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भारत की प्रथम शिक्षिका – राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुलेभारत की सामाजिक क्रांति के इतिहास में सावित्रीबाई फुले का नाम स्वर्...
31/12/2025

भारत की प्रथम शिक्षिका – राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले

भारत की सामाजिक क्रांति के इतिहास में सावित्रीबाई फुले का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। वे भारत की प्रथम शिक्षिका, महान समाज सुधारक, कवयित्री और नारी शिक्षा की अग्रदूत थीं। ऐसे समय में जब स्त्रियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता था और उन्हें केवल घर की चारदीवारी तक सीमित कर दिया गया था, सावित्रीबाई फुले ने साहस, संघर्ष और संकल्प के बल पर शिक्षा के द्वार खोले।

सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव में हुआ। बाल्यावस्था में ही उनका विवाह महामना ज्योतिराव फुले से हुआ। राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित किया। शिक्षा प्राप्त करने के बाद सावित्रीबाई फुले ने स्वयं शिक्षिका बनकर समाज की रूढ़ियों को चुनौती दी। 1848 में पुणे के भिड़े वाड़ा में उन्होंने ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर देश का पहला बालिका विद्यालय स्थापित किया। यह केवल एक विद्यालय नहीं था, बल्कि सामाजिक क्रांति की नींव थी। जब वे पढ़ाने जाती थीं, तब विषमतावादी/रूढ़िवादी समाज के लोग उन पर कीचड़, गोबर और पत्थर फेंकते थे, लेकिन वे प्रतिदिन एक अतिरिक्त साड़ी लेकर जातीं और अपमान सहते हुए भी अपने लक्ष्य से कभी विचलित नहीं हुईं।

सावित्रीबाई फुले ने विधवा पुनर्विवाह, बाल विवाह निषेध, जाति उन्मूलन और स्त्री सम्मान के लिए भी अथक संघर्ष किया। उन्होंने विधवाओं और अनाथ बच्चों के लिए आश्रय गृह खोले तथा प्लेग जैसी महामारी के समय निस्वार्थ भाव से पीड़ितों की सेवा की। इसी सेवा भाव में 1897 में वे स्वयं प्लेग से संक्रमित होकर इस संसार से विदा हो गईं।

सावित्रीबाई फुले केवल शिक्षिका नहीं, बल्कि शिक्षा की वास्तविक देवी और नारी मुक्ति की प्रतीक थीं। उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि शिक्षा ही समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जा सकती है। आज जब हम उनकी जयंती मनाते हैं, तो यह संकल्प लेना आवश्यक है कि हम शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के उनके सपनों को साकार करें।
निश्चय ही, क्रान्तिज्योति राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

आप सभी भारतवासियों को भारत के सबसे बड़े धर्म ग्रंथ  #भारतीय_संविधान_दिवस (26नवंबर)की हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनायें🙏🙏🙏🙏🙏🙏...
26/11/2025

आप सभी भारतवासियों को भारत के सबसे बड़े धर्म ग्रंथ #भारतीय_संविधान_दिवस (26नवंबर)की हार्दिक बधाई एवं
मंगलकामनायें
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जन्म लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल   "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" (जन्म 31 अक्टूबर 1875,मृत्यु 15दिसम्बर 1950)भारत के इतिहास ...
31/10/2025

जन्म लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल

"एक भारत, श्रेष्ठ भारत"

(जन्म 31 अक्टूबर 1875,मृत्यु 15दिसम्बर 1950)

भारत के इतिहास में ज़ब भी देश निर्माण कि बात आती है तो प्राचीन काल में प्रथम बार सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने अखण्ड भारत का निर्माण किये उसके बाद सम्राट अशोक महान ने,और देश कि आजादी के समय *लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल* ने भारत के लगभग 40% भाग जो कई रियासतों में बटी थी, उन्हें जोड़कर एक असम्भव कार्य को सम्भव कर दिखाए।

सरदार वल्लभभाई पटेल का देहांत 15 दिसम्बर 1950 को बॉम्बे के बिड़ला हाउस में दिल का दुसरी बार दौरा पड़ने के बाद हुआ। पटेल जी को भारत के एकीकरणकर्ता के रूप में सबसे ज्यादा याद किया जाता है।

सरदार पटेल की जाति और वंश
बर्तमान समय में काफ़ी भारतीय अपने नाम में पटेल टाइटल लगा रहे हैं। फिरहाल सरदार पटेल कृषक वर्ग के कुर्मी जाति से थे जो सनातनीय खत्तीय वंश से ताल्लुक रखते थे।

पटेल जी का नारा

पटेल जी का प्रसिद्ध नारा, "एक भारत, श्रेष्ठ भारत " आज भी देश को प्रेरित करता है। भारत के लौह पुरुष के रूप में प्रसिद्ध सरदार बल्लभभाई पटेल न केवल एक स्वतंत्रता सेनानी थे बल्कि एक दूरदर्शी नेता भी थे।

शिक्षा
सरदार पटेल को अपनी स्कूली शिक्षा पुरी करने में काफी समय लगा। उन्होंने 22साल की उम्र में 10 वीँ की परीक्षा पास की। आर्थिक स्थित अच्छी न होने पर भी उन्होंने अपने वकील बनने के सपने को पूरा कर सके।

प्रधानमंत्री न बनने का कारण
सन 1947 में भारत को आजादी मिलने पर ज़ब भावी प्रधानमंत्री के लिए मतदान हुआ तो सरदार पटेल को सर्वाधिक मत मिले। उसके बाद सर्वाधिक मत आचार्य कृपलानी को मिले थे। किन्तु गांधी जी के कहने पर सरदार पटेल और आचार्य कृपलानी ने अपना नाम वापस ले लिया और जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया।फिर वोट क्यों कराया गया था ज़ब उसे मानना हि नहीं था।

सरदार पटेल को प्रथम बार जेल

पटेल जी को पहली बार 1930 में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। अगले 16 वर्षो में उन्होंने अपना लगभग आधा समय जेल में बिताया।

खेड़ा सत्याग्रह

स्वतंत्रता आंदोलन में सरदार पटेल का सबसे पहला और बड़ा आंदोलन 1918 में खेड़ा संघर्ष में हुआ। गुजरात का खेड़ा खण्ड उन दिनों भयंकर सूखे की चपेट में था। किसानों ने अंग्रेज सरकार से भरी कर में छूट की मांग की। ज़ब यह स्वीकार नहीं किया गया तो सरदार पटेल, गांधीजी एवं अन्य लोगों ने किसानों का नेतृत्व किया और उन्हें कर न देने के लिए प्रेरित किया। अंत में सरकार झुकी और उस वर्ष करों में राहत दी गयी। यह सरदार पटेल की पहली सफलता थी।

सरदार की उपाधि
बारडोली सत्याग्रह, भारतीय स्वाधीनता संग्राम के दौरान वर्ष 1928 में गुजरात में हुआ एक प्रमुख किसान आंदोलन था, जिसका नेतृत्व भल्लभभाई पटेल ने किया। उस समय प्रांतीय सरकार ने किसानों के लगान में 30%तक की बृद्धि कर दी थी। पटेल ने इस लगान बृद्धि का जमकर बिरोध किया। सरकार ने इस सत्याग्रह आंदोलन को कुचलने के लिए कठोर कदम उठाये, पर अंततः विवस होकर उन्हें किसानों के मांगो को मानना पड़ा। एक न्यायिक अधिकारी ब्लूमफील्ड और एक राजस्व अधिकारी मैक्सवेल ने संपूर्ण मामलों की जाँच कर 22% लगान बृद्धि को गलत ठहराते हुए इसे घटाकर 6.03% कर दिया।

इस आंदोलन के सफल होने पर वहाँ की महिलाओ ने वल्लभभाई पटेल को सरदार की उपाधि प्रदान की।

सरदार वल्लभभाई पटेल का कार्य और लौह पुरुष की उपाधि

स्वतन्त्रता के समय भारत में 562 देशी रियासते थी। इसका क्षेत्रफल भारत का 40% था। सरदार पटेल ने आजादी के ठीक पूर्व ही वीपी मेनन के साथ मिलकर कई देशी रियासतों को भारत में मिलाने के लिए कार्य आरम्भ कर दिए थे। पटेल और मेनन ने देसी राजाओ को बहुत समझाया कि उन्हें स्वायत्तता देना सम्भव नहीं होगा। जिसके फलस्वरूप तीन को छोड़कर शेष सभी राजवाड़ों ने स्वेक्षा से भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। केवल जम्मू एवं कश्मीर, जूनागढ़ तथा हैदराबाद के राजाओं ने ऐसा करना नहीं स्वीकारा। जूनागढ़ सौरष्ट्र के पास एक छोटी रियासत थी और चारों ओर से भारतीय भूमि से घिरी थी। वह पाकिस्तान के समीप नहीं थी। वहाँ के नवाब ने 15 अगस्त 1947 को पाकिस्तान में विलय कि घोषणा कर दी। राज्य कि जनता भारत विलय चाहती थी। नवाब के विरुद्ध बहुत विरोध हुआ तो भारतीय सेना जूनागढ़ में प्रवेश कर गयी। नवाब भागकर पाकिस्तान चला गया और 9 नवम्बर 1947 को जूनागढ़ भी भारत में मिल गया। हैदराबाद भारत कि सबसे बड़ी रियासत थी, जो चारों ओर से भारतीय भूमि से घिरी थी। वहाँ के निज़ाम ने पाकिस्तान के प्रोत्साहन से स्वतंत्र राज्य का दावा किया और अपनी सेना बढ़ाने लगा। वह ढेर सारे हथियार आयात करता रहा। पटेल चिंतित हो उठे। अंततः भारतीय सेना 13 सितम्बर 1948 को हैदराबाद में प्रवेश कर गयी। तीन दिनों के बाद निज़ाम ने आत्मसमर्पण कर दिया और नवंबर 1948 में भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।
नेहरू ने कश्मीर को यह कहकर अपने पास रख लिया कि यह समस्या एक अंतर्राष्ट्रीय समस्या है।
562 छोटी बड़ी रियासतों को भारत में विलय कराकर, असम्भव कार्य को संभवकर दिए, इस महान कार्य के लिए पटेल जी को लौह पुरुष कि उपाधि दी गयी।

स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू जी एवं प्रथम उप प्रधानमंत्री पटेल जी में आकाश पाताल का अंतर था। दोनों ने इग्लैंड जाकर बैरिस्टरी कि डिग्री प्राप्त कि थी परन्तु सरदार पटेल वकालत में नेहरू से काफी आगे थे, तथा उन्होंने सम्पूर्ण ब्रिटिश साम्राज्य के विद्यार्थियों में सर्वप्रथम स्थान प्राप्त किये थे। नेहरू सोचते रहते थे पटेल उसे कर डालते थे। पटेल भी उची शिक्षा पाई थी परन्तु उनमे किंचित भी अहंकार नहीं था। वे स्वयं कहा करते थे, "मैने कला या विज्ञान के विशाल गगन में ऊँची उड़ाने नहीं भरी। मेरा विकास कच्ची झोपड़ियो में गरीब किसान के खेतोँ की भूमि और शहरों के गंदे मकानों में हुआ है"

सरदार पटेल गृहमंत्री के रूप में वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने भारतीय नागरिक सेवाओं (आई. सी. एस.) का भारतीयकरण कर उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवाएं (आई. ए. एस.) बनाया। अंग्रेजो की सेवा करनेवालो में विश्वास भरकर उन्हें राजभक्ति से देशभक्ति की ओर मोड़ा।

लेखन कार्य एवं प्रकाशित पुस्तकें

निरन्तर संघर्षपूर्ण जीवन जीने वाले सरदार पटेल को स्वतंत्र रूप से पुस्तक-रचना का अवकाश नहीं मिला, परंतु उनके लिखे पत्रों, टिप्पणियों एवं उनके द्वारा दिये गये व्याख्यानों के रूप में बृहद् साहित्य उपलब्ध है, जिनका संकलन विविध रूपाकारों में प्रकाशित होते रहा है। इनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण तो सरदार पटेल के वे पत्र हैं जो स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में दस्तावेज का महत्व रखते हैं। 1945 से 1950 ई० की समयावधि के इन पत्रों का सर्वप्रथम दुर्गा दास के संपादन में (अंग्रेजी में) नवजीवन प्रकाशन मंदिर से 10 खंडों में प्रकाशन हुआ था। इस बृहद् संकलन में से चुने हुए पत्र-व्यवहारों का वी० शंकर के संपादन में दो खंडों में भी प्रकाशन हुआ, जिनका हिंदी अनुवाद भी प्रकाशित किया गया। इन संकलनों में केवल सरदार पटेल के पत्र न होकर उन-उन संदर्भों में उन्हें लिखे गये अन्य व्यक्तियों के महत्वपूर्ण पत्र भी संकलित हैं। विभिन्न विषयों पर केंद्रित उनके विविध रूपेण लिखित साहित्य को संकलित कर अनेक पुस्तकें भी तैयार की गयी हैं। उनके समग्र उपलब्ध साहित्य का विवरण इस प्रकार है:-

हिन्दी में

"एकता की प्रतिमा"
सरदार पटेल : चुना हुआ पत्र-व्यवहार (1945-1950) - दो खंडों में, संपादक- वी० शंकर, प्रथम संस्करण-1976, (नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद)
सरदारश्री के विशिष्ट और अनोखे पत्र (1918-1950) - दो खंडों में, संपादक- गणेश मा० नांदुरकर, प्रथम संस्करण-1981 (वितरक- नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद)
भारत विभाजन (प्रभात प्रकाशन, नयी दिल्ली)
गांधी, नेहरू, सुभाष
आर्थिक एवं विदेश नीति
मुसलमान और शरणार्थी
कश्मीर और हैदराबाद

अंग्रेजी में

Sardar Patel's correspondence, 1945-50. (In 10 Volumes), Edited by Durga Das [Navajivan Pub. House, Ahmedabad.]
The Collected Works of Sardar Vallabhbhai Patel (In 15 Volumes), Ed. By Dr. P.N. Chopra & Prabha Chopra (Konark Publishers PVT LTD, Delhi)

ऐसे सदी के महानायक के जन्म दिवस पर उन्हें कोटि -कोटि नमन💐💐💐🙏🙏🙏

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20/10/2025

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आपको व आपके परिवार को #प्राचीन_पर्व #दीपदानोत्सव #दीपोत्सव (दीपावली) की हार्दिक बधाई एवं अनंत धम्म मंगलकामनाएं देता हूं।
आप और आपका परिवार सदैव दीप की भांति प्रकाशवान हो, स्वयं के साथ संपूर्ण धरा के जीव मंडल को भी प्रकाशित और आनंदित करता रहे।

।।।भवतु सब्ब मंगलं।।।
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ए.पी.जे अब्दुल कलाम,इनका पुरा नाम अवुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम है। जिन्हें मिसाइल मैन भी कहा जाता है। उनका जन्म 15...
15/10/2025

ए.पी.जे अब्दुल कलाम,इनका पुरा नाम अवुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम है। जिन्हें मिसाइल मैन भी कहा जाता है। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के जिला रमानाथपुरन के रामेश्वरम के धनुषकोडी मे एक गरीब मुस्लिम परिवार मे हुआ था। इनके माता का नाम आशियम्मा था,जो एक गृहिणी थी और उनके पिता का नाम जैनुलाब्दीन था,अब्दुल कलाम जी के पिता ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे। वे मच्छवारो को नाव किराए पर दिया करते थे और वह एक स्थानीय मस्जिद के इमाम भी थे। डॉ॰ कलाम ने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी स्नाकोत्तर यानि कि पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री पूरी की। अपनी शिक्षा को पूरा करने के बाद डॉ कलाम रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) में शामिल हुए। DRDO के बाद डॉ कलाम ISRO से जुड़ें और कई ग्रह प्रक्षेपण कार्यों में शामिल हुए।

डॉ॰ कलाम‌ को ऐसे ही मिसाइल मैन नही कहा जाता है उन्होंने ने भारत को परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्रों की सूची में लाने का काम किया और इसके अलाव उनहोंने नाग,पृथ्वी, त्रिशूल,ब्रह्मोस,आकाश,अग्नि समेत क्ई मिसाइल बनाए। वो कलाम ही थे जिनके डायरेक्शन में देश को पहली स्वदेशी मिसाइल मिली। कलाम अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों के अलावा अपने विनम्र और प्रेरक व्यक्तित्व के लिए भी जाने जाते थे। वह लाखों लोगों,विशेषकर युवाओं के लिए एक महान role model और प्रेरणा थे। वह शिक्षा की शक्ति में बढ चढ कर हिस्सा लिया और इसे बढ़ावा देने के लिए अथक प्रयास भी किया। डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम साहब की राजनितिक क्षेत्र मे रुचि तो‌ नही थी पर पक्ष (बी जे पी) और विपक्ष (काँग्रेस) दोने की सहमति से उन्हें 25 जुलाई 2002 को भारत के राष्ट्रपति चुना गया । कलाम साहब से नामांकन फाॅम पर सिग्नेचर करने के लिए पुछा गया कि किस दिन को आये,तो उन्होंने कहा जब मर्जी आ सकते हो,मेरे लिए सब दिन एक सामान है,मै विज्ञानवाद पे भरोसा करता हुँ। इससे साफ जाहिर होता है कि कलाम साहब अंधविश्वास, पाखंडवाद से बहुत दुर थे। पांच वर्ष की अवधि की सेवा के बाद, वह शिक्षा,लेखन और सार्वजनिक सेवा के अपने नागरिक जीवन में लौट आए। डॉ॰ कलाम ने आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए बहुत सारी किताबे भी लिखी,जिनमें मुख्य किताबे👇

1. विंग्स ऑफ फायर
2. इग्नाइटेड माइंड्स
3. गाइडिंग सोल्स
4. असफलता से सफलता तक
5. द साइंटिफिक इंडिया
6. टारगेट 3 बिलियन
7. टर्निंग पॉइंट्स.......इत्यादि

कलाम साहब की कुछ प्रमुख विचारे

चलिए अपना आज कुर्बान करें ताकि आगे आने वाली पीढ़ी को बेहतर कल मिल सके।

मै अलग सोचने वाले युवा लोगो को संदेश देना चाहता हूँ कि जिसमे कुछ खोजने का,घूमने का,नामुमकिन को संभव करने का और समस्याओं को जीतने का दम है वे इस मार्ग पर चलना जारी रखे ।

यदि आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं, तो पहले सूरज की तरह जलें।

अपने मिशन मे कामयाब होने का सिर्फ एक ही रास्ता है,किसी भी काम को पूरी लगन के साथ करो।

आसमान की तरफ देखो। हम अकेले नही है। सारा जहां हमारा दोस्त हैं और सपने देखने और उन्हे पुरा करने वालो की मदद करता है....।

जहाँ एक तरफ भारत देश मे नेताओ के द्वारा,सभी धर्मों के धर्मगुरुओ के द्वारा,सरकारी संस्थानों मे सेवा दे रहे,कुछ सरकारी अधिकारियों के द्वारा.. जहां समानता,विषमता,धर्मिक उन्मादो को बढावा दिया जा रहा हो। वैसे भारत देश मे, डॉ॰ ए पी जे अब्दुल कलाम जैसा एक सच्चा देशभक्त एक मिसाइल मैन,एक मिसाल के रुप मे अपने आप को स्थापित करता है जो अपने देश और देश के लोगों से गहरा प्रेम और लगाव रखता है। ऐसे महान देशभक्त,वैज्ञानिक,सच्चे दिलवाला सौ साल में एक बार जन्म लेते है और कुछ ऐसा कर जाता है कि आने वाले सहस्राब्दियों तक उन्हें याद किया जाता है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष"पर्यावरण शब्द" परि + आवरण  से मिलकर बना है। 'परि' का आशय चारों ओर तथा 'आवरण' का आशय परिवेश ...
05/06/2025

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष

"पर्यावरण शब्द" परि + आवरण से मिलकर बना है। 'परि' का आशय चारों ओर तथा 'आवरण' का आशय परिवेश है। दूसरे शब्दों में कहें तो पर्यावरण अर्थात वनस्पतियों, प्राणियों, और मानव जाति सहित समस्त सजीवों और उनके साथ सम्बन्धित भौतिक परिसर को पर्यावरण कहतें हैं वास्तव में पर्यावरण में वायु, जल, भूमि, पेड़-पौधे, जीव-जन्तु, मानव और उसकी विविध गतिविधियों के परिणाम आदि सभी का समावेश होता हैं।

पर्यावरण संरक्षण की समस्या प्रमुख रूप से विज्ञान के क्षेत्र में असीमित प्रगति तथा नये - नये आविष्कारों की स्पर्धा के कारण उत्पन्न हुई है वैज्ञानिक उपलब्धियों से मानव प्राकृतिक संतुलन को उपेक्षा की दृष्टि से देख रहा है। दूसरी ओर धरती पर जनसंख्या की निरंतर वृद्धि, औद्योगीकरण एवं शहरीकरण की तीव्र गति से बढने से प्रकृति के हरे भरे क्षेत्रों, पेड- पौधों, जंगल, वनों को समाप्त किया जा रहा है ।

साथियों हम सबको गर्व होना चाहिए कि हम लोग उस भारत में जन्मे हैं जहां अब के लगभग 2300 वर्षों पूर्व सम्राट अशोक महान का शासन हुआ करता था। "वसुधैव कुटुम्बकम" के जनक सम्राट अशोक ने पूरी वसुधा को अपना परिवार मान लिया था और वह कहते थे "सबे मुनिवे पजा ममा" अर्थात् सभी मानव मेरी सन्तान हैं। सम्राट अशोक महान के शिलालेखों से पता चलता है कि उन्होंने राज्य के विभिन्न स्थानों में मानव और पशुओं के लिए औषधियों की व्यवस्था व जड़ी-बूटियों को उगाने की व्यवस्था करवायी। गिरनार शिलालेख से स्पष्ट है कि सम्राट अशोक महान ने जनहित में पशुओं के लिए चिकित्सालय खुलवाये। राजमार्गों के किनारे वृक्ष लगवाने और कुएं खुदवाए ताकि मनुष्यों तथा पशुओं को पानी और वृक्षों के नीचे विश्राम की सुविधा प्राप्त हो सके।

सोचिए कितने दूरदर्शी थे सम्राट अशोक महान उन्होने आज हो रही पर्यावरण की समस्याओं को 2300 वर्षों पहले ही जान लिया था इसलिए उन्होने अपने शासनकाल में मानव जगत, पशु - पक्षियों के साथ - साथ वनस्पति जगत का समुचित ध्यान रखते हुए शासन किया था।

आज हम सभी को सम्राट अशोक महान के शासनकाल से प्रेरणा लेने की जरूरत है वर्ना पर्यावरण की उपेक्षा ही निकट भविष्य में मानव सभ्यता के विनाश का कारण बन सकती है इस स्थिति को ध्यान में रखकर सन 1992 में ब्राजील में विश्व के 174 देशों का "पृथ्वी सम्मेलन" आयोजित किया गया था। इसके पश्चात सन 2002 में जोहान्सबर्ग में पृथ्वी सम्मेलन आयोजित कर विश्व के सभी देशों को पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने के लिए अनेक उपाय सुझाए गये। वस्तुतः पर्यावरण के संरक्षण से ही धरती पर जीवन का संरक्षण हो सकता है, अन्यथा मंगल ग्रह आदि ग्रहों की तरह धरती का जीवन-चक्र भी एक दिन समाप्त हो जाएगा।

विश्व को सर्वप्रथम सभ्यता का पाठ पढ़ाने वाले, समता समानता के संस्थापक, प्रकृति धम्म के अन्वेषक, महान मानवतावादी, महान दा...
12/05/2025

विश्व को सर्वप्रथम सभ्यता का पाठ पढ़ाने वाले, समता समानता के संस्थापक, प्रकृति धम्म के अन्वेषक, महान मानवतावादी, महान दार्शनिक, महान वैज्ञानिक, महान चिकित्सक, महान पर्यावरणविद्, महान समाजशास्त्री, महान अर्थशास्त्री एवं संसार के सौ महापुरुषों में प्रथम स्थान रखने वाले, अपने ज्ञान के आलोक से पूरे विश्व को आलोकित करने वाले, महाकारुणिक, महामानव, विश्वगुरु, साक्यमुनि तथागत गोतम बुध का जन्म 563 ई०पू० वैसाख मास की पूर्णिमा को हुआ था ।

यह अद्भुत संयोग है कि इसी दिन भगवान बुध को 528 ई० पू० में संबोधि लाभ हुआ और वैसाख मास की पूर्णिमा के दिन ही 483 ई० पू० को महापरिनिब्बान हुआ था। इसलिए इसे त्रिविध पावनी बुध पूर्णिमा कहा जाता है ।
इस पावन पर्व के अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई देते हुए लोक मंगल की कामना करता है ।☸️☸️☸️

हृदय की गहाराइयों से सादर आभार
26/04/2025

हृदय की गहाराइयों से सादर आभार

विद्यापीठ एकेडमी की छात्रा आयुषी ने प्राप्त किया जिले में दूसरा स्थानकरकी माइनर(कर्मा)आज शुक्रवार को यू0 पी0 बोर्ड का 10...
25/04/2025

विद्यापीठ एकेडमी की छात्रा आयुषी ने प्राप्त किया जिले में दूसरा स्थान

करकी माइनर(कर्मा)

आज शुक्रवार को यू0 पी0 बोर्ड का 10वीं और 12वीं का रिजल्ट जारी किया गया,जिसमें विद्यापीठ एकेडमी(कोचिंग सेंटर) करकी माइनर हाईस्कूल की छात्रा आयुषी मौर्या पुत्री सर्वजीत कुमार 94.34%। अंक प्राप्त कर जनपद में दूसरा स्थान वही इंटरमीडिएट में अल्का मौर्या पुत्री सुजीत कुमार ने 82.22%अंक हासिल प्रथम स्थान हासिल की वही सेंटर का सौ प्रतिशत रिजल्ट रहा कोचिंग के संचालक अंशुमान मौर्य एवं मैनेजर शैलेन्द्र कुमार मौर्य ने बिटिया को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना किए,साथ ही अध्यापक मुबारक अली,जय हिंद चौहान,संदीप कुमार को भी बधाई दिए जिनके अथक मेहनत से परिणाम सकारात्मक बना और अगले सत्र के लिए भी बच्चों को संस्थान में आमंत्रित किए।

सामाजिक क्रांति के अग्रदूत,महान समाज सुधारक,  #महिला शिक्षा के जनक, महामना  #ज्योतिबा_फुले_जयंती पर समस्त देशवासियों को ...
11/04/2025

सामाजिक क्रांति के अग्रदूत,महान समाज सुधारक, #महिला शिक्षा के जनक, महामना #ज्योतिबा_फुले_जयंती पर समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं


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अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का अदम्य साहस और बलिदान अतुलनीय है। मातृभूमि को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने का...
23/03/2025

अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का अदम्य साहस और बलिदान अतुलनीय है। मातृभूमि को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने का उनका संकल्प और त्याग हर भारतवासी के हृदय में अमिट है।

अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव के बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि!

सुप्रभात 🌹🌹
19/03/2025

सुप्रभात 🌹🌹

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