05/01/2026
तेल का खेल: अमेरिका ने क्यों उखाड़ फेंका मादुरो को?" वेनेजुएला पर संकट: ट्रंप ने क्यों चलाए बम? पूरा सच" देखिए ।
दक्षिण अमेरिका का एक छोटा सा देश, लेकिन दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार… और उसी देश की राजधानी पर अमेरिकी बमबारी के बाद उसके राष्ट्रपति की गिरफ्तारी। क्या यह लोकतंत्र की जीत है या तेल की राजनीति?
आज की खास रिपोर्ट – अमेरिका बनाम वेनेजुएला: दोस्ती से दुश्मनी तक की कहानी।” आप सब को बताएंगे बस ध्यान से देखे -----
वेनेजुएला… दक्षिण अमेरिका के उत्तरी किनारे पर बसा वह देश, जो कभी अमेरिका का करीबी तेल–साझेदार हुआ करता था। बीसवीं सदी में अमेरिका वेनेजुएला के तेल का सबसे बड़ा खरीदार था, और दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक रिश्ते मजबूत माने जाते थे। लेकिन यह दोस्ती ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। साल 1999… में वेनेजुएला के सत्ता में आते हैं ह्यूगो चावेज़।
वे खुलकर समाजवादी नीतियों की बात करते हैं, और अमेरिकी नीतियों की आलोचना करते हैं साथ ही राष्ट्रीयकरण की राह पर चलते हैं। तेल कंपनियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ता है, अमेरिकी कंपनियों की पकड़ ढीली होने लगती है, और यहीं से शुरू होता है वॉशिंगटन और कराकस के बीच टकराव। साल 2002 में चावेज़ के खिलाफ तख्तापलट की कोशिश होती है, जिसे वेनेजुएला की सरकार अमेरिकी दखल से जोड़कर देखती है, जबकि अमेरिका इस आरोप को खारिज करता है।
इसके बाद से दोनों देशों के बीच अविश्वास स्थायी हो जाता है।”
वही “चावेज़ की मौत के बाद 2013 में राष्ट्रपति बनते हैं निकोलास मादुरो।
इसी दौर में तेल की क़ीमतें गिरती हैं और वेनेजुएला गहराते आर्थिक संकट में फँस जाता है।देश में महँगाई बेलगाम हो जाती है, बाज़ारों से खाने–पीने की चीजें और दवाइयाँ गायब होने लगती हैं, और लाखों लोग रोज़गार और सुरक्षा की तलाश में देश छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं। अमेरिका खुले तौर पर मादुरो पर आरोप लगाता है कि वे चुनावों में धांधली करते हैं, विपक्ष पर कार्रवाई करते हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रहे हैं।
यही नहीं, अमेरिका मादुरो सरकार को भ्रष्ट और अधिनायकवादी करार देता है।इसके बाद शुरू होती है मैक्सिमम प्रेशर की नीति।अमेरिका वेनेजुएला पर एक के बाद एक आर्थिक प्रतिबंध लगाता है।
तेल कंपनियों, सरकारी बैंकों और सैन्य अधिकारियों तक – दर्जनों लोगों और संस्थाओं की संपत्तियाँ फ्रीज़ कर दी जाती हैं और डॉलर में लेन–देन रोका जाने लगता है। आरोप यह भी लगता है कि मादुरो और उनके करीबी लोग ड्रग तस्करी में शामिल हैं, और अमेरिकी कोर्ट में उनके खिलाफ ‘नार्को–टेररिज़्म’ से जुड़े कई केस दर्ज होते हैं।2018 का राष्ट्रपति चुनाव… विपक्ष और कई पश्चिमी देश इस चुनाव को ‘फर्जी और गैर–निष्पक्ष’ बताते हैं।
2019 में विपक्षी नेता जुआन ग्वाइदो को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा ‘अंतरिम राष्ट्रपति’ के रूप में मान्यता दे दी जाती है, जबकि वास्तविक सत्ता मादुरो के हाथ में ही रहती है।यहीं से वेनेजुएला दो हिस्सों में बँट जाता है – एक, मादुरो समर्थक, और दूसरा, ग्वाइदो समर्थक।”
अब बात यहाँ से फिर शुरू होती है 2025–26 की सैन्य कार्रवाई से जो “साल 2025 में अमेरिका वेनेजुएला के तेल सेक्टर पर और सख़्त आर्थिक कदम उठाता है।
वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर भी भारी टैरिफ लगाए जाते हैं, और मादुरो पर रखे गए इनाम की रकम बढ़ाकर 50 मिलियन डॉलर तक कर दी जाती है। इसी बीच समुद्र में सैन्य अभ्यास, ड्रग–रोधी ऑपरेशन और सीमा के आसपास अमेरिकी तैनाती तेज़ हो जाती है। और फिर… जनवरी 2026।खबर आती है कि वेनेजुएला की राजधानी कराकस के कई इलाकों में अचानक धमाकों की आवाजें गूँजती हैं, मिसाइल और ड्रोन हमलों की रिपोर्टें आने लगती हैं।अगली बड़ी खबर – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घोषणा करते हैं कि अमेरिकी बलों ने निकोलास मादुरो और उनकी पत्नी को ‘कस्टडी’ में ले लिया है और अब उन्हें अमेरिका की अदालत में पेश किया जाएगा। ट्रंप प्रशासन इसे ‘लोकतंत्र की बहाली और नार्को–टेररिज़्म के खिलाफ युद्ध’ बताते हुए एक जरूरी कदम कहता है।
अमेरिका का दावा है कि मादुरो अब वैध राष्ट्रपति नहीं थे और वे वेनेजुएला के लोगों के खिलाफ अपराध कर रहे थे।
“लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि मादुरो कौन हैं… सवाल यह भी है कि क्या किसी संप्रभुता वाले देश के राष्ट्रपति को इस तरह सैन्य कार्रवाई करके हटाना अंतरराष्ट्रीय क़ानून के दायरे में आता है क्या? कई अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अधिकारी और विभिन्न देशों की सरकारें इस ऑपरेशन को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरनाक मिसाल बता रही हैं। वेनेजुएला के मादुरो समर्थक और कई विश्लेषक इसे सीधे–सीधे ‘आक्रमण’ और ‘तेल पर कब्ज़े की कोशिश’ कह रहे हैं।
उनका आरोप है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश में सत्ता परिवर्तन के पीछे लोकतंत्र से ज़्यादा ईंधन की राजनीति छुपी हुई है।
वहीं अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह कदम वेनेजुएला के लोगों के लिए, लोकतंत्र के लिए और अमेरिकी सुरक्षा के लिए ज़रूरी था, क्योंकि वे मादुरो को ड्रग तस्करी और आतंक से जोड़कर देख रहे हैं।
अब दुनिया के सामने बड़ा सवाल यह है –क्या यह सचमुच लोकतंत्र की जीत है…
या फिर यह 21वीं सदी की सबसे बड़ी जियो–पोलिटिकल पावर गेम का एक और अध्याय?”
“फिलहाल इतना ही…अगले एपिसोड में हम आपको बताएँगे कि मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला के अंदर क्या हालात हैं, कौन सत्ता में आ सकता है, और इस पूरे संकट का असर तेल की कीमतों और वैश्विक राजनीति पर क्या पड़ सकता है।
आप देखते रहिए बिहार क्रांति न्यूज़।
धन्यवाद।”