11/05/2026
राधा अपने पिता के बहुत करीब थी। हर शाम वह उनके आने का इंतज़ार करती, ताकि उनके साथ बैठकर बातें कर सके। लेकिन उसके पिता मोहन काम के तनाव में अक्सर चिड़चिड़े हो जाते थे।
एक दिन स्कूल में राधा की टीचर ने कहा कि अगले दिन सभी बच्चों को अपने माता-पिता की तस्वीर लानी है। राधा बहुत खुश थी। उसने घर आकर अपने पिता की पुरानी फोटो निकाल ली और उसे सजाने लगी।
गलती से फोटो पर चाय गिर गई। तस्वीर खराब हो गई।
शाम को जब मोहन ने वह फोटो देखी, तो गुस्से में अपना आपा खो बैठे। उन्होंने राधा को एक जोरदार थप्पड़ मार दिया और बोले,
“तुमसे एक चीज संभाली नहीं जाती!”
राधा सहम गई। उसने कुछ नहीं कहा और चुपचाप अपने कमरे में चली गई।
अगली सुबह मोहन की नज़र मेज़ पर रखे एक छोटे से कार्ड पर पड़ी। उस पर राधा ने लिखा था—
“मेरे पापा दुनिया के सबसे अच्छे पापा हैं। मैं बड़ी होकर बिल्कुल उनके जैसी बनना चाहती हूँ।”
यह पढ़कर मोहन की आँखें नम हो गईं। उन्हें एहसास हुआ कि गुस्से में उन्होंने अपनी मासूम बेटी का दिल दुखा दिया।
वे तुरंत राधा के पास गए। राधा स्कूल जाने के लिए तैयार बैठी थी, लेकिन उसकी आँखों में उदासी थी।
मोहन ने उसे गले लगाकर कहा,
“बेटी, मुझसे गलती हो गई। चीजें दोबारा मिल सकती हैं, लेकिन तुम्हारी मुस्कान नहीं।”
राधा हल्का सा मुस्कुराई और अपने पापा को कसकर पकड़ लिया।
उस दिन के बाद मोहन ने गुस्से से पहले प्यार को चुनना सीख लिया।