तार देने का प्रावधान था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है। हालांकि जिन शिक्षकों को पहले ही पुराने नियमों के तहत सेवा विस्तार मिल चुका है, वे स्वीकृत अवधि तक सेवा में बने रहेंगे। वहीं, वर्ष 2025 तक राष्ट्रीय या राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त कर चुके शिक्षक पुराने नियमों के अनुसार सेवा विस्तार के पात्र रहेंगे।
यदि वे सेवा विस्तार नहीं लेते हैं, तो उन्हें नई नीति के तहत संशोधित नकद पुरस्कार का लाभ मिलेगा। शिक्षा सचिव राकेश कंवर द्वारा जारी इस अधिसूचना के साथ ही पुरस्कार विजेता शिक्षकों के लिए सेवा विस्तार की व्यवस्था समाप्त कर नकद प्रोत्साहन देने की नई व्यवस्था लागू हो गई है। नई योजना के तहत हिमाचल प्रदेश के सरकारी प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (डीआईईटी) में कार्यरत शिक्षक, मुख्याध्यापक और प्रधानाचार्य राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए पात्र होंगे। योजना में इस बार शिक्षकों के चयन का आधार केवल वरिष्ठता नहीं होगा, बल्कि विद्यार्थियों के सीखने के परिणाम, नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, डिजिटल शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) का प्रभावी क्रियान्वयन, स्कूल कॉम्प्लेक्स एवं क्लस्टर प्रणाली, संसाधनों के बेहतर उपयोग, पुस्तकालय, रीडिंग रूम और अन्य गुणवत्ता सुधार गतिविधियों में योगदान को भी प्रमुखता दी जाएगी।
नई योजना में बदलाव
नई योजना के तहत प्रदेश में कुल 31 शिक्षक सम्मानित किए जाएंगे। इनमें 25 नियमित राज्य शिक्षक पुरस्कार दिए जाएंगे, जिनमें 16 पुरस्कार सामान्य क्षेत्र और नौ पुरस्कार जनजातीय एवं दुर्गम क्षेत्रों के शिक्षकों के लिए निर्धारित किए गए हैं। छह विशेष पुरस्कार उन शिक्षकों को दिए जाएं

धान के एमएसपी में 72 रुपए का इजाफा, प्रदेशभर में 11 सरकारी मंडियों में होगी धान की खरीदखरीफ सीजन में फसल खरीद की तैयारिय...
30/07/2026

धान के एमएसपी में 72 रुपए का इजाफा, प्रदेशभर में 11 सरकारी मंडियों में होगी धान की खरीद
खरीफ सीजन में फसल खरीद की तैयारियां तेज
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने धान की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 72 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ा दिया है। इस बार किसानों को धान की फसल का 2,461 प्रति क्विंटल एमएसपी दिया जाएगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने खरीफ सीजन 2026-27 के दौरान धान खरीद को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने और खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने के उद्देश्य से खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने व्यापक रणनीति तैयार की है। इसी क्रम में विभागीय निदेशालय में धान खरीद की तैयारियों की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता विभाग के निदेशक कुमद सिंह ने की। बैठक में आगामी धान खरीद सीजन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने खरीद केंद्रों की तैयारी, किसानों के पंजीकरण, भुगतान व्यवस्था, परिवहन और भंडारण जैसे विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में बताया गया कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी सरकार किसानों से सीधे धान की खरीद करेगी। इसके लिए प्रदेश के चार प्रमुख धान उत्पादक जिलों कांगड़ा, ऊना, सोलन और सिरमौर में कुल 11 सरकारी खरीद मंडियां चिन्हित की गई हैं। इन मंडियों के माध्यम से अक्तूबर माह के पहले सप्ताह से धान की खरीद शुरू की जाएगी। निदेशक कुमद सिंह ने कहा कि इस सीजन में प्रदेश में 28,600 मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। कुमद सिंह ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी धान की उपज केवल सरकार द्वारा चिन्हित खरीद मंडियों में ही बेचें, जिससे उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों की उपज खरीदने के बाद 48 घंटे के भीतर भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में ऑनलाइन हस्तांतरित कर दिया जाएगा। इससे किसानों को समय पर भुगतान मिलेगा और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी। बैठक में विभाग के संयुक्त निदेशक मिलाप शांडिल के अलावा हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम, कृषि मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी तथा सिरमौर, सोलन, ऊना और कांगड़ा के जिला नियंत्रक भी उपस्थित रहे।

हिमाचल में 15 अगस्त को खुले रहेंगे सभी सरकारी स्कूल, पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया जाएगा स्वतंत्रता दिवस।
29/07/2026

हिमाचल में 15 अगस्त को खुले रहेंगे सभी सरकारी स्कूल, पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया जाएगा स्वतंत्रता दिवस।

हिमाचल प्रदेश भर्ती एवं सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्त अधिनियम, 2024 हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी आज रद्द हो गया...
29/07/2026

हिमाचल प्रदेश भर्ती एवं सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्त अधिनियम, 2024 हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी आज रद्द हो गया। नियुक्ति तिथि से मिलेगी वरिष्ठता और अन्य लाभ।
हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी कर्मचारियों की वरिष्ठता (सीनियोरिटी) और वित्तीय लाभ से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी है. इसके साथ ही हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहेगा.
हाईकोर्ट ने रद्द किया था 2024 का कानून
इससे पहले 25 अप्रैल 2026 को हिमाचल हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 को असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया था. यह कानून दिसंबर 2024 में विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान पारित किया गया था.
हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा शामिल थे, ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए इस अधिनियम को रद्द कर दिया था. इसके बाद राज्य सरकार ने इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिल सकी.
क्या है पूरा मामला?
प्रदेश में अलग-अलग समय पर नियुक्त सरकारी कर्मचारियों की अनुबंध अवधि अलग-अलग रही. पहले कर्मचारियों को 8 वर्ष बाद नियमित किया जाता था, फिर इसे 6 वर्ष, उसके बाद 5 वर्ष और वर्तमान में 3 वर्ष कर दिया गया.
इसी कारण वरिष्ठता और वित्तीय लाभ को लेकर विवाद पैदा हुआ. कुछ कर्मचारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और मांग की कि उन्हें नियुक्ति की मूल तिथि से वरिष्ठता और वित्तीय लाभ दिए जाएं.

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