29/07/2026
मेरे लिए गुरु की परिभाषा मेरे पिताजी स्व.विनोद जी लाटा थे।
गुरु वह होता है जो हमें जीवन में सही मार्ग दिखाए, सही शिक्षा और संस्कार दे। गुरु वह होता है जो अपने स्नेह, अपनत्व और प्रेम से हमारा जीवन संवार दे। गुरु वह होता है जो हर दुविधा में हमारा मार्गदर्शन करे, हमें सच्चाई और ईमानदारी के रास्ते पर चलना सिखाए। गुरु वह होता है जो कहे कि जीवन में कभी अहंकार मत रखना, सबके साथ मिलकर चलना, सभी का सम्मान करना और सबको साथ लेकर आगे बढ़ना। गुरु वह होता है जो हमें अपने परिश्रम से ईमानदारी की कमाई करना सिखाए। मेरे पिताजी ही मेरे पहले गुरु थे, उनके साथ रहकर ही मैंने उनके आशीर्वाद से पत्रकारिता सीखी। उनके साथ रहने का अवसर मिला, तो जीवन के ये सभी अनमोल संस्कार उनसे सीखने को मिले। पत्रकारिता एक ऐसा पेशा है, जहाँ हर दिन संघर्ष, दबाव, आलोचना और अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे माहौल में इन सभी गुणों को अपने जीवन में बनाए रखना आसान नहीं होता। लेकिन मेरे पिताजी ने अपने व्यवहार और व्यक्तित्व से यह साबित किया कि एक सच्चा पत्रकार सबसे पहले एक अच्छा इंसान होता है। उन्होंने कभी अहंकार को अपने पास नहीं आने दिया, हमेशा सत्य, ईमानदारी और मानवता को प्राथमिकता दी, सभी का सम्मान किया और प्रेम व अपनत्व से लोगों का दिल जीता।
आज पिताजी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके दिए हुए संस्कार, उनकी सीख और उनके आदर्श आज भी मेरे हर निर्णय, हर कदम और हर परिस्थिति में मेरा मार्गदर्शन करते हैं। उनके बताए हुए जीवन-मूल्य ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी और सबसे बड़ी विरासत हैं। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि मैं उनके दिखाए हुए मार्ग पर चलकर उनके नाम और उनके आदर्शों का सम्मान जीवनभर बनाए रख सकूँ। प्रणाम पापा जी।