Goswami Kanha Parvat Shastri

Goswami Kanha Parvat Shastri ॐ नमों नारायण
हर हर महादेव
यद्यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं शम्भो तवाराधनम्‌॥
हे शम्भो! मैं जो भी कर्म करता हूँ
वह आपकी ही अराधना हैं।

25/08/2026

विद्या संबल
27 से 10 सितंबर तक फार्म भरे जायेंगे।
इंतजार करे।

🏆🇮🇳 एक बिहारी, सब पर भारी! 🇮🇳🏆चम्पारण और बिहार का नाम दिल्ली में रोशन करने वाले मननपुर निवासी, अखिल भारतीय गोस्वामी समाज...
23/08/2026

🏆🇮🇳 एक बिहारी, सब पर भारी! 🇮🇳🏆

चम्पारण और बिहार का नाम दिल्ली में रोशन करने वाले मननपुर निवासी, अखिल भारतीय गोस्वामी समाज बिहार के प्रदेश अध्यक्ष श्री उद्धव गोस्वामी जी के सुपुत्र एवं सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत अधिवक्ता श्री प्रांजल गोस्वामी जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। 💐👏

दिल्ली में प्रतिष्ठित संस्था टॉपमैन द्वारा आयोजित अर्द्ध मैराथन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रांजल गोस्वामी जी ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और जज्बे का शानदार परिचय दिया।

उन्होंने लगभग 22 किलोमीटर की दूरी करीब 2 घंटे में पूरी कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 🏃‍♂️🏆

यह उपलब्धि केवल प्रांजल गोस्वामी जी की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि सम्पूर्ण गोस्वामी समाज, चम्पारण एवं बिहार के लिए गर्व और गौरव का विषय है। 🚩

🌟 आपके उज्ज्वल भविष्य, निरंतर सफलता एवं नई उपलब्धियों के लिए हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं।

जय गोस्वामी समाज 🚩
जय बिहार 🇮🇳

🥇🇮🇳 गोस्वामी समाज के लिए गौरव का क्षण 🇮🇳🥇✌️🤼‍♂️ राष्ट्रीय ग्रैप्लिंग कुश्ती चैंपियनशिप 2026 में मध्य प्रदेश के होनहार पह...
23/08/2026

🥇🇮🇳 गोस्वामी समाज के लिए गौरव का क्षण 🇮🇳🥇

✌️🤼‍♂️ राष्ट्रीय ग्रैप्लिंग कुश्ती चैंपियनशिप 2026 में मध्य प्रदेश के होनहार पहलवान एवं छोटे भाई हरिओम पुरी गोस्वामी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सीनियर वर्ग के 66 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक 🥇 हासिल किया।

दिनांक 20 से 23 अगस्त 2026 तक उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित वंदना कटारिया स्टेडियम में आयोजित इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने समाज, मध्य प्रदेश और पूरे देश का नाम रोशन किया है। 🇮🇳

अब हरिओम पुरी गोस्वामी आगामी एशियाई चैंपियनशिप, वियतनाम में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगे। 🇮🇳🤼‍♂️🥇

छोटे भाई हरिओम पुरी गोस्वामी को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की अनंत शुभकामनाएं। 💐🎉

महादेव से प्रार्थना है कि आप निरंतर सफलता की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करें और देश के लिए गौरव बढ़ाएं। 🚩🙏

#हरिओम_पुरी_गोस्वामी


#स्वर्ण_पदक 🥇
#भारतीय_टीम 🇮🇳
#एशियाई_चैंपियनशिप
#गोस्वामी_समाज
#गर्व_का_क्षण 🚩

जब ऋषियों ने स्वयं महादेव से पूछा, “भस्म, नग्नत्व और साधना (भाग - 2).......के इन गूढ़ चिह्नों का वास्तविक अर्थ क्या है?”...
23/08/2026

जब ऋषियों ने स्वयं महादेव से पूछा, “भस्म, नग्नत्व और साधना (भाग - 2).......

के इन गूढ़ चिह्नों का वास्तविक अर्थ क्या है?” तब भगवान शिव ने जो रहस्य प्रकट किया, उसमें साधना का एक ऐसा स्वरूप सामने आया जो बाहरी वेश से कहीं अधिक गहरा था।

भगवान शिव ऋषियों की तपस्या और स्तुति से प्रसन्न हुए। महादेव ने उनसे कहा कि वे उनके कल्याण के लिए ऐसी बातें प्रकट करेंगे, जो शिवभक्तों के लिए हितकारी और पवित्र हैं।

सबसे पहले भगवान शिव ने ऋषियों को शिवभक्तों और तपस्वियों के सम्मान की शिक्षा दी। उन्होंने समझाया कि किसी साधक को केवल उसके बाहरी रूप से नहीं परखना चाहिए। कोई बालक के समान दिखाई दे सकता है, किसी का आचरण सामान्य जनों से भिन्न हो सकता है और कोई संसार की दृष्टि में उन्मत्त भी प्रतीत हो सकता है। फिर भी उसके अंतःकरण में भगवान शिव के प्रति अखण्ड निष्ठा और ब्रह्मतत्त्व का चिंतन प्रतिष्ठित हो सकता है।

भस्म में रत, संयमित और ध्याननिष्ठ साधक के बाहरी स्वरूप से अधिक महत्वपूर्ण उसकी अंतःसाधना है। इसलिए शिवभक्त की निंदा या अवमानना से दूर रहने का उपदेश महादेव ने स्वयं दिया।

ऋषियों ने भगवान शिव को प्रणाम किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने कहा,

“मैं आप सभी से प्रसन्न हूँ। वर माँगो।”

ऋषियों ने धन, राज्य अथवा किसी सांसारिक सुख की कामना नहीं की।

उनकी जिज्ञासा अब साधना के उन रहस्यों तक पहुँच चुकी थी, जिनका उत्तर केवल स्वयं महादेव दे सकते थे।

उन्होंने पूछा,

भस्मस्नान का रहस्य क्या है?

नग्नत्व का वास्तविक अर्थ क्या है?

वामत्व और प्रतिलोमता किस तत्त्व को प्रकट करते हैं?

और कौन सेवनीय है तथा कौन असेव्य?

महादेव ने ऋषियों के प्रश्न सुने और भस्म के रहस्य से अपना उपदेश आरम्भ किया।

उन्होंने बताया कि अग्नि से दग्ध होकर जो कुछ भस्मरूप प्राप्त करता है, वह पवित्र माना जाता है। अग्नि और सोम के तत्त्व से जगत का संबंध बताते हुए भगवान शिव ने भस्म को अपने तत्त्व से जोड़ा।

इसलिए भस्म केवल शरीर पर धारण की जाने वाली वस्तु नहीं है।

भस्मस्नान पाशुपत साधना में शुद्धि और शिवस्मरण से संबद्ध है। भस्म से शरीर को अभिषिक्त करके भगवान शिव का ध्यान करने वाला साधक अपने अंतःकरण को संयम और साधना की ओर उन्मुख करता है।

फिर ऋषियों के दूसरे प्रश्न की बारी आई।

नग्नत्व का अर्थ क्या है?

महादेव ने इस प्रश्न का उत्तर केवल शरीर और वस्त्र तक सीमित नहीं रखा।

उन्होंने जन्म की स्वाभाविक अवस्था का उल्लेख करते हुए साधक के वास्तविक आवरण की ओर संकेत किया। शरीर पर वस्त्र हों, लेकिन इन्द्रियाँ अनियंत्रित हों, तो बाहरी आवरण साधक को संयमित नहीं कर सकता।

इसके विपरीत, जिसने अपनी इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर ली, उसके लिए वास्तविक आवरण वस्त्रों से कहीं ऊपर है।

महादेव ने साधक के श्रेष्ठ आवरण के रूप में क्षमा, धैर्य, अहिंसा, वैराग्य और मान तथा अपमान में समभाव का वर्णन किया।

यहीं ऋषियों के प्रश्न का अर्थ और गहरा हो जाता है।

शरीर को वस्त्र ढक सकते हैं, लेकिन क्रोध को कौन ढकेगा?

अहंकार को कौन बाँधेगा?

अपमान की अग्नि में मन को स्थिर कौन रखेगा?

महादेव का उत्तर बाहरी वेश में नहीं, आचरण में दिखाई देता है।

क्षमा उस मन का आभूषण है जो प्रतिशोध से ऊपर उठ चुका है।

धैर्य उस साधक की शक्ति है जो विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होता।

अहिंसा उसके हृदय की निर्मलता है।

वैराग्य संसार से भागना नहीं, आसक्ति के बंधन से मुक्त होना है।

और मान तथा अपमान में समभाव साधना की उस अवस्था का संकेत है, जहाँ बाहरी प्रशंसा और निंदा मन की शांति को डिगा नहीं पाती।

इसके बाद भगवान शिव ने भस्मस्नान और शिवध्यान की महिमा बताते हुए पाशुपत साधना के मार्ग को और स्पष्ट किया।

फिर महादेव ने शिवयोगियों और दृढ़व्रती शिवभक्तों के सम्मान की शिक्षा दी।

भस्मधारी हों, जटाधारी हों, मुण्डित हों अथवा नग्न तपस्वी हों, उनके बाहरी स्वरूप को देखकर उनका तिरस्कार नहीं करना चाहिए।

शिवभक्त का मूल्य उसके वेश से नहीं, उसकी शिवनिष्ठा से समझना चाहिए।

महादेव ने दधीचि जैसे महान शिवभक्तों का स्मरण कराते हुए भी शिवभक्तों के सम्मान की महिमा प्रकट की।

अब ऋषियों के सामने इस पूरे उपदेश का स्वरूप स्पष्ट होने लगा था।

उन्होंने भस्म के विषय में पूछा था, तो महादेव ने उन्हें केवल भस्म का स्वरूप नहीं बताया। उन्होंने उसके पीछे छिपी साधना दिखाई।

उन्होंने नग्नत्व के विषय में पूछा, तो उत्तर शरीर के आवरण से आगे निकलकर इन्द्रियसंयम और सद्गुणों तक पहुँचा।

उन्होंने शिवभक्तों के विषय में जाना चाहा, तो महादेव ने उन्हें बाहरी रूप से परे देखने की दृष्टि दी।

यही इस प्रसंग की सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा है।

भस्म शरीर पर हो और मन अशुद्ध रहे, तो साधना अधूरी है।

वैराग्य वेश में हो और भीतर आसक्ति बनी रहे, तो उसका स्वरूप अधूरा है।

ज्ञान मुख पर हो और आचरण में संयम न हो, तो उसकी ज्योति मंद पड़ जाती है।

महादेव के उपदेश में साधना का सार बाहरी चिह्नों से आगे जाकर क्षमा, धैर्य, अहिंसा, वैराग्य, इन्द्रियसंयम और समभाव में दिखाई देता है।

ऋषियों ने भस्म और नग्नत्व का रहस्य पूछा था।

महादेव ने उन्हें साधक के भीतर छिपे वास्तविक आवरण का दर्शन करा दिया।

यही पाशुपत मार्ग की वह गूढ़ शिक्षा है, जहाँ भस्म केवल शरीर को नहीं छूती, बल्कि साधक को अपने भीतर की अशुद्धियों की ओर देखने का अवसर देती है।

ॐ श्री महादेवाय नमः

🚩 ॥ हर हर महादेव : जय श्री महाकाल ॥ 🚩
__________________________________________________

📜 विशेष स्पष्टीकरण :

यह प्रसंग लिङ्ग महापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 33 और 34 में वर्णित ऋषियों के प्रश्न तथा भगवान शिव के उपदेश के क्रम पर आधारित है। इसमें भस्मस्नान, नग्नत्व, वामत्व, प्रतिलोमता, सेव्या और असेव्य से जुड़े प्रश्नों के साथ भस्म की महिमा, इन्द्रियसंयम तथा क्षमा, धैर्य, अहिंसा, वैराग्य और मान अपमान में समभाव जैसे विषयों का वर्णन आता है। साथ ही शिवभक्तों और शिवयोगियों के सम्मान की शिक्षा भी दी गई है।

📚 ग्रंथ संदर्भ :

लिङ्ग महापुराण
पूर्वभाग, अध्याय 33 और 34

🎨 प्रस्तुत चित्र केवल भावात्मक एवं कलात्मक प्रस्तुति है। इसका उद्देश्य कथा का दृश्यात्मक अनुभव कराना है, न कि वास्तविक स्वरूप का सटीक चित्रण।

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इन महंत जी  कोन कोन जानते हो।
23/08/2026

इन महंत जी कोन कोन जानते हो।

23/08/2026

सभी गोस्वामी कथावाचक अपने नबंर व शहर लिखे।

🌹 हार्दिक बधाई एवं गौरवपूर्ण शुभकामनाएँ 🌹श्री ओम गिरी गोस्वामी, सुपुत्र श्री तुलस गिरी गोस्वामी, थुंबली (रावतसर) का राजस...
23/08/2026

🌹 हार्दिक बधाई एवं गौरवपूर्ण शुभकामनाएँ 🌹

श्री ओम गिरी गोस्वामी, सुपुत्र श्री तुलस गिरी गोस्वामी, थुंबली (रावतसर) का राजस्थान लोक सेवा आयोग, अजमेर द्वारा आयोजित प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में राजस्थान में टॉप रैंक ऑल राजस्थान 33वीं रैंक )के साथ चयन होने पर हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ। 💐💐

आपकी यह शानदार सफलता आपकी मेहनत, लगन, अनुशासन एवं निरंतर साधना का प्रतिफल है। आपकी उपलब्धि न केवल आपके माता-पिता एवं परिवार के लिए, बल्कि सम्पूर्ण समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।

परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना है कि आप इसी प्रकार नियमित, निष्ठापूर्वक एवं अनवरत परिश्रम करते हुए सफलता की नई ऊँचाइयों को स्पर्श करें तथा अपने ज्ञान, प्रतिभा और कर्मठता से समाज एवं राष्ट्र को गौरवान्वित करते रहें।

“सफलता की यह ऊँची उड़ान,
आपके उज्ज्वल भविष्य की बने पहचान।”

🌺 एक बार पुनः उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएँ। 🌺

बहुत-बहुत बधाई हो ओम गिरी जी! 💐🎉🏆

डॉ. आकांक्षा गिरि गोस्वामी भारत के ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान के सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग में ...
23/08/2026

डॉ. आकांक्षा गिरि गोस्वामी
भारत के ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान के सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग में रेजिडेंट हैं। उन्होंने नेपाल के काठमांडू विश्वविद्यालय के मणिपाल महाविद्यालय से फोरेंसिक मेडिसिन में स्वर्ण पदक और ओटोरिनोलैरिंगोलॉजी में विशिष्टता के साथ अपनी प्रारंभिक चिकित्सा शिक्षा पूरी की है।

वर्तमान में, वह अमेरिकन कॉलेज ऑफ सर्जन्स और अमेरिकन कॉलेज ऑफ एकेडमिक इंटरनेशनल मेडिसिन की स्थायी सदस्य हैं। वह अपर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन्स (टीयूजीएस) की अर्ली सर्जिकल ट्रेनीज कमेटी की भी सदस्य हैं।

प्रशिक्षण प्राप्त सर्जन होने के साथ-साथ, डॉ. गोस्वामी अकादमिक क्षेत्र में भी काफी उत्साही हैं और उन्होंने अपने शोध को कई प्रतिष्ठित अनुक्रमित और सहकर्मी-समीक्षित पत्रिकाओं में प्रकाशित किया है। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई मंचों पर अपने शोध प्रस्तुत किए हैं। वह ब्रिटेन के कार्डिफ विश्वविद्यालय में ब्रिटिश स्टूडेंट डॉक्टर की सहकर्मी समीक्षक भी हैं और उन्होंने यूरोपियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च, स्प्रिंगर नेचर और बीएमसी सर्जरी आदि के प्रकाशनों की समीक्षा की है।

चिकित्सा क्षेत्र में उनके योगदान के लिए, उन्हें इंस्टीट्यूट ऑफ स्कॉलर्स, इंडिया द्वारा यंग अचीवर अवार्ड से सम्मानित किया गया।

वर्तमान में, उनकी मुख्य पेशेवर और वैज्ञानिक रुचि घाव भरने और शल्य चिकित्सा संक्रमणों पर केंद्रित है। हालांकि, भविष्य में उन्हें प्लास्टिक सर्जरी और माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी में भी गहरी रुचि है।

डॉ. दिनकर गोस्वामी गांधीनगर (गुजरात) के एक जाने-माने वरिष्ठ चिकित्सक (जनरल मेडिसिन) हैं। चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र म...
23/08/2026

डॉ. दिनकर गोस्वामी गांधीनगर (गुजरात) के एक जाने-माने वरिष्ठ चिकित्सक (जनरल मेडिसिन) हैं। चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव है।
शिक्षा (Education)एमबीबीएस (MBBS, 1993): बी.जे. मेडिकल कॉलेज, अहमदाबाद।एमडी (MD जनरल मेडिसिन, 1997): बी.जे. मेडिकल कॉलेज, अहमदाबाद।
कार्य अनुभव (Work Experience)डॉ. गोस्वामी के पास चिकित्सा और शिक्षण का लंबा (लगभग 3 दशक से अधिक) अनुभव है।
उन्होंने गांधीनगर के जी.एम.ई.आर.एस. (GMERS) मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दी हैं।वह जी.एम.ई.आर.एस. मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल, गांधीनगर में अतिरिक्त अधीक्षक (Additional Superintendent) भी रहे हैं।
अन्य उपलब्धियां और सम्मानविभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिकाओं (Journals) में उनके कई शोध लेख प्रकाशित हो चुके हैं।उन्हें गुजरात के माननीय राज्यपाल के मानद चिकित्सक (Honorary Physician) का पद भी प्राप्त है।वर्तमान अभ्यास (Current Practice)वर्तमान में, वह गांधीनगर के सेक्टर-11 और सेक्टर-7 क्षेत्र में अपनी चिकित्सा सेवाएं प्रदान करते हैं।

डॉ. अरुण कुमार गिरी  द्वारक दिल्लीसर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्टआकाश हेल्थकेयर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका, नई दिल्लीडॉ. अरुण...
23/08/2026

डॉ. अरुण कुमार गिरी द्वारक दिल्ली
सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट

आकाश हेल्थकेयर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका, नई दिल्ली
डॉ. अरुण कुमार गिरि के बारे में
डॉ. अरुण कुमार गिरी एक उच्च कुशल सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और रोबोटिक सर्जन हैं, जिन्हें 27 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
उनकी विशेषज्ञता रोबोटिक (दा विंची एक्सआई प्लेटफॉर्म) और न्यूनतम चीर-फाड़ वाली सर्जरी में है।
डॉ. गिरी फेफड़े, प्रोस्टेट, सिर और गर्दन, गुर्दे, यकृत, गर्भाशय, अंडाशय, मुंह, अन्नप्रणाली और स्वरयंत्र के कैंसर के शल्य चिकित्सा प्रबंधन में विशेषज्ञ हैं।
उन्हें थायरॉइड सर्जरी, थोरेसिक सर्जरी, मास्टेक्टॉमी, ब्रेस्ट कंजर्वेशन सर्जरी, ऑन्कोप्लास्टी, ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन और बोन सार्कोमा के लिए लिम्ब साल्वेज सर्जरी में अत्यधिक अनुभव है।
उन्होंने 1997 और 1999 में क्रमशः बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान से एमबीबीएस और सर्जरी में एमएस की उपाधि प्राप्त की।
बाद में, उन्होंने 2008 में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस से सर्जिकल ऑन्कोलॉजी में डीएनबी की उपाधि प्राप्त की।
उन्हें अमेरिकन कॉलेज ऑफ सर्जन्स (एफएसीएस) की फेलोशिप भी प्राप्त है।
डॉ. गिरी ने संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित मेमोरियल स्लोन-केटिंग कैंसर सेंटर से सिर और गर्दन की सर्जरी में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया।
उन्होंने अमेरिका के मेडस्टार वाशिंगटन मेडिकल सेंटर में पेरिटोनियल सरफेस सर्जरी (सीआरएस) और एचआईपीईसी में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया था।
वह जापान भी चले गए और वहां उन्होंने टोक्यो स्थित जापानी कैंसर अनुसंधान फाउंडेशन से मिनिमली इनवेसिव गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और कोलोरेक्टल सर्जरी का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
डॉ. गिरी जटिल नैदानिक ​​स्थितियों के प्रबंधन में अपनी विशेषज्ञता और साक्ष्य-आधारित कैंसर प्रबंधन के प्रति अपने समर्पण के लिए जाने जाते हैं।
वह शोध कार्य में सक्रिय रूप से शामिल हैं और प्रतिष्ठित ऑन्कोलॉजी पत्रिकाओं में उनके कई प्रकाशन हैं।
वह सोसाइटी ऑफ सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (यूएसए), इंडियन एसोसिएशन ऑफ सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया और अमेरिकन कॉलेज ऑफ सर्जन्स सहित विभिन्न प्रतिष्ठित कैंसर सोसाइटियों के सदस्य हैं।
उन्होंने विभिन्न कार्यशालाओं में लाइव सर्जरी का संचालन किया है।

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