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राधा अपने पिता के बहुत करीब थी। हर शाम वह उनके आने का इंतज़ार करती, ताकि उनके साथ बैठकर बातें कर सके। लेकिन उसके पिता मो...
11/05/2026

राधा अपने पिता के बहुत करीब थी। हर शाम वह उनके आने का इंतज़ार करती, ताकि उनके साथ बैठकर बातें कर सके। लेकिन उसके पिता मोहन काम के तनाव में अक्सर चिड़चिड़े हो जाते थे।

एक दिन स्कूल में राधा की टीचर ने कहा कि अगले दिन सभी बच्चों को अपने माता-पिता की तस्वीर लानी है। राधा बहुत खुश थी। उसने घर आकर अपने पिता की पुरानी फोटो निकाल ली और उसे सजाने लगी।

गलती से फोटो पर चाय गिर गई। तस्वीर खराब हो गई।

शाम को जब मोहन ने वह फोटो देखी, तो गुस्से में अपना आपा खो बैठे। उन्होंने राधा को एक जोरदार थप्पड़ मार दिया और बोले,
“तुमसे एक चीज संभाली नहीं जाती!”

राधा सहम गई। उसने कुछ नहीं कहा और चुपचाप अपने कमरे में चली गई।

अगली सुबह मोहन की नज़र मेज़ पर रखे एक छोटे से कार्ड पर पड़ी। उस पर राधा ने लिखा था—

“मेरे पापा दुनिया के सबसे अच्छे पापा हैं। मैं बड़ी होकर बिल्कुल उनके जैसी बनना चाहती हूँ।”

यह पढ़कर मोहन की आँखें नम हो गईं। उन्हें एहसास हुआ कि गुस्से में उन्होंने अपनी मासूम बेटी का दिल दुखा दिया।

वे तुरंत राधा के पास गए। राधा स्कूल जाने के लिए तैयार बैठी थी, लेकिन उसकी आँखों में उदासी थी।

मोहन ने उसे गले लगाकर कहा,
“बेटी, मुझसे गलती हो गई। चीजें दोबारा मिल सकती हैं, लेकिन तुम्हारी मुस्कान नहीं।”

राधा हल्का सा मुस्कुराई और अपने पापा को कसकर पकड़ लिया।

उस दिन के बाद मोहन ने गुस्से से पहले प्यार को चुनना सीख लिया।

11/05/2026

Omg

बारिश की काली रात थी। हवेली के बाहर बिजली चमक रही थी। रीना खिड़की के पास खड़ी थी, जबकि उसका पति ठाकुर विक्रम सिंह कई दिन...
11/05/2026

बारिश की काली रात थी। हवेली के बाहर बिजली चमक रही थी। रीना खिड़की के पास खड़ी थी, जबकि उसका पति ठाकुर विक्रम सिंह कई दिनों से शहर से बाहर गया हुआ था।

हवेली में काम करता था एक नौकर — राजू। गरीब था, मगर दिल का साफ। रीना अक्सर उससे छोटी-छोटी बातें करने लगी। धीरे-धीरे दोनों की नजदीकियाँ बढ़ने लगीं। हवेली के लंबे सन्नाटे में दोनों एक-दूसरे का सहारा बन गए।

लेकिन हवेली की दीवारों के भी कान होते हैं।

एक बूढ़ी दासी ने ठाकुर विक्रम को सब बता दिया। यह सुनते ही उसका खून खौल उठा। वह बिना किसी को बताए आधी रात को हवेली लौट आया।

उस रात हवेली में अजीब सन्नाटा था।

विक्रम ने दोनों को आँगन में साथ देख लिया। उसकी आँखों में ऐसा गुस्सा था कि रीना काँप उठी। राजू हाथ जोड़कर माफी माँगने लगा, लेकिन विक्रम ने कुछ नहीं कहा।

अगले दिन पूरे गाँव को हवेली में बुलाया गया।

सबके सामने विक्रम ने राजू से कहा,
“जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया तूने।”

फिर उसने एक डरावना फैसला सुनाया —
राजू को गाँव से हमेशा के लिए निकाल दिया गया और किसी को भी उसे काम देने से मना कर दिया। देखते ही देखते राजू भिखारी बन गया।

लेकिन रीना के लिए विक्रम ने और भी बड़ी सजा रखी थी।

उसने हवेली के सारे आईने तुड़वा दिए और रीना से कहा,
“जिसे अपनी इज्जत की परवाह नहीं, उसे अपना चेहरा देखने का हक भी नहीं।”

रीना उस हवेली में रहते हुए भी कैदी बन गई। धीरे-धीरे उसका हँसना, बोलना सब खत्म हो गया।

कुछ साल बाद विक्रम बूढ़ा हो गया। एक दिन बीमारी में बिस्तर पर पड़ा था। हवेली में कोई नहीं बचा था उसकी देखभाल करने वाला।

तभी दरवाजा खुला।

सामने रीना खड़ी थी। वही रीना, जिसे उसने जिंदा लाश बना दिया था।

विक्रम की आँखों से आँसू बह निकले।
“मैंने बदला लिया… लेकिन अपना घर खुद उजाड़ दिया।”

रीना बिना कुछ बोले कमरे से बाहर चली गई।

उस रात हवेली में सिर्फ बारिश की आवाज गूँजती रही… और एक आदमी का पछतावा, जो बहुत देर से जागा था।

एक बार भगवान शिव और माता पार्वती पृथ्वी लोक का भ्रमण कर रहे थे। वे साधारण मनुष्यों का रूप लेकर लोगों के व्यवहार को देखना...
11/05/2026

एक बार भगवान शिव और माता पार्वती पृथ्वी लोक का भ्रमण कर रहे थे। वे साधारण मनुष्यों का रूप लेकर लोगों के व्यवहार को देखना चाहते थे।

एक गाँव में उन्होंने देखा कि लोग एक धनवान स्त्री “सुरेखा” से बहुत डरते थे। सुरेखा सुंदर थी, लेकिन उसे अपने धन और शक्ति का घमंड था। वह गाँव की महिलाओं को अपमानित करती और गरीबों को तुच्छ समझती।

माता पार्वती ने दुखी होकर कहा,
“नारी तो शक्ति और करुणा का रूप होती है, लेकिन यह अपने अभिमान में दूसरों को पीड़ा दे रही है।”

महादेव शांत रहे, पर उनकी आँखों में गंभीरता थी।

अगले दिन महादेव एक वृद्ध साधु का रूप धारण कर सुरेखा के द्वार पर पहुँचे। उन्होंने कहा,
“माँ, कई दिनों से भूखा हूँ। थोड़ा अन्न मिल जाए तो कृपा होगी।”

सुरेखा ने तिरस्कार से हँसते हुए कहा,
“काम क्यों नहीं करते? हर दिन भीख माँगने चले आते हो!”

इतना कहकर उसने नौकरों को आदेश दिया कि उस साधु को बाहर निकाल दो।

उसी क्षण तेज आँधी चलने लगी। आकाश काले बादलों से भर गया। साधु के रूप में खड़े महादेव अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए। उनके त्रिशूल से अग्नि की चमक निकल रही थी।

भगवान शिव ने क्रोधित स्वर में कहा,
“जिसे अपने सौंदर्य और धन पर अभिमान हो जाता है, वह मानवता भूल जाता है। नारी का वास्तविक आभूषण उसका दया भाव है, न कि उसका अहंकार।”

सुरेखा भय से काँपने लगी। उसका घमंड टूट चुका था। वह रोते हुए महादेव के चरणों में गिर गई और बोली,
“प्रभु, मुझे क्षमा कर दीजिए। मैंने लोगों को बहुत दुख दिया है।”

तभी माता पार्वती वहाँ प्रकट हुईं। उन्होंने कहा,
“सच्चा पश्चाताप सबसे बड़ा प्रायश्चित है।”

महादेव का क्रोध शांत हुआ। उन्होंने सुरेखा को क्षमा करते हुए कहा,
“आज से तुम अपने धन का उपयोग दूसरों की सहायता में करोगी।”

उस दिन के बाद सुरेखा ने अपना जीवन बदल दिया। उसने गरीबों के लिए भोजनालय बनवाया और गाँव की स्त्रियों की सहायता करने लगी। धीरे-धीरे लोग उससे डरना छोड़कर उसका सम्मान करने लगे।

**सीख:**
अभिमान चाहे किसी में भी हो, अंत में विनाश का कारण बनता है। दया और विनम्रता ही सच्ची शक्ति हैं।

बिहार के एक छोटे से गाँव में पूजा नाम की एक गर्भवती महिला रहती थी। उसका पति अर्जुन मजदूरी करता था। दोनों बहुत गरीब थे, ल...
11/05/2026

बिहार के एक छोटे से गाँव में पूजा नाम की एक गर्भवती महिला रहती थी। उसका पति अर्जुन मजदूरी करता था। दोनों बहुत गरीब थे, लेकिन अपने आने वाले बच्चे को लेकर बड़े सपने देखते थे।

एक दिन पूजा को खबर मिली कि उसकी माँ बहुत बीमार है। वह तुरंत उससे मिलने शहर जाने के लिए ट्रेन में बैठ गई। ट्रेन में इतनी भीड़ थी कि उसे बैठने की जगह तक नहीं मिली। वह दरवाज़े के पास खड़ी होकर सफर करने लगी।

रात गहरी हो चुकी थी। तेज हवा चल रही थी और ट्रेन पूरी रफ्तार में थी। तभी अचानक कुछ यात्रियों में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। एक जोरदार धक्का लगा और पूजा चलती ट्रेन से नीचे गिर गई।

अंधेरी रात में उसकी चीख सुनकर कुछ लोगों ने चेन खींची। ट्रेन रुक गई। सभी लोग डर गए कि शायद अब वह बच नहीं पाएगी।

पास के खेतों में काम कर रहे दो किसान दौड़ते हुए आए। उन्होंने देखा कि पूजा घायल हालत में पड़ी है, लेकिन वह अपने पेट पर हाथ रखकर बार-बार कह रही थी, “मेरे बच्चे को बचा लो…”

किसानों ने तुरंत एंबुलेंस बुलवाई और उसे अस्पताल पहुँचाया। डॉक्टरों ने कई घंटों तक ऑपरेशन किया। आखिरकार सुबह डॉक्टर बाहर आए और बोले, “भगवान की कृपा से माँ और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।”

यह सुनकर पूरे अस्पताल में खुशी की लहर दौड़ गई। अर्जुन अपनी पत्नी और बच्चे को देखकर रो पड़ा। उसने किसानों और डॉक्टरों का हाथ जोड़कर धन्यवाद किया।

कुछ दिनों बाद पूजा अपने नवजात बेटे को गोद में लेकर गाँव लौटी। गाँव वालों ने उसका स्वागत किया और उसकी बहादुरी की कहानी दूर-दूर तक फैल गई।

**सीख:** मुसीबत कितनी भी बड़ी हो, हिम्मत और दूसरों की मदद इंसान को नई जिंदगी दे सकती है।

“तरबूज वाली और भाभी”**शाम का समय था। आसमान में हल्के बादल छाए हुए थे और गर्म हवा पूरे मोहल्ले को बेचैन कर रही थी। पूजा भ...
11/05/2026

“तरबूज वाली और भाभी”**

शाम का समय था। आसमान में हल्के बादल छाए हुए थे और गर्म हवा पूरे मोहल्ले को बेचैन कर रही थी। पूजा भाभी छत पर खड़ी थीं। तभी नीचे गली से आवाज़ सुनाई दी—

“ठंडे मीठे तरबूज... लाल तरबूज ले लो...!”

पूजा ने नीचे देखा। एक युवा लड़की हाथगाड़ी पर तरबूज बेच रही थी। चेहरे पर पसीना था, मगर मुस्कान वैसी ही ताज़ा।

“ऊपर आ जाओ बहन,” पूजा ने आवाज़ लगाई।

लड़की गाड़ी रोककर ऊपर आई। उसका नाम काजल था। उसने बड़े ध्यान से एक तरबूज चुना और बोली—

“भाभी, ये वाला काटोगी तो दिल खुश हो जाएगा।”

पूजा हँस दीं—“इतना भरोसा है अपने तरबूज पर?”

“भरोसा मेहनत पर है,” काजल ने जवाब दिया।

तरबूज काटा गया। अंदर से गहरा लाल और रस से भरा हुआ। पूजा ने पहला टुकड़ा खाते ही आँखें बड़ी कर लीं—

“अरे वाह! सच में बहुत मीठा है।”

काजल मुस्कुराई। पूजा ने उसे भी खाने को कहा। दोनों छत पर बैठकर तरबूज खाने लगीं। धीरे-धीरे बातें शुरू हुईं।

काजल ने बताया कि वह पढ़ाई भी करती है और घर चलाने के लिए गर्मियों में तरबूज बेचती है। पूजा को उसकी मेहनत और आत्मसम्मान बहुत अच्छा लगा।

थोड़ी देर बाद ठंडी हवा चलने लगी। पूजा ने कहा—

“आज तो तुमने गर्मी ही भगा दी।”

काजल हँसते हुए बोली—

“भाभी, मीठे तरबूज और अच्छी बातों से हर प्यास मिट जाती है।”

उस दिन के बाद पूजा रोज़ शाम को काजल का इंतज़ार करने लगीं। कभी चाय, कभी ठंडा शरबत—दोनों की छोटी-सी दोस्ती पूरे मोहल्ले में मिसाल बन गई।

एक दिन की बात है, गाँव में बहुत गर्मी पड़ रही थी। दोपहर के समय सब लोग अपने-अपने घरों में आराम कर रहे थे। तभी भाभी के पति...
11/05/2026

एक दिन की बात है, गाँव में बहुत गर्मी पड़ रही थी। दोपहर के समय सब लोग अपने-अपने घरों में आराम कर रहे थे। तभी भाभी के पति बाजार से एक बड़ा और ताज़ा तरबूज लेकर आए।

भाभी ने तरबूज देखकर खुशी से कहा, “अरे, आज तो गर्मी दूर हो जाएगी!”

उन्होंने तरबूज को ठंडे पानी में डाल दिया। थोड़ी देर बाद रसोई से चाकू लाकर बड़े प्यार से तरबूज काटा। जैसे ही तरबूज खुला, उसका लाल रंग देखकर सब खुश हो गए।

भाभी ने एक टुकड़ा उठाया, ऊपर थोड़ा काला नमक छिड़का और आराम से खाने लगीं। रस इतना मीठा था कि उनके हाथ तक लाल हो गए। तभी देवर ने हँसते हुए कहा, “भाभी, लगता है तरबूज बहुत पसंद आ गया!”

भाभी मुस्कुराईं और बोलीं, “गर्मी में ठंडा तरबूज मिल जाए, तो दिन बन जाता है।”

फिर उन्होंने सबको बराबर-बराबर तरबूज बाँटा। बच्चे बीज दूर फेंककर खेल रहे थे और बड़े लोग ठंडी हवा में तरबूज का मज़ा ले रहे थे।

उस दिन पूरे परिवार ने साथ बैठकर तरबूज खाया और खूब बातें कीं। गर्मी की वह शाम सबको हमेशा याद रही।

 # # गर्भवती महिला और एक थप्पड़ — नई हिन्दी कहानीशहर की भीड़भाड़ से दूर एक कॉलोनी में अमित और पूजा रहते थे। शादी के पाँच...
10/05/2026

# # गर्भवती महिला और एक थप्पड़ — नई हिन्दी कहानी

शहर की भीड़भाड़ से दूर एक कॉलोनी में अमित और पूजा रहते थे। शादी के पाँच साल बाद उनके घर खुशखबरी आने वाली थी। पूजा सात महीने की गर्भवती थी। अमित बाहर नौकरी करता था और अक्सर काम के तनाव में रहता था।

एक शाम अमित ऑफिस से लौटा तो बहुत परेशान था। कंपनी में उसकी किसी बात पर बॉस से बहस हो गई थी। घर पहुँचते ही उसने देखा कि कमरा थोड़ा बिखरा हुआ है और खाना भी तैयार नहीं था।

अमित ने तेज आवाज में कहा,
“पूरा दिन घर में रहती हो, फिर भी कुछ संभलता नहीं!”

पूजा ने थकी हुई आवाज में कहा,
“आज डॉक्टर के पास गई थी… तबीयत ठीक नहीं लग रही थी।”

लेकिन गुस्से में अमित ने उसकी बात सुने बिना उसे थप्पड़ मार दिया।

थप्पड़ लगते ही पूजा की आँखों से आँसू बहने लगे। वह बिना कुछ बोले कमरे में चली गई। उसी रात उसे तेज दर्द शुरू हुआ। अमित घबरा गया और तुरंत उसे अस्पताल ले गया।

डॉक्टर ने कहा,
“गर्भवती महिला को तनाव और चोट दोनों खतरनाक हो सकते हैं। इन्हें आराम और प्यार की जरूरत होती है।”

डॉक्टर की बात सुनकर अमित अंदर से टूट गया। उसे अपनी गलती का एहसास होने लगा। अस्पताल की कुर्सी पर बैठा वह पूरी रात सोचता रहा कि गुस्से में उसने कितना बड़ा पाप कर दिया।

सुबह पूजा की हालत थोड़ी ठीक हुई। अमित उसकी तरफ देखकर बोला—

“मैं अच्छा पति नहीं बन पाया पूजा… लेकिन मैं बदलना चाहता हूँ। मुझे एक मौका दे दो।”

पूजा ने धीरे से कहा,
“गलती इंसान से होती है अमित, लेकिन रिश्ते वही बचते हैं जहाँ सम्मान जिंदा रहता है।”

उस दिन के बाद अमित ने अपना व्यवहार बदल दिया। वह पूजा का हर काम में साथ देने लगा। कुछ महीनों बाद उनके घर एक स्वस्थ बेटे का जन्म हुआ।

बच्चे को गोद में लेते हुए अमित ने मन ही मन वादा किया—

“मैं अपने बच्चे को कभी गुस्से और हिंसा की भाषा नहीं सिखाऊँगा।”

# # # सीख:

घर की असली ताकत प्यार और सम्मान है, डर और हिंसा नहीं। खासकर गर्भवती महिला को भावनात्मक सहारे और सुरक्षा की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

उत्तर प्रदेश के एक छोटे कस्बे में रवि अपनी बहन नेहा के साथ रहता था। पिता की मौत के बाद घर की सारी जिम्मेदारी रवि के कंधो...
10/05/2026

उत्तर प्रदेश के एक छोटे कस्बे में रवि अपनी बहन नेहा के साथ रहता था। पिता की मौत के बाद घर की सारी जिम्मेदारी रवि के कंधों पर आ गई। उसने अपनी पढ़ाई छोड़ दी ताकि बहन की पढ़ाई पूरी हो सके। दिन-रात मेहनत करके उसने नेहा को अच्छे कॉलेज में दाखिला दिलाया।

नेहा हमेशा कहती थी,
“भैया, एक दिन मैं आपका नाम रोशन करूँगी।”

रवि उसकी हर खुशी में अपनी खुशी ढूँढता था।

लेकिन कॉलेज में नेहा की मुलाकात आदित्य नाम के लड़के से हुई। धीरे-धीरे दोनों करीब आ गए। नेहा जानती थी कि रवि इस रिश्ते के खिलाफ होगा, इसलिए उसने सब छुपाकर रखा।

एक रात रवि काम से लौटा तो घर में अजीब सन्नाटा था। नेहा का कमरा खाली था। अलमारी खुली हुई थी और तकिए के नीचे एक चिट्ठी रखी थी—

> “भैया, मैं आदित्य के साथ जा रही हूँ। मुझे ढूँढने की कोशिश मत करना।”

रवि के हाथ काँपने लगे। जिस बहन के लिए उसने अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी, वही उसे अकेला छोड़ गई थी।

अगले दिन पूरे मोहल्ले में बातें फैल गईं। लोग ताने मारने लगे—

“बहन भाग गई… अब किस मुँह से बाहर निकलेगा?”

रवि ने घर से निकलना बंद कर दिया। उसकी आँखों के नीचे काले घेरे पड़ गए। वह हर रात नेहा की पुरानी तस्वीरें देखकर रोता।

उधर आदित्य वैसा इंसान नहीं निकला जैसा नेहा समझती थी। कुछ महीनों बाद उसने नेहा को छोड़ दिया और उसके पैसे लेकर गायब हो गया। नेहा पूरी तरह टूट चुकी थी।

एक दिन बारिश में भीगी हुई नेहा घर के दरवाज़े पर पहुँची। रवि दरवाज़ा खोलकर उसे देखकर कुछ पल चुप रहा।

नेहा फूट-फूटकर रो पड़ी—

“भैया… मुझे माफ कर दो। मैंने आपका दिल तोड़ दिया।”

रवि की आँखों से आँसू बह निकले। उसने बहन के सिर पर हाथ रखा और बोला—

“तू गलत थी… लेकिन आज भी मेरी बहन है।”

उस रात दोनों बहुत रोए। दर्द अभी भी था, लेकिन रिश्ते की डोर पूरी तरह टूटी नहीं थी।

 # **“थप्पड़ के बाद खुला तहखाने का राज”**गांव के बाहर बने पुराने हवेलीनुमा घर में उस रात बहुत तेज चीख सुनाई दी।“तुम झूठ ...
08/05/2026

# **“थप्पड़ के बाद खुला तहखाने का राज”**

गांव के बाहर बने पुराने हवेलीनुमा घर में उस रात बहुत तेज चीख सुनाई दी।

“तुम झूठ बोल रहे हो, विकास!”

और फिर…
**चटाक!**

गर्भवती नंदिनी ने अपने पति विकास को जोरदार थप्पड़ मार दिया।

घर के नौकर और पड़ोसी दौड़कर बाहर आ गए। लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था।

कुछ देर बाद विकास गुस्से में घर से निकल गया।

उस रात के बाद…
वो कभी वापस नहीं आया।

---

तीन दिन तक विकास का कोई पता नहीं चला।

पुलिस आई। पूरे घर की तलाशी हुई।

नंदिनी आठ महीने की गर्भवती थी। डरी हुई लग रही थी, लेकिन बार-बार एक ही बात कह रही थी—

“मुझे नहीं पता वो कहाँ गया।”

इंस्पेक्टर कबीर को बात हजम नहीं हुई।

क्योंकि पूरे गांव में चर्चा थी कि थप्पड़ के बाद दोनों के बीच जोरदार झगड़ा हुआ था।

---

तलाशी के दौरान इंस्पेक्टर की नजर हवेली के पीछे बने पुराने तहखाने पर पड़ी।

ताला जंग लगा था… लेकिन उस पर मिट्टी नई लगी हुई थी।

“इसे खोलो।”

ताला तोड़ा गया।

जैसे ही दरवाजा खुला, अंदर से बदबू का तेज झोंका आया।

सभी के होश उड़ गए।

तहखाने में एक पुरानी कुर्सी, खून के धब्बे… और दीवार पर नाखूनों से लिखा एक शब्द था—

**“बचाओ”**

लेकिन सबसे डरावनी चीज अभी बाकी थी।

कोने में एक मोबाइल पड़ा था।

वो विकास का था।

---

फोन चालू किया गया। उसमें एक वीडियो रिकॉर्डिंग थी।

वीडियो देखकर इंस्पेक्टर कबीर के चेहरे का रंग उड़ गया।

वीडियो में विकास किसी आदमी को तहखाने में बांधकर पीट रहा था।

और वो आदमी बार-बार कह रहा था—

“मैंने कुछ नहीं किया…”

अचानक वीडियो में नंदिनी की आवाज आई—

“विकास, बस करो!”

वीडियो वहीं खत्म हो गया।

---

अब शक सीधे नंदिनी पर गया।

इंस्पेक्टर ने सख्ती से पूछा—

“सच क्या है?”

नंदिनी रोने लगी।

“मैंने विकास को नहीं मारा… लेकिन वो इंसान नहीं था।”

फिर उसने जो बताया, उसे सुनकर सब सन्न रह गए।

---

नंदिनी की शादी के बाद उसे पता चला कि हवेली का तहखाना सिर्फ पुराना स्टोर रूम नहीं था।

विकास वहां लोगों को बंद करता था।

वो गांव के गरीब मजदूरों को पैसे का लालच देकर लाता… फिर उनसे गैरकानूनी काम करवाता।

जो मना करता… वो गायब हो जाता।

नंदिनी डर के कारण चुप थी।

लेकिन उस रात उसने विकास को एक युवक को मारते देखा।

जब उसने रोकने की कोशिश की, विकास ने कहा—

“तुम चुप रहो, वरना तुम्हारा बच्चा भी सुरक्षित नहीं रहेगा।”

यही सुनकर नंदिनी ने उसे थप्पड़ मारा।

दोनों में झगड़ा हुआ।

फिर विकास तहखाने की तरफ भागा… लेकिन शराब के नशे में सीढ़ियों से फिसल गया।

उसका सिर लोहे की रेलिंग से टकराया।

और वहीं उसकी मौत हो गई।

डर के मारे नंदिनी ने लाश को पीछे वाले सूखे कुएं में फेंक दिया।

---

पुलिस ने कुएं की तलाशी ली।

विकास की लाश वहीं मिली।

लेकिन कहानी का सबसे बड़ा रहस्य तब खुला…

जब तहखाने की दीवार तोड़ी गई।

दीवार के पीछे एक छोटा कमरा था।

उस कमरे में कई लोगों के सामान, फोटो और पहचान पत्र मिले।

विकास वर्षों से लोगों को गायब कर रहा था।

---

कुछ महीनों बाद नंदिनी ने एक बेटी को जन्म दिया।

लोग आज भी उस हवेली के पास जाने से डरते हैं।

कहते हैं, बारिश की रातों में तहखाने से आज भी एक आवाज आती है—

**“बचाओ…”**

 # # भाभी की कहानी — “राखी का वादा”अमन शहर में नौकरी करता था और कई महीनों बाद अपने गाँव लौट रहा था। घर पहुँचते ही उसकी भ...
07/05/2026

# # भाभी की कहानी — “राखी का वादा”

अमन शहर में नौकरी करता था और कई महीनों बाद अपने गाँव लौट रहा था। घर पहुँचते ही उसकी भाभी, पूजा, ने मुस्कुराते हुए दरवाज़ा खोला।
“आ गए साहब! अब तो घर याद आ ही गया?” भाभी ने मज़ाक करते हुए कहा।

अमन हँस पड़ा। उसे हमेशा लगता था कि भाभी सिर्फ घर संभालती हैं, लेकिन धीरे-धीरे उसे एहसास हुआ कि वे पूरे परिवार की ताकत हैं।

कुछ दिनों बाद अमन को पता चला कि उसके बड़े भाई की दुकान घाटे में चल रही है। घर की हालत फिर खराब होने लगी थी। अमन परेशान हो गया। उसी रात उसने देखा कि भाभी देर तक सिलाई कर रही थीं।

अमन ने पूछा,
“भाभी, आप इतनी रात तक काम क्यों कर रही हैं?”

पूजा ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
“घर को संभालने के लिए कभी-कभी नींद से समझौता करना पड़ता है।”

अमन चुप हो गया। अगले दिन राखी थी। उसकी छोटी बहन शहर से नहीं आ पाई थी, इसलिए घर थोड़ा सूना लग रहा था। तभी पूजा भाभी एक राखी लेकर आईं।

“आज से मैं सिर्फ तुम्हारी भाभी नहीं, बहन भी हूँ,” उन्होंने कहा।

अमन की आँखें नम हो गईं। उसने राखी बंधवाई और मन ही मन फैसला किया कि अब वह अपने परिवार की हर जिम्मेदारी में साथ देगा।

कुछ महीनों बाद अमन ने अपने भाई के साथ मिलकर दुकान फिर से खड़ी कर दी। घर में खुशियाँ लौट आईं।

उस दिन पूजा भाभी मुस्कुराकर बोलीं,
“रिश्ते खून से नहीं, साथ निभाने से बनते हैं।”

और अमन को समझ आ गया कि भाभी सिर्फ रिश्ते का नाम नहीं, बल्कि परिवार को जोड़कर रखने वाली डोर होती हैं।

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