बाल सजग एक हकीकत भरा प्रयास... जिसके लिए हम सभी बच्चें कोशिश में लगे है...हमारे सपने... हमारी उमंगे हमको भी चाहिए एक जमीन जो हमारी हो...जिसके लिए किसी का मुहँ न देखना पड़े...हम भी लिखना चाहते है...सोचना चाहते है और घिसी-पिटी पढाई को छोड़ नया कुछ पढ़ना चाहते है...जो हमारे दोस्तों ने लिखा हो...जो हमने लिखा हो... बाल सजग एक ऐसा ही प्रयास है... हम सभी ईट-भाठ्ठों पर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्च
ें है... हमारे बचपन का अधिकतर समय ईट की पथाई में गुजरा है...दहकतियों भठियों में झुलसा है...भाठ्ठों की तपिश में न मालूम मासूम बचपना कंहा खो गया...हमको नहीं मालूम की जांत- पात, उंच - नीच क्या होती ...हम जानना भी नहीं चाहते है ... हम जानना चाहते है की शेर खीरा ककड़ी क्यों नहीं खाता... आसमान के तारों पर कौन रहता है...हम सब कुछ जानना चाहते है जो हमारे मन में आते है...तमाम ख्वाब आपके है... पर कुछ हमारे भी है...हम अपने खवाबों को आपके साथ जीना चाहते है.....
बाल सजग टीम