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https://youtu.be/y9Js1-isMP8?si=oQwui3KEMTpZR5jz
10/02/2026

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“भोलेनाथ भजन | शिव शंकर महादेव | 5 मिनट का प्यारा हिंदी भजन | Har Har Mahadev | पारंपरिक लोक शैली”ओम नमः शिवाय! 🙏इस वीडियो में सु.....

“Unsaid. Unfelt. Unforgettable.”
05/02/2026

“Unsaid. Unfelt. Unforgettable.”

गोगाजी महाराज की कथा गोगाजी महाराज को गोगा जी, जाहर पीर और सांपों के देवता के रूप में जाना जाता है। वे राजस्थान, हरियाणा...
29/01/2026

गोगाजी महाराज की कथा गोगाजी महाराज को गोगा जी, जाहर पीर और सांपों के देवता के रूप में जाना जाता है। वे राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत में लोकदेवता के रूप में पूजे जाते हैं। उनकी भक्ति में हिंदू-मुस्लिम एकता की अनोखी मिसाल देखने को मिलती है।

जन्म और परिचय
कहा जाता है कि गोगाजी महाराज का जन्म राजस्थान के चूरू ज़िले के ददरेवा गांव में चौहान वंश में हुआ। उनके पिता राजा जैवर सिंह और माता बाछल देवी थीं। गोगाजी बचपन से ही तेजस्वी, वीर और न्यायप्रिय थे।

वीरता और बलिदान की कथा
गोगाजी महाराज ने अन्याय के खिलाफ हमेशा आवाज़ उठाई। एक लोककथा के अनुसार, उनका युद्ध अरब आक्रांता मसूद से हुआ। इस युद्ध में गोगाजी वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन कहा जाता है कि उनका शीश कटने के बाद भी घोड़े पर सवार होकर लड़ता रहा। इसी कारण उन्हें “शीश के दानी” भी कहा जाता है।

सांपों के देवता क्यों?
लोकमान्यता है कि गोगाजी महाराज सांप के विष से रक्षा करते हैं। आज भी जिन लोगों को सांप काट लेता है, वे गोगाजी महाराज की धोक (मन्नत) लेते हैं। कई जगहों पर गुग्गल/गोगामेड़ी में उनकी पूजा विशेष रूप से की जाती है।

गोगामेड़ी और मेला
राजस्थान के हनुमानगढ़ ज़िले में स्थित गोगामेड़ी उनका प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहाँ हर साल भाद्रपद माह में विशाल मेला लगता है, जहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।

आस्था और संदेश
गोगाजी महाराज की कथा हमें यह सिखाती है कि धर्म से बड़ा मानवता है, अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना ही सच्चा धर्म है और लोकआस्था में एकता और विश्वास सबसे बड़ी शक्ति है।



👉 आज बहुत से लोग अर्टिकेरिया (Urticaria) नाम की बीमारी से परेशान हैं, लेकिन सही जानकारी न होने के कारण डर जाते हैं। यह प...
23/01/2026

👉 आज बहुत से लोग अर्टिकेरिया (Urticaria) नाम की बीमारी से परेशान हैं, लेकिन सही जानकारी न होने के कारण डर जाते हैं। यह पोस्ट खास तौर पर मरीजों और उनके परिवार के लिए है, ताकि पढ़कर उन्हें सही समझ, राहत और दिशा मिल सके। 🙏



🔴 अर्टिकेरिया क्या है?

अर्टिकेरिया को आम भाषा में एलर्जी के दाने / हाइव्स कहा जाता है। इसमें शरीर पर अचानक
✔ लाल या सफ़ेद उभरे हुए चकत्ते
✔ तेज़ खुजली
✔ जलन
होने लगती है।
अक्सर ये दाने कुछ घंटों में गायब हो जाते हैं और फिर दूसरी जगह आ सकते हैं।

⚠️ यह छूने से फैलने वाली बीमारी नहीं है और ज़्यादातर मामलों में जानलेवा भी नहीं होती।



🧾 अर्टिकेरिया के प्रकार

1️⃣ Acute Urticaria – 6 हफ्तों से कम समय तक
2️⃣ Chronic Urticaria – 6 हफ्तों से ज़्यादा, बार-बार होना
3️⃣ Physical Urticaria – ठंड, गर्मी, पसीना, धूप, दबाव से
4️⃣ Angioedema – होंठ, आंख, गले या चेहरे पर सूजन (थोड़ा गंभीर)



😖 इसके मुख्य लक्षण

✔ बहुत तेज़ खुजली
✔ शरीर पर उभरे हुए दाने
✔ दाने का बार-बार जगह बदलना
✔ होंठ, आंख या हाथ-पैर में सूजन
✔ कभी-कभी जलन या दर्द

🚨 अगर सांस लेने में दिक्कत हो या गला सूज जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।



❓ अर्टिकेरिया क्यों होता है? (कारण)

🔹 कुछ खाने से – अंडा, मूंगफली, मछली, दूध
🔹 दवाइयों से – दर्द की दवा, एंटीबायोटिक
🔹 धूल, मिट्टी, पराग कण
🔹 ठंड या ज्यादा गर्मी
🔹 पसीना, टाइट कपड़े
🔹 कीड़े का काटना
🔹 ज्यादा तनाव (Stress)
🔹 कई बार कारण पता ही नहीं चलता



🧪 जाँच कैसे होती है?

✔ ज़्यादातर मामलों में डॉक्टर लक्षण देखकर पहचान लेते हैं
✔ लंबे समय से हो तो –
▪ ब्लड टेस्ट
▪ थायरॉइड टेस्ट
▪ एलर्जी टेस्ट (ज़रूरत पड़ने पर)



💊 इलाज (डॉक्टर की सलाह ज़रूरी)

✔ Anti-Histamine दवाइयाँ – खुजली व दाने कम करने के लिए
✔ ज़्यादा होने पर कुछ दिनों की दवा
✔ Chronic केस में स्पेशल ट्रीटमेंट

❌ बिना डॉक्टर पूछे स्टेरॉयड या दर्द की दवा न लें



🏡 घरेलू देखभाल

✅ ठंडी पट्टी लगाएं
✅ ढीले सूती कपड़े पहनें
✅ हल्का खाना खाएं
✅ ज्यादा खुजलाएं नहीं
✅ तनाव कम रखें (योग/प्राणायाम)



🚫 क्या न करें

❌ बहुत गर्म पानी से न नहाएं
❌ खुद से दवा न लें
❌ एलर्जी वाला खाना न खाएं
❌ धूम्रपान और शराब से बचें



🛡️ बचाव के उपाय

✔ अपनी एलर्जी का कारण पहचानें
✔ खाना-पीना नोट करें
✔ समय पर दवा लें
✔ डॉक्टर की सलाह मानें



❤️ खास संदेश

👉 अगर आप या आपके परिवार में कोई अर्टिकेरिया से पीड़ित है, तो घबराएं नहीं।
👉 सही जानकारी, सही इलाज और धैर्य से यह बीमारी काबू में लाई जा सकती है।

📢 इस पोस्ट को शेयर करें, ताकि जो लोग चुपचाप इस परेशानी से जूझ रहे हैं, उन्हें भी सही जानकारी और हिम्मत मिल सके। 🙏

#एलर्जी #अर्टिकेरिया

🔥 झाँसी नहीं, बिहार से गूँजी थी बग़ावत – कुंवर सिंह की कहानी 🔥जब 1857 का स्वतंत्रता संग्राम पूरे भारत में फैल रहा था, तब...
23/01/2026

🔥 झाँसी नहीं, बिहार से गूँजी थी बग़ावत – कुंवर सिंह की कहानी 🔥

जब 1857 का स्वतंत्रता संग्राम पूरे भारत में फैल रहा था, तब बिहार की धरती से एक ऐसे योद्धा ने अंग्रेज़ों को चुनौती दी,
जिसकी उम्र थी 80 साल — नाम था कुंवर सिंह।

अंग्रेज़ों को लगा था कि यह बूढ़ा ज़मींदार अब कुछ नहीं कर पाएगा।
लेकिन उन्होंने ये नहीं समझा कि
🔥 हौसले की कोई उम्र नहीं होती।

⚔️ आरा (बिहार) से कुंवर सिंह ने अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ विद्रोह छेड़ा।
उन्होंने सैकड़ों सैनिकों को संगठित किया और अंग्रेज़ी छावनियों पर हमले किए।
कई बार घायल हुए, लेकिन कभी पीछे नहीं हटे।

एक युद्ध में जब गोली लगने से उनका हाथ बुरी तरह ज़ख़्मी हो गया,
तो उन्होंने वही हाथ खुद काटकर गंगा नदी में अर्पित कर दिया —
ताकि कमज़ोरी उनके साहस को छू भी न सके।

😮‍🔥 80 वर्ष की उम्र में भी
वे घोड़े पर सवार होकर
अंग्रेज़ों को धूल चटाते रहे।

💥 26 अप्रैल 1858
कुंवर सिंह वीरगति को प्राप्त हुए,
लेकिन जाते-जाते इतिहास में लिख गए:

“आजादी के लिए लड़ने को जवान शरीर नहीं,
जवान दिल चाहिए।”



🇮🇳 कुंवर सिंह हमें सिखाते हैं कि
🔥 देशभक्ति उम्र, जाति या ताक़त की मोहताज नहीं होती।

नमन है इस अमर योद्धा को!
जय हिंद 🙏




जय जय रघुवर श्रीराम | शास्त्रीय राम भजन | Traditional Ram Bhajan | Mandir Satsang Bhajan
20/01/2026

जय जय रघुवर श्रीराम | शास्त्रीय राम भजन | Traditional Ram Bhajan | Mandir Satsang Bhajan

जय जय रघुवर श्रीराम | शास्त्रीय राम भजन | Traditional Ram Bhajan | Mandir Satsang Bhajan🙏 जय श्रीराम 🙏यह शुद्ध हिंदी में रचित शास्त्रीय एवं पारं...

🔥 1858 की शेरनी – मंडला की रानी अवंतीबाई 🔥जब पूरा भारत अंग्रेज़ी हुकूमत की ज़ंजीरों में जकड़ा हुआ था, तब मध्यप्रदेश के म...
18/01/2026

🔥 1858 की शेरनी – मंडला की रानी अवंतीबाई 🔥

जब पूरा भारत अंग्रेज़ी हुकूमत की ज़ंजीरों में जकड़ा हुआ था, तब मध्यप्रदेश के मंडला की धरती से एक ऐसी नारी उठी जिसने इतिहास की दिशा बदल दी — रानी अवंतीबाई लोधी।

रानी अवंतीबाई, राजा विक्रमादित्य सिंह की पत्नी थीं। जब राजा अस्वस्थ हो गए, तब अंग्रेज़ों ने इसे अवसर समझकर मंडला रियासत को हड़पने की साज़िश रची।
लेकिन वे भूल गए थे कि सिंहासन पर बैठी यह स्त्री कमज़ोर नहीं, रणचंडी है।

⚔️ 1857–58 के स्वतंत्रता संग्राम में रानी अवंतीबाई ने अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया।
उन्होंने किसानों, आदिवासियों और सैनिकों को संगठित किया और अंग्रेज़ी सेना पर कई हमले किए।
मंडला, रामगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में अंग्रेज़ों की नींद उड़ गई।

जब अंग्रेज़ों की विशाल सेना ने चारों ओर से घेर लिया और बंदी बनाए जाने का ख़तरा पैदा हुआ, तब रानी ने गुलामी स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

💥 20 मार्च 1858
रानी अवंतीबाई ने तलवार हाथ में ली…
और अंतिम सांस से पहले अपने बलिदान से इतिहास रच दिया।

👑 उन्होंने दिखा दिया कि

“स्वाभिमान के साथ मरना, गुलामी में जीने से बड़ा होता है।”

आज भी रानी अवंतीबाई भारत की उन वीरांगनाओं में गिनी जाती हैं, जिन्होंने यह साबित किया कि
🔥 आजादी की लड़ाई सिर्फ पुरुषों की नहीं थी।



📌 नमन है मंडला की इस शेरनी को!
जय हिंद 🇮🇳
जय वीरांगना अवंतीबाई 🙏

📜 जब एक मंदिर की घंटी ने अंग्रेज़ी राज को चुनौती दीये कहानी है 1830 के आसपास, दक्षिण भारत के एक छोटे से गाँव की।🔔 घंटी ज...
17/01/2026

📜 जब एक मंदिर की घंटी ने अंग्रेज़ी राज को चुनौती दी

ये कहानी है 1830 के आसपास, दक्षिण भारत के एक छोटे से गाँव की।

🔔 घंटी जो विद्रोह बन गई

उस गाँव के शिव मंदिर की घंटी हर दिन सुबह–शाम बजती थी।
लेकिन एक दिन अंग्रेज़ अफसर ने आदेश दिया:

“अब ये घंटी नहीं बजेगी।
लोगों को इकट्ठा होने से रोका जाए।”

क्योंकि अंग्रेज़ जानते थे—
जहाँ लोग इकट्ठा होते हैं, वहाँ आज़ादी की बात होती है।

🧓 पुजारी का साहस

मंदिर के बूढ़े पुजारी ने सिर झुकाया नहीं।
अगले ही दिन
⏰ सूरज उगते ही
घंटी फिर बजी।

पूरा गाँव जमा हो गया।
कोई भाषण नहीं,
कोई नारा नहीं—
सिर्फ़ घंटी की आवाज़।

⚔️ अंग्रेज़ी गुस्सा

अफसर ने पुजारी को बुलाया और कहा:
“ये घंटी दोबारा बजी तो अंजाम बुरा होगा।”

पुजारी ने शांत स्वर में जवाब दिया:
“ये घंटी भगवान के लिए है,
राज के डर के लिए नहीं।”

🩸 बलिदान

अगली सुबह
घंटी फिर बजी।

उस दिन
पुजारी को गिरफ़्तार कर लिया गया।
कहा जाता है—
उसी मंदिर के आँगन में
उन्हें मार दिया गया।

🔥 लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी

पुजारी के बाद
गाँव के हर घर से
एक–एक आदमी आया।

और घंटी…
हर दिन पहले से ज़्यादा ज़ोर से बजने लगी।



🇮🇳 इतिहास की सच्चाई

आजादी की लड़ाई
सिर्फ़ तलवारों से नहीं लड़ी गई,
कभी–कभी
एक घंटी भी क्रांति बन जाती है।





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15/01/2026

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जब एक साधारण डाकिए ने अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला दियाबहुत कम लोग जानते हैं कि 1857 की क्रांति से पहले भी भारत में चुपचाप आ...
14/01/2026

जब एक साधारण डाकिए ने अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला दिया

बहुत कम लोग जानते हैं कि 1857 की क्रांति से पहले भी भारत में चुपचाप आज़ादी की आग जल रही थी।

🚲 कहानी एक डाकिए की

ब्रिटिश भारत में एक साधारण सा डाकिया (Postman) था — नाम इतिहास ने नहीं लिखा।
उसका काम था अंग्रेज़ अफसरों के पत्र पहुँचाना।

लेकिन वही पत्र…
क्रांति का हथियार बन गए।

✉️ गुप्त क्रांति

अंग्रेज़ों को क्या पता था कि
उनके सीलबंद पत्रों के बीच
👉 क्रांतिकारियों के गुप्त संदेश
👉 आज़ादी की योजनाएँ
👉 विद्रोह की तारीख़ें
भी सफ़र कर रही हैं।

वो डाकिया जान जोखिम में डालकर
एक जगह से दूसरी जगह
क्रांतिकारियों तक संदेश पहुँचाता रहा।

⚔️ पकड़ा गया, पर टूटा नहीं

एक दिन अंग्रेज़ों को शक हुआ।
डाकिया पकड़ा गया।
भयानक यातनाएँ दी गईं।

लेकिन उसने
एक भी नाम नहीं बताया।

अंग्रेज़ अफसर चिल्लाया:
“तू जानता है तू क्या खो रहा है?”

डाकिए ने कहा:
“मैं अपनी जान नहीं, भारत का भविष्य बचा रहा हूँ।”

🩸 अंत, लेकिन जीत

उसे फाँसी दे दी गई।
कोई मूर्ति नहीं।
कोई किताब नहीं।

लेकिन उसी नेटवर्क से
आगे चलकर
1857 की आग भड़की।



🔥 सीख

🇮🇳 आज़ादी सिर्फ बड़े नामों से नहीं मिली
🇮🇳 कई गुमनाम नायकों के बलिदान से मिली






🔥 राजा भोज और उस किसान की बेटी – जब न्याय ने इतिहास रच दियाभारत के महान परमार शासक राजा भोज (11वीं शताब्दी) को विद्वान, ...
13/01/2026

🔥 राजा भोज और उस किसान की बेटी – जब न्याय ने इतिहास रच दिया

भारत के महान परमार शासक राजा भोज (11वीं शताब्दी) को विद्वान, न्यायप्रिय और प्रजा–वत्सल राजा माना जाता है। लेकिन उनके जीवन की ये घटना इतिहास की किताबों में बहुत कम मिलती है।

🌾 कहानी की शुरुआत

मालवा के एक छोटे से गाँव में एक गरीब किसान रहता था। उसकी बेटी बेहद बुद्धिमान और साहसी थी। एक दिन गाँव के ज़मींदार ने अपने पद और ताक़त के बल पर उस लड़की के साथ अन्याय किया। डर के मारे गाँव वाले चुप रहे।

लेकिन वो लड़की चुप नहीं रही।

👣 न्याय की खोज

लोगों ने उसे डराया—
“राजा तक पहुँचना आसान नहीं है, बेटी।”

लेकिन उसने कहा:
“अगर राजा सच में न्यायप्रिय है, तो मेरी आवाज़ वहाँ तक पहुँचेगी।”

वो नंगे पाँव, कई दिनों की यात्रा कर राजा भोज की सभा में पहुँची।

⚖️ राजा भोज का फैसला

सभा में सबको लगा—
एक गरीब किसान की बेटी राजा के सामने क्या बोलेगी?

लेकिन जैसे ही उसने अपनी आपबीती सुनाई,
राजा भोज का चेहरा बदल गया।

उन्होंने बिना किसी दबाव के ज़मींदार को बुलाया, जाँच करवाई और
➡️ ज़मींदार को कठोर दंड दिया
➡️ लड़की को सम्मान, सुरक्षा और शिक्षा का अधिकार दिया

राजा ने कहा:
“राजा वही है, जो सबसे कमजोर की आवाज़ सुने।”

📜 इतिहास क्यों चुप है?

क्योंकि ये कहानी युद्धों की नहीं,
न्याय, साहस और एक आम लड़की की जीत की कहानी है।



✨ सीख
• भारत का इतिहास सिर्फ राजाओं की तलवारों से नहीं,
सामान्य लोगों के साहस से भी बना है।
• असली शक्ति पद में नहीं, सच बोलने की हिम्मत में होती है।



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