Narendra Kumar Bhatnagar

Narendra Kumar Bhatnagar जय हिंद जय भारत

02/06/2026

दोस्तों, फालतू का घमंड ना पाले.........




#नरेन्द्र_कुमार_भटनागर

सहयोग एक अनमोल तोहफा है!जो देने में भी अच्छा लगता है।और मिल जाये....तो भी अच्छा लगता है...!छोटी सोच शंका को जन्म देती है...
02/06/2026

सहयोग एक अनमोल तोहफा है!
जो
देने में भी अच्छा लगता है।
और मिल जाये....
तो भी अच्छा लगता है...!

छोटी सोच शंका को जन्म देती है,
और बड़ी सोच, समाधान को।

ये जो इमारत आप सामने देख रहे हो ये है राजा नल की प्रेमिका का महल (नटनीवारा) यही से एक विश्वासघात की कहानी लिखी गई थी यान...
01/06/2026

ये जो इमारत आप सामने देख रहे हो ये है राजा नल की प्रेमिका का महल (नटनीवारा) यही से एक विश्वासघात की कहानी लिखी गई थी
यानी कि यहां से 2KM दूर एक राजा नल का किला बना हुआ है जो नरवरगढ़ किले के नाम से जाना जाता है वहां तक यहां से कच्चे धागे पर चलकर जाना था ऐसा ही हुआ नरवरगढ़ में एक नट लोगों की टोली आई और उन्होंने अपना कर्तव्य दिखाया तो उनके समक्ष एक शर्त रखी गई कि आपको इस पहाड़ी से चलकर किले तक जाना है अगर आप वहां तक पहुंच जाती है तो आपको हमारा आधा राजपाट दिया जायेगा और रानी भी बनाया जायेगा अगली सुबह कुछ ऐसा ही हुआ सभी लोग एक साथ आए कच्चा धागा बांदा गया नटनी देवी उसके ऊपर नृत्य करते हुए जाने लगी जैसे ही वो आधे रास्ते तक पहुंची तो राजा नल की रानी को लगा कि अब राजा इसे ही रानी बना लेगी तो उन्होंने अपने कुछ विश्वासपात सैनिकों से मिलकर धागे को कटवा दिया और नटनीदेवी आधे रास्ते में गिर कर उनकी मृत्यु हो गई 🥵 तो राजा को नटनीदेवी ने तभी राजा को श्राफ दिया था और राजा नल ने जहां ओर गिरी थी वही पर उनका मंदिर बनवा दिया था जहां वो आज भी पूजी जाती है और जिन लोगों की गोद सूनी होती है उनकी माता मनोकामना पूर्ण करती है और आज वो लोड़ी माता के नाम से जानी जाती है जय लोड़ी माता 🙏🏻

#नरेन्द्र_कुमार_भटनागर

🙏🙏पंच तत्व से बनी ये देहजीवन भर दौड लगाये रे थारी म्हारी करता करताउमरिया बीती जावे रेकाई लेबा आयो तूकाई लेकर जासी तूअकेल...
31/05/2026

🙏🙏

पंच तत्व से बनी ये देह
जीवन भर दौड लगाये रे
थारी म्हारी करता करता
उमरिया बीती जावे रे

काई लेबा आयो तू
काई लेकर जासी तू
अकेलो आयो तू
अकेलो ही जासी तू

सारी जिंदगी भाग दौड़ करली
चहरा पर पडगी झुर्रियां रे
निंद्रा छूटी समाज छूटयो
रह गयो तू अकेलाअकेलो रे

अब पछतावत काई हों सी
कर्मा को फल भोगन खातिर
हंसो तो उडबा चालयो रे
हंसो तो उडबा चालयो रे

🌞 सुप्रभातम🌞"कामयाब होने के लिए अकेले ही आगे बढ़ना पड़ता है,लोग तो तब पीछे आते हैंजब आप सफल होने लगते हैं।"👏👏👏💐💐👏
31/05/2026

🌞 सुप्रभातम🌞

"कामयाब होने के लिए अकेले ही आगे बढ़ना पड़ता है,
लोग तो तब पीछे आते हैं
जब आप सफल होने लगते हैं।"

👏👏👏💐💐👏

🙏🚩जोड़ने के लिए नर्म बनो और जोड़े रखने के लिए सख्त ये सीख हमें अपने जीवन में सीमेंट से सीखनी चाहिए। परिवार में यही भूमिक...
31/05/2026

🙏🚩
जोड़ने के लिए नर्म बनो और जोड़े रखने के लिए सख्त ये सीख हमें अपने जीवन में सीमेंट से सीखनी चाहिए। परिवार में यही भूमिका परिवार के मुखिया की और समाज में यही भूमिका समाज के मुखिया की भी होनी चाहिए।

परिवार जोड़ने के लिए नर्म और जोड़े रखने के लिए सख्त होना होना आपकी चातुर्यता है।परिवार का मुखिया नर्म न हो तो परिवार का जुड़ना मुश्किल है और परिवार का मुखिया सख्त न हो तो परिवार का जुड़े रहना भी मुश्किल ही है।

सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति।
सहज कृपन सन सुंदर नीति॥

जीवन में कभी-कभी जहाँ विनय काम नहीं आता वहाँ कठोरता काम कर जाती है। आपकी विनम्रता से किसी का अहित हो रहा हो तो भला वह विनम्रता भी किस काम की है..? विनम्रता भी वही भली है जिसमें किसी का अहित न हो और कठोरता से यदि किसी का हित सध रहा हो तो वहाँ पर कठोरता ही श्रेष्ठ है।

सदा विनम्र रहो मगर जहाँ पर आपकी विनम्रता किसी श्रेष्ठ कार्य के साथ-साथ आपके व सामने वाले के हित में बाधक बन रही हो वहाँ पर थोड़ा कठोरता दिखाकर उस श्रेष्ठ कार्य की परिपूर्णता ही श्रेयस्कर हो जाती है।

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औकात नहीं हे आंख से आंख मिलाने की और बात करते हैं हमारा नाम मिटाने की।।
30/05/2026

औकात नहीं हे आंख से आंख मिलाने की और बात करते हैं हमारा नाम मिटाने की।।

शब्द भी एक भोजन हैंअगरखुद को अच्छा न लगेतो दूसरों को भी मत परोसिये...
30/05/2026

शब्द भी एक भोजन हैं
अगर
खुद को अच्छा न लगे
तो
दूसरों को भी मत परोसिये...

30/05/2026

प्रकृति हमारी मां है।।


अवाच्यवादांश्च बहून् वदिष्यन्ति तवाहिताः।निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम्॥ भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं ...
30/05/2026

अवाच्यवादांश्च बहून् वदिष्यन्ति तवाहिताः।
निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम्॥

भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि यदि तुम अपने कर्तव्य से पीछे हटोगे, तो तुम्हारे विरोधी तुम्हारे सामर्थ्य और वीरता की निन्दा करेंगे। वे तुम्हारे बारे में ऐसी बातें कहेंगे जो सुनने योग्य भी नहीं होंगी। एक सम्मानित व्यक्ति के लिए अपमान और निन्दा मृत्यु से भी अधिक कष्टदायक होती है।

मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु बाहर नहीं, भीतर का भय है। जब व्यक्ति अपने सत्य को जानकर भी उससे पीछे हटता है, तब उसका आत्मबल कमजोर होने लगता है। संसार की निन्दा उतनी पीड़ा नहीं देती, जितनी अपनी ही आत्मा की आवाज़ को अनसुना करने से होती है।

जो व्यक्ति अपने कर्तव्य को पूरी जागरूकता और निष्ठा से निभाता है, वह दूसरों की प्रशंसा या आलोचना से ऊपर उठ जाता है। उसका सम्मान बाहरी शब्दों से नहीं, बल्कि उसके आंतरिक साहस और सत्यनिष्ठा से निर्मित होता ह

आप सभी को हृदय से धन्यवाद। ईश्वर की कृपा आप पर बनी रहे, जीवन में धर्म, साहस और सद्बुद्धि का प्रकाश सदैव बना रहे।

राधे-राधे। 🙏🌺

#श्रीमद्भगवद्गीता
#गीता_ज्ञान
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#आध्यात्मिकता

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