22/08/2026
कुछ विश्लेषक कह रहे हैं कि राहुल गांधी बदल रहे हैं, कुछ कह रहे हैं कि उनकी राजनीति बदल रही है, कुछ कह रहे हैं कि उनका तरीक़ा बदल रहा है। मैं कहूंगा कि असल में, समय बदल रहा है।
जो राहुल गांधी को जानते हैं, करीब से देखते हैं, वे जानते हैं कि वे 20 साल पहले से वैसी ही राजनीति कर रहे हैं। लोगों के बारे में, सरकार के बारे में, अपनी विचारधारा के बारे में वे जो 20 साल पहले बोल रहे थे, वही आज भी बोल रहे हैं।
वे पिछले दो दशक भी सबसे कमजोर लोगों के घर जाते थे, उनकी मदद करते थे, उनकी आवाज उठाते थे। वे आज भी वही कर रहे हैं।
फिर नया क्या है? नया ये है कि लोगों की आंख पर पड़ा पर्दा हट रहा है। यह पर्दा कुटिल राजनीति और कॉर्पोरेट के घृणित गठजोड़ का नतीजा था। राहुल गांधी को अगंभीर साबित करने के लिए सैकड़ों हजारों करोड़ रुपए फूंक दिए गए। एक हाहाकारी प्राचारतंत्र तैयार किया गया।
राहुल गांधी इसके आगे डिगे नहीं। वे जमे रहे। वे सरकार की नाकामियों और मूर्खताओं को लेकर भविष्यवाणी करते रहे और वे भविष्यवाणियां सच साबित होती रहीं।
आज सौ के आसपास पेपर लीक, भ्रष्टाचार और युवाओं की बर्बादी के बोझ से दबी एक भ्रष्ट सरकार बैकफुट पर है। सरकार में बैठे लोग अभी तक उनका मजाक उड़ाते थे, अब उन्हें राहुल गांधी की बातों को, मांगों को स्वीकार करना पड़ रहा है। सरकार की साख, सरकार का इकबाल खत्म हो गया है। वह पूरी तरह जनविरोधी साबित हो चुकी है।
देश के युवा सारा तमाशा देख रहे हैं और यह भी समझ रहे हैं कि उनके भविष्य के लिए क्या बेहतर है। लोगों की सोच बदल रही है और इसलिए समय भी करवट ले रहा है।
नरेंद्र मोदी से देश की जनता का मोह भंग हो चुका है और अब लोग उम्मीद से राहुल गांधी की ओर देख रहे हैं।
Rahul Gandhi