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🚨 आस्था के नाम पर घिनौना खेल: 'ढोंगी बाबा' ऋषिकेश वेद की गिरफ्तारी का पूरा सच! 🚨समाज में धर्म और आस्था के नाम पर मासूम ल...
23/05/2026

🚨 आस्था के नाम पर घिनौना खेल: 'ढोंगी बाबा' ऋषिकेश वेद की गिरफ्तारी का पूरा सच! 🚨

समाज में धर्म और आस्था के नाम पर मासूम लोगों को ठगने और उनका शोषण करने वाले ढोंगियों का पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है। पुणे से सामने आया 'स्वयंभू बाबा' ऋषिकेश वेद का मामला इसका एक और जीता-जागता और शर्मनाक उदाहरण है।क्या है पूरा मामला?ऋषिकेश वेद नाम के एक शख्स ने आध्यात्मिक गुरु का चोला ओढ़कर एक 35 वर्षीय विवाहित महिला की धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाया। आरोपी ने अंधविश्वास का ऐसा जाल बुना कि महिला को यह विश्वास दिला दिया कि वह "भगवान शिव का अवतार है और महिला उसकी पार्वती है।
"आस्था की आड़ में यौन शोषण:इस कथित 'दैवीय' झांसे में लेकर आरोपी ने महिला का लंबे समय तक शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण किया। जब यह प्रताड़ना हद से पार हो गई, तब जाकर इस घिनौने सच का खुलासा हुआ।कानूनी कार्रवाई:इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 'महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग' ने तुरंत संज्ञान लिया। आयोग के कड़े निर्देश और दबाव के बाद पुणे पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी ऋषिकेश वेद को सलाखों के पीछे भेज दिया है।सोचने वाली बात:आखिर कब तक हम चमत्कारों और अंधविश्वास के चक्कर में आकर अपनी और अपने अपनों की जिंदगी दांव पर लगाते रहेंगे? धर्म हमें सही रास्ता दिखाता है, किसी पाखंडी के सामने आत्मसमर्पण करना नहीं सिखाता।

👉 सजग रहें, सुरक्षित रहें: किसी भी व्यक्ति पर आँख मूंदकर भरोसा न करें। अगर आपके आस-पास ऐसा कोई पाखंडी सक्रिय है, तो तुरंत आवाज उठाएं और पुलिस को सूचित करें।आपका इस पूरे मामले पर क्या सोचना है? कमेंट में अपनी राय जरूर साझा करें और इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करके लोगों को जागरूक करें।

What are you think about CJP🤔
21/05/2026

What are you think about CJP🤔

20/05/2026

सुबह-सुबह फेसबुक स्क्रॉल करते हुए क्या आपने यह नाम सुना? 🪳 'Cockroach Janta Party'!
​शुरुआत में जिसे लोग महज एक मज़ाक या मीम (Meme) समझ रहे थे, वह अब देश के लाखों बेरोज़गार और फ्रस्ट्रेटेड युवाओं की आवाज़ बनता जा रहा है। महज कुछ ही दिनों में इस ऑनलाइन मूवमेंट से 80 हज़ार से ज़्यादा लोग जुड़ चुके हैं! 🤯
​आखिर इस "काल्पनिक पार्टी" को किसने और क्यों शुरू किया? बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़े अभिजीत डिपके का इसके पीछे क्या विज़न है? और चीफ जस्टिस की किस टिप्पणी के बाद इंटरनेट पर यह गुस्सा आंदोलन में बदल गया? जानिए इस वीडियो में पूरी इनसाइड स्टोरी!
​आपकी इस पर क्या राय है? क्या वाकई सोशल मीडिया के मीम्स और ये इंटरनेट मूवमेंट्स देश की राजनीति को बदल सकते हैं? कमेंट में अपनी राय ज़रूर दें और अपने दोस्तों को भी टैग करें! 👇

🪳 ब्रेकिंग न्यूज़: राजनीति के गलियारों में अब आ गई है 'कॉकरोच जनता पार्टी'! 🪳बड़े-बड़े वादे करने वाली पार्टियां तो आपने ...
20/05/2026

🪳 ब्रेकिंग न्यूज़: राजनीति के गलियारों में अब आ गई है 'कॉकरोच जनता पार्टी'! 🪳

बड़े-बड़े वादे करने वाली पार्टियां तो आपने बहुत देखी होंगी, लेकिन इस पार्टी का दावा है कि ये हर मौसम में टिके रहेंगे—चाहे कितनी भी 'हिट' (Hit) स्प्रे मार लो! 😂

पार्टी का मुख्य एजेंडा:
🛑 "जो वादे इंसानी नेता नहीं कर पाए, वो अब ये करेंगे!"
🛑 हर घर के कोने-कोने तक अपनी पहुंच बनाना।

इस चुनावी माहौल में आपका क्या कहना है? क्या आप इस नई पार्टी को अपना समर्थन देंगे? नीचे कमेंट में अपनी राय बताएं और अपने दोस्तों को भी टैग करें! 👇

यह चिंताजनक है 😟
20/05/2026

यह चिंताजनक है 😟

सवाल...??
19/05/2026

सवाल...??

15/05/2026

Hypocrisy

“बीच में बैठे शख्स हैं — भारत के तत्कालीन वित्तमंत्री Manmohan Singh।मंच है Doordarshan का, और सवाल पूछ रहे हैं वरिष्ठ प...
15/05/2026

“बीच में बैठे शख्स हैं — भारत के तत्कालीन वित्तमंत्री Manmohan Singh।
मंच है Doordarshan का, और सवाल पूछ रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार Prannoy Roy।

यह चर्चा 1992 के ऐतिहासिक बजट के बाद की है — वही बजट जिसने भारत की अर्थव्यवस्था को लाइसेंस-परमिट राज से निकालकर उदारीकरण की दिशा में मोड़ा।

वीडियो में जिस आत्मविश्वास, शालीनता और तथ्यात्मक स्पष्टता के साथ मनमोहन सिंह जवाब दे रहे हैं, वह देखने लायक है। असहमति हो सकती है, लेकिन उनकी आर्थिक समझ, भाषा पर पकड़ और संयमित व्यक्तित्व को नकारना मुश्किल है।

जिन लोगों ने वर्षों तक उन्हें “मौनमोहन” कहकर सिर्फ़ राजनीतिक तंज का विषय बनाया, उन्हें यह वीडियो ज़रूर देखना चाहिए। कई बार शांत व्यक्ति कमज़ोर नहीं, बल्कि गहराई से सोचने वाला होता है।

और हाँ, यह तुलना सिर्फ़ व्यक्तियों की नहीं, बल्कि दो राजनीतिक संस्कृतियों की भी है —
एक तरफ़ नीति और संस्थागत सोच पर आधारित संवाद,
दूसरी तरफ़ लगातार प्रचार और राजनीतिक शोर।

पूरा कार्यक्रम लंबा है, लेकिन अगर समय कम हो तो 30वें मिनट के आसपास का हिस्सा ज़रूर देखिए। वहाँ एक अर्थशास्त्री वित्तमंत्री की तैयारी, स्पष्टता और स्वतंत्र सोच साफ़ दिखाई देती है।”

चलिए भाई, मान लिया…अर्थव्यवस्था तबाह है।देश खत्म है।सब बर्बाद है।फिर भी सुबह 8 बजे कोचिंग फुल है।मेट्रो में जगह नहीं है।...
13/05/2026

चलिए भाई, मान लिया…
अर्थव्यवस्था तबाह है।
देश खत्म है।
सब बर्बाद है।

फिर भी सुबह 8 बजे कोचिंग फुल है।
मेट्रो में जगह नहीं है।
शादी में 32 तरह की डिशें हैं।
आईफोन की EMI चल रही है।
क्रिकेट मैच में टिकट नहीं मिल रही।
यूट्यूब पर हर दूसरा आदमी करोड़पति बनने का कोर्स बेच रहा है।
और ट्विटर पर वही लोग, जिनका देश कल खत्म हो गया था, आज फिर लिख रहे हैं — “भारत अब नहीं बचेगा।”

देश इतनी बार खत्म हो चुका है कि अब तो उसे खुद भी याद नहीं होगा कि आखिरी बार जिंदा कब था।

90 के दशक में कहा गया — “उदारीकरण आया, देश बिक गया।”
2000 में कहा गया — “MNC आ गईं, भारतीय संस्कृति खत्म।”
2008 में कहा गया — “मंदी आ गई, अब सब डूबेगा।”
2014 में कहा गया — “लोकतंत्र खत्म।”
2016 में कहा गया — “नोटबंदी से सभ्यता समाप्त।”
2020 में कहा गया — “कोरोना के बाद भारत नहीं बचेगा।”
और अब 2026 में फिर वही घोषणा चल रही है… बस हैशटैग बदल गए हैं।

भारत दुनिया का पहला ऐसा देश है जो हर शाम बर्बाद हो जाता है और अगली सुबह फिर ऑफिस चला जाता है।

यहाँ निराशा भी एक तरह का उद्योग है।
कुछ लोग GDP से ज्यादा “सब खत्म” पैदा करते हैं।
उनका पूरा बिज़नेस मॉडल यही है कि जनता को लगे सब खत्म हो गया है…
लेकिन “सब खत्म होने वाला” अगला वीडियो कल फिर आएगा।

और मज़े की बात देखिए…
जो आदमी दिन भर “देश बर्बाद है” बोलता है, वही रात में Swiggy से खाना मंगाकर Netflix पर “India Rising” की डॉक्यूमेंट्री देखता है।

सच यह है कि भारत न उतना महान है जितना भक्त बताते हैं,
न उतना बर्बाद जितना पेशेवर दु:खवादी बताते हैं।
यह विशाल, उलझा हुआ, विरोधाभासी, जिद्दी देश है…
जो गालियाँ खाते-खाते भी आगे बढ़ता रहता है। 🇮🇳

बाकी आप चिंता मत कीजिए।
कल सुबह फिर कोई नया विशेषज्ञ आएगा और बताएगा कि आंकड़े भयावह हैं।
“इस बार सच में देश खत्म हो गया है…” 😄

#भारत

📚🔥 “एक तरफ लाखों छात्र रात-रात भर मेहनत कर रहे हैं… दूसरी तरफ सिस्टम पर उठते सवाल उनका भरोसा तोड़ रहे हैं।”सोशल मीडिया प...
13/05/2026

📚🔥 “एक तरफ लाखों छात्र रात-रात भर मेहनत कर रहे हैं… दूसरी तरफ सिस्टम पर उठते सवाल उनका भरोसा तोड़ रहे हैं।”

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वायरल पोस्ट ने NEET और पेपर लीक विवाद को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पोस्ट में तंज कसते हुए लिखा गया —
“तुम्हारा NEET का पेपर leak हो जाएगा और कोई बिना paper दिए ही Health Minister बन जाएगा…” 😳⚠️

यही वजह है कि यह तस्वीर इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है और छात्र लगातार अपनी नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं। कई युवाओं का कहना है कि जब मेहनत और ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों का भविष्य बार-बार विवादों में घिरता है, तो सिस्टम पर भरोसा कमजोर पड़ने लगता है। 💔

NEET जैसी परीक्षाएं सिर्फ एग्जाम नहीं होतीं, बल्कि लाखों छात्रों के सपनों, करियर और परिवार की उम्मीदों से जुड़ी होती हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं सिर्फ एक परीक्षा को नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता को सवालों के घेरे में ला देती हैं। 📚🔥

सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है।
👉 कुछ लोग इसे छात्रों की हताशा और गुस्से की आवाज बता रहे हैं।
👉 वहीं कुछ इसे राजनीतिक हमला और व्यंग्य मान रहे हैं।

लेकिन एक बात साफ दिखाई दे रही है — अब युवा सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि पारदर्शिता और सख्त कार्रवाई चाहते हैं। क्योंकि बार-बार होने वाले विवादों का असर सीधे उन छात्रों पर पड़ता है जो दिन-रात मेहनत करके अपने भविष्य का सपना देखते हैं। 👀⚠️

अब सबकी नजर इस बात पर है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और भरोसेमंद बनाने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

इतना सस्ता पानी पीने के लिए एक धन्यवाद तो बनता है।
13/05/2026

इतना सस्ता पानी पीने के लिए एक धन्यवाद तो बनता है।

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