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27 नक्षत्रों के वृक्ष27 Nakshatra based Tree | नक्षत्र राशि तथा ग्रह के लिए निर्धारित पेड़ पौधे 27 Nakshatra based Tree |...
01/08/2024

27 नक्षत्रों के वृक्ष
27 Nakshatra based Tree | नक्षत्र राशि तथा ग्रह के लिए निर्धारित पेड़ पौधे


27 Nakshatra based Tree | नक्षत्र राशि तथा ग्रह के लिए निर्धारित पेड़ पौधे
Astrology, Planet / By Dr. Deepak Sharma
27 Nakshatra based Tree | नक्षत्र राशि तथा ग्रह के लिए निर्धारित पेड़ पौधे27 Nakshatra based Tree | नक्षत्र राशि तथा ग्रह के लिए निर्धारित पेड़ पौधे | वृक्ष प्रकृति की अनमोल उपहार है यह हमारे पर्यावरण तथा मानव जीवन का संरक्षक है। जिस प्रकार प्रत्येक मनुष्य की अपनी विशेषता है उसी प्रकार प्रत्येक वृक्ष की अपनी विशेषता है। वस्तुतः इस पृथिवी पर यदि वृक्ष न हो तो हमारा जीवन खतरे में पड़ जाएगा। यह हम सभी जानते है वृक्ष हमें आक्सीजन प्रदान करता है और आक्सीजन के बिना मनुष्य जीवित नहीं रह सकता। इसी कारण वैदिक साहित्य में “वृक्ष पूजन” का स्पष्ट निर्देश दिया गया था जो आज भी विराजमान है चाहे वह अंधविश्वास के रूप में ही सही वृक्षो की पूजा की जाती है। इसका मुख्य श्रेय हमारे ऋषि मुनियो, पौराणिक परम्परा, यज्ञ आदि के लिए निर्धारित सामग्री में निश्चित लकड़ी का प्रयोग तथा आज के ज्योतिष शास्त्री को जाता है।

ज्योतिष शास्त्र में वृक्ष की पूजा का विधान है यदि कोई जातक बहुत परेशानी में है चाहे व्यापार से सम्बंधित हो, संतान से, दाम्पत्य जीवन से आदि आदि तो ज्योतिषी जन्मकुंडली के आधार पर यह जानने का प्रयास करता है की किस ग्रह नक्षत्र, राशि वा राशि स्वामी के कारण वह परेशान है। पुनः उस ग्रह अथवा राशि के कारकत्व को आधार बनाकर जातक के परेशानी को दूर करता है। उन कारकतत्व में पेड़ पौधे भी आते है।

भारतीय ज्योतिष में प्रत्येक नक्षत्र, ग्रह और राशि के लिए कोई न कोई पेड़-पौधे निर्धारित है। जन्म कुंडली में बुरे ग्रहो के प्रभाव को कम करने के लिए तथा शुभ ग्रहो के शुभत्त्व को बढ़ाने के लिए निर्धारित पेड़-पौधों की सेवा तथा उसके जड़ को धारण करने का विधान है। आइये जानते है की कौन पौधा किस ग्रह राशि तथा नक्षत्र के लिए निर्धारित किया गया है।

ज्योतिषीयशास्त्र में 27 नक्षत्रों के लिए अलग-अलग गुणवाले पेड़-पौधे निर्धारित किये गए है आइये जानते है वे कौन कौन है।

27 नक्षत्रो के लिए निर्धारित पेड़-पौधे
अश्विनी – कोचिला,
भरनी – आंवला
कृतका – गुल्लड़
रोहिणी – जामुन
मृगशिरा – खैर
आद्रा – शीशम
पुनर्वसु – बांस
पुष्य – पीपल
अश्लेषा – नागकेसर
मघा – बट
पूर्वा फाल्गुन – पलास
उत्तरा फाल्गुन – पाकड़
हस्त – रीठा
चित्रा – बेल
स्वाती- अजरुन
विशाखा – कटैया
अनुराधा – भालसरी
ज्योष्ठा – चीर
मूला – शाल
पूर्वाषाढ़ – अशोक
उत्तराषाढ़ – कटहल
श्रवण – अकौन
धनिष्ठा – शमी
शतभिषा – कदम्ब
पूर्व भाद्र – आम
उत्तरभाद्र – नीम
रेवती – महुआ

बारह राशि के लिए निर्धारित पेड़-पौधे
राशि – पेड़-पौधे
मेष – आंवला
वृष – जामुन,
मिथुन – शीशम,
कर्क – नागकेश्वर,
सिंह – पलास,
कन्या – रिट्ठा,
तुला – अजरुन,
वृश्चिक – भालसरी,
धनु – जलवेतस,
मकर – अकोन,
कुंभ – कदम्ब
मीन – नीम

प्रत्येक ग्रह के लिए निर्धारित पेड़ -पौधे
सूर्य – अकोन ( एकवन)
चन्द्रमा – पलास,
मंगल – खैर,
बुद्ध – चिरचिरी,
गुरु – पीपल,
शुक्र – गुलड़,
शनि – शमी,
राहु – दुर्वा व
केतु – कुश

ग्रह, राशि, नक्षत्र के लिए निर्धारित पेड़ पौधे का प्रयोग करने से अंतश्चेतना में सकारात्मक सोच का संचार होता है तत्पश्चात हमारी मनोकामनाये शनै शनै पूरी होने लगती है। वृक्ष लगाओ जीवन पाओ.

अन्यत्र

अश्विनी नक्षत्र का वृक्ष - केला, आक तथा धतूरा को माना गया है।
भरणी नक्षत्र का वृक्ष - केला एवं आंवला को बताया गया है।
कृत्तिका नक्षत्र का वृक्ष - गूलर है।
रोहिणी नक्षत्र का वृक्ष - जामुन को निर्धारित किया गया है।
मृगशिरा नक्षत्र का वृक्ष - खैर है।
आर्द्रा नक्षत्र का वृक्ष - आम तथा बेल को माना गया है।
पुनर्वसु नक्षत्र का वृक्ष - बांस है।
पुष्य नक्षत्र का वृक्ष - पीपल को सुनिश्चित किया गया है।
आश्लेषा नक्षत्र का वृक्ष - नाग केसर और चंदन है।
मघा नक्षत्र का वृक्ष - वटवृक्ष (बरगद) को माना जाता है।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का वृक्ष - ढाक है।
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का वृक्ष - पाकड़ है।
हस्त नक्षत्र का वृक्ष - रीठा को माना जाता है।
चित्रा नक्षत्र का वृक्ष - बेलवृक्ष है।
स्वाति नक्षत्र का वृक्ष - अर्जुन को बताया गया है।
विशाखा नक्षत्र का वृक्ष - नीम है।
अनुराधा नक्षत्र का वृक्ष - मौलसिरी है।
ज्येष्ठा नक्षत्र का वृक्ष - रीठा को माना जाता है।
मूल नक्षत्र का वृक्ष - राल का वृक्ष है।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का वृक्ष - जामुन का पेड़ है।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का वृक्ष - कटहल है।
श्रवण नक्षत्र का वृक्ष - आक को बताया गया है।
धनिष्ठा नक्षत्र का वृक्ष - शमी और सेमर है।
शतभिषा नक्षत्र का वृक्ष - कदम्ब का पेड़ है।
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का वृक्ष - आम है।
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का वृक्ष - सोनपाठा को माना जाता है।
रेवती नक्षत्र का वृक्ष - महुआ को माना गया है।
अगर आप भी अपने जन्मसमय के नक्षत्र के अनुसार उपरोक्त में से किसी भी एक वृक्ष का दर्शन करते हैं अथवा पूजा करते हैं तो जल्दी ही आपका भाग्य खुल जाएगा।

माता के चरणों मे कोटि-कोटि प्रणाम
18/06/2024

माता के चरणों मे कोटि-कोटि प्रणाम

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।   या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थि...
05/05/2023

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

🙏🏻🏵️🌺🌼💮🙏🏻
🙏🏻जय माता की 🙏🏻

जय महाकाल
26/03/2023

जय महाकाल

12/01/2023

#शुक्रवार #काशी_दुर्लभ_दर्शन -🚩(विशेष )दर्शन किजिये आदि शक्तिदात्री संकटहरणी जगत जननी माँ संकटा देवी।।... #शिव_जी_जहाँ_काशी_मे_ज्ञान_से_लेकर #आत्मदर्शन_के_केंद्र_है_वही_आदिशक्ति_दात्री_संकठा_के_रूप_मे_हैं। प्राचीन मान्यता हैं कि माँ काशीवासियों को शक्ति प्रदान करती हैं। इनके दर्शन पूजन करने वालों कों अभय प्रदान करती हैं। इनके दर्शन पूजन करने वालोे को कभी भय नहीं सताता ।माँ का यही प्रभाव भक्तों को हर वक्त माता के दरबार मे पहुँचते रहते है। मान्यता के अनुसार अज्ञात वास के दौरान कुन्ती पुत्र #पाण्डव काशी आये तो संकठा जी के दर्शन पूजन किया करीब एक वर्ष तक यहाँ रूके। वहीं करीब २५० वर्ष पूर्व खोदाई के दौरान माता आदिशक्ति की प्रतिमा मिली थी। जिसे वर्तमान मे मंदिर की देख रेख कर रहे श्री राजीव शर्मा और अतुल शर्मा के पूर्वजो ने मंदिर बनवाकर स्थापितकर दिया तभी से भक्त माता संकठा के दर्शन पूजन कर आशिर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। मानयताओं के आनुसार माता सभी भक्तों के संकटो का शमन कर सारे कष्टों को हर लेती हैं साथ ही सभी भक्तों के मनोरथों को सिद्ध करती हैं। सप्ताह के प्रत्येक (शुक्रवार) को भक्तों का ताँता लगातार भारी संख्या मे आता है।।।माता संकठा के दर्शन मात्र से सारे कष्टों का शमन हो जाता है साथ ही भक्तों की सभी मनोकामनाएँ सार्थक हो इसी कामनाओं के साथ।। जय माता दी ।।🚩

जय जगदंब .....🙏🏻💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्ये त्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ।🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺ब...
04/11/2022

जय जगदंब .....🙏🏻
💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके
शरण्ये त्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ।
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
बोलेगा सोनीहाल होगा ,
बोल साचे दरबार की जय
हे दरबारा वाली आप की
सदा जय,सदा जय,सदा जय
फीर बोल लौकडे वीर की जय,
हे वीर साहब आप की सदा जय
🌹🌹🌹🌹🌹🌹
नमो संकटा कष्ट हरनी भवानी....
👏जय जगदंम्ब......💐💐💐

🌺🌺🌺जय माँ संकठा 🌺🌺🌺🙏🌺🌺बनारस में आज के दिन माँ भगवती के विभिन्न मंदिरों में दर्शन होता है ,  जिसमे में गलियो में स्थपित इ...
14/10/2022

🌺🌺🌺जय माँ संकठा 🌺🌺🌺
🙏🌺🌺बनारस में आज के दिन माँ भगवती के विभिन्न मंदिरों में दर्शन होता है , जिसमे में गलियो में स्थपित इस मंदिर का आलौकिक प्रतिस्ठा है , 🙏🌺🌺🌺🙏
🙏🌺🌺🌺ये मन्दिर सभी कस्ट को नाश करती है , ऐसा कथा है कि श्री कृष्ण के कहने पर पांडव काशी आकर यहां पूजन किये थे और महाभारत में जीत की कामना की थी ,, 🙏🌺🌺🌺🌺🌺🙏🙏माँ संकटा के मंदिर प्रांगड़ में एक विशाल शेर का प्रतिमा है , स्थानियो की माने तो कभी कभी रात में अक्सर शेर की दहाड़ने की आवाज सुनाई देता है । 🌺 जय माता दी

जय माता दी
04/08/2022

जय माता दी

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