Spiritualdiscussionwithprashant

Directions Website Contact the business

Spiritualdiscussionwithprashant Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Spiritualdiscussionwithprashant, Video Creator, Varanasi.

यह पेज आप सभीको अध्यात्म के हर एक प्राचीन पहलुओं से जोड़ता है चाहे वे वैदिक हो या पौराणिक।आप सब जुड़े।

व्हॉट्स नंबर -9120096234

टेलीग्राम ग्रुप लिंक

https://t.me/shaivtantra

20/08/2026

विना देहेन कस्यापि पुरुषार्थो न विद्यते ।
तस्माद्देहधनं प्राप्य पुण्यकर्माणि साधयेत् ।।

यह सोचने की बात है कि, शरीर न रहने पर, विना शरीर के किसी पुरुषार्थ की सिद्धि नहीं हो सकती । शरीर के विना पुरुषार्थ की कल्पना भी नहीं की जा सकती । संसार में जितने भी धन हैं, उनमें सर्वोत्तम धन देह-धन है। इतना महत्त्वपूर्ण धन प्राप्त करने पर मनुष्य का यह परमकर्त्तव्य हो जाता है कि, वह पुण्य कर्मों का सम्पादन करे ॥

शक्ति उपासना एवं आचार शाक्त साधना तीन प्रकार के आचारों से की जाती है १. दक्षिणाचार, २. वामाचार एवं ३. कुलाचार। दक्षिणाचा...
08/08/2026

शक्ति उपासना एवं आचार

शाक्त साधना तीन प्रकार के आचारों से की जाती है १. दक्षिणाचार, २. वामाचार एवं ३. कुलाचार। दक्षिणाचार में समस्त वैष्णवाचार सम्मिलित है। इसमें प्रात: स्नान, दिन में पूजन, हविष्यान का भोजन, पूजन में ऊन का आसन, रुद्राक्ष माला तथा तुलसीमाला का प्रयोग, श्रौत-स्मार्त नियमों का पालन करते हुए साधना करना, पत्थर या मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग करना, ब्रह्मचर्यपूर्वक रहना, अपनी ही स्त्री से सम्भोग करना तथा मद्य से पूजन न करना।

बामाचार में स्नान-शौचादि का कोई बन्धन नहीं है। साधक सदा सभी समय में जप-ध्यानादि कर सकता है। रात्रिपूजन विशेष रूप से किया जाता है। वर्णाश्रम धर्म के पालन की कोई आवश्यकता नहीं है। नृदन्त की माला तथा नरमुण्ड के पात्र प्रशस्त हैं। धर्मादि (मृगचर्मादि) के आसन, स्त्रीकेश के कंकण तथा मदा का सेवन विहित है। मद्य-मांसादि से ही देवता का पूजन किया जाता है। साधनाकाल में अपनी स्त्री या दूसरे की ही में यह भेद नहीं किया जाता।

कुलाचार को राजयोग भी कहा जाता है। इसके पश्च मकार अन्तर्याग से सम्बन्धित हैं। इनका क्रमपूर्वक विवेचन यथास्थान किया जायेगा।

उपरोक्त तीनों आचारों को भावत्रय भी कहते हैं। दक्षिणाचार पशुभाव से सम्बन्धित है, वामाचार वीरभाव से तथा कुलाचार दिव्यभाव से सम्बन्धित है।

कालीविलासतन्त्र का कहना है

शृणु भावनयं देवि ! दिव्यवीरपशुक्रमात् ।

दिव्यश्च देववत् प्रायो वीरचोद्धतमानसः ।।

पशुभावः सदा देवि। शुद्धश्च शुचिवत् सदा ।

अर्थात् हे देवि । भावत्रय का श्रवण करो। दिव्य, बीर एवं पशु यह क्रमपूर्वक है। दिव्यभाव देववत् है, वीरभाव औद्धत्य है और पशुभाव सदा शुद्ध तथा पवित्रवत् है।

'कालीविलासतन्त्र' पशुभाव को सर्वश्रेष्ठ तथा बीरभाव को सबसे निकृष्ट मानता है; जबकि अन्य तन्त्र पशुभाव को ही निकृष्ट मानते हैं; जैसा कि 'भावचूड़ामणि' में कहा भी गया है-

भावस्तु त्रिविधो देव। दिव्यबीरपशुक्रमात् । आद्यभावो महादेव । श्रेयान् सर्वसमृद्धिदः ।।

द्वितीयो मध्यमशैव तृतीयस्सर्वनिन्दितः ।।

श्रीदेवी ने कहा- हे देव। भाव तीन प्रकार के होते हैं १. दिव्य, २. वीर तथा ३. पशु। हे महादेव! दिव्यभाव सभी प्रकार की समृद्धि प्रदान करने वाला है, वीरभाव मध्यम है तथा पशुभाव सभी प्रकार से निन्दित है।

यहाँ पर यह भी उल्लेखनीय है कि जिस तन्त्रग्रन्ध ने जिस भाव को प्रधानता दी है उसे ही श्रेष्ठ कहा है, किन्तु अधिकांश ग्रन्थ इस बात पर सहमत हैं कि पशुभाव ही सबसे निन्दित है।

अब इन सभी भावों का क्रमपूर्वक पृथक् पृथक् विवेचन किया जायेगा।

श्रीतारा महा-विद्या एक समय श्री पार्वती ने श्री शङ्कर से पूछा- सर्वेश्वर सर्व-रहस्याभिज्ञ विश्वात्मन् । वह कौन-सी विद्या...
06/08/2026

श्रीतारा महा-विद्या

एक समय श्री पार्वती ने श्री शङ्कर से पूछा- सर्वेश्वर सर्व-रहस्याभिज्ञ विश्वात्मन् । वह कौन-सी विद्या है, जिसे प्राप्त कर परम बिद्वान् व्यास मुनि ने भारतादि-ग्रंथों का निर्माण किया?'

उत्तर में श्री शंकर ने कहा हे पार्वति । श्रीतारा महाविद्या के प्रभाव से ही व्यास मुनि ग्रन्थ-रचना में समर्थ हुए थे। हे गिरि-नन्दिनि । 'तारा' महा-विद्या अज्ञान रूपी इन्धन के लिए 'अग्नि-स्वरूप' है, जिसे प्राप्त कर 'धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष' चारों पदार्थ अनायास ही मिल जाते हैं। इस विद्या के प्रभाव से कोई भी वस्तु अप्राप्य नहीं है। श्रीतारा का साधक 'काव्य-कला' में प्रवीण होकर गङ्गा-प्रवाह के सदृश कविता करता है, राजा को वश में कर रखता है, सभा में नाद उपस्थित होने पर प्रति-वादी की वाणी का स्तम्भन कर सकता है। इस विद्या के आराधन से अनेक अ‌द्भुत चमत्कार साधक में आ जाते हैं। कहाँ तक कहें, श्रीतारा-मन्त्र के ज्ञान मात्र से साधक सर्वज्ञ हो जाता है।'

श्रीतारा के अनेक मन्च तथा साधना-प्रकार हैं, तथापि तीन भेद ही मुख्य माने जाते हैं। प्रणव (ऊं), माया (ह्रीं), वधू (स्त्री), कूर्व (हूं) बौर अस्त्र (फट) अर्थात ॐ हीं स्त्री हूं फट- तारा भगवती की पंचाक्षर महा-विद्या है। 'हीं स्त्रीं हूँ इस त्रयाक्षर को 'नील सरस्वती' कहते हैं। यही 'तारा कुल्लुका' नाम से प्रख्यात है। ह्रीं स्त्रीं हूं फट' मंत्र को 'एक-जटा तारा कहते हैं। किसी-किसी के मत से 'स्त्री' बीज के स्थान पर ' त्रीं' बीज माना जाता है, परन्तु वह विद्या वसिष्ठ मुनि से शप्त होने के कारण शीघ्र फलदा नहीं है, किन्तु 'तारा-भक्ति-सुधार्णव में कहा है कि कृष्ण-अवतार होने पर यह विद्या श्राप से मुक्त हो जाएगी। इन विद्याओं के और भी कई भेद है, तथापि साधक समुदाय में इन्हीं का विशेष प्रचलन है।

'मन्त्र-महोदधि' में भी तारा के कई भेद बताए गए हैं। श्री ब्रह्मा ने भी तारा की जिस मन्त्र से आराधना की थी, उसे 'सप्ताक्षर' कहते हैं। दूसरी विद्या 'द्वादशाक्षर' है, जिसकी सिद्धि बौद्ध-मार्ग से होती है। 'सप्ताक्षर' के पाँचवें वर्ण के स्थान पर 'सौं' बीज लगाकर भगवान् बलराम ने आराधन किया था। त्रीं हूं फट् क्लीं ऐं' इस पंचाक्षर को नारायण ने जपा था। ॐ ह्रीं हूं हीं हूं फट' इस ष्डाक्षरी विद्या' को सूर्य ने अदिति को प्रदान किया था। श्री शंकर जो कहते हैं कि स्त्री हूं ह्रीं हूं फट्' इस पंचाक्षर को जप कर मैने जालंधर को मारा था।

गुरु पूर्णिमा में संपूर्ण गुरु मंडल की कृपा सभी साधकों को प्राप्त हो।आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं ।।
29/07/2026

गुरु पूर्णिमा में संपूर्ण गुरु मंडल की कृपा सभी साधकों को प्राप्त हो।आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं ।।

माधुरी साधनायह साधना उनलोगों के लिए है जो राजनीती के क्षेत्र में है। धर्मोपदेशकों, समाज के प्रमुख लोगों के लिए भी यह साध...
03/06/2026

माधुरी साधना

यह साधना उनलोगों के लिए है जो राजनीती के क्षेत्र में है। धर्मोपदेशकों, समाज के प्रमुख लोगों के लिए भी यह साधना उत्तम है। इस साधना से तीव्र सम्मोहन शक्ति उनकी वाणी में हो जाती है अतः गायकों, उपदेशकों और जनसमूह के नियंत्रकों के लिए सर्वोत्तम सिद्ध हो चूका है। यह एक परीक्षित साधना है। इसके साधक जो कुछ भी अपने ज्ञान के अनुसार कहता है उसे जनसमूह पर अच्छा और अनुकूल साबित हुआ है।

मूल-मंत्र है -

" हूम ॐ क्लीम हूम ह्रीम ऐंग क्लीम ( एक गुप्त मंत्र बीज ) हूम ॐ स्वहा "

दीक्षा लेके साधना शुरू करने के लिए संकल्पित साधक/साधिकाओं को पूर्ण मन्त्र बता दिया जाएगा।

सर्वे-प्रथम गणेश जी को सिद्धि दिलाने के लिए नमन करें। फिर, उसके बाद अपने गुरु मंत्र ( ॐ तैलंग स्वामी तुभ्यं नमः ) बोलते हुए प्रणाम करें। उसके बाद माता सरस्वती को प्रणाम करें। इतना कर लेने के बाद आप जप के लिए तैयार हैं।
साधना की शुरुआत बुधवार से करें जो सिद्ध मुहूर्त में पड़ा हो। आठ माला जप नित्य 51 दिनों तक करना है। हवनादि कर्म की आवश्यकता नहीं। जो साधक यदि हवन कर्म भी करना चाहे तो वो सफ़ेद या लाल फूलों से कर सकता है और अश्वगंध मिले जल से तर्पण-मार्जन कर सकता है। तब हवनकुंड आठ कोनों वाला हो और हवन की लकड़ी आम की हो।
इस साधना में ब्रह्मचर्य की कोई खास जरुरत नहीं है परन्तु, इसका अर्थ यह नहीं हुआ कि आप रोज सेक्स ही करें। यहाँ इस साधना में सेक्स तभी करें जब मन सेक्स के लिए विचलित हो।
इस साधना में सफ़ेद या नीले रंग की संस्कारित हकीक या मोती की माला या श्वेतार्क की माला से जप किया जाता है। इन मालाओं के अभाव में संस्कारित स्फटिक की माला का उपयोग किया जा सकता है।
साधना की दिशा पूरब रहेगी। आसन और वस्त्रों का रंग लाल या सफ़ेद या सफ़ेद लिए क्रीम कलर का हो।
यह साधना कोई भी एक निश्चित समय पर की जाए तो समय का बदलाव बार-बार न हो। साधना करने का जो समय निश्चित किया गया हो उसमे डेढ़ घंटा का आगे या पीछे होने से कोई समस्या नहीं है किन्तु, समय की सुनिश्चितता का ध्यान रखें।
इस साधना को बिना दीक्षा लिए न करें। बिना दीक्षा लिए यह साधना करने पर गरुओं का अपमान होता है और उनकी कृपा से वंचित हो जाने पर अच्छी सिद्धि न मिलने की संभावना बनी रहती है।
साधना करने से पूर्व अपने ग्रहयोगों के अनुसार ग्रह-तंत्र अवश्य धारण करें। साधनाकाल के दौरान स्थान परिवर्तन न करें। यदि करना ही पड़ जाए तो परिवर्तन करने से पहले उच्छिष्ट गणपति तंत्र धारण कर लें। उसके बाद साधना-स्थान परिवर्तन हो सकता है।
इसके साधक अपनी वाणियों द्वारा ही सभी प्रकार के जन समूह को सम्मोहित कर लेता है - परीक्षित है।

प्रमाणित एवं परीक्षित विद्या से संबंधित लेख पढ़ने हेतु टेलीग्राम चैनल लिंक

t.me/prash0702

जय माँ

माँ पराअम्बा की प्रेरणा और मेरी सेवा लेख प्रस्तुत है नए जिज्ञासुओं के मेसेज आते हैं गुरुजी हम बिल्कुल नए है हम कैसे आध्य...
31/05/2026

माँ पराअम्बा की प्रेरणा और मेरी सेवा लेख प्रस्तुत है

नए जिज्ञासुओं के मेसेज आते हैं गुरुजी हम बिल्कुल नए है हम कैसे आध्यात्मिक यात्रा शुरू करें हमे तंत्र मार्ग पर आगे बढ़ायें तो अब यह लेख पढ़ें

बड़ी बड़ी परम्परा बड़ी बड़ी पूजाओं बड़े बड़े गुरु सभी को हाथ जोड़ें और सर्वप्रथम स्वयं का अवलोकन करें,चिंतन करें।किसी भी व्यक्ति के अंदर साधना संस्कार हैं तो वह संस्कार किसी ना किसी कारण से उदय अवश्य होगा।
अब जब यह संस्कार का उदय हो तो मन विचलित होता है लेकिन इस विचलन को बनाये रखते हुए संतुलन आवश्यक है क्योंकि इसी समय व्यक्ति जल्दबाजी में तंत्र के ऊलजलूल मार्ग में फँस जाता है और फिर एक लंबा समय व्यतीत करके वापस से शुरू से शुरू करता है खैर यह सब प्रारब्ध का ही एक हिस्सा है।
क्या करें सबसे प्रथम जब मन विचलित हो तंत्र मार्ग में प्रवेश करने हेतु और आप बिल्कुल नए हैं आपको कुछ नहीं समझ आ रहा।
प्रथम मार्ग है प्रार्थना जिस भी मंदिर ,पीठ ,देवी देवता में आपका आकर्षण हो आपका भाव हो उनकी तरफ़ बढ़ें उनके पीठ इत्यादि पर जायें एवं उनसे प्रार्थना करें की आपके गुरु एवं आपके इष्ट की तरफ़ जाने वाले मार्ग पर आपको आगे बढ़ाये।यह प्रार्थना आपके खोज से ज़्यादा प्रभावी होता है क्योंकि खोज भी सही दिशा में हो यह आपकी प्रार्थना की शक्ति से आती है।
प्रथम कार्य तो बता दिया आप सभी को जो की प्रार्थना है अब द्वितीय कार्य पर आते हैं जो है छोटे छोटे संकल्प जैसे मन लीजिए आप ने संकल्प लिया की मैं ३ माह तक नित्य १५। मिनट सिर्फ एक आसन पर बैठूँगा रीड की हड्डी सीधी करके अब ये एक संकल्प बन गया आपके लिए अब इस संकल्प के लिए अपने आपको झोंक दें।जैसे ही आप एक संकल्प पूर्ण करते हैं आपके अंदर एक अद्भुत शक्ति का उदय होता है और आप साधना तंत्र के मार्ग में पहली सीढ़ी चाहेंगे है ऐसे ही कभी संकल्प लिया किसी पाठ स्तोत्र इत्यादि का और उसे पूरा किया यहाँ से असल में आपका अभ्यास शुरू होता है अभी मैंने शृंखला शुरू कर दी है अपने लेखों की जिसमे मैं अपने अनुभव ,साधना की यात्रा एवं वर्षों का निचोड़ आपको सरल भाषा में यहाँ देता रहूँगा यह आप सभी को निश्चित रूप से अंदर से तैयार कर देगा और जो अनुभवी साधक होंगे उनकी भावनाए भी इन लेखों में उन्हें प्रत्यक्ष दिखेगी।

यह सभी लेख पूर्णतः मेरे द्वारा लिखे गए हैं ना ही किसी के शब्द है ना ही किसी की कॉपी यह अनुभव है जिसे शब्दों में उतारने की चेष्टा माँ तारा की प्रेरणा से कर रहा हूँ।मैं ज़्यादा समय नहीं दे पाता की वीडियो इत्यादि बना पाऊ अतः यह एक मार्ग निकाला है की कम से कम मेरे लेख ही प्रकाश का कार्य करें जहाँ तक पहुँचें वहाँ ज्ञान का प्रकाश फैलाए।

विशेष प्रामाणिक तंत्र विषयक ज्ञान हेतु टेलीग्राम से जुड़ें टेलीग्राम लिंक

t.me/prash0702

जय माँ

मेरे बहुत शिष्य एवं साधक मित्र पूछते रहते है ध्यान गहरा कैसे हो महीने हो गए वर्ष हो गए लेकिन वो संतुष्टि नहीं है जो ध्या...
30/05/2026

मेरे बहुत शिष्य एवं साधक मित्र पूछते रहते है ध्यान गहरा कैसे हो महीने हो गए वर्ष हो गए लेकिन वो संतुष्टि नहीं है जो ध्यान को गहराई में मिलनी चाइए

आइए चर्चा करते हैं

धारणा इष्ट पर गहरी करें ध्यान गहरा होता जाएगा।एक समय आयेगा इष्ट प्रत्यक्ष भी होंगे और फिर स्वयं के स्वरूप लोक करके आपको ध्यान की पराकाष्ठा पर भी पहुँचा देंगे।इष्ट पर धरना गहरा हो इसके लिए आपका इष्ट से प्रेम ,जुड़ाव ,भक्ति का गहरा होना आवश्यक है यह जुड़ाव आपके पूर्व के संस्कारों से आपका अंदर बीज रूप में उपस्थित रहता है और यदि आप साधना के लिए ब्रह्मांड द्वारा चुने गए हैं तो जीवन अचानक कोई ऐसी घटना क्रम होगा जिससे स्वतः ही आप अपने इष्ट की तरफ़ भागेंगे हालाँकि तुरंत ही अपने इष्ट अथवा गुरु का मिलना भी नहीं हो पाता व्यक्ति आकर्षण में सहायक देवी देवताओं के इर्द गिर्द घूमते घूमते अपने इष्ट तक पहुँचता है।इस यात्रा के दौरान कई अच्छे बुरे अनुभव कई अन्य प्रकार के संघर्ष ,मन के विभिन्न उलझनों का सामना करता जाता है और यदि साधक धैर्य,समर्पण और संकल्प का धनी है तो वो समय आता है जब वह आयाम खुलता है जो सामान्य व्यक्ति के समझ ,तर्क से परे है।आपके इष्ट का आपके जीवन में प्रवेश होता है यही वो समय है जिसे कहा गया है की साधक का दूसरा जन्म और यहाँ से होती है आपकी धारणा पुष्ट और भी ध्यान स्वतः ही पुष्ट होने लगता है।
खैर आप अपना अभ्यास जारी रखें और अपने मंत्र ,गुरु और इष्ट पर विश्वास रखें सब स्वतः होगा।
आ गए हैं साधना मार्ग पर फिर जाएँगे कहा ।

सारे लेख मेरी अनुभूति अंतरात्मा की आवाज से जुड़ी हुई है और हम सब ब्रह्मांडीय नियम के अंतर्गत एक दूसरे से जुड़े है तो हो ही नहीं सकता की ये लेख आप सब के हृदय तक ना पहुंचे अतः अपनी यात्रा पर काम करते जाए।

टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े और जुड़ें एक वृहद आध्यात्मिक एवं तांत्रिक गहन शोध से
टेलीग्राम लिंक -

t.me/prash0702

जय माँ
शाक्त उपासना मार्ग

महागुरुओं की कृपा और शक्ति अक्सर हमारे शिष्य जन एवं उनसे जुड़े हुए लोग जो कुछ ना कुछ परेशानी में होते हैं वो हमसे मिलने ...
29/05/2026

महागुरुओं की कृपा और शक्ति

अक्सर हमारे शिष्य जन एवं उनसे जुड़े हुए लोग जो कुछ ना कुछ परेशानी में होते हैं वो हमसे मिलने आते हैं हालांकि मेरा मिलना किसी से ज़्यादा नहीं हो पता क्योंकि समय साधना में ज़्यादा लगने के वजह से मेरी व्यस्तता नित्य बनी रहती है फिर भी ३-४ महीने से लगातार कोई पीछे पड़ा हो तो भगवती की प्रेरणा से मुँह से निकल जाता है की ठीक है आ जाइए मिलने के लिए लेकिन मैं ज़्यादा समय नहीं दे पाऊँगा अतः किसी ना किसी तरह से लोगो का आना जाना लगा रहता है जिसमे दीक्षा एवं साधनात्मक मार्ग पर अग्रसर होने वाले कम और परेशानियों से घिरे व्यक्ति ज़्यादा होते है और उचित भी है व्यक्ति कहीं तो जायेगा ही परेशानी से बाहर निकलने हेतु और मेरा काम भी है भगवती की प्रेरणा से जो कुछ कर सकू उनके लिए करना इसी क्रम में जिस सोसाइटी में मैं रहता हूँ वहाँ किसी को पता चल गया की एक साधक यहाँ रहते है तो वो अपने बच्चे को ले कर पहुँच गयीं । उनके बच्चे की गर्दन हर १५-२० सेकेंड के बाद स्वतः से नृत्य करने जैसा हिला करती थी मतलब गर्दन हर २० सेकेंड के बाद अपने आप हिलती रहती है बहुत जगह इलाज करा लिए लेकिन पता नहीं चल रहा था की क्या हुआ है मेरे पास आए तो मैंने देखा अब समझने की बात ये है की हजारो लाखो तरह की परेशानियां होती है और हर परेशानी का कोई निश्चित इलाज किसी साधक को नहीं पता होता सिर्फ इष्ट की प्रेरणा से ही कुछ किया जा सकता है।मेरा विश्वास ऐसी किसी भी स्थिति में अपने मन में आ रहे तरंगों विचारो पर होता है एयर वही मेरी इष्ट की प्रेरणा होती है।अब इस तरह की समस्या में मेरे मन जो विचार आया वो मैं बताता हूँ माँ तारा के फोटो के पास हमने एक कमल का फूल चढ़ाया हुआ था जो की लंबी डंडी के साथ था वह कमल का फूल उठाया और बहुत लंबे समय से महागुरु तैलंग स्वामी का एक मंत्र मैं जो जपता रहता था वो जपते हुए और उनका स्मरण करते हुए उसके गर्दन पर तीन बार वह कमल के फूल से मारा और बोला कि जाओ कल बताना क्या है कुछ आराम है कि नहीं वो दिन है और आज का दिन है कई महीने हो गए वह परेशानी उसकी जड़ से खत्म हो गई पता ही नहीं चला की क्या हुआ तो अब मैं बताता हूँ महागुरु तैलंग स्वामी का वो मंत्र और विधान

गुरु पूर्णिमा विशेष -

हूम हूम हूम अघोर सिद्धि देहि -देहि तैलंग स्वामी की आन फुरो आगम मेरी भक्ति स्वामी की शक्ति फुरो मंत्र महागुरु शिव वाचा।

माला रुद्राक्ष ,

दिशा पूरब और दक्षिण की कोण की ओर होकर।

सरसों के तेल की दीपक जलाकर , पांच माला जप 7 दिन करना है। हवन की जरुरत नहीं।

आसन - काला हो।

यह कार्य हर महीने करना है 15 माह तक।

प्रमाणिक जानकारी एवं मार्गदर्शन हेतु टेलीग्राम ग्रुप लिंक

t.me/prash0702

जय माँ
शाक्त उपासना मार्ग

शक्ति प्रत्यक्षीकरण यदि मान लिया गया की कृपा संभव है लेकिन देव एवं अन्य योनि की शक्तियां किसी का भी प्रत्यक्षीकरण नहीं ह...
28/05/2026

शक्ति प्रत्यक्षीकरण

यदि मान लिया गया की कृपा संभव है लेकिन देव एवं अन्य योनि की शक्तियां किसी का भी प्रत्यक्षीकरण नहीं हो सकता तो क्षमा करें आप कृपा पात्र के योग्य हो सकते हैं लेकिन शक्ति का प्रत्यक्ष सानिध्य कभी प्राप्त नहीं कर सकते।
साधक जान सधाये करते हैं ख़ुद पर बिना काम किए हुए बिना ख़ुद को तैयार किए हुए सीधा मंत्र जाप और मन में ढेर सारे शंका की कुछ काम बन जाए और यदि किसी से सुन लिया की शक्ति प्रत्यक्ष होती है तो बिना विश्वास बिना समर्पण बिना पागलपन सिर्फ़ ऐसा सोच लेना की ५१,१०० दिन में आड़े तिरछे जैसे तैसे जाप कर लेने से शक्ति प्रत्यक्ष हो जाएगी तो ये बहुत बड़ी भूल है और ऐसे ही लोग फिर आगे चल कर बोलते है बहुत साधनाएँ की लेकिन प्रत्यक्षीकरण जैसा कुछ नहीं होता।अरे भाई आपने सधनाये नहीं की आपने सिर्फ़ मजाक किया क्योंकि आप कभी तैयार थे ही नहीं ना आपने कभी आत्मसात किया था प्रत्यक्षीकरण के विज्ञान को सिर्फ़ आज़माया अपने मनोरथ को पूर्ण करने के साथ साथ सोचा की अगर प्रत्यक्ष भी हो जाए तो और आनंद उस चक्कर में कुछ ना हुवा।

प्रत्यक्षीकरण के प्रमुख मूल बिंदु है

इष्ट अथवा जिनकी साधना कर रहे हैं उनके प्रति पूर्ण समर्पण भाव ,कोई तर्क दिमाग में ना रहे की यदि भाव है सेवा है तो देवता प्रत्यक्ष भी होंगे ऐसा दृढ़ संकल्प होना चाहिए। एक ही शक्ति के पीछे पूर्ण समर्पण से लगे रहें।आज कल तो साधक जन पूछते है ३३ दिन साधना हवन कर लिया गुरु जी कितने दिन में प्रत्यक्षीकरण हो जाएगा यह मूर्खतापूर्ण प्रश्न है।रामकृष्ण परमहंस ,गुरुदेव बामा खेपा ने अपने आराध्य को कभी प्रतिमा समझा ही नहीं जीवित चैतन्य सत्य समझा और एक लंबे धैर्य,भावात्मक आवेश एवं कठिन तप से अपने आराध्य का प्रत्यक्षीकरण प्राप्त किया | यह मात्र एक प्रत्यक्षीकरण नहीं था यह सभी तर्क से परे एक साधक की प्रगाढ़ भावना ,प्रेम,समर्पण ,तप और एक लंबा इंतज़ार था जिसने साबित किया कि पराम्बा भी प्रत्यक्ष सामने आकर खड़ी होती हैं।
आज कल तो कुछ दिन शक्ति की साधना की साथ ही साथ अलग अलग तरह के पाठ फिर उसके साथ ही अलग अलग स्वरूपों पर अपनी इक्षा अनुसार अलग अलग आकर्षण और एकनिष्ठ प्रेम तो विरले ही करते है किसी एक स्वरूप में रम कर और ऐसे विरले ही प्राप्त करते प्रत्यक्षीकरण।

प्रमुख मार्गदर्शन एवं प्रामाणिक जानकारी हेतु टेलीग्राम ग्रुप लिंक

t.me/prash0702

जय माँ
शाक्त उपासना मार्ग

असीम शक्ति से बदले जीवन -अक्सर मेरे पास ऐसे कॉल या मेसेज आते हैं जिनसे बात करके मैं उनका ऊर्जा को पढ़ता हूँ और यह ज्ञात ...
26/05/2026

असीम शक्ति से बदले जीवन -

अक्सर मेरे पास ऐसे कॉल या मेसेज आते हैं जिनसे बात करके मैं उनका ऊर्जा को पढ़ता हूँ और यह ज्ञात हो जाता है की उनकी स्थिति कैसी है आत्मविश्वास शून्य,एकाग्रता की कमी,लगातार नकारात्मक विचारो से घिरे रहना, प्रमाद में रहना ना काम करने की इक्षा ना कुछ करने की लेकिन ऐसे में जब अति हो जाता है तो वे ढूँढते है की इससे बाहर कैसे निकले ऐसे में मैं बात करते समय ही भाँप जाता हूँ की इनके साथ क्या स्थिति बनी हुई है।इन सब के साथ ही साथ जो रोजगार हेतु प्रयासरत हैं किसी महत्वपूर्ण कंपीटिशन की तैयारी कर रहे हैं उन्हें भी जिस स्तर की ऊर्जा अपने अंदर चाहिए वह बहुत कम लोगो के अंदर दिखायी देती है।अतः ऐसे में मैंने अधिकतर लोगो को एक प्रयोग दिया और इसके अद्भुत परिणाम सामने आए।इसमें एक उदाहरण एक विद्यार्थी की भी है जो आईएएस की तैयारी में प्री और मेन्स निकालने के बाद इंटरव्यू में छाँट दिए जा रहे थे जब लास्ट एटेम्पट बचा तो कहीं से ढूँढते ढाँढते हुए उन्हें मेरा नम्बर प्राप्त हुआ और यही प्रयोग उन्हें भी बताया गया जिसके बाद उन्होंने आईएएस क्रैक किया और अच्छे पद पर अभी बने हुए हैं।कुछ राजनैतिक लोग भी इस प्रयोग से स्वयं को अच्छे पद पर आसीन कर सके।

आइए नीचे जानते है इस आसान और सभी के लिए उपयुक्त इस प्रयोग के विषय में

सर्वप्रथम एक आसन पर रोज़ रीड की हड्डी सीधी करके कम से कम १५ मिनट तक स्थिरता से बैठने का अभ्यास करें जब आपकी शारीरिक स्थिरता बनने लगे और मन विचारशून्य होना शुरू हो उस समय आप सभी को प्रातः सूर्योदय के समय कुछ समय सूर्य के समक्ष एक प्रक्रिया से गुजरना है।

आईय जानते है -

स्थिरता से सूर्योदय के समय ऐसे स्थान पर बैठें जहाँ सूर्य उगते हुए दिखें कुछ देर तक सूर्य को इस स्थिति में देखें उगते हुए एवं धीरे धीरे स्वांस ले और बाहर निकाले अनुभव करें कि आपके अंदर आपके नाक से दिव्य प्राण ऊर्जा आपके अंदर धीरे धीरे प्रवाहित हो रही है जो पूरे शरीर मे फैल रही है और धीरे धीरे स्वास बाहर निकालते समय महसूस करें कि अंदर के सभी नकारात्मक,सभी दुख/ईर्ष्या/द्वेष/अहंकार रूपी दूषित ऊर्जाएं बाहर निकल रही है।अपने आपको आनन्दित और हल्का महसूस करें जैसे कोई भार अंदर से निकल रहा हो। यह सब प्रक्रिया करते समय स्थिर और रीढ़ की हड्डी सीधी करके बैठें।
स्वांस लेना और बाहर छोड़ना इसे एक क्रिया मानी जायेगी ऐसा कम से कम 21 बार करें।

अब आंखें बंद कर लें आपने दाहिने तरफ के नाक को दबाएं एवं बाएं तरफ के नाक से धीरे धीरे स्वांस लें इस स्वांस के साथ प्रातः की सूर्य की किरणों का प्रवेश बाए तरफ के नाक से अंदर जाते हुए सजग रूप से महसूस करें।स्वास लेते समय 6 सेकेंड में पूरी तरह स्वांस भर लें और दोनो नाकों को बंद करके स्वांस को 24 सेकेंड के लिए रोक दें इस स्थिति में अनुभव करें कि आपके अंदर यह ऊर्जा का भंडार आपके सभी नाड़ी,सभी शरीर के अवयवों को ऊर्जा से भर रहा है आपके मस्तिष्क को ज्यादा सजग और तीव्र कर रहा है फिर 24 सेकेंड स्वांस रोकने के बाद दाहिने नाक से 12 सेकेंड में धीरे धीरे पूरी स्वांस बाहर निकाल दें इस निकलती हुई स्वास के साथ सम्पूर्ण नकारात्मक भाव वाली सभी ऊर्जाएं जिससे आपका आत्मविश्वास कमजोर होता है उसे बाहर निकलता हुआ महसूस करें।अब दाहिने नाक से स्वांस लें ,स्वास रोके,और स्वास को बाहर निकाले ठीक जैसे आपने ऊपर किया है उसी प्रकार।
बाए से स्वांस लेना ,रोकना,दाहिने नाक से बाहर निकलना पुनः दाहिने से स्वांस लेना,रोकना, और बाएं से बाहर निकालना यह एक क्रिया हुई ऐसी आपको 15 क्रियाएं करनी है।

इसके बाद शांत,आनन्दित,ऊर्जा से भरे हुए स्वयं को शांत मन से स्थिरता के साथ ध्यान में बैठे रहने दें और कम से कम 21 बार नीचे दिए गए सूर्य गायत्री मन का मन ही मन जप करें।

ॐ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयत।।

जिन्हें किसी भी प्रकार की स्वांस की परेशानी हो अथवा हृदय के मरीज हो वे स्वांस रोकने की प्रक्रिया न करें।केवल स्वांस एक तरफ से लें और दूसरी तरफ से बाहर निकाले ऊपर बताये गयी प्रक्रिया अनुसार।

यह अद्भुत शक्ति का आपके अंदर संचार करता है ।इससे निम्न परिवर्तन आपके अंदर आते है -

★ आपके अंदर चेतना का विस्तार होता है।
★ पहले से ज्यादा सजग होते जाते हैं।
★ यादाश्त तेज होती जाती है और मंद बुद्धि स्वस्थ्य होने शुरू ही जाती है।
★ दिमाग ज्यादा विश्लेषण करने योग्य हो जाता है और जल्दी थकता नही।
★ आध्यात्मिक स्तर पर जो सजगता आपको चाहिये वो प्राप्त होती है।
★ भय का नाश और आत्मविश्वास की वृद्धि।
★ किसी भी प्रकार की डिप्रेशन, अनिद्रा,एंजायटी और अन्य बहुत से परेशानियों में आराम मिलता है।
★ इंट्यूशन शक्ति बढ़ती जाती है जिससे किसी भी परिस्तिथि, व्यक्ति एवं घटनाओं के प्रति ज्यादा सजग होने शुरू हो जाते है।

अन्य अनेको अनुभव है जो व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है।

आपको बता दु एक सन्यासी दुर्लभ योगी द्वारा यह क्रिया का अभ्यास किया जाता था जिनका नाम मैं यहां नही लूंगा और वे अपने योग बल के लिए काफी प्रसिद्ध थे।

मैंने २०२० में यूट्यूब पर सार्वजनिक रूप से योग सिद्धि का प्रमाण दिया था जिसमे एक साथ ही विभिन्न जगहों पर बैठे कई लोगो को ध्यान में बैठा का उन सभी के साथ एक ही समय पर मैंने लिंक स्थापित किया था वह इसी के अभ्यास से मानसिक शक्ति के विकास से संभव हुआ खैर यह सब बातो का कोई अर्थ नहीं बस आप सभी को इसका महत्व बताने हेतु और आप सब इसे जीवन में उतार कर इसका लाभ ले सकें इसके हेतु यह सब बताया।अतः इसका आप सब लाभ लें और जीवन में बदलाव लाए ।

ऐसे अनेकों विशेष जानकारी एवं मार्गदर्शन हेतु टेलीग्राम लिंक पर क्लिक करके टेलीग्राम चैनल में जुड़ सकते हैं

t.me/prash0702

जय माँ

Address

Varanasi
221002

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Spiritualdiscussionwithprashant posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Spiritualdiscussionwithprashant:

Shortcuts

Share

Category