01/03/2026
हनुमान जी की अपार शक्ति और भक्ति की यह कथा उनके निस्वार्थ प्रेम को दर्शाती है।
जब भगवान श्री राम का राज्याभिषेक हुआ, तो माता सीता ने हनुमान जी को प्रेम स्वरूप एक बहुमूल्य मोतियों की माला भेंट की। हनुमान जी ने माला ली और एक-एक मोती को अपने दांतों से तोड़कर बड़े ध्यान से देखने लगे। यह देखकर दरबार में उपस्थित सभी लोग चकित रह गए। लक्ष्मण जी ने उत्सुकतावश पूछा, "हे पवनपुत्र, आप इस बहुमूल्य माला को क्यों नष्ट कर रहे हैं?"
हनुमान जी ने सरलता से उत्तर दिया, "प्रभु, मैं इन मोतियों में अपने आराध्य श्री राम और माता सीता को खोज रहा हूँ। जिस वस्तु में मेरे प्रभु का वास न हो, वह मेरे लिए व्यर्थ है।" दरबारियों को उनकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने उपहास करते हुए कहा कि क्या उनके शरीर में भी राम बसते हैं?
यह सुनकर हनुमान जी ने बिना किसी संकोच के अपनी छाती चीर दी। वहां उपस्थित सभी लोग दंग रह गए क्योंकि उनके हृदय के भीतर साक्षात श्री राम और माता सीता की छवि विराजमान थी। उनकी इस अनन्य भक्ति को देख प्रभु राम ने उन्हें गले से लगा लिया। यह प्रसंग सिखाता है कि सच्ची भक्ति बाहरी आडंबरों में नहीं, बल्कि शुद्ध हृदय में बसती है।
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