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26/08/2026

किराना हिल्स से धुआं उठता देख घबरा गया था पाकिस्तान, ऑपरेशन सिंदूर पर खुलासा

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ऑपरेशन सिंदूर…यह पहलगाम अटैक का बदला था. भारत ने पहलगाम अटैक का बदला लेने के लिए पाकिस्तान की ईंट से ईंट बजा दी थी. ऑपरेशन सिंदूर में न केवल आतंकी ठिकाने नष्ट हुए थे. पाकिस्तानी एयरबेस तक तबाह हुए थे. ब्रह्मोस मिसाइलों की बरसात से पाकिस्तान में हाहाकार मच गया था. आतंकियों की कमर टूट गई थी. पाक सेना लाचार हो गई थी. पाकिस्तानियों की हालत तो तब और खराब हो गई थी, जब किराना हिल्स से धुआं उठता दिखा था. जी हां, पूर्व सीडीएस अनिल चौहान ने किराना हिल्स पर हमले का राज खोला है. उनके मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने पर भारत का ड्रोन जा गिरा था.

भारत ने किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया, आत्मघाती ड्रोन किसी पहाड़ी से टकरा गया होगा: पूर्व सीडीएस

दरअसल, पूर्व सीडीएस यानी प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर पर लंबी बातचीत की. उन्होंने साफ किया कि भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान की किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया था. किराना हिल्स पाकिस्तान का एक परमाणु प्रतिष्ठान है. उनके मुताबिक, पाकिस्तान के सरगोधा की ओर भारत ने कई आत्मघाती ड्रोन भेजे थे. इनमें से एक अपनी उड़ान क्षमता खोने के बाद नीचे गिरकर एक पहाड़ी से टकरा गया होगा.

ऑपरेशन सिंदूर की वो कहानी
अनिल चौहान ने ‘ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद के हालात’ पर हुई बातचीत के दौरान अपनी बात स्पष्ट करते हुए एयर मार्शल ए.के. भारती का भी समर्थन किया. एयर मार्शल भारती ने पिछले साल 12 मई को वायुसेना के ‘वायु संचालन महानिदेशक (डीजीएओ) के तौर पर पत्रकारों से कहा था, ‘हमने किराना हिल्स पर हमला नहीं किया है, चाहे वहां कुछ भी रहा हो.’ एयर मार्शल भारती 31 जुलाई को उप वायुसेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए. उनसे सोशल मीडिया पर फैली उन अफवाहों के बारे में पूछा गया जिनमें कहा गया था कि भारत ने जवाबी कार्रवाई के दौरान ‘किराना हिल्स’ नाम की जगह पर हमला किया था, जहां कथित तौर पर परमाणु हथियार भंडारण केंद्र था.

अनिल चौहान ने बताया किराना हिल्स अटैक का राज
अनिल चौहान ने कहा, ‘एयर मार्शल भारती से किराना हिल्स के बारे में एक सवाल पूछा गया था. मुझे लगता है कि मुझे इस बारे में साफ तौर पर बताना चाहिए. कई बार यह पूछा गया है कि क्या किराना हिल्स पर हमला किया गया था; क्योंकि वहीं पर उनके (पाकिस्तान के) परमाणु ठिकाने हैं.’ उन्होंने कहा कि एयर मार्शल भारती ने तब सही कहा था कि हमने किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया था. ‘मैं शायद कुछ हद तक समझा सकता हूं… उन हमलों से पहले हमने सरगोधा में कई ड्रोन भेजे थे, और किराना हिल्स सरगोधा से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर में है. तो ये ड्रोन उन राडार को ढूंढ रहे थे जो सरगोधा और उसके आस-पास थे. इसकी एक समय-सीमा होती है, जिसका मतलब है कि ये लगभग दो घंटे तक हवा में मंडराते रहते हैं, और अगर कोई लक्ष्य नहीं मिलता, तो ये नीचे आकर कहीं टकरा जाते हैं.’

किराना हिल्स की पहाड़ियों से निकला धुआं
पूर्व सीडीएस ने कहा, ‘हो सकता है कि वह आकर उन पहाड़ियों में से किसी एक से टकराया हो. इसलिए यह उन वजहों में से एक हो सकता है जिनके बारे में लोगों ने पूछा… क्योंकि पाकिस्तानी मीडिया ने कुछ ऐसी तस्वीरें भी दिखाई थीं जिनमें किराना पहाड़ियों से धुआं निकलता दिख रहा था.’ जी हां, पाकिस्तान में इसे देखकर ही हड़कंप मच गया था. उन्हें लगा था कि भारत ने किराना हिल्स पर अटैक कर दिया है. इसका मतलब है कि पाकिस्तान में हाहाकार मचेगा. इसके बाद ही पाकिस्तान ने तुरंत भारत के आगे सीजफायर की गुहार लगाई थी. गौरतलब है कि भारत ने 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया, जिसमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए.

26/08/2026

बांके बिहारी मंदिर के दान की एक-एक पाई का होगा हिसाब, अब सीधा जाएगा खजाने में

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मथुराः सुप्रीम कोर्ट ने वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में दान को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि मंदिर में आने वाला हर एक पैसा सीधे दान पेटी या ऑनलाइन माध्यम से मंदिर के खजाने में ही जमा होना चाहिए. न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सेवकों या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस प्रक्रिया में डाली गई बाधा को बेहद गंभीरता से लिया जाएगा. कोर्ट ने प्रबंधन समिति को मंदिर में कदाचार और धांधली रोकने के लिए तत्काल एक पारदर्शी व्यवस्था शुरू करने का आदेश दिया है. इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि मंदिर के कोष से संपत्ति खरीदने के किसी भी प्रस्तावित लेनदेन को पूरा करने से पहले अदालत के समक्ष पेश करना अनिवार्य होगा.

‘पैसे लेकर पॉलीथिन में डाल रहे हैं’
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मंदिर के कामकाज की निगरानी कर रही उच्चस्तरीय समिति की स्थिति रिपोर्ट पर दी गईं वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह की दलीलों पर गौर किया. सिंह ने तस्वीरें अदालत के सामने रखते हुए कहा कि बहुत गंभीर समस्याएं हैं और इस मामले में तुरंत कार्रवाई की जरूरत है. उन्होंने कहा, “एक वीडियो है. तीन लोग पारंपरिक दान पेटी के सामने खड़े हैं और श्रद्धालुओं से पैसे लेकर उन्हें अपनी पॉलीथिन की थैलियों में डाल रहे हैं.”

‘खजाने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू करें’
इस दलील पर कड़ा रुख अपनाते हुए पीठ ने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए. हम निर्देश देते हैं कि दान का एक-एक पैसा मंदिर की दान पेटियों में या ऑनलाइन कोष में जमा होना चाहिए. ‘सेवायत’ या कोई और इसमें कोई बाधा पैदा करते हैं तो इसे बहुत गंभीरता से लिया जाएगा. प्रबंधन समिति मंदिर के खजाने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू करे.” पीठ ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर की प्रबंधन समिति की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी.

26/08/2026

हिमाचल में सुबह-सुबह भूकंप, घर से निकले लोग, 4.0 रिक्टर स्केल पर डोली धरती

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शिमला. हिमाचल प्रदेश में बुधवार सुबह भूकंप के झटका लगा है. सुबह 5 बजकर 46 मिनट औऱ 50 सेकंड्स पर भूकंप प्रदेश में भूकंप आया और इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.0 दर्ज की गई. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने भूकंप की पुष्टि की है औऱ बताया कि भूकंप का केंद्र शिमला से करीब 66 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण दिशा में जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था और जुब्बल-कोटखाई की दिशा में बताया जा रहा है.

हिमाचल प्रदेश में बुधवार को भूकंप आया.

जानकारी के अनुसार, करीब तीन सेकेंड तक भूकंप के झटके महसूस किए गए और इस दौरान धरती डोलनी लगी तो लोग घरों से बाहर निकल आए. इस दौरान कई लोग नींद में भी थे और इस वजह से उन्हें पता नहीं चल पाया. कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर भूकंप के बारे में जानकारी दी और कहा कि जोर का झटका लगा.

नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने भूकंप की पुष्टि की है औऱ बताया कि भूकंप का केंद्र शिमला से करीब 66 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण दिशा में जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था.
बताया जा रहा है कि शिमला के अलावा सोलन, सिरमौर, बिलासपुर और मंडी के कई इलाकों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए. फिलहाल किसी तरह का जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है. हिमाचल पहले से ही भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील राज्यों में शामिल है और शिमला और मंडी जोन-4 और जोन-5 में आते हैं. गौर रहे कि 5.0 से कम तीव्रता के भूकंपों से आमतौर पर बड़े स्तर पर नुकसान की संभावना कम रहती है. हाल ही में चंबा और कांगड़ा में भी भूकंप के झटके लगे थे.

बिहार का अनोखा गांव, 300 की आबादी में सिर्फ पहले मैट्रिक पास हैं राजेश पडहियाKASHI MAIL गया: बिहार के गया जिले के नागोबा...
26/08/2026

बिहार का अनोखा गांव, 300 की आबादी में सिर्फ पहले मैट्रिक पास हैं राजेश पडहिया

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गया: बिहार के गया जिले के नागोबार गांव के रहने वाले राजेश कुमार पडहिया अपने गांव के पहले मैट्रिक पास युवक हैं. इनके गांव में सिर्फ तीन लोग मैट्रिक पास हैं, जिसमें इनके ही दो छोटे भाई और बहन हैं. गया जिले का यह गांव एक दौर में अति नक्सल प्रभावित माना जाता था. इस गांव में पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है. जंगल और नदी पार करने के बाद इस गांव में पहुंचा जा सकता है. हालांकि राजेश कुमार के पिता केदार पडहिया अपने बच्चों को शिक्षा देने के लिए हर संभव प्रयास किए.

केदार पडहिया अपने बेटे को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए एक साइकिल खरीद कर दी और साइकिल से ही बड़ा बेटा राजेश 15 किलोमीटर दूर प्रखंड मुख्यालय बांके बाजार जाता था. जब राजेश कुमार वर्ष 2012 में सेकंड डिवीजन से मैट्रिक पास किया तो इनके छोटे भाई और बहन भी पढ़ाई करने लगे और राजेश के अलावा छोटे भाई बहन भी मैट्रिक पास कर लिए. गांव की आबादी लगभग 300 के करीब है, लेकिन सिर्फ 3 ही युवा मैट्रिक पास हैं.

पहला मैट्रिक पास चिकित्सक के यहां करता है प्रैक्टिस

हालांकि अब इस गांव में प्राथमिक विद्यालय खुलने के बाद छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाना शुरू कर दिए हैं. यहां गांव में अधिकांश पडहिया जनजाति के लोग रहते हैं. जंगल से लकड़ी चुनकर बेचना और मजदूरी करना इस गांव के लोगों का मुख्य पेशा है. राजेश कुमार जो मैट्रिक पास करने वाले गांव के पहले व्यक्ति हैं, फिलहाल एक चिकित्सक के पास रहकर प्रैक्टिस करते हैं और अपने क्षेत्र के लोगों को चिकित्सीय सलाह देते हैं.

जानें कैसे स्कूल जाते थे राजेश
लोकल 18 से खास बात करते हुए राजेश ने बताया कि जब इन्होंने पढ़ाई शुरू की थी. तब आसपास कोई स्कूल नहीं था. उन दिनों प्राथमिक विद्यालय 5 किलोमीटर दूर लुटुआ गांव में था. जबकि उच्च शिक्षा के लिए रोजाना 15 किलोमीटर साइकिल से बांके बाजार प्रखंड मुख्यालय पढ़ाई करने जाना पड़ता था. जंगल, नदी और पहाड़ के रास्ते रोजाना स्कूल जाते थे और किसी तरह से मैट्रिक की परीक्षा द्वितीय श्रेणी से पास कर ली. मैट्रिक पास करने के बाद गुरिया हाई स्कूल से इंटरमीडिएट का परीक्षा भी पास कर लिया.

एरिया में भी नहीं है अस्पताल
उन्होंने बताया कि किसी तरह इंटर तक पढ़ाई तो कर ली, लेकिन बीए की पढ़ाई करने के लिए उतने पैसे नहीं थे और आगे की पढ़ाई छोड़ दी. फिलहाल एक डॉक्टर के साथ रहकर प्रैक्टिस करते हैं और अपने जंगल तथा पहाड़ी क्षेत्र में मौजूद ग्रामीणों को चिकित्सीय सलाह देते हैं. उन्होंने बताया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की दूरी भी उनके गांव से लगभग 15 किलोमीटर दूर है. अगर कोई बीमार पड़ जाता है तो रास्ता नहीं होने के कारण मामला गंभीर हो जाता है.

Gaya News: गया के नागोबार गांव के राजेश कुमार पडहिया अपने गांव के पहले मैट्रिक पास युवक हैं. अब वह चिकित्सक के पास प्रैक्ट...

25/08/2026

250 करोड़ की बिल्‍डिंग पर चला हथोडा... मुंबई में नेताओं और रईसों के 128 आलीशान फ्लैट्स पर बीएमसी की गाज

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मुंबई की 63 मंजिला गगनचुंबी इमारत में जब बीएमसी का भारी-भरकम हथौड़ा गर्जा तो सिर्फ कंक्रीट की दीवारें ही नहीं टूटीं बल्कि महाराष्ट्र के सबसे ताकतवर सियासी और प्रशासनिक रसूख का घमंड भी चूर-चूर हो गया. 1 लाख रुपये प्रति स्क्वेयर फीट वाले मुंबई के सबसे महंगे पते ‘रुस्तमजी क्राउन’ पर सुबह-सुबह जब नगर निगम का दस्ता दाखिल हुआ तो देश के बड़े-बड़े दिग्गजों के पसीने छूट गए. मंत्रियों, नौकरशाहों और अरबपतियों ने लिफ्ट के आसपास की जिस साझा जमीन को अपने फ्लैट में मिलाकर 250 करोड़ रुपये का साम्राज्य बना रखा था, उसे बीएमसी के हथौड़ों ने चंद घंटों में मलबे में तब्दील कर दिया. कानून के इस सख्त प्रहार ने पूरे सियासी गलियारे में हड़कंप मचा दिया है कि जब 63वीं मंजिल पर हथौड़ा चल सकता है, तो फिर नियम तोड़ने वालों की खैर कहां.

बीएमसी ने सख्‍त एक्‍शन लिया.

250 करोड़ का ‘अवैध’ खेल और हथौड़े की चोट
मुंबई के लोअर परेल/प्रभादेवी इलाके स्थित बेहद आलीशान प्रोजेक्ट ‘रुस्तमजी क्राउन’ में बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. क्राउन मिल कंपाउंड में बने इन 63 मंजिला तीन आलीशान टावरों में लिफ्ट के आसपास की कॉमन और ओपन स्पेस (साझा जगहों) को अवैध रूप से अपने फ्लैटों में मिला लिया गया था. RTI कार्यकर्ता संतोष दौड़कर की शिकायत के बाद जी-साउथ वार्ड के असिस्टेंट कमिश्नर के आदेश पर बीएमसी की टीम दस्ता लेकर पहुंची और 128 फ्लैटों के बाहर किए गए अवैध निर्माण को तोड़ना शुरू कर दिया. इस टावर में प्रॉपर्टी की कीमत 1 लाख रुपये प्रति स्क्वेयर फीट से भी ज्यादा है. यानी लिफ्ट के पास कब्जाई गई मामूली सी जगह की कीमत भी करोड़ों में थी, जिसका कुल मूल्य 250 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है.

मंत्री, नेता और नौकरशाहों के फ्लैट्स पर स्कैनर
बीएमसी की इस कार्रवाई से हड़कंप इसलिए मच गया क्योंकि जिन 128 फ्लैटों पर बीएमसी का हथौड़ा चला है, उनमें महाराष्ट्र की राजनीति के कई बड़े चेहरे और नामी हस्तियां शामिल हैं:

• कैबिनेट मंत्री संजय राठौड़: राज्य के कैबिनेट मंत्री [संजय राठौड़] और उनकी पत्नी शीतल राठौड़ से जुड़ा फ्लैट इस कार्रवाई के दायरे में आया है.

• पूर्व मंत्री दीपक केसरकर: पूर्व राज्य मंत्री [दीपक केसरकर] से संबंधित फ्लैट पर भी कार्रवाई की गाज गिरी है, जिसके लिए वे कथित तौर पर 4.20 लाख रुपये प्रति महीना किराया चुकाते हैं.

• विधायक पुत्र समाधान सरवणकर: शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक सदा सरवणकर के बेटे समाधान सरवणकर का फ्लैट भी इस सूची में शामिल है.

• वरिष्ठ नौकरशाह व उद्योगपति: इनके अलावा कई वरिष्ठ आईएएस/आईपीएस अधिकारियों और बड़े उद्योगपतियों के फ्लैटों में बने अवैध ढांचों को भी बीएमसी द्वारा ध्वस्त किया जा रहा है.

कानून के उल्लंघन पर बीएमसी ने साफ कर दिया है कि इमारत चाहे कितनी भी लग्जरी हो और उसमें रहने वाले लोग कितने भी रसूखदार हों, अवैध कब्जे को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

रुस्तमजी क्राउन प्रोजेक्ट में बीएमसी ने किस बात पर कार्रवाई की है?

बीएमसी ने लिफ्ट के आसपास की कॉमन और ओपन स्पेस (साझा जगह) पर 128 फ्लैट मालिकों द्वारा किए गए अवैध निर्माण और अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की है.

ध्वस्त किए जा रहे अवैध निर्माण की अनुमानित कीमत कितनी बताई जा रही है?

कब्जाई गई इस कॉमन स्पेस का कुल बाजार मूल्य 250 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है, जहाँ फ्लैट्स की कीमत 1 लाख रुपये प्रति स्क्वेयर फीट से ज्यादा है.

इस अवैध निर्माण के खिलाफ शिकायत किसने दर्ज कराई थी?

आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता संतोष दौड़कर ने बीएमसी में नियमों के उल्लंघन और लिफ्ट एरिया पर कब्जे की शिकायत दर्ज कराई थी.

बीएमसी की इस कार्रवाई की जद में कौन-कौन से प्रमुख राजनीतिक चेहरे आए हैं?

महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री संजय राठौड़, पूर्व मंत्री दीपक केसरकर, और विधायक पुत्र समाधान सरवणकर से जुड़े फ्लैट्स इस कार्रवाई की जद में आए हैं.

25/08/2026

ईरान का 'दम घोंट' देगा अमेरिका का ये नया वार, डॉलर को मोहताज हो जाएंगे मददगार

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ईरान के खिलाफ अमेरिका ने अब एक मजबूत हथियार निकाल लिया है. इससे अमेरिका ईरान और उसके साथियों पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है. अब जो भी देश, बैंक या संस्था ईरान की पैसे के लेनदेन करेगी या मनी लॉन्ड्रिंग में करेगी उसे अमेरिकी डॉलर की सिस्टम से बाहर किया जा सकता है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को ऐलान किया है.

साफ शब्दों में कहें तो इसका मतलब है कि ईरान की जो मदद जो भी देश करेगा वो देश अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा. बेसेंट ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान के लिए मनी लॉन्ड्रिंग करने वाली किसी भी संस्था को अमेरिकी डॉलर सिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कार्रवाई का समय शुरू हो चुका है.

5 क्षेत्रों पर अमेरिका की नजर
अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान की अर्थव्यवस्था से जुड़े पांच अहम क्षेत्रों को नई कार्रवाई के दायरे में शामिल किया है. इनमें डिजिटल संपत्ति, तकनीक, सोना, विमानन और समुद्री परिवहन शामिल है. यानी अगर कोई देश या संस्था इस क्षेत्र में ईरान से लेन-देने रखेगी तो उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना होगा. ईरान इन क्षेत्रों का इस्तेमाल अपनी कमजोर होती अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कर रहा है.

नई पाबंदियां हर जगह तुरंत लागू नहीं होंगी. अमेरिका ने कुछ कंपनियों और कारोबारियों को अपना रास्ता बदलने के लिए थोड़ी मोहलत देने की बात कही है. लेकिन बेसेंट ने साफ कर दिया कि यह राहत ज्यादा लंबी नहीं होगी. उनका कहना है कि कार्रवाई बहुत तेजी से आगे बढ़ेगी और अमेरिका इस बार पूरी तरह गंभीर है.
ईरान की अर्थव्यवस्था की नस दबाने की तैयारी
अमेरिका की नई रणनीति का मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था तक पहुंचने वाले पैसों के रास्ते बंद करना है. इसे ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट नाम दिया है. इससे अमेरिका दुनिया भर में ईरान को मिलने वाली हर बड़ी आर्थिक मदद की कड़ी काटना चाहता है.

अमेरिका इसे तब तक जारी रखेगा, जब तक ईरानी सरकार आर्थिक रूप से अलग-थलग नहीं पड़ जाता. बेसेंट ने यह भी चेतावनी दी कि कोई देश या कंपनियां ईरान के साथ आर्थिक कारोबार जारी रखेंगी, उन पर भी कार्रवाई का खतरा बढ़ गया है.

असली दबाव होर्मुज पर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच होर्मुज सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है. दुनिया के तेल कारोबार का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है. ईरान के साथ युद्ध को छह महीने हो चुके हैं. इस समुद्री रास्ते को फिर से खोलने को लेकर बातचीत अटकी हुई है. यही वजह है कि अमेरिका की आर्थिक रणनीति में तेल, जहाजरानी और वित्तीय लेनदेन को निशाना बनाना बेहद बड़ा कदम माना जा रहा है.

बैंकों पर भी गिरेगी गाज
नई पाबंदियों का सिर्फ कंपनियों पर नहीं हैं. अमेरिका ने साफ किया है कि बड़े वित्तीय संस्थानों को भी निशाना बनाया जा सकता है. बेसेंट ने कहा कि इसी सप्ताह के अंत तक एक बड़े वित्तीय संस्थान पर प्रतिबंध लगाए जाने की उम्मीद है. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वह संस्था कौन-सी है.
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका ने चीन के बैंकों को भी चेतावनी दी है. हालांकि चीन से अमेरिका कैसे निपटेगा इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर हैं. बेसेंट ने कहा कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले किसी भी संस्थान को अमेरिकी प्रतिबंधों को झेलना ही होगा.

25/08/2026

आखिर क्यों बदला गया राम मंदिर के स्वर्ण शिखर का धर्म ध्वज, क्या है कहानी?

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अयोध्या: धार्मिक नगरी अयोध्या में भगवान श्री राम के भक्तों के लिए एक बेहद खास और आध्यात्मिक पल सामने आया है. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के स्वर्ण शिखर पर सावन शुक्ल एकादशी के पावन अवसर पर नया धर्म ध्वज पूरी विधि-विधान के साथ फहरा दिया गया है. मंदिर के शिखर पर ध्वज परिवर्तन को लेकर देश-विदेश के श्रद्धालुओं में भारी उत्सुकता और श्रद्धा का माहौल है. जानकारों का कहना है कि मंदिर में ध्वज बदलने की यह प्रक्रिया सिर्फ बाहरी सजावट भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी सनातन परंपराएं और आध्यात्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं.

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 नवंबर 2025 को राम मंदिर के स्वर्ण शिखर पर ऐतिहासिक ध्वजारोहण किया था. इसके बाद इसी साल अप्रैल माह में चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर पहली बार मंदिर का ध्वज बदला गया था. अब सावन के पवित्र महीने में एकादशी के शुभ अवसर पर दूसरी बार नया धर्म ध्वज स्थापित किया गया है. हालांकि ट्रस्ट द्वारा ध्वज बदलने की एक नियमित अवधि तय की गई है, लेकिन इस बार विशेष तिथियों और परंपराओं के चलते निर्धारित अवधि से पहले ही ध्वज परिवर्तन किया गया है.

कैसा है राम मंदिर का नया धर्म ध्वज?
राम मंदिर के लगभग 191 फीट ऊंचे स्वर्ण शिखर पर फहराए गए इस नए धर्म ध्वज की बनावट और विशेषताएं बेहद खास हैं:
रंग और डिजाइन: नया धर्म ध्वज पूरी तरह से चमकीले केसरिया रंग का है, जो सनातन संस्कृति और ऊर्जा का प्रतीक है.
प्रतीक चिन्ह: इस पर भगवान राम के सूर्यवंश का प्रतीक ‘सूर्य चिह्न’, पवित्र ‘ॐ’ और अयोध्या का पारंपरिक राजचिह्न ‘कोविदार वृक्ष’ अंकित किया गया है.

आकार और सामग्री: उच्च गुणवत्ता वाले पैराशूट फैब्रिक से तैयार यह त्रिभुजाकार ध्वज लगभग 22 फीट लंबा और 11 फीट चौड़ा है.

तकनीक: स्वर्ण शिखर पर इसे फहराने के लिए उसी विशेष आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया, जिसका प्रयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समय ध्वजारोहण के दौरान किया गया था.

धार्मिक मान्यता और परंपरा का प्रतीक
इस ध्वज परिवर्तन के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए जानकारों का कहना है कि सनातन परंपरा में मंदिर का शिखर, कलश और उस पर फहराने वाला ध्वज बहुत ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं. चैत्र रामनवमी और सावन शुक्ल एकादशी जैसी विशेष तिथियों पर मंदिरों में ध्वज बदलने की प्राचीन परंपरा रही है. यदि मौसम के प्रभाव या किसी अन्य वजह से ध्वज का रंग फीका पड़ जाए या वह क्षतिग्रस्त हो जाए, तो उसे बदलना अनिवार्य माना जाता है.
मंदिर का यह पावन ध्वज भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा, धर्म की विजय और सनातन संस्कृति की एकता का संदेश देता है. राम मंदिर के स्वर्ण शिखर पर लहराता यह नया धर्म ध्वज श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का एक बड़ा केंद्र बन गया है.

25/08/2026

'आपको सड़क पर निकलने भी न दिया जाए' CM सुवेंदु के बयान पर ममता का पलटवार

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कथित बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी पर राजनीतिक विरोधियों को धमकाने और संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया है. ममता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सुवेंदु अधिकारी के बयान का वीडियो शेयर करते हुए सवाल किया कि आखिर किसी को यह अधिकार किसने दिया कि वह तय करे कि कोई राजनीतिक नेता अपने घर से बाहर निकल सकता है या नहीं.

ममता बनर्जी ने जिस वीडियो को शेयर किया उसमें सुवेंदु अधिकारी कथित तौर पर कहते नजर आ रहे हैं, ‘आपको सड़कों पर आने की जरूरत नहीं है और मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि आपको सड़क पर निकलने भी न दिया जाए.’
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता ने कहा कि यह सिर्फ उनके खिलाफ दिया गया बयान नहीं है, बल्कि इससे लोकतंत्र और संविधान को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

‘हाउस अरेस्ट, धमकी या राजनीतिक उत्पीड़न?’

ममता बनर्जी ने कहा कि एक मौजूदा मुख्यमंत्री ने संविधान की रक्षा की शपथ ली है, लेकिन वही मुख्यमंत्री प्रमुख विपक्षी दल की अध्यक्ष की आवाजाही की स्वतंत्रता को सीमित करने की बात कर रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे बयान का आखिर मतलब क्या है? क्या यह हाउस अरेस्ट की धमकी है, डराने की कोशिश है या राजनीतिक उत्पीड़न?

TMC प्रमुख ने पूछा कि संवैधानिक लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को यह तय करने का अधिकार आखिर किसने दिया कि कौन स्वतंत्र रूप से घूम सकता है और कौन नहीं?

‘मैं राजनीति से संन्यास नहीं लूंगी’
ममता बनर्जी ने उन अटकलों को भी खारिज कर दिया कि राजनीतिक गतिविधियों पर रोक या अनुमति न मिलने की स्थिति में वह राजनीति से संन्यास ले सकती हैं. फेसबुक लाइव के दौरान उन्होंने कहा कि जो लोग यह सोच रहे हैं कि उन्हें अनुमति न मिलने की वजह से वह राजनीति से ‘संन्यास’ ले लेंगी, वे गलत हैं. उन्होंने साफ कहा कि उनकी राजनीतिक लड़ाई जारी रहेगी और यह लड़ाई तब तक नहीं रुकेगी, जब तक बीजेपी को राजनीतिक रूप से रिटायर नहीं कर दिया जाता.

ममता ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार उन्हें राजनीतिक बैठकें करने की अनुमति नहीं दे रही है. उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार बदलने के कुछ ही महीनों में पश्चिम बंगाल की जनता ने बीजेपी का ‘असली चेहरा’ समझ लिया है.

‘डर का माहौल बनाया जा रहा है’
TMC प्रमुख ने राज्य में नागरिकों को कथित तौर पर डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मामला केवल उनके व्यक्तिगत अधिकारों तक सीमित नहीं है. उनके मुताबिक, सवाल यह है कि क्या देश में ऐसा माहौल बनाया जाएगा, जहां राजनीतिक विरोधियों को धमकाया जाए, असहमति की आवाज को दबाया जाए और संवैधानिक अधिकार सत्ता में बैठे लोगों की इच्छा पर निर्भर हो जाएं.

अभिषेक बनर्जी ने भी बीजेपी पर साधा निशाना
ममता बनर्जी के बयान के बाद TMC नेता और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भी बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जब कोई सम्मान हासिल नहीं कर पाता तो डर पैदा करने की कोशिश करता है. अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी की राजनीति में धमकी और डराने की कोशिशें उसकी असुरक्षा को ही उजागर करती हैं.

इस पूरे विवाद ने पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष की लड़ाई को तेज कर दिया है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि सुवेंदु अधिकारी या बीजेपी की ओर से ममता बनर्जी के इन आरोपों पर क्या जवाब दिया जाता है.

23/08/2026

'हमने ही मारा निज्जर', लीक ऑडियो में गोल्डी बराड़ का दावा; बताया क्यों ठोका?

KASHI MAIL

नई दिल्ली: हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर एक बार फिर बड़ा दावा सामने आया है. कनाडा में मारे गए खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या की जिम्मेदारी गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने कथित तौर पर ली है. एक लीक ऑडियो क्लिप में बराड़ को यह कहते हुए सुना गया है कि उसकी टीम ने ही निज्जर को मारा. दावा है कि उसने यह बात खालिस्तानी आतंकी परमजीत सिंह पम्मा से बातचीत के दौरान कही. बराड़ ने कथित तौर पर निज्जर पर युवाओं को नशे के कारोबार में धकेलने वाले लोगों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. हालांकि, इस ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में इसके दावे को लेकर सावधानी जरूरी है.

हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर गोल्डी बराड़ का कथित लीक ऑडियो सामने आया है.

कथित ऑडियो में गोल्डी बराड़ ने निज्जर की हत्या के पीछे की वजह भी बताई है. उसके मुताबिक, कुछ लोग 16-17 साल के युवाओं को नशे की बिक्री के लिए इस्तेमाल करते थे. वह दावा करता है कि निज्जर ऐसे लोगों को समर्थन और मजबूती देता था. बराड़ के अनुसार, इन्हीं वजहों से उसने और उसकी टीम ने निज्जर को निशाना बनाया. निज्जर की हत्या जून 2023 में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर की गई थी. इसके बाद भारत और कनाडा के रिश्तों में जबरदस्त तनाव पैदा हो गया था.

कथित बातचीत में बराड़ कहता है कि जो लोग कम उम्र के युवाओं को नशा बेचने के लिए तैयार करते हैं या उन्हें ब्लैकमेल करके इस काम में लगाते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. उसने आरोप लगाया कि निज्जर ऐसे लोगों को समर्थन देता था ताकि जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके. इसी आधार पर बराड़ ने कथित तौर पर कहा कि उसकी टीम ने निज्जर को मारने का फैसला किया. इस दावे की पुष्टि किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी या आधिकारिक स्रोत से नहीं हुई है.

निज्जर की हत्या के बाद तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने संसद में कहा था कि कनाडाई एजेंसियां हत्या और भारत सरकार के एजेंटों के बीच संभावित संबंधों के आरोपों की जांच कर रही हैं. भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें बेतुका बताया था. नई दिल्ली ने कनाडा पर खालिस्तान समर्थक तत्वों को पनाह देने का भी आरोप लगाया था.

निज्जर हत्याकांड पर अब तक क्या हुआ?
निज्जर की हत्या के बाद भारत-कनाडा के रिश्ते बेहद खराब दौर में पहुंच गए थे. दोनों देशों ने राजनयिक स्तर पर कई कदम उठाए. भारत ने अपने उच्चायुक्त और अन्य राजनयिकों को वापस बुला लिया था. हालांकि, बाद में कनाडा की जांच में भारत से जुड़े आरोपों को लेकर स्थिति बदली. पिछले महीने कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस की डिप्टी कमिश्नर लिसा मोरलैंड ने कहा था कि संगठित अपराध की जांच और दाखिल आरोपों में भारतीय अधिकारियों के शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला है.

गोल्डी बराड़ पर FBI का इनाम
गोल्डी बराड़ भारत में कई आपराधिक मामलों में वांछित है. उसका नाम पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या समेत कई मामलों में सामने आया है. अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी FBI ने पिछले महीने बराड़ की गिरफ्तारी की सूचना देने वाले को 50 हजार डॉलर तक के इनाम की घोषणा की थी. FBI ने उसे लॉरेंस बिश्नोई ऑर्गनाइज्ड क्राइम ग्रुप से कथित तौर पर जुड़ा हुआ बताया था. लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ कई अपराधों में साथ रहे हैं, हालांकि दोनों के बीच पिछले साल अलगाव की खबरें भी सामने आई थीं.

23/08/2026

FSSAI का नेस्ले, पेप्सीको और कोका-कोला पर शिकंजा, 150+ नोटिस जारी

KASHI MAIL

नई दिल्ली: नेस्ले, पेप्सीको और कोका-कोला जैसे बड़े नामों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. देश के फूड सेफ्टी रेगुलेटर FSSAI ने पिछले कुछ महीनों में खाद्य कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है. इसी कड़ी में 150 से ज्यादा नोटिस जारी किए गए हैं. मामला कथित तौर पर भ्रामक विज्ञापनों, गलत दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है. FSSAI ने शनिवार को अपनी कार्रवाई की जानकारी साझा करते हुए कई बड़ी कंपनियों के नाम भी बताए. यानी अब पैकेट पर लिखी जानकारी से लेकर विज्ञापन में किए जा रहे दावों तक, कंपनियों की निगरानी बढ़ गई है. रेगुलेटर का फोकस साफ है कि ग्राहकों तक सही और नियमों के मुताबिक जानकारी पहुंचे.

FSSAI की कार्रवाई सिर्फ बड़ी फूड कंपनियों तक सीमित नहीं रही. ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म और रेस्टोरेंट कारोबार भी इसकी जांच के दायरे में आए हैं. Amazon और Flipkart समेत ई-कॉमर्स कंपनियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं. वहीं KFC, McDonald’s, Pizza Hut, Domino’s और Costa Coffee जैसे फूड सर्विस ब्रांड्स को भी नोटिस मिले हैं. FSSAI के मुताबिक, नियमों के उल्लंघन पर कई कंपनियों के उत्पाद जब्त भी किए गए हैं. कुछ मामलों में लाइसेंस पर भी कार्रवाई हुई है. इससे साफ है कि फूड सेफ्टी और विज्ञापन नियमों को लेकर रेगुलेटर अब ज्यादा सख्त रुख अपना रहा है.

भ्रामक विज्ञापन और गलत दावों पर FSSAI की नजर

FSSAI ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में फूड बिजनेस ऑपरेटर्स के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून और उससे जुड़े नियमों के उल्लंघन पर लगातार कार्रवाई की गई है. 150 से ज्यादा नोटिस कथित भ्रामक विज्ञापनों, गलत दावों और लेबलिंग नियमों को लेकर जारी किए गए हैं. रेगुलेटर ने Nestle India, PepsiCo, Abbott India, Red Bull India, Danone India, Monster Energy India, Hell Energy, Mondelez India, Coca-Cola India, Diageo, Pernod Ricard, Ferrero India और Kenvue Inc. समेत कई कंपनियों को नोटिस भेजे हैं.

FSSAI के अनुसार कार्रवाई के दौरान कई कंपनियों के उत्पाद भी जब्त किए गए. इनमें एनर्जी ड्रिंक और अल्कोहलिक बेवरेज बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं. रेगुलेटर की कार्रवाई का मकसद खाद्य सुरक्षा, विज्ञापन और लेबलिंग से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना है. नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित कंपनी पर आरोप अंतिम रूप से साबित हो गए हैं. कंपनियों को नियमों के मुताबिक जवाब देने और जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने का मौका मिलता है.

Amazon और Flipkart समेत ई-कॉमर्स कंपनियां भी जांच के दायरे में
FSSAI ने ऑनलाइन कारोबार करने वाली कंपनियों पर भी कार्रवाई की है. रेगुलेटर ने Amazon और Flipkart समेत ई-कॉमर्स कंपनियों को 12 नोटिस जारी किए हैं. कार्रवाई के बाद Amazon के एक वेयरहाउस का लाइसेंस भी रद्द किया गया है. इससे संकेत मिलता है कि फूड प्रोडक्ट्स की ऑनलाइन बिक्री में भी नियमों का पालन अब पहले से ज्यादा सख्ती से देखा जा रहा है.

KFC से Domino’s तक, रेस्टोरेंट चेन को नोटिस
फूड सर्विस सेक्टर में भी FSSAI का शिकंजा कसा है. रेगुलेटर के अनुसार KFC, McDonald’s, Pizza Hut, Domino’s और Costa Coffee समेत फूड सर्विस प्रतिष्ठानों को 30 से ज्यादा नोटिस जारी किए गए हैं. कार्रवाई के तहत Domino’s के पांच लाइसेंस भी निलंबित किए गए हैं. यानी जांच सिर्फ पैकेट में बिकने वाले सामान तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राहकों को परोसे जाने वाले खाद्य उत्पादों और उनसे जुड़े नियमों पर भी निगरानी रखी जा रही है.

कंपनियों ने शुरू किए सुधारात्मक कदम
FSSAI ने कहा है कि नोटिस मिलने के बाद कई कंपनियों ने सुधारात्मक कदम उठाना शुरू कर दिया है. रेगुलेटर की यह कार्रवाई उसकी लगातार चल रही जांच और निगरानी अभियान का हिस्सा है. इसका उद्देश्य खाद्य कंपनियों, ऑनलाइन विक्रेताओं और फूड सर्विस कारोबार को खाद्य सुरक्षा, विज्ञापन और लेबलिंग नियमों के मुताबिक काम करने के लिए बाध्य करना है. आने वाले समय में ऐसी कार्रवाई और तेज हो सकती है.

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