05/02/2026
राष्ट्रीय नाटक विद्यालय में भारत रंग महोत्सव का भव्य आयोजन
3 फरवरी को ‘महात्मे’ की यक्षगान प्रस्तुति में नवदुर्गा की आसुरी शक्तियों पर विजय की कथा ने दर्शकों को किया भावविभोर
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) द्वारा आयोजित भारत रंग महोत्सव के अंतर्गत 3 फरवरी को पारंपरिक यक्षगान नृत्य-नाट्य शैली में देवी महात्म्य का प्रभावशाली मंचन प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भारतीय लोकनाट्य परंपरा और शक्ति उपासना की पौराणिक कथा से रूबरू कराया।
इसके अलावा प्रदर्शनी में विभिन्न स्टालों और स्थानीय टेलेंट को जगह दी गई। यहां स्थानीय व्यंजनों से लेकर अलग अलग स्टाल लगे दिखाई दिए।
यक्षगान के माध्यम से मंचित कथा में असुर राजाओं शुम्भ और निशुम्भ के अत्याचारों का सजीव चित्रण किया गया, जिन्होंने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। देवताओं की सामूहिक प्रार्थना पर आदि शक्ति देवी दुर्गा का अवतरण होता है।
प्रस्तुति में दिखाया गया कि देवी दुर्गा ने असुरों के विनाश हेतु अपने विभिन्न स्वरूपों को प्रकट किया। युद्ध के क्रम में देवी से उत्पन्न काली ने चण्ड और मुण्ड का वध किया, जिसके बाद वे चामुण्डा कहलाईं। आगे चलकर देवी के तेज से सप्त मातृकाओं और नवदुर्गा के स्वरूपों का प्राकट्य हुआ।
यक्षगान की विशिष्ट वेशभूषा, मुखौटे, उग्र नेत्राभिनय, शक्तिशाली संवाद और पारंपरिक संगीत के साथ प्रस्तुत इस नाट्य रूपांतरण में देवी द्वारा रक्तबीज, निशुम्भ और अंततः शुम्भ के वध का दृश्य अत्यंत प्रभावशाली रहा। कथा का समापन अधर्म पर धर्म और असुर शक्तियों पर देवी शक्ति की विजय के संदेश के साथ हुआ।
भारत रंग महोत्सव में प्रस्तुत यह यक्षगान नाट्य न केवल धार्मिक-पौराणिक चेतना को उजागर करता है, बल्कि भारत की लोकनाट्य परंपराओं की समृद्ध विरासत को भी दर्शाता है।
#रंगमंच