10/08/2026
पहाड़ से पलायन कर देहरादून आए, अब समझ नहीं आ रहा—घर में नदी है या नदी में घर!
देहरादून। पहाड़ों से पलायन कर बेहतर सुविधाओं और आसान जिंदगी की उम्मीद में देहरादून पहुंचे लोगों के सामने अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। शहर और आसपास के इलाकों में बारिश के बाद कई बस्तियों की तस्वीर ऐसी नजर आ रही है कि समझना मुश्किल हो गया है कि घरों के अंदर नदी का पानी पहुंच गया है या नदी के रास्ते में ही घर बसा दिए गए हैं।
बताया जाता है कि कुछ प्रॉपर्टी डीलरों ने पहाड़ से पलायन कर देहरादून पहुंचे लोगों को सस्ते और अच्छे प्लॉट का सपना दिखाकर ऐसी जगहों पर जमीनें बेच दीं, जहां प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते पहले से मौजूद थे। लोगों ने भी अपने सुरक्षित भविष्य और घर के सपने के लिए अपनी मेहनत की कमाई इन जमीनों में लगा दी।
लेकिन अब बरसात के मौसम में यही जमीनें परेशानी का कारण बन रही हैं। बारिश का पानी निकलने का रास्ता बाधित होने से कई जगह जलभराव की स्थिति पैदा हो रही है और लोगों के घरों तक पानी पहुंच रहा है। ऐसे में जिन लोगों ने पहाड़ छोड़कर देहरादून में बेहतर जिंदगी की उम्मीद की थी, उन्हें यहां भी दूसरी आफत का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्लॉट बेचते समय जमीन की स्थिति और प्राकृतिक जल निकासी की व्यवस्था की जांच किसने की? क्या लोगों को जमीन बेचने से पहले यह बताया गया था कि बरसात के दौरान यहां जलभराव का खतरा हो सकता है? और अगर नियमों को ताक पर रखकर बस्तियां बसाई गईं, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
पलायन करने वाले पहाड़ के लोगों को उम्मीद थी कि देहरादून में उन्हें बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित भविष्य मिलेगा। लेकिन अगर घर बनाने के बाद हर बरसात में यही घर पानी से घिर जाएं, तो सवाल उठना लाजिमी है—आखिर सुरक्षित घर के नाम पर लोगों को किस खतरे में धकेल दिया गया?
अब जरूरत सिर्फ जलभराव की समस्या दूर करने की नहीं, बल्कि उन जगहों की भी जांच करने की है जहां प्राकृतिक जल निकासी के रास्तों से छेड़छाड़ कर बस्तियां बसाई गई हैं। क्योंकि लोगों ने यहां सिर्फ जमीन नहीं खरीदी थी, उन्होंने अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य का सपना खरीदा था।