Kailash Mehala

Kailash Mehala (Member of RLP)

जिस रियाबड़ी तहसील में कभी RLP का झंडा उठाने वाला भी कोई नहीं था, आज उसी क्षेत्र में हजारों समर्पित कार्यकर्ताओं की RLP ...
22/08/2026

जिस रियाबड़ी तहसील में कभी RLP का झंडा उठाने वाला भी कोई नहीं था, आज उसी क्षेत्र में हजारों समर्पित कार्यकर्ताओं की RLP की मजबूत फौज खड़ी हो चुकी है। 💪🚩

आज हालात यह हैं कि प्रत्येक वार्ड से RLP के लिए 10-10 उम्मीदवारों के नाम सामने आ रहे हैं। यह सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि संगठन की बढ़ती ताकत, कार्यकर्ताओं के विश्वास और जनता के बढ़ते समर्थन का प्रमाण है।

यह बदलाव एक दिन में नहीं आया। इसके पीछे आदरणीय हनुमान बेनीवाल जी का संघर्षपूर्ण नेतृत्व, उनकी जनहित की लड़ाई और वर्षों से जमीन पर लगातार मेहनत करने वाले वरिष्ठ कार्यकर्ताओं एवं समर्पित साथियों का अथक परिश्रम है।

जिस संगठन को कभी इस क्षेत्र में कमजोर समझा जाता था, आज वही संगठन मजबूती के साथ गांव-गांव, ढाणी-ढाणी और वार्ड-वार्ड अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहा है।

यह सिर्फ RLP की मजबूती नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के आत्मविश्वास और जनता के भरोसे की जीत है।

🚩 संघर्ष जारी है, संगठन मजबूत है और जनसमर्थन लगातार बढ़ रहा है।

जय हनुमान जी बेनीवाल!
जय RLP! 🚩
जय किसान, जय जवान, जय राजस्थान!

एक अफसर की विदाई… और दूसरे अफसर की आंखों में आंसू! ❤️IPS केके विश्नोई का संभल से बिजनौर ट्रांसफर हुआ। विदाई के मौके पर ज...
22/08/2026

एक अफसर की विदाई… और दूसरे अफसर की आंखों में आंसू! ❤️

IPS केके विश्नोई का संभल से बिजनौर ट्रांसफर हुआ। विदाई के मौके पर जो दृश्य सामने आया, उसने हर किसी का ध्यान खींच लिया।

डीएम अंकित खंडेलवाल की आंखों में अपने साथी अधिकारी की विदाई पर आंसू आ गए।

आमतौर पर हम अफसरों को सख्त फैसले लेते हुए, कानून-व्यवस्था संभालते हुए और अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए देखते हैं। लेकिन जब एक अधिकारी के जाने पर दूसरा अधिकारी भावुक हो जाए, तो समझ आता है कि उनके बीच सिर्फ पद का रिश्ता नहीं, बल्कि इंसानियत और विश्वास का रिश्ता भी था।

मैंने पहली बार ऐसा दृश्य देखा कि एक SP की विदाई पर DM साहब भी खुद को भावुक होने से नहीं रोक पाए।

कुर्सियां बदलती रहती हैं, पोस्टिंग आती-जाती रहती है, लेकिन अच्छे व्यवहार और अच्छे रिश्तों की याद हमेशा साथ रहती है।

केके विश्नोई जी को नई जिम्मेदारी के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। 🙏

अफसर बहुत मिलते हैं, लेकिन अच्छे इंसान और अच्छे साथी हमेशा याद रहते हैं। ❤️

राजस्थान में RLP क्यों चाहिए?इस सवाल का जवाब किसी भाषण या नारे से नहीं, बल्कि केरवाजाट गांव की एक घटना से समझिए।अलवर जिल...
21/08/2026

राजस्थान में RLP क्यों चाहिए?

इस सवाल का जवाब किसी भाषण या नारे से नहीं, बल्कि केरवाजाट गांव की एक घटना से समझिए।

अलवर जिले के मालाखेड़ा ब्लॉक के केरवाजाट गांव में एक सोलर कंपनी द्वारा आबादी क्षेत्र के बीच से विद्युत लाइन निकालने का प्रयास किया जा रहा था। ग्रामीणों का कहना था कि इससे गांव की आबादी और लोगों की सुरक्षा प्रभावित होगी। इसी मांग को लेकर पूरा गांव पिछले छह महीनों से संघर्ष कर रहा था।

ग्रामीणों ने अपनी बात प्रशासन से लेकर जयपुर और दिल्ली तक पहुंचाने की कोशिश की। CMO तक गए, अलग-अलग नेताओं और जनप्रतिनिधियों से मिले, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया।

इसी बीच राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अलवर प्रभारी श्रवण चौधरी जी गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्या सुनी और मौके से ही हनुमान बेनीवाल जी को फोन कर पूरी स्थिति से अवगत करवाया।

हनुमान जी ने ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रशासन से बात की। इसके बाद जो मामला पिछले छह महीनों से अटका हुआ था, उसका समाधान 24 घंटे से भी कम समय में हो गया। प्रशासन ने ग्रामीणों की मांग स्वीकार करते हुए विद्युत लाइन को आबादी क्षेत्र से हटाकर गांव के बाहर से निकालने पर सहमति दी।

यही कारण है कि देर रात करीब 12 बजे भी गांव के बच्चे, बुजुर्ग, युवा और महिलाएं एकत्रित होकर श्रवण चौधरी जी और हनुमान बेनीवाल जी का आभार व्यक्त करने पहुंचे। यह तस्वीर केवल धन्यवाद की नहीं, बल्कि जनता के भरोसे की तस्वीर है। 🔰❤️

अब सवाल पूरे राजस्थान का है।

जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो सिर्फ चुनाव के समय दिखाई न दे, बल्कि मुश्किल वक्त में जनता के बीच खड़ी मिले।

राजस्थान में ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जहां आम आदमी अपनी समस्या लेकर दर-दर भटकने के बजाय यह भरोसा रख सके कि उसकी आवाज विधानसभा से लेकर प्रशासन तक मजबूती से उठाई जाएगी।

केरवाजाट की घटना हमें एक बात साफ सिखाती है—

राजनीति पद के लिए नहीं, जनता की समस्या के समाधान के लिए होनी चाहिए।

इसलिए आगामी चुनाव में वोट देने से पहले सिर्फ यह मत देखिए कि कौन बड़े-बड़े वादे कर रहा है।

यह भी देखिए कि मुश्किल समय में आपके साथ कौन खड़ा होता है।
आपकी आवाज को मजबूती से कौन उठाता है।
और आपकी समस्या के समाधान के लिए कौन संघर्ष करता है।

क्योंकि जनता को सिर्फ नेता नहीं, जनता के बीच खड़ा रहने वाला नेतृत्व चाहिए।

इसीलिए राजस्थान में RLP जैसी मजबूत जनआवाज की जरूरत है। 🔰✌️❤️

#राष्ट्रीय_लोकतांत्रिक_पार्टी #हनुमान_बेनीवाल #अलवर #केरवाजाट #जनता_की_आवाज

20 साल का संघर्ष… और जमीन से जुड़ी एक पहचानराजनीति में पहचान केवल पद, पैसा या बड़े मंच से नहीं बनती। असली पहचान वर्षों त...
21/08/2026

20 साल का संघर्ष… और जमीन से जुड़ी एक पहचान

राजनीति में पहचान केवल पद, पैसा या बड़े मंच से नहीं बनती। असली पहचान वर्षों तक लोगों के बीच रहकर, संघर्षों को करीब से देखकर और बिना किसी बड़े राजनीतिक सहारे के अपनी जगह बनाने से बनती है।

बनवारी जी गुरु का सफर भी करीब 20 वर्षों के संघर्ष, मेहनत और सामाजिक जुड़ाव की कहानी है। किसान परिवार से निकलकर सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बनाना अपने आप में आसान सफर नहीं है। एक ओर धनबल और संसाधनों से मजबूत लोग हैं, तो दूसरी ओर जमीन से जुड़े सामान्य परिवारों के लोग भी अपनी मेहनत और विचारों के साथ लोकतंत्र में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

आज कांता बनवारी गुरु का वार्ड नंबर 6 से चुनावी मैदान में होना इसी संघर्ष और सामाजिक जुड़ाव की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।

यह चुनाव केवल उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं, बल्कि वार्ड के भविष्य से जुड़े विचारों और प्राथमिकताओं पर चर्चा का अवसर भी है। लोकतंत्र में हर उम्मीदवार का अपना संघर्ष, अपनी सोच और अपना परिचय होता है।

एक तरफ संसाधनों की ताकत, दूसरी तरफ किसान के घर से निकला संघर्ष।
एक तरफ राजनीति का प्रभाव, दूसरी तरफ वर्षों से जमीन पर खड़े रहने का अनुभव।

अंततः लोकतंत्र में जनता ही सर्वोच्च है। फैसला भी जनता करेगी और वही तय करेगी कि वार्ड नंबर 6 के भविष्य के लिए उसे किस दिशा और किस नेतृत्व पर भरोसा करना है।

20 वर्षों का संघर्ष अपनी जगह है…
अब समय है काम, विचार और व्यक्तित्व को परखने का।

कार्यक्रम होना बुरी बात नहीं, लेकिन सवाल यह है कि समाज को इससे स्थायी रूप से क्या हासिल होगा?आज के माहौल में केवल बड़े म...
19/08/2026

कार्यक्रम होना बुरी बात नहीं, लेकिन सवाल यह है कि समाज को इससे स्थायी रूप से क्या हासिल होगा?

आज के माहौल में केवल बड़े मंच, भाषण और नेताओं से संवाद के कार्यक्रम करने से समाज की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होने वाला।

अगर वास्तव में समाज का भला चाहते हैं, तो Permanent Empowered Committee जैसी मजबूत और जवाबदेह व्यवस्था पर विचार होना चाहिए—जो लगातार जनप्रतिनिधियों और सरकार से संवाद करे, समाज के मुद्दों को व्यवस्थित तरीके से उठाए और उनके समाधान तक फॉलोअप करे।

क्योंकि समाज को सिर्फ मंच और भीड़ नहीं, स्थायी प्रतिनिधित्व, निरंतर संवाद और ठोस परिणाम चाहिए।

और एक भविष्यवाणी भी समझ लीजिए—
आज इस कार्यक्रम की जो क्लिप आपको उपलब्धि जैसी लग रही है, कल वही क्लिप अलग-अलग संदर्भों में दूसरे लोग आपके खिलाफ इस्तेमाल कर सकते हैं।

इसलिए किसी भी आयोजन का मूल्यांकन भीड़ और तस्वीरों से नहीं, बल्कि इस सवाल से होना चाहिए—

“इससे समाज को लंबे समय में मिला क्या?”

मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उद्देश्य एक होना चाहिए—
समाज का मजबूत भविष्य और उसके हितों की प्रभावी आवाज।

#समाज #संवाद #सामाजिकहित #जवाबदेही #संगठन

पूनिया जी रै हाथां मैं लाडू ई लाडू…! 🍬😄राजनीति में वक्त बदलते देर नहीं लगती…कभी इंतजार लंबा होता है, तो कभी हाथों में मि...
18/08/2026

पूनिया जी रै हाथां मैं लाडू ई लाडू…! 🍬😄

राजनीति में वक्त बदलते देर नहीं लगती…
कभी इंतजार लंबा होता है, तो कभी हाथों में मिठास ही मिठास होती है।

आज पूनिया जी रै हाथां मैं लाडू ई लाडू…
और तस्वीर भी बहुत कुछ कह रही है! 😄

राजस्थान की राजनीति में आगे क्या-क्या देखने को मिलेगा, ये तो वक्त ही बताएगा…
फिलहाल तस्वीर का आनंद लीजिए और मुस्कुराइए। 😊

बाकी राजनीति है साहब… यहां कहानी हर दिन नया मोड़ लेती है! 😉

चूरू की राजनीति ने राजस्थान को दो बड़े राजनीतिक चेहरे दिए—राजेन्द्र राठौड़ और सतीश पूनिया।दोनों ही 2023 के विधानसभा चुना...
18/08/2026

चूरू की राजनीति ने राजस्थान को दो बड़े राजनीतिक चेहरे दिए—राजेन्द्र राठौड़ और सतीश पूनिया।

दोनों ही 2023 के विधानसभा चुनाव में अपने-अपने चुनाव हार गए। राजेन्द्र राठौड़ जी 7 बार के लगातार विधायक रहे, वहीं सतीश पूनिया जी एक बार विधायक रहे, लेकिन संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका लंबे समय से रही है।

2023 के बाद दोनों नेताओं को मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरों के तौर पर भी देखा गया, लेकिन राजनीति में हार-जीत अंतिम पड़ाव नहीं होती।

2024 के बाद सतीश पूनिया जी लगातार सक्रियता और नई जिम्मेदारियों के साथ सफलता की राह पर आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। वहीं राजेन्द्र राठौड़ जी भी अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ के साथ नई भूमिका और नए अवसर की तलाश में हैं।

राजनीति संभावनाओं का खेल है। वक्त बदलता है, परिस्थितियां बदलती हैं और अवसर भी लौटकर आते हैं।

उम्मीद है कि राठौड़ साहब के लिए भी आने वाला समय नई जिम्मेदारियां, नई भूमिका और नई सफलता लेकर आएगा।

क्योंकि राजनीति में सफर कभी खत्म नहीं होता… बस अगला पड़ाव बदल जाता है।

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