07/04/2026
जगन-मोहिनी योगिनी साधना -
यह एक ऐसी योगिनी साधना है जिससे साधक एक से अधिक कई व्यक्ति-समूह को मोह लेती है। अतः किसी सामाजिक या राजनैतिक चुनाव में विजेता बनने के लिए इसकी साधना करनी चाहिए। व्यक्तिगत मोहन करने के लिए भी यह साधना उत्तम है। इस साधना द्वारा मोहन, सम्मोहन और आकर्षण होना संभव है और व्यक्ति से या समूह से मन-लायक काम लिया जा सकता है।
यह 37 दिन की साधना है और 42 वे दिन दशांश हवन कर या 37 कुंआरी लड़कियों को भोजन करा कर साधना संपन्न कर लिया जाता है। प्रतिदिन 15 माला जप करना होता है।
नए या पुराने साधक इस साधना को कर सकते हैं। जिन्हें दशांश हवन करने में कठिनाई हो वे 37 कुंआरी कन्याओं को भोजन करा सकते हैं। सभी कन्याएं भोजन से संतुष्ट हो जाएं -इस बात का ध्यान अवश्य रखें। साधना करने से पहले इस साधना की शिक्षा-दीक्षा अवश्य ले लें। साधक अपनी जन्मतिथि के अनुसार शुभ-मुहूर्त का चुनाव कर साधना आरम्भ कर सकते हैं।
इस साधना के सम्बन्ध में कोई भी बात साधना शुरू करने से पहले ही जो भी कुछ पूछना हो वह पूछ लें। साधना शुरू कर देने के बाद कोई भी बात अपने गुरु से भी न पूछें। साधना की पूर्णता के 15 दिन तक न पूछें। अधिकतर लोग इन बातों को ध्यान में नहीं रखते और चूक कर बैठते हैं जिसका परिणाम यह होता है कि साधना ख़राब जाती है या परिणाम आने में बहुत देर हो जाती है। अतः बिना कोई त्रुटि हुए साधना संपन्न करें।
साधना -विधि
आवश्यक सामग्री - लाल चन्दन , लाल हकीक की संस्कारित माला या श्वेतार्क की माला। इनमे कोई एक।
भैरव तंत्र - सुरक्षा के लिए भैरव तंत्र अवश्य धारण कर साधना आरम्भ करना चाहिए।
साधना का समय - रात 10 बजे के बाद।
आसन और वस्त्र - लाल
साधना की दिशा - दक्षिण छोड़कर कोई भी दिशा। साधक को अपनी जन्मतिथि के अनुसार साधना की दिशा तय कराना चाहिए।
साधना स्थल पर अरंडी के तेल की दीपक जलाकर साधना आरम्भ करना है। दीपक बुझे नहीं , इसके लिए पूरी सुरक्षित उपाय कर लेना चाहिए।
मंत्र-जप करने से पहले कुछ देर नदी-शोधन प्राणायाम कर लेना चाहिए।
जप शुरू करने से पहले उच्छिष्ट गणपति जी को प्रणाम करना चाहिए।
मूल मंत्र है - HREEM HOOM STREEM JAGANMOHINI HOOM TAH HREEM FATT .
ह्रीं हूम स्त्रीं जगन्मोहिनी हूम ट: ह्रीं फट
उक्त मंत्र की साधना करने के बाद साधक किसी भी व्यक्ति- समूह को अपने भाषणों के द्वारा सम्मोहित कर लेता है। सभी लोगों का आकर्षण का केंद्र हो जाता है साधक।
इस मंत्र की साधना करके इसे जागृत करने के पश्चात कई प्रकार के प्रयोग किए जा सकते है।
मंत्र दीक्षा एवं आवश्यक सामग्री प्राप्त करके गंभीरता पूर्वक साधना करने के पश्चात प्रयोग इत्यादि बताए जाएँगे एवं अन्य कुछ गुप्त प्रक्रिया ।
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