My Life My Rules

My Life  My Rules Welcome to iM My Life My Style! Our page is dedicated to personal growth, self-improvement, knowledge, motivation, success, lifestyle, and positive thinking.

We share inspiring content, life lessons, practical tips, and powerful ideas to help you become Welcome to "My Life, My Style" – Your Journey to Success! I’m Rishi Patel, a dedicated life coach passionate about guiding individuals toward achieving their goals and unlocking their full potential. This page is your one-stop destination for:
✨ Motivation to conquer life's challenges
✨ Practical tips for personal growth
✨ Insights into achieving work-life balance
✨ Stories of transformation and success

Life is a series of steps, and I’m here to help you take each one confidently and purposefully. Join me as we explore the path to success together! Let’s create a life you love – one step at a time. 💡

07/08/2026

👑 What happens when a fool is placed on a pedestal?

The biggest danger isn't always a bad leader—it can be blind loyalty that stops people from questioning. This reel is a political satire meant to encourage critical thinking, not to target any individual.

💬 Do you think people should question more instead of following blindly? Share your thoughts.

06/08/2026

🧠 अंधा भरोसा आपकी सोच को कब और कैसे बंद कर देता है?

जब हम बिना सवाल किए किसी की हर बात मानने लगते हैं, तो फैसले हमारी सोच नहीं, हमारा भरोसा लेने लगता है। यह एक राजनीतिक व्यंग्य है, किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं। अंत तक देखें और खुद सोचिए।

💬 क्या अंधा भरोसा सही है या सवाल पूछना ज़रूरी है? अपनी राय कमेंट में बताइए।

05/08/2026

🤔 एक बेवकूफ दोस्त को सिर पर कब तक बैठाकर रखेंगे?

कभी-कभी सबसे बड़ा नुकसान दुश्मन नहीं करता... बल्कि वह करता है जिसे हम बिना सोचे-समझे हमेशा सही मान लेते हैं। यह एक राजनीतिक व्यंग्य है, किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं। अंत तक देखें और खुद तय करें। 🎭

💬 आपकी राय क्या है? कमेंट में ज़रूर बताइए।

कहानी: "सिर पर बैठा हुआ बेवकूफ" 😂एक गाँव में एक आदमी था... नाम था भोला।भोला का एक दोस्त था, जिसे हर बात पर सलाह देने का ...
05/08/2026

कहानी: "सिर पर बैठा हुआ बेवकूफ" 😂

एक गाँव में एक आदमी था... नाम था भोला।

भोला का एक दोस्त था, जिसे हर बात पर सलाह देने का बहुत शौक था... लेकिन दिक्कत ये थी कि उसकी हर सलाह उल्टी पड़ती थी।

एक दिन उसने कहा,
"पेड़ काट दो... छाया की क्या ज़रूरत?"

भोला ने पेड़ काट दिया...
अगले दिन धूप में खुद ही जलने लगा।

फिर बोला,
"छाता मत ले जाना... बारिश नहीं होगी।"

भोला ने उसकी बात मान ली...
और आधे घंटे बाद भीगता हुआ घर पहुँचा।

इसके बाद उसने कहा,
"पैसे बैंक में क्यों रखते हो? गद्दे के नीचे रखो।"

भोला ने वही किया...
और कुछ दिनों बाद चोर पूरे गद्दे सहित पैसे भी ले गए।

गाँव वाले रोज़ समझाते,
"अरे भाई! इसकी हर बात गलत निकलती है, फिर भी इसकी सुनते क्यों हो?"

भोला मुस्कुराकर कहता,
"क्या करूँ... बचपन का दोस्त है।"

एक दिन गाँव के बुज़ुर्ग ने सबके सामने सिर्फ़ एक सवाल पूछा...

"एक बेवकूफ आदमी को कब तक सिर पर बैठाकर रखोगे?..."

उस दिन पहली बार भोला को समझ आया...

रिश्ते निभाना अच्छी बात है... लेकिन अपनी समझदारी गिरवी रखकर नहीं।

सीख:
कभी-कभी सबसे बड़ा नुकसान दुश्मन नहीं करता... बल्कि वह इंसान करता है जिसे हम बिना सोचे-समझे हर बार सही मान लेते हैं।

Petrol itna mehenga ho gaya ki ab naya model launch ho gaya. 😅
02/08/2026

Petrol itna mehenga ho gaya ki ab naya model launch ho gaya. 😅

01/08/2026

🦅 क्या होता है जब कोई एक शासक पूरे जंगल को अपना समझने लगता है?

यह एक काल्पनिक व्यंग्य कथा है, जिसमें सत्ता, लालच, अधिकार और एकजुटता की कहानी दिखाई गई है। किसी भी वास्तविक व्यक्ति, दल, सरकार या घटना से इसका कोई संबंध नहीं है।

🎬 पूरी कहानी देखकर बताइए—अगर आप उस जंगल में होते, तो क्या करते?

⚠️ अस्वीकरण: यह वीडियो केवल मनोरंजन और सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से बनाई गई एक काल्पनिक कहानी है। इसका किसी वास्तविक व्यक्ति, संगठन, राजनीतिक दल या घटना से कोई संबंध नहीं है।

#जंगलराज #काल्पनिककहानी #व्यंग्य

युवा रोजगार : डिग्री बढ़ी, लेकिन नौकरी क्यों नहीं?भारत के पिछले 12 वर्षों का एक तथ्यात्मक विश्लेषणलेखक: Rishi Patel---प्...
30/07/2026

युवा रोजगार : डिग्री बढ़ी, लेकिन नौकरी क्यों नहीं?

भारत के पिछले 12 वर्षों का एक तथ्यात्मक विश्लेषण

लेखक: Rishi Patel

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प्रस्तावना

भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है। लगभग 140 करोड़ से अधिक आबादी में बड़ी संख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। यही युवा शक्ति भारत की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। लेकिन एक बड़ा सवाल लगातार सामने आ रहा है—

क्या भारत अपने युवाओं को पर्याप्त रोजगार दे पा रहा है?

हर साल लाखों छात्र स्कूल और कॉलेज से निकलते हैं। कोई इंजीनियर बनता है, कोई डॉक्टर, कोई MBA, कोई ITI या डिप्लोमा करता है। लेकिन क्या सभी को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार मिलता है?

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पिछले 12 वर्षों में कितने विद्यार्थियों ने पढ़ाई पूरी की?

AISHE तथा विभिन्न सरकारी आँकड़ों के आधार पर अनुमान:

- Graduation एवं उससे ऊपर की डिग्री पूरी करने वाले: लगभग 4.5 से 5 करोड़
- 12वीं पास करने वाले: लगभग 10 से 11 करोड़
- ITI, Polytechnic, Diploma आदि: लगभग 1.5 करोड़

यानी पिछले 12 वर्षों में लगभग 16–18 करोड़ युवाओं ने किसी न किसी स्तर की शिक्षा पूरी की। (ये संयुक्त अनुमान हैं, क्योंकि पूरे 12 वर्षों का एकीकृत सरकारी डेटा उपलब्ध नहीं है।)

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क्या सभी को सरकारी नौकरी मिली?

नहीं।

भारत में सरकारी नौकरियों की संख्या सीमित है।

अनुमानतः:

- कुल सरकारी कर्मचारी (केंद्र + राज्य + PSU + अन्य): लगभग 2.2–2.5 करोड़
- हर वर्ष नई भर्तियाँ: लगभग 6–10 लाख (वर्ष के अनुसार बदलती हैं)

यदि हर साल लगभग 2–3 करोड़ युवा रोजगार बाजार में प्रवेश करते हैं, तो सरकारी नौकरियाँ केवल बहुत छोटे प्रतिशत को ही मिल पाती हैं।

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Private Sector कितना रोजगार देता है?

भारत में रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत निजी क्षेत्र है।

मुख्य क्षेत्र:

- IT
- Manufacturing
- Retail
- Banking
- Healthcare
- MSME
- Logistics
- Construction

फिर भी बड़ी संख्या में रोजगार असंगठित (Informal) क्षेत्र में हैं, जहाँ वेतन, सुरक्षा और स्थिरता सीमित हो सकती है।

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बेरोजगारी की वास्तविक स्थिति

PLFS के अनुसार पिछले वर्षों में कुल बेरोजगारी दर में गिरावट आई है, लेकिन शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

कुछ प्रमुख तथ्य:

- 15–29 वर्ष आयु वर्ग में बेरोजगारी दर हाल के वर्षों में लगभग 10% के आसपास दर्ज की गई।
- स्नातकों में बेरोजगारी दर सामान्य आबादी से अधिक रही है।

इसका अर्थ यह नहीं कि बाकी सभी सरकारी नौकरी में हैं। बहुत से युवा:

- निजी नौकरी करते हैं,
- स्वरोजगार में हैं,
- पारिवारिक व्यवसाय में हैं,
- या अपनी योग्यता से कम स्तर का कार्य कर रहे हैं।

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भारत को हर साल कितनी नौकरियों की आवश्यकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार भारत के श्रम बाज़ार में हर वर्ष बड़ी संख्या में नए युवा प्रवेश करते हैं।

कई आर्थिक अध्ययनों के अनुसार भारत को लगभग 80 लाख से 1 करोड़ गुणवत्तापूर्ण नई नौकरियों की हर वर्ष आवश्यकता होती है ताकि नए युवाओं को पर्याप्त अवसर मिल सकें।

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केवल डिग्री क्यों पर्याप्त नहीं?

आज कंपनियाँ केवल डिग्री नहीं, बल्कि कौशल (Skills) भी देखती हैं।

मुख्य Skill Gap:

- Communication
- English
- AI एवं Digital Skills
- Practical Experience
- Problem Solving

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रोजगार की चुनौती के कई कारण

रोजगार की स्थिति किसी एक कारण से नहीं बनती। प्रमुख कारणों में शामिल हैं:

- उद्योगों की अपेक्षा कम गति से नौकरी सृजन
- Skill Gap
- Automation एवं AI
- भर्ती प्रक्रियाओं में देरी
- कुछ परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाएँ
- MSME और Manufacturing क्षेत्र की चुनौतियाँ
- प्रशासनिक अक्षमताएँ
- भ्रष्टाचार या पारदर्शिता की कमी से जुड़े मामले

इनमें से किसी एक कारण को अकेले पूरी समस्या का कारण नहीं माना जा सकता।

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आगे का रास्ता

भारत को आवश्यकता है:

- Manufacturing विस्तार
- Skill आधारित शिक्षा
- Startup और MSME को प्रोत्साहन
- भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता
- समय पर परीक्षाएँ और नियुक्तियाँ
- AI और नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षण

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निष्कर्ष

भारत के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है। चुनौती अवसरों की गुणवत्ता और संख्या की है। शिक्षा, उद्योग, कौशल विकास, निवेश, पारदर्शी भर्ती और प्रभावी नीतियाँ मिलकर ही रोजगार की स्थिति को बेहतर बना सकती हैं।

यदि हर वर्ष पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण नौकरियाँ सृजित होती हैं और शिक्षा को उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ा जाता है, तो भारत अपनी युवा आबादी को वास्तविक "Demographic Dividend" में बदल सकता है।

29/07/2026

📢 संसद में सुप्रिया सुले का सरकार पर तीखा सवाल

एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान सांसद सुप्रिया सुले ने संसद में अपनी बात रखते हुए सरकार पर कई सवाल उठाए। उन्होंने युवाओं, सोशल मीडिया और मौजूदा राजनीतिक माहौल का भी ज़िक्र किया और कहा कि आज की नई पीढ़ी क्या सोचती है, इसका जवाब आने वाले समय में मिलेगा।

▶️ इस वीडियो में देखिए उन्होंने अपने भाषण में और कौन-कौन से मुद्दे उठाए।

⚠️ Disclaimer:
इस वीडियो के सभी मूल अधिकार संसद टीवी (Sansad TV) के पास सुरक्षित हैं। यह सामग्री केवल जन-जागरूकता, सूचना और शैक्षिक उद्देश्य से साझा की जा रही है। हमारा इस सामग्री पर किसी प्रकार का स्वामित्व दावा नहीं है।

29/07/2026

🇮🇳 Vande Mataram isn't just a slogan—it's a feeling.

Today's youth has the power to shape tomorrow. True patriotism isn't only about words; it's about integrity, courage, hard work, and standing up for what's right. Every small action can help build a stronger nation.

Vande Mataram. Jai Hind! ❤️🇮🇳

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