31/10/2025
जन्म लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल
"एक भारत, श्रेष्ठ भारत"
(जन्म 31 अक्टूबर 1875,मृत्यु 15दिसम्बर 1950)
भारत के इतिहास में ज़ब भी देश निर्माण कि बात आती है तो प्राचीन काल में प्रथम बार सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने अखण्ड भारत का निर्माण किये उसके बाद सम्राट अशोक महान ने,और देश कि आजादी के समय *लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल* ने भारत के लगभग 40% भाग जो कई रियासतों में बटी थी, उन्हें जोड़कर एक असम्भव कार्य को सम्भव कर दिखाए।
सरदार वल्लभभाई पटेल का देहांत 15 दिसम्बर 1950 को बॉम्बे के बिड़ला हाउस में दिल का दुसरी बार दौरा पड़ने के बाद हुआ। पटेल जी को भारत के एकीकरणकर्ता के रूप में सबसे ज्यादा याद किया जाता है।
सरदार पटेल की जाति और वंश
बर्तमान समय में काफ़ी भारतीय अपने नाम में पटेल टाइटल लगा रहे हैं। फिरहाल सरदार पटेल कृषक वर्ग के कुर्मी जाति से थे जो सनातनीय खत्तीय वंश से ताल्लुक रखते थे।
पटेल जी का नारा
पटेल जी का प्रसिद्ध नारा, "एक भारत, श्रेष्ठ भारत " आज भी देश को प्रेरित करता है। भारत के लौह पुरुष के रूप में प्रसिद्ध सरदार बल्लभभाई पटेल न केवल एक स्वतंत्रता सेनानी थे बल्कि एक दूरदर्शी नेता भी थे।
शिक्षा
सरदार पटेल को अपनी स्कूली शिक्षा पुरी करने में काफी समय लगा। उन्होंने 22साल की उम्र में 10 वीँ की परीक्षा पास की। आर्थिक स्थित अच्छी न होने पर भी उन्होंने अपने वकील बनने के सपने को पूरा कर सके।
प्रधानमंत्री न बनने का कारण
सन 1947 में भारत को आजादी मिलने पर ज़ब भावी प्रधानमंत्री के लिए मतदान हुआ तो सरदार पटेल को सर्वाधिक मत मिले। उसके बाद सर्वाधिक मत आचार्य कृपलानी को मिले थे। किन्तु गांधी जी के कहने पर सरदार पटेल और आचार्य कृपलानी ने अपना नाम वापस ले लिया और जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया।फिर वोट क्यों कराया गया था ज़ब उसे मानना हि नहीं था।
सरदार पटेल को प्रथम बार जेल
पटेल जी को पहली बार 1930 में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। अगले 16 वर्षो में उन्होंने अपना लगभग आधा समय जेल में बिताया।
खेड़ा सत्याग्रह
स्वतंत्रता आंदोलन में सरदार पटेल का सबसे पहला और बड़ा आंदोलन 1918 में खेड़ा संघर्ष में हुआ। गुजरात का खेड़ा खण्ड उन दिनों भयंकर सूखे की चपेट में था। किसानों ने अंग्रेज सरकार से भरी कर में छूट की मांग की। ज़ब यह स्वीकार नहीं किया गया तो सरदार पटेल, गांधीजी एवं अन्य लोगों ने किसानों का नेतृत्व किया और उन्हें कर न देने के लिए प्रेरित किया। अंत में सरकार झुकी और उस वर्ष करों में राहत दी गयी। यह सरदार पटेल की पहली सफलता थी।
सरदार की उपाधि
बारडोली सत्याग्रह, भारतीय स्वाधीनता संग्राम के दौरान वर्ष 1928 में गुजरात में हुआ एक प्रमुख किसान आंदोलन था, जिसका नेतृत्व भल्लभभाई पटेल ने किया। उस समय प्रांतीय सरकार ने किसानों के लगान में 30%तक की बृद्धि कर दी थी। पटेल ने इस लगान बृद्धि का जमकर बिरोध किया। सरकार ने इस सत्याग्रह आंदोलन को कुचलने के लिए कठोर कदम उठाये, पर अंततः विवस होकर उन्हें किसानों के मांगो को मानना पड़ा। एक न्यायिक अधिकारी ब्लूमफील्ड और एक राजस्व अधिकारी मैक्सवेल ने संपूर्ण मामलों की जाँच कर 22% लगान बृद्धि को गलत ठहराते हुए इसे घटाकर 6.03% कर दिया।
इस आंदोलन के सफल होने पर वहाँ की महिलाओ ने वल्लभभाई पटेल को सरदार की उपाधि प्रदान की।
सरदार वल्लभभाई पटेल का कार्य और लौह पुरुष की उपाधि
स्वतन्त्रता के समय भारत में 562 देशी रियासते थी। इसका क्षेत्रफल भारत का 40% था। सरदार पटेल ने आजादी के ठीक पूर्व ही वीपी मेनन के साथ मिलकर कई देशी रियासतों को भारत में मिलाने के लिए कार्य आरम्भ कर दिए थे। पटेल और मेनन ने देसी राजाओ को बहुत समझाया कि उन्हें स्वायत्तता देना सम्भव नहीं होगा। जिसके फलस्वरूप तीन को छोड़कर शेष सभी राजवाड़ों ने स्वेक्षा से भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। केवल जम्मू एवं कश्मीर, जूनागढ़ तथा हैदराबाद के राजाओं ने ऐसा करना नहीं स्वीकारा। जूनागढ़ सौरष्ट्र के पास एक छोटी रियासत थी और चारों ओर से भारतीय भूमि से घिरी थी। वह पाकिस्तान के समीप नहीं थी। वहाँ के नवाब ने 15 अगस्त 1947 को पाकिस्तान में विलय कि घोषणा कर दी। राज्य कि जनता भारत विलय चाहती थी। नवाब के विरुद्ध बहुत विरोध हुआ तो भारतीय सेना जूनागढ़ में प्रवेश कर गयी। नवाब भागकर पाकिस्तान चला गया और 9 नवम्बर 1947 को जूनागढ़ भी भारत में मिल गया। हैदराबाद भारत कि सबसे बड़ी रियासत थी, जो चारों ओर से भारतीय भूमि से घिरी थी। वहाँ के निज़ाम ने पाकिस्तान के प्रोत्साहन से स्वतंत्र राज्य का दावा किया और अपनी सेना बढ़ाने लगा। वह ढेर सारे हथियार आयात करता रहा। पटेल चिंतित हो उठे। अंततः भारतीय सेना 13 सितम्बर 1948 को हैदराबाद में प्रवेश कर गयी। तीन दिनों के बाद निज़ाम ने आत्मसमर्पण कर दिया और नवंबर 1948 में भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।
नेहरू ने कश्मीर को यह कहकर अपने पास रख लिया कि यह समस्या एक अंतर्राष्ट्रीय समस्या है।
562 छोटी बड़ी रियासतों को भारत में विलय कराकर, असम्भव कार्य को संभवकर दिए, इस महान कार्य के लिए पटेल जी को लौह पुरुष कि उपाधि दी गयी।
स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू जी एवं प्रथम उप प्रधानमंत्री पटेल जी में आकाश पाताल का अंतर था। दोनों ने इग्लैंड जाकर बैरिस्टरी कि डिग्री प्राप्त कि थी परन्तु सरदार पटेल वकालत में नेहरू से काफी आगे थे, तथा उन्होंने सम्पूर्ण ब्रिटिश साम्राज्य के विद्यार्थियों में सर्वप्रथम स्थान प्राप्त किये थे। नेहरू सोचते रहते थे पटेल उसे कर डालते थे। पटेल भी उची शिक्षा पाई थी परन्तु उनमे किंचित भी अहंकार नहीं था। वे स्वयं कहा करते थे, "मैने कला या विज्ञान के विशाल गगन में ऊँची उड़ाने नहीं भरी। मेरा विकास कच्ची झोपड़ियो में गरीब किसान के खेतोँ की भूमि और शहरों के गंदे मकानों में हुआ है"
सरदार पटेल गृहमंत्री के रूप में वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने भारतीय नागरिक सेवाओं (आई. सी. एस.) का भारतीयकरण कर उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवाएं (आई. ए. एस.) बनाया। अंग्रेजो की सेवा करनेवालो में विश्वास भरकर उन्हें राजभक्ति से देशभक्ति की ओर मोड़ा।
लेखन कार्य एवं प्रकाशित पुस्तकें
निरन्तर संघर्षपूर्ण जीवन जीने वाले सरदार पटेल को स्वतंत्र रूप से पुस्तक-रचना का अवकाश नहीं मिला, परंतु उनके लिखे पत्रों, टिप्पणियों एवं उनके द्वारा दिये गये व्याख्यानों के रूप में बृहद् साहित्य उपलब्ध है, जिनका संकलन विविध रूपाकारों में प्रकाशित होते रहा है। इनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण तो सरदार पटेल के वे पत्र हैं जो स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में दस्तावेज का महत्व रखते हैं। 1945 से 1950 ई० की समयावधि के इन पत्रों का सर्वप्रथम दुर्गा दास के संपादन में (अंग्रेजी में) नवजीवन प्रकाशन मंदिर से 10 खंडों में प्रकाशन हुआ था। इस बृहद् संकलन में से चुने हुए पत्र-व्यवहारों का वी० शंकर के संपादन में दो खंडों में भी प्रकाशन हुआ, जिनका हिंदी अनुवाद भी प्रकाशित किया गया। इन संकलनों में केवल सरदार पटेल के पत्र न होकर उन-उन संदर्भों में उन्हें लिखे गये अन्य व्यक्तियों के महत्वपूर्ण पत्र भी संकलित हैं। विभिन्न विषयों पर केंद्रित उनके विविध रूपेण लिखित साहित्य को संकलित कर अनेक पुस्तकें भी तैयार की गयी हैं। उनके समग्र उपलब्ध साहित्य का विवरण इस प्रकार है:-
हिन्दी में
"एकता की प्रतिमा"
सरदार पटेल : चुना हुआ पत्र-व्यवहार (1945-1950) - दो खंडों में, संपादक- वी० शंकर, प्रथम संस्करण-1976, (नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद)
सरदारश्री के विशिष्ट और अनोखे पत्र (1918-1950) - दो खंडों में, संपादक- गणेश मा० नांदुरकर, प्रथम संस्करण-1981 (वितरक- नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद)
भारत विभाजन (प्रभात प्रकाशन, नयी दिल्ली)
गांधी, नेहरू, सुभाष
आर्थिक एवं विदेश नीति
मुसलमान और शरणार्थी
कश्मीर और हैदराबाद
अंग्रेजी में
Sardar Patel's correspondence, 1945-50. (In 10 Volumes), Edited by Durga Das [Navajivan Pub. House, Ahmedabad.]
The Collected Works of Sardar Vallabhbhai Patel (In 15 Volumes), Ed. By Dr. P.N. Chopra & Prabha Chopra (Konark Publishers PVT LTD, Delhi)
ऐसे सदी के महानायक के जन्म दिवस पर उन्हें कोटि -कोटि नमन💐💐💐🙏🙏🙏