27/05/2026
किसान भाइयों अब यूरिया खरीदने के नियम बदल गए हैं। सरकार ने यूरिया खाद की बिक्री और वितरण को लेकर नए नियम लागू करने की तैयारी की है। बताया जा रहा है कि इन नियमों का उद्देश्य यूरिया की कालाबाजारी रोकना, जरूरतमंद किसानों तक खाद पहुंचाना और खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है। लेकिन गांव के किसान इस फैसले को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। कुछ किसानों का कहना है कि इससे सही किसानों को फायदा मिलेगा, जबकि कई किसान इसे नई परेशानी मान रहे हैं।
नई व्यवस्था के अनुसार अब यूरिया खरीदने के लिए आधार कार्ड दिखाना जरूरी होगा। इसके साथ ही मोबाइल नंबर पर OTP सत्यापन भी किया जाएगा। केवल पंजीकृत किसानों को ही यूरिया देने की बात कही जा रही है। इतना ही नहीं, प्रति किसान निर्धारित मात्रा में ही खाद उपलब्ध कराया जाएगा और खरीदारी के बाद पर्ची या रसीद लेना भी अनिवार्य होगा।
सरकार का कहना है कि इन नियमों से कालाबाजारी पर रोक लगेगी। कई जगह शिकायत मिलती रही है कि यूरिया की बोरियां गलत तरीके से बड़े व्यापारियों या दूसरे राज्यों में भेज दी जाती हैं, जबकि असली किसान खाद के लिए लाइन में खड़ा रहता है। खरीफ और रबी सीजन में हर साल किसानों को यूरिया की किल्लत का सामना करना पड़ता है। कई बार किसान पूरी रात सहकारी समिति के बाहर इंतजार करता है, लेकिन सुबह तक खाद खत्म हो जाती है। ऐसे में सरकार इस व्यवस्था को नियंत्रित करना चाहती है।
लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों की कुछ बड़ी चिंताएं भी सामने आ रही हैं। गांव के बहुत से छोटे किसान आज भी तकनीकी प्रक्रियाओं से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। कई बुजुर्ग किसानों के मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं हैं। कुछ किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं है, तो कुछ क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या रहती है। ऐसे में OTP आधारित व्यवस्था किसानों के लिए नई परेशानी खड़ी कर सकती है।
सबसे बड़ी दिक्कत उन किसानों को हो सकती है जो बटाई पर खेती करते हैं। गांवों में बड़ी संख्या में किसान दूसरों की जमीन लेकर खेती करते हैं, लेकिन जमीन उनके नाम पर नहीं होती। यदि केवल पंजीकृत भू-स्वामी किसानों को ही यूरिया मिलेगा, तो बटाईदार किसानों के सामने खाद की भारी समस्या खड़ी हो सकती है। खेती तो वही कर रहे हैं, लेकिन कागजों में उनका नाम नहीं होने से उन्हें खाद लेने में दिक्कत आ सकती है।
कई किसान यह भी सवाल उठा रहे हैं कि सरकार पहले खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करे। नियम बनाना आसान है, लेकिन गांव स्तर पर सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में यूरिया पहुंचाना ज्यादा जरूरी है। आज भी कई जिलों में किसान डीएपी और यूरिया के लिए परेशान रहते हैं। कुछ जगह किसानों को जरूरत से कम खाद मिलती है, जबकि कई बार मजबूरी में किसानों को बाजार से ऊंचे दाम पर खाद खरीदनी पड़ती है।
सरकार का तर्क है कि निर्धारित मात्रा में यूरिया देने से उसका संतुलित उपयोग होगा। कृषि वैज्ञानिक भी लंबे समय से कह रहे हैं कि किसान जरूरत से ज्यादा यूरिया डाल रहे हैं, जिससे मिट्टी की सेहत खराब हो रही है। लगातार अधिक यूरिया उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति घटती है और उत्पादन पर भी असर पड़ता है। इसलिए सरकार संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना चाहती है।
हालांकि किसान भाइयों का कहना है कि केवल यूरिया की मात्रा सीमित करने से समस्या हल नहीं होगी। यदि सरकार संतुलित खेती चाहती है, तो उसे डीएपी, पोटाश और अन्य उर्वरकों को भी किसानों के लिए सस्ता और आसानी से उपलब्ध कराना होगा। आज कई किसान महंगे दाम के कारण पर्याप्त मात्रा में अन्य खाद नहीं खरीद पाते और मजबूरी में यूरिया का ज्यादा उपयोग करते हैं।
एक और बड़ी चिंता लाइन और भीड़ को लेकर है। यदि हर किसान को आधार सत्यापन और OTP प्रक्रिया से गुजरना होगा, तो सहकारी समितियों पर भीड़ और ज्यादा बढ़ सकती है। गांवों में इंटरनेट और मशीन की दिक्कत पहले से रहती है। कई बार सर्वर डाउन होने से किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में नई व्यवस्था को लागू करने से पहले गांव स्तर पर तकनीकी तैयारी मजबूत करना जरूरी होगा।
किसानों का यह भी कहना है कि नियम बनाते समय छोटे किसानों की वास्तविक स्थिति को समझना जरूरी है। खेती केवल कागजों से नहीं चलती। खेत में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि किसान को समय पर खाद नहीं मिलेगी, तो फसल प्रभावित होगी। धान, मक्का, गन्ना, गेहूं और सब्जियों जैसी फसलों में समय पर यूरिया डालना बहुत जरूरी होता है। थोड़ी सी देरी भी उत्पादन कम कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को किसानों के लिए सरल और पारदर्शी व्यवस्था बनानी चाहिए। यदि आधार और OTP व्यवस्था लागू करनी है, तो गांव स्तर पर सहायता केंद्र भी बनाए जाएं। बुजुर्ग किसानों, बटाईदार किसानों और तकनीकी जानकारी से दूर किसानों के लिए अलग सहायता व्यवस्था होनी चाहिए ताकि कोई भी किसान खाद से वंचित न रहे।
इसके साथ ही किसानों को जैविक खाद, नैनो यूरिया और संतुलित पोषण प्रबंधन के बारे में भी जागरूक करना जरूरी है। केवल रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करके ही खेती की लागत और मिट्टी की समस्या को कम किया जा सकता है। आने वाले समय में टिकाऊ खेती के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग सबसे जरूरी माना जाएगा।
आज जरूरत इस बात की है कि नियम किसानों को परेशान करने के बजाय उनकी मदद करने वाले साबित हों। यदि व्यवस्था पारदर्शी होगी, खाद समय पर मिलेगी और कालाबाजारी रुकेगी, तो किसान इसका स्वागत करेंगे। लेकिन यदि नियमों के कारण किसान को खाद लेने में और ज्यादा परेशानी हुई, तो इसका सीधा असर खेती और उत्पादन पर पड़ेगा।
किसान भाइयों, आपके क्षेत्र में यूरिया आसानी से मिल रहा है या नहीं? क्या आधार और OTP वाली व्यवस्था सही है या इससे किसानों की परेशानी बढ़ेगी? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
#यूरिया #खाद #किसान #खेती #यूरिया_नियम #कृषि #धान_की_खेती #गेहूं_की_खेती #किसान_समस्या #कृषि_समाचार #सहकारी_समिति #ग्रामीण_भारत #उर्वरक #खाद_संकट #खेती_किसानी