28/03/2026
श्री हनुमान जन्मोत्सव दो अप्रेल को
प्राचीन शिव मंदिर बिश्नाह से महामण्डलेश्वर स्वामी अनूप गिरी महाराज ने बताया कि इस वर्ष श्री हनुमान जन्मोत्सव दो अप्रेल गुरुवार को मनाया जाएगा। चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को श्री हनुमान जी का जन्म हुआ था। हनुमान जी अमर हैं। कलयुग के देवता होने का वरदान हनुमान जी को मिला है। हनुमान जी के अन्य कई नाम हैं जिनमें प्रमुख नाम पवनपुत्र, केसरीनन्दन, महावीर, बजरंगबली आदि हैं। रुद्रावतार होने से इनका एक नाम शंकर सुवन भी है। बाल्यकाल में हनुमान जी ने सूर्य को अपने मुंह में रख लिया था जिससे चारों तरफ अँधेरा छा गया था। तब देवराज इंद्र ने इनकी ठोड़ी (हनु) पर अपने बज्र से प्रहार किया जिससे इनकी हनु टेढ़ी हो गई थी तभी से इन्हें हनुमान कहा जाने लगा।
जन्मोत्सव मनाने की विधि:- प्रातः स्नान करके लाल वस्त्र धारण कर हनुमान जी के मंदिर जाएं। चमेली के तेल में सिन्दूर मिलाकर हनुमान जी के पूरे शरीर पर लेप करें। हनुमान जी को लाल वस्त्र पहनायें। लाल फूलों की माला पहनायें। पंचमुखी दीपक जलायें। हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टक, बजरंग बाण का पाठ करें। हनुमान जी की आरती करें। प्रसाद में आप हनुमान जी को जलेबी, इमरती, लड्डू, गुड़ चना, लाल मीठा बदाना, नारियल, लाल फल आदि चढ़ा सकते हैं। हनुमान जी के प्रसाद में तुलसी के पत्ते अवश्य शामिल करें। गरीब लोगों को भोजन करायें उन्हें उनकी जरूरत की वस्तुएं दें।
हनुमान जी के स्वरूपों का महत्व:- प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए उड़ते हुए हनुमान जी का फोटो लगाएं। बीमार व्यक्ति के कमरे में संजीवनी लाते हुए हनुमान जी का फोटो लगाएं। शक्ति साहस प्राप्त करने के लिए सीना चीरते हुए हनुमान जी का फ़ोटो लगाएं। अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा तथा शत्रु शांति के लिए पंचमुखी हनुमान जी का फोटो लगाएं। घर में सुख शांति के लिए समाधि में लीन हनुमान जी का फोटो लगाएं।
परम बलशाली, पराक्रमी:- अत्यंत बलशाली, परम पराक्रमी, जितेन्द्रिय, ज्ञानियों में अग्रगण्य श्री हनुमान जी का जीवन सदा से प्रेरणा दायक रहा है। पहलवान अपने अखाड़ों में हनुमान जी की फोटो या मूर्ति रखते हैं। कुछ अखाड़ों में तो हनुमान जी के मंदिर भी होते हैं। हनुमान जी के चरण स्पर्श करके ही पहलवान अपनी कसरत, कुश्ती आदि कार्य प्रारम्भ करते हैं। वीरता में हनुमान जी का कोई सानी नहीं है। हनुमान जी प्रत्येक कार्य में सफल हुए हैं और अपने भक्तों को भी प्रत्येक कार्य में सफलता प्रदान करते हैं। हनुमान जी बंधन मुक्त कराते हैं। मुकदमे, चुनाव में विजय दिलाते हैं। आपकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण कराते हैं। पूरे ब्रह्मांड की समस्त शक्तियां हनुमान जी के पास हैं।
हनुमान चालीसा की व्याख्या:- हनुमान चालीसा की व्याख्या करने से इसकी महिमा का पता चलता है। और देवता चित्त न धरई हनुमत सेई सर्व सुख करई इसका अर्थ है कि जो भक्त हनुमान जी की शरण में जाता है उसके सभी कष्ट समाप्त होते हैं और उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। भूत पिशाच निकट नहीं आवें महावीर जब नाम सुनावे इसका अर्थ है कि जो भी भक्त हनुमान जी की शरण मे आता है उस पर बुरी शक्तियां असर नहीं करतीं हैं। दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते इसका अर्थ है कि जो भक्त हनुमान जी की शरण में आता है उसके कठिन से कठिन काम हनुमान जी की कृपा से सहज सुलभ हो जाते हैं। इसी तरह अन्य सभी चौपाइयों का भी अर्थ बहुत महत्वपूर्ण है।
सिन्दूर चढ़ाने की परम्परा:- एक बार सीता माता अपनी माँग में सिन्दूर लगा रहीं थीं उसी समय हनुमान जी वहाँ आ गए और माता से सिन्दूर लगाने का कारण पूछने लगे। माता सीता ने कहा कि इससे राम जी दीर्घायु होते हैं और मुझसे प्रसन्न रहते हैं। तब हनुमान जी ने विचार किया कि जब एक चुटकी सिन्दूर से प्रभु श्रीराम जी को लम्बी आयु प्राप्त होती है तो क्यो न मैं अपने पूरे शरीर पर सिन्दूर लगाकर प्रभु को अजर-अमर कर दूँ। अगले दिन हनुमान जी अपने पूरे शरीर पर सिन्दूर पोतकर राम दरबार में पहुँचे। सभी दरबारी हनुमान जी को देखकर हँसने लगे तब श्री रामजी ने हनुमान जी से इसका कारण पूछा तो हनुमान जी ने सारा वृतांत कह सुनाया। राम जी अत्यंत प्रसन्न हुए और हनुमान जी को गले लगाकर बोले तुम जैसा मेरा कोई अन्य भक्त नहीं है। श्री राम जी ने हनुमान जी को अमरत्व का वरदान दिया और कलयुग के देवता होने का आशीर्वाद दिया। और कहा कि कलयुग में जो भी आपकी मूर्ति पर सिन्दूर चढ़ायेगा उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होंगी। तभी से हनुमान जी की मूर्ति पर सिन्दूर चढ़ाने की परम्परा शुरू हुई।