28/12/2023
🪕🚩श्री हनुमान वायु गमन साधना:-❤️🔱
विषेश सूचना:-
यहां पर इन्होंने हनुमान वायु गमन सिद्धि के बारे में बताया है। जब भी इस तरह की - कोई साधना करें तो पूरी तरह से एकाग्र चित्त होकर। भगवान हनुमान में पूरा विश्वास रखते हुए अपने अंतरात्मा में किसी अन्य वस्तु का विचार ना करते हुए ही करनी चाहिए और ऐसी साधनाओं में अगर आपको क्रोध आता है तो अपने क्रोध को काबू करने के लिए सभी प्रकार । के प्रयोजन करने आवश्यक होते हैं। क्योंकि जब भी आप हनुमान साधना करते हैं, आपके अंदर क्रोध का भाव बढ़ जाता है। इससे मुक्त होना अति आवश्यक है अन्यथा आपकी साधना में आपको सफलता प्राप्त नहीं होती है।
इसके अलावा हनुमान जी की साधना विषयक जितने भी नियम है उन सब का आपको पालन करना अनिवार्य होता है और साथ ही साथ हवन अवश्य करें। तभी आपकी साधना का फल आपको प्राप्त होगा। वरना आपकी साधना मे सिद्धि प्राप्ति नहीं होती है और भौतिक! जितने भी सुख होते हैं, वह नहीं मिलते। इसलिए जब भी साधना करें उसका दशांश हवन अनिवार्य रूप से करें। यहां पर भी हनुमान जी की साधना में आपको एकांत शुचिता और ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन करना अनिवार्य है।❤️🔱
मंत्र:-
"ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते प्रलयकलानलप्रभाज्वलत्तापवज्रदेहाय अंजनीगर्भसम्भूताय प्रकटविक्रमवीरदैत्य- दानवयक्षराक्षसग्रहनाय भूतग्रह- प्रेतग्रहपिशाचग्रहशाकिनीग्रहदाकिनीग्रह- काकिनीग्रहकामिनीग्रहब्रह्माग्रहब्रह्मराक्षसग्रह- सूर्यग्रहनाय एहि एहि अग्निआच्छाघगच्छ- आवेष्यावेषाय मम हृदयं प्रवेशय प्रवेश सबंधाय स्फुर प्रस्फुर प्रस्फुर सत्यं कथय कथय व्याघ्रमुखं बंधय बंधय सर्पमुखं बंधय राजमुखं बंधय बंधय सभामुखं बंधय बंधय शत्रुमुखं बंधय बंधय सर्वमुखं बंध्य बंधाय लंकाप्रसादभंजन सर्वजनं मे वशमानय वशमानय श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सर्वनाकराय आकर्षय शत्रुं मार्मय मरय मारय मारय नक्षत्रय खे खे खे श्रीरामचन्द्राज्ञया प्रज्ञया मम कार्यसिद्धि कुरु कुरु मम शत्रून् भस्मी कुरु कुरु स्वाहा ॥ ॐ ह्रां ह्रीं हूं हैं हों ह्रः फट् श्रीविचित्रवीरहनुमते मम सर्वशत्रून् भस्मी कुरु कुरु हन हन हूं फट् स्वाहा"॥
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