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कलम सदैव तलवार से अधिक शक्तिशाली रही है, लेकिन दुख की बात है कि आज की पत्रकारिता में स्याही प्रायोजित है।

वर्दी से कलम तक : जज़्बे की अनवरत यात्राकवि : शिवेन्द्र गौतमआलेख : डॉ० दिनेश प्रसाद सिन्हाहिंदी और भोजपुरी साहित्य के वि...
03/08/2026

वर्दी से कलम तक : जज़्बे की अनवरत यात्रा
कवि : शिवेन्द्र गौतम
आलेख : डॉ० दिनेश प्रसाद सिन्हा
हिंदी और भोजपुरी साहित्य के विस्तृत परिदृश्य में समय-समय पर ऐसे रचनाकार सामने आते हैं, जो साहित्य को प्रतिष्ठा अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का सशक्त साधन मानते हैं। ऐसे साहित्यकारों की पहचान उनके अलंकारों से अधिक उनके जज़्बे, ईमानदारी, निरंतर लेखन और भाषा के प्रति समर्पण से होती है। शिवेन्द्र गौतम ऐसे ही संवेदनशील रचनाकार हैं, जिन्होंने राष्ट्रसेवा की कठोर जिम्मेदारियों के बीच भी अपने भीतर के कवि को जीवित रखा और आज हिंदी तथा भोजपुरी साहित्य में अपनी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।और
25 फरवरी 1981 को बिहार के मुजफ्फरपुर जनपद स्थित हुस्सेपुर गाँव में जन्मे शिवेन्द्र गौतम के पिता श्री राधेश्याम सिंह तथा माता श्रीमती रागनी देवी हैं। प्रारंभ से ही उन्हें संस्कार, अनुशासन और देशप्रेम की प्रेरणा परिवार से मिली। उन्होंने वाणिज्य विषय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की तथा संगीत की भी विधिवत शिक्षा ग्रहण की। संगीत ने उनके व्यक्तित्व को संवेदनशील बनाया और यही संवेदनशीलता आगे चलकर उनकी कविताओं की आत्मा बनी।
शिवेन्द्र गौतम का जीवन राष्ट्रसेवा और साहित्य-साधना का अद्भुत संगम है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में सेवा के दौरान उन्होंने पाँच वर्षों तक भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के सुरक्षा अधिकारी के रूप में अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन किया। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी उन्होंने साहस, अनुशासन और समर्पण के साथ सेवाएँ दीं। कठिन परिस्थितियों के बीच भी उनका कवि-मन कभी मौन नहीं हुआ। वे अपने साथियों को कविताएँ सुनाकर उनमें उत्साह, आत्मविश्वास और राष्ट्रप्रेम का संचार करते रहे। यही उनकी संवेदनशीलता और सकारात्मक दृष्टि का परिचाय क है।
सेवा-जीवन की व्यस्तताओं और पारिवारीक संबंधी चुनौतियों के कारण उन्हें लंबे समय तक साहित्यिक मंचों पर सक्रिय होने का अवसर नहीं मिल सका। किंतु उनके भीतर उमड़ते भाव कभी रुके नहीं। उन्होंने सोशल मीडिया, समाचार-पत्रों और साहित्यिक पत्रिकाओं को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। आज उनकी रचनाएँ बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रमुख दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक तथा अर्द्धवार्षिक समाचार-पत्रों, साहित्यिक पत्रिकाओं, साहित्यिक पोर्टलों तथा सोशल मीडिया मंचों पर निरंतर प्रकाशित और चर्चित हो रही हैं।
उनका एक साझा काव्य-संकलन प्रकाशित हो चुका है तथा दूसरा साझा काव्य-संकलन शीघ्र प्रकाशित होने वाला है। यह उनकी निरंतर सृजनशीलता और साहित्य के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यद्यपि उनकी एकल काव्य-कृति अभी प्रकाशन की प्रतीक्षा में है, फिर भी उनकी रचनात्मक सक्रियता यह विश्वास जगाती है कि आने वाले समय में वे हिंदी और भोजपुरी साहित्य को महत्त्वपूर्ण कृतियाँ प्रदान करेंगे।
साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को विभिन्न संस्थाओं ने सम्मानित भी किया है। उन्हें लोकधारा काव्य विभूषण, रामवृक्ष बेनीपुरी सम्मान तथा वर्ष 2026 में नेपाल से प्रदान किया गया स्व. आचार्य गौरीशंकर पांडेय सम्मान प्राप्त हो चुका है। ये सम्मान उनकी साहित्य-साधना, भाषा-प्रेम और निरंतर सृजनशीलता की सार्वजनिक स्वीकृति हैं।
शिवेन्द्र गौतम केवल एक रचनाकार ही नहीं, बल्कि एक कुशल संगठनकर्ता भी हैं। वे लिच्छवी साहित्य संगम के संस्थापक सदस्यों (Founder Member) में शामिल हैं तथा संगठन को सुदृढ़ और सक्रिय बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सीआरपीएफ के अनुशासित जीवन से प्राप्त नेतृत्व क्षमता, कार्यनिष्ठा, अनुशासन, समर्पण और सरलता का लाभ वे आज साहित्यिक संगठन को भी दे रहे हैं। यही कारण है कि वे साहित्य और संगठन—दोनों क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय और प्रतिबद्ध दिखाई देते हैं।
शिवेन्द्र गौतम की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सहजता और स्पष्टवादिता है। वे साहित्य को किसी बंधन में बाँधकर नहीं देखते। उनका मानना है कि कविता का मूल उद्देश्य मनुष्य के अंतर्मन की अनुभूतियों को शब्द देना है। वे स्वयं कहते हैं— "संभव है मेरी रचनाओं में कहीं-कहीं शिल्प या भाषा संबंधी त्रुटियाँ रह जाएँ, किंतु मैं अपने मन के भावों को जिस रूप में भी शब्दों में व्यक्त कर देता हूँ, उसी को कविता मानता हूँ। मेरे लिए भावों की सच्चाई ही कविता की सबसे बड़ी कसौटी है।" यही विचार उन्हें निर्भीक होकर निरंतर लिखने की प्रेरणा देता है।
आज जब साहित्य में शिल्प और प्रदर्शन की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, ऐसे समय में शिवेन्द्र गौतम जैसे रचनाकार यह विश्वास जगाते हैं कि सच्चे भाव, ईमानदार अभिव्यक्ति और भाषा के प्रति समर्पण ही किसी साहित्यकार की सबसे बड़ी पूँजी होते हैं। उन्होंने वर्दी पहनकर राष्ट्र की सेवा की और अब कलम के माध्यम से समाज, संस्कृति तथा हिंदी और भोजपुरी भाषा की सेवा में जुटे हैं। निस्संदेह, उनकी यह साहित्यिक यात्रा अभी प्रारंभिक अवस्था में है, किंतु उनकी प्रतिबद्धता, सृजनशीलता और कर्मनिष्ठा यह संकेत देती है कि भविष्य में वे हिंदी और भोजपुरी साहित्य जगत में अपनी एक सशक्त और सम्मानजनक पहचान स्थापित करेंगे।
वास्तव में, शिवेन्द्र गौतम की यात्रा यह सिद्ध करती है कि जब हृदय में राष्ट्रप्रेम, मन में संवेदनाएँ और हाथों में कलम हो, तब वर्दी से कलम तक का सफर केवल जीवन-परिवर्तन नहीं, बल्कि समाज और साहित्य के प्रति समर्पण की प्रेरक गाथा बन जाता है।
डॉ० दिनेश प्रसाद सिन्हा, मुजफ्फरपुर, बिहार

गोरौल: बहादुरपुर शिव मंदिर से पूजा के दौरान लड्डू गोपाल चोरी, मासूम भक्त अनुप्रिया की भावुक अपीलगोरौल प्रखंड के आदमपुर क...
03/08/2026

गोरौल: बहादुरपुर शिव मंदिर से पूजा के दौरान लड्डू गोपाल चोरी, मासूम भक्त अनुप्रिया की भावुक अपील

गोरौल प्रखंड के आदमपुर के समीप स्थित बहादुरपुर शिव मंदिर से पूजा के दौरान भगवान श्री लड्डू गोपाल चोरी हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, आदमपुर निवासी श्री शिवनाथ पासवान जी की पोती अनुप्रिया पूजा करने के लिए अपने प्रिय लड्डू गोपाल को बहादुरपुर शिव मंदिर लेकर गई थी। पूजा के दौरान ही भगवान श्री लड्डू गोपाल चोरी हो गए।

एक भक्त और भगवान का संबंध केवल एक प्रतिमा का नहीं, बल्कि अटूट प्रेम, श्रद्धा और विश्वास का होता है। अनुप्रिया अपने लड्डू गोपाल के वियोग में लगातार रो रही है और बहुत परेशान है। परिवार भी अत्यंत दुखी है।

यदि किसी भी व्यक्ति को भगवान श्री लड्डू गोपाल मिलें या उनके संबंध में कोई जानकारी हो, तो कृपया तुरंत नीचे दिए गए नंबर पर संपर्क करें और उन्हें सुरक्षित उनके भक्त तक पहुंचाने में सहयोग करें।

📞 संपर्क: श्री शिवनाथ पासवान जी – 91622 35275

गोरौल एवं आसपास के सभी सम्मानित नागरिकों से हाथ जोड़कर विनम्र अनुरोध है कि इस संदेश को अधिक से अधिक साझा करें, ताकि भगवान श्री लड्डू गोपाल सकुशल अपने भक्त के पास लौट सकें।

🙏 जय श्री कृष्ण।

18953 मत कि हार के साथ भाजपा का 40 वर्षो से बांके पुर का अभेद किला ढह गया है। जहाँ 1995 से अभी तक भाजापा नही हारी थी । प...
03/08/2026

18953 मत कि हार के साथ भाजपा का 40 वर्षो से बांके पुर का अभेद किला ढह गया है। जहाँ 1995 से अभी तक भाजापा नही हारी थी । प्रशांत किशोर को 66230 तो वही भाजपा 44250 और राजद को 14085 मत मिले । भाजपा प्रत्यासी किसी भी राउन्ड में बढ़त न बना पाया

कहाँ बाड़े रे BIB बिजेंद्र सिंह? पटना के लोग तोहरा के खोजत बा। सुपर लाइव में कहत रहलऽ – 'PK ना जीती'…अब जीत गइलें, अब जू...
03/08/2026

कहाँ बाड़े रे BIB बिजेंद्र सिंह? पटना के लोग तोहरा के खोजत बा। सुपर लाइव में कहत रहलऽ – 'PK ना जीती'…
अब जीत गइलें, अब जूता ना… डांस देखाईं!" BIB Bijendra singh

"चेहरा त देखीं… 😄 जब रिजल्ट उल्टा पड़ जाला,त सुपर लाइव अपने-आप बंद हो जाला!" BIB Bijendra singh
03/08/2026

"चेहरा त देखीं… 😄 जब रिजल्ट उल्टा पड़ जाला,
त सुपर लाइव अपने-आप बंद हो जाला!" BIB Bijendra singh

प्रशांत किशोर बांकीपुर उपचुनाव में 18953 वोट से जीते
03/08/2026

प्रशांत किशोर बांकीपुर उपचुनाव में 18953 वोट से जीते

"पटना के जनता पूछत बा…'भइया! अब चुप्पी काहे?जवन कहत रहलऽ – PK हारिहें…अब एगो रिएक्शन त बनत बा!'" BIB Bijendra singh
03/08/2026

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03/08/2026

बांकीपुर उपचुनाव में जनसुराज की बढ़त से कार्यकर्ताओं में जश्न भाजपा के गढ़ में जनसुराज का दम!

सब्जी मंडी चक्रमऔर बस स्टैंड वाले इलाके की ओर काउंटिंग बढ चली है जहां भाजपा को पहले से भी झटका लगता रहा है।प्रशांत किशोर...
03/08/2026

सब्जी मंडी चक्रमऔर बस स्टैंड वाले इलाके की ओर काउंटिंग बढ चली है जहां भाजपा को पहले से भी झटका लगता रहा है।प्रशांत किशोर की अभी की बढ़त को देखते हुए भाजपा को यह खाई पटना मुश्किल होगा इस प्रकार हम कह सकते हैं कि प्रशांत किशोर ने यह इलेक्शन जीत लिया है

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03/08/2026

"ए बिजेंद्र सिंह जी… अब कैमरा ऑन करऽ! रोज सुपर लाइव में भविष्यवाणी होत रहे, अब रिजल्ट परो एगो लाइव त बनावऽ!" BIB Bijendra singh

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