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ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत देश भर में पांडुलिपियों को सूचीबद्ध करने के साथ ही युवाओं को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। ...
15/04/2026

ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत देश भर में पांडुलिपियों को सूचीबद्ध करने के साथ ही युवाओं को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। इसी कड़ी में जयपुर में 21-दिवसीय लिपि प्रशिक्षण कार्यशाला का किया जा रहा है, यह कार्यशाला ३ मई 2026 तक चलेगी जिसमें युवाओं को विशिष्ट प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, ताकि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पांडुलिपियों की खोज एवं उनके डॉक्यूमेंटेशन का कार्य सुचारू रूप से हो सके। अधिक जानकारी के लिए देखें- https://gyanbharatam.com/

डॉ. अम्बेडकर की वैचारिक विरासत और इलाहाबाद संग्रहालय की ऐतिहासिक प्रदर्शनीभारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर का व्यक्तित्व भा...
15/04/2026

डॉ. अम्बेडकर की वैचारिक विरासत और इलाहाबाद संग्रहालय की ऐतिहासिक प्रदर्शनी

भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर का व्यक्तित्व भारतीय इतिहास में एक ऐसे प्रकाशस्तंभ के रूप में स्थापित है, जिसने सामाजिक अन्याय, असमानता और शोषण के विरुद्ध संगठित वैचारिक एवं संवैधानिक संघर्ष का नेतृत्व किया। उनका जीवन केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों की कहानी नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक परिवर्तन का सशक्त दस्तावेज है। उनकी 135वीं जयंती के अवसर पर इलाहाबाद संग्रहालय द्वारा आयोजित विशेष प्रदर्शनी इसी ऐतिहासिक विरासत को प्रमाणिक दस्तावेजों और समकालीन समाचार पत्रों के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है।

वर्ष 1956 में प्रकाशित द टाइम्स ऑफ इंडिया (समाचार पत्र भारत) तथा नेशनल हेराल्ड (राष्ट्रीय संदेश पत्र) के लेख इस प्रदर्शनी को और अधिक ऐतिहासिक गहराई प्रदान करते हैं। “अम्बेडकर रिप्लाई” में उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि “कास्ट इज नॉट मर्ली ए डिवीजन ऑफ लेबर, इट इज ए डिवीजन ऑफ लेबरर्स (जाति प्रथा केवल श्रम का विभाजन नहीं है, बल्कि यह श्रमिकों का विभाजन है)”। इस कथन के माध्यम से उन्होंने जाति व्यवस्था की जटिलता और उसके दुष्परिणामों को उजागर किया। उनके अनुसार, जब तक समाज में इक्वालिटी (समानता मूल्य), लिबर्टी (स्वतंत्रता अधिकार) और फ्रैटरनिटी (बंधुत्व भावना) की स्थापना नहीं होती, तब तक लोकतंत्र अधूरा रहेगा।

इलाहाबाद संग्रहालय द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी केवल दस्तावेजों का संकलन नहीं है, बल्कि उस दौर की वैचारिक चेतना का जीवंत प्रतिबिंब है। यह दर्शाती है कि डॉ. अम्बेडकर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और समाज को दिशा प्रदान करते हैं। यह प्रदर्शनी हमें आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है कि क्या हम वास्तव में उन मूल्यों को अपने जीवन में उतार पा रहे हैं, जिनके लिए डॉ. अम्बेडकर ने संघर्ष किया था। उनकी जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि एक संकल्प है—एक ऐसे समाज के निर्माण का संकल्प, जहाँ सामाजिक न्याय, समानता और मानव गरिमा की सच्ची स्थापना हो सके।

वैशाख संक्रांति की दुपहरी में जब सूर्य मीन से मेष राशि में प्रवेश कर तपिश बढ़ा देता है, उसी समय बिहार की मिट्टी सतुआन के...
15/04/2026

वैशाख संक्रांति की दुपहरी में जब सूर्य मीन से मेष राशि में प्रवेश कर तपिश बढ़ा देता है, उसी समय बिहार की मिट्टी सतुआन के रूप में प्रकृति, संस्कृति और स्वास्थ्य का अद्भुत उत्सव मनाती है। यह लोकपर्व नई फसल, सूर्योपासना और जल व अन्न के प्रति कृतज्ञता का पर्व है।

भुने चने से बना सत्तू प्रोटीन, फाइबर और लौह सहित अनेक आवश्यक पोषक तत्त्वों से भरपूर होता है, जो पाचन सुधारने, ऊर्जा देने और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करने में सहायक है। गर्मी के मौसम में पानी के साथ लिया गया सत्तू शरीर के द्रव और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बनाए रखकर स्वाभाविक ‘कूलेंट’ की तरह काम करता है और लू व निर्जलीकरण के जोखिम को घटाता है।

सतुआन हमें सिखाता है कि हमारे उत्सव मात्र आडंबर नहीं बल्कि ऋतु–चक्र के अनुरूप जीवन–शैली, संतुलित आहार और प्रकृति के प्रति आभार का वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगम है।

ग्रीष्म ऋतु के स्वागत और प्रकृति से जुड़े लोकपर्व सतुआन की ढेरों शुभकामनाएं!

#सतुआन #सतुआनी #बिहार #स्वास्थ्य_और_संस्कृति

Chhath puja
12/04/2026

Chhath puja

Jain dharma
12/04/2026

Jain dharma

Jawaharlal Nehru (in cap) along with BV Wagh, the sculptor (3rd from right) glances at the bust of Mahatma Jyotiba Phule...
12/04/2026

Jawaharlal Nehru (in cap) along with BV Wagh, the sculptor (3rd from right) glances at the bust of Mahatma Jyotiba Phule, after unveiling it during the inauguration of Mahatma Phule Tantrik Vidyalaya in Bombay on December 27, 1963.

12/04/2026

कर्मनवीर बाबा मंदिर ,काशी हिन्दू विश्वविद्यालय #बनारस

 ? Trutiya Ratna, a play written by Jyotiba Phule in 1855, refers to education and knowledge as the third jewel, highlig...
12/04/2026

? Trutiya Ratna, a play written by Jyotiba Phule in 1855, refers to education and knowledge as the third jewel, highlighting their crucial role in combating social evils of inequality & injustice.



PMO India Press Information Bureau - PIB, Government of India Gajendra Singh Shekhawat Rao Inderjit Singh MyGovIndia Amrit Mahotsav

11/04/2026
सुप्रसिद्ध सरोद वादिका विदुषी शरण रानी प्रथम महिला थीं, जिन्होंने सरोद जैसे साज़ को संपूर्ण ऊँचाई प्रदान की। प्रशंसक उन्...
09/04/2026

सुप्रसिद्ध सरोद वादिका विदुषी शरण रानी प्रथम महिला थीं, जिन्होंने सरोद जैसे साज़ को संपूर्ण ऊँचाई प्रदान की। प्रशंसक उन्हें 'सरोद रानी' के नाम से पुकारते थे। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को विदेशों मे लोकप्रिय बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जयंती पर सादर नमन🙏

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भारत मे पारसी इतिहास
09/04/2026

भारत मे पारसी इतिहास

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