03/01/2026
एक सामाजिक सन्देश - ज़रूर पढ़ें
🙏❤️🙏
मै बीवी बच्चों के साथ दस साल से
शहर मे रह रहा था। गाँव मे भाईयों से
लड़ कर आया था। दस साल से बोलचाल बन्द थी। भाईयों के साथ प्रॉपर्टी का मुकदमा भी चल रहा था । बैठे बेठे विचार आया कि मुझे लड़ने झड़ने से मिला क्या? दस साल से किराये के मकान मे रह रहा हूँ। ना कोई रिश्तेदार है न कोई फिक्र करने वाला। आज बीवी बीमार है अकेले हॉस्पिटल मे बैठा हूँ। दो दिन से नहाया भी नही हूँ। अगर मेरे अपने मेरे साथ होते तो मेरी ऐसी हालत होती क्या? अचानक मैंने अपने बड़े भाई को फोन
मिला दिया। पूरी रिंग गई मगर भैया ने नही उठाया। हिम्मत करके दुबारा फोन मिलाया। इस बार भैया ने फोन उठा लिया। मगर कुछ आवाज नही आई। मै बोला " भैया? " उधर से भैया का कर्कस स्वर सुनाई दिया " फोन क्यो किया? " मै बोला " आपकी बहु बीमार है भैया। दस दिन से हॉस्पिटल मे भर्ती है। बच्चे घर मे अकेले है। मै थक गया हूँ भैया" कहते हुए मुझे रोना आ गया। भैया की वही भारी आवाज सुनाई दी। " दस दिन हो गए और तु अब बता रहा है। रो मत मै आ रहा हूँ उसके बाद घण्टे भर मे भाई भाभी, भतीजे सब आ गए। आते ही उन्होंने सब सम्भाल लिया। उनके आते ही महसूस हुआ कि मेरी असली ताकत तो यही लोग है। उन्हे देखते ही हिम्मत सौ गुनी हो गई थी। उनके आने पर पत्नी की तबियत भी जल्दी ठीक हो गई। फिर मै भाईयों के साथ गांव लौट आया। मोरल:- जिंदगी वही है जो अपनो के साथ गुजरे। अपनो के साथ कैसा झगडा? कैसी लडाई? कैसी इग्गो? दुख सुख मे यही तो काम आयेंगे। भाई हिम्मत है। भाई रक्षा कवच है। भाई हो तो पीठ सुनी नही पड़ती। इसलिए बेशक अलग रहो मगर भाइयो से अनबन मत रखो!