09/10/2025
*अपनो के बीच अकेला - एक बाप*
बेटा ! गाड़ी साफ कर दूं.....
रंजीत ने जैसे ही फ्यूल भरवाने के लिए अपनी कार को पेट्रोल पंप पर रोकी एक बुजुर्ग भागकर उसकी गाड़ी के करीब आया।
नहीं अंकल अभी जल्दी में हूँ
कहते हुए रंजीत ने उस बुजुर्ग को टालना चाहा लेकिन वह उससे विनती करने लगा - बेटा दस मिनट भी नहीं लगेंगे !थोड़ा ठहर जाओ मैंने आज सुबह से अभी तक कुछ नहीं खाया दस बीस रुपए दे देना बस !
रंजीत को दया आ गई अंकल ! मैं आपको रुपए दे देता हूंँ आप कुछ खा लीजिएगा ! यह कह रंजीत ने जेब से बटुआ निकाल लिया , लेकिन बुजुर्ग ने यह कहते हुए रुपए लेने से इंकार कर दिया कि -
बेटा ! मैं भीख नहीं लेता।
अंकल ! यह भीख नहीं है आप मेरे पिता समान हैं लेकिन आपने सुबह से कुछ नहीं खाया है इसलिए मैं आपको यह कुछ रुपए देना चाहता हूंँ।
नहीं बेटा ! आप जाइए , मैं इंतजार करूंगा , आप नहीं तो कोई और सही!
यह कहते हुए वह बुजुर्ग वापस मुड़ गया। उसका आत्मसम्मान और स्वाभिमान देख रंजीत हैरान हुआ।वह बुजुर्ग उसे कोई आम इंसान नहीं लगा, इसलिए रंजीत अपनी कार छोड़ उस बुजुर्ग के पीछे आया।
अंकल! क्या मैं आपसे दो मिनट बात कर सकता हूंँ?
बोलो बेटा !
आप कहां रहते हो?
यहीं !
यहां कहां?"
यह पेट्रोल पंप ही मेरा ठिकाना है ! मैं यहीं रहता हूंँ।
आपका कोई घर-द्वार
घर था ! लेकिन अब नहीं रहा।
मैं कुछ समझा नहीं अंकल?
बच्चों को पढ़ाने और लायक बनाने के चक्कर में मैं अपना घर बेचकर एक किराए के मकान में रहने लगा था।
अब आपके बच्चे कहां रहते हैं?
एक विदेश में है और दूसरा इसी शहर में!
आप उनके साथ क्यों नहीं रहते?
उनके घर में मेरे रहने लायक कोई जगह नहीं है!
क्यों...
मेरा एक बेटा इसी शहर में डॉक्टर है ! साठ हजार किराये के बंगले में रहता है ! पच्चीस लाख की गाड़ी से चलता है लेकिन मेरे लिए उसके पास कुछ नहीं है यह कहते-कहते उस बुजुर्ग की आंखों में आंसू छलक गए।
अंकल! आप अपने बच्चों पर आपको गुजारा भत्ता देने के लिए मुकदमा दायर क्यों नहीं करते? आपने ही अपना सब कुछ देकर उन्हें कमाने लायक बनाया है।
बुजुर्ग मुस्कुराया !! मैंने उनकी परवरिश पर जो भी खर्च किया वह सब अपनी मर्जी से किया था अगर मैं वह सब कुछ उन पर मुकदमा करके मांग भी लूं , तो उन सब चीजों का अब मैं करूंगा क्या?फिर भी आपको उनसे कुछ ना कुछ तो मिलना ही चाहिए।
बेटा! दो रोटी तो मैं अपनी मेहनत से आज भी कमा लेता हूंँ !!
रही मुकदमे की बात तो अदालत में मुकदमा दायर कर बच्चों के प्रति स्नेह और माता-पिता के प्रति सम्मान नहीं मांगा जा सकता , इस बात का अंदाजा मुझे भी है।
रंजीत नतमस्तक हो गया लेकिन फिर उसने अपनी बात को मोड़ दिया.. अंकल!.अब मैं इतनी देर ठहर ही गया हूंँ तो आप मेरी कार पर जमी धूल साफ कर दीजिए।
वह बुजुर्ग अपने हाथ में थामे साफे से झटपट उसकी कार पर जमी धूल को साफ करने लगा ,लेकिन उस की जिंदगी पर जमी धूल को साफ करने में असमर्थ रंजीत मन ही मन सोच रहा था कि ..
एक अकेला गरीब पिता/माँ अपने बच्चों को लायक बनाने की हिम्मत रखते हैं लेकिन जवान होने पर वही बच्चे सक्षम होने के बावजूद अपने बुजुर्ग हो चुके माता-पिता को संभालने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाते!
तभी रंजीत ने कहा अंकल !! मेरा गाड़ियों का शोरूम है आप चाहें ,तो वहाँ गाड़ियों की देखभाल का काम कर सकते हैं।
बुजुर्ग के हाथ रुक गए वह मुस्कुराया.. बेटा!.आप बहुत दयालु हो लेकिन मुझे किसी की दया की जरूरत नहीं है।
रंजीत ने आगे बढ़कर उस बुजुर्ग का हाथ अपने हाथों में लेकर उसे आश्वस्त किया - वहाँ भी आपको आपकी मेहनत के बदले ही रुपए मिलेंगे। एक अजनबी से इतनी आत्मीयता पाकर उस बुजुर्ग के चेहरे पर गजब का स्वाभिमान था।
आज की पीढ़ी भौतिकता के चकाचौंध में अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रही है क्योंकि मैकाले की शिक्षा पद्धति भाव-संवेदना शून्य भोगवादी फसल तैयार करती है।