19/08/2026
ज़िंदगी के मोड़ पर
एक लड़की थी, जो अपनी ज़िंदगी से बहुत परेशान थी। उसने हमेशा सबके लिए अच्छा सोचा, सबके साथ अच्छा किया, लेकिन बदले में उसे अक्सर सिर्फ़ ताने और दर्द मिले।
एक दिन वह बहुत टूट गई। उसने अकेले बैठकर सोचा—
“शायद मेरी ज़िंदगी में खुशियाँ हैं ही नहीं।”
तभी उसकी नज़र खिड़की से बाहर पड़े एक छोटे से पौधे पर गई। वह पौधा पत्थरों के बीच उग रहा था। न मिट्टी ठीक थी, न पानी की कोई व्यवस्था… फिर भी वह हर दिन थोड़ा-थोड़ा बढ़ रहा था।
लड़की को समझ आया कि ज़िंदगी भी उस पौधे जैसी है। हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान उम्मीद का हाथ नहीं छोड़ता, तो एक दिन वह भी खिल उठता है।
उस दिन उसने अपने आँसू पोंछे और खुद से कहा—
“अब मैं अपनी कहानी दूसरों के हिसाब से नहीं, अपने हौसले से लिखूँगी।”
वक्त बदला… हालात बदले… और सबसे बड़ी बात, वह खुद बदल गई।
आज जब वह पीछे मुड़कर देखती है, तो उसे एहसास होता है कि जिस मोड़ पर उसे लगा था कि सब खत्म हो गया, वही मोड़ उसकी नई शुरुआत थी।
ज़िंदगी में हर मोड़ मंज़िल नहीं छीनता…
कुछ मोड़ हमें हमारी असली पहचान से मिलाने आते हैं। ❤️