14/06/2026
चापेकर बंधु (दामोदर हरि चापेकर, बाल कृष्ण हरि चापेकर, वासुदेव हरि चापेकर) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान और
पहले उग्र क्रांतिकारी थे ,
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1896 -- 97 में पुणे में ब्यूबोनिक प्लेग फैला था , जिससे हज़ारों लोगों की मौत हो रही थी।
अंग्रेजी शासन ने इस बीमारी को रोकने के बहाने भारतीय लोगो को लूटना शुरू कर दिया।
भारतीय लोगों को लूटने और उनके घरों में घुसकर घर की महिलाओं का शोषण करने लगे।
अंग्रेज अधिकारी W C Rand ने इस सब का खुल कर समर्थन किया।
सारे भारतीय खौफ में जीने लग गए थे किसी को कोई पता नहीं था कि कब किस के घर पर ये अंग्रेज अधिकारी आ धमके
और उनकी बहु बेटियों का शोषण कर दे।
लेकिन तीन भारतीय बेटों से ये सब नहीं देखा गया और उन्होंने
ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया के राज्याभिषेक की डायमंड जुबली (diamond jubilee) के दिन चापेकर बंधुओं (दामोदर चापेकर , बालकृष्ण चापेकर, महादेव चापेकर )ने पुणे के गणेश खेड़ा में रेंड और उसके बॉडी गार्ड्स को वहीं पर
गोली मारकर ढेर कर दिया।
इस खबर को सुनकर ब्रिटिश शासन में हड़कंप मच गया और इस घटना के मुख्य आरोपी दामोदर चापेकर को पकड़ कर 18
अप्रैल 1898 को उन्हें यरवड़ा जेल में फांसी दे दी गई।
लाभग एक माह तक छिपकर रहने वाले बालकृष्ण चापेकर को रामकृष्ण द्रविड़ और गणेश द्रविड़ की मुखबिरी से पकड़े गए , 12 मई 1899 को फांसी दे दी गई।
वासुदेव चापेकर ने उन दोनों गद्दारों को मौत के घाट उतार दिया जल्द ही वासुदेव को गिरफ्तार कर के फांसी दे दी गई।
भारतीय क्रांति की इस पहली गोली की कौन कौन जनता था
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