29/11/2025
आख़िर कैसे भरोसा करे ऐसी पुलिस पर?
एक पीड़ित से 22 लाख की ठगी… और ऊपर से न्याय भी अधूरा। जिन पर भरोसा कर इंसाफ़ की उम्मीद थी, वही पुलिसकर्मी आरोपित से सांठगांठ कर बैठे।
पीड़ित को मिलना चाहिए था पूरा हक़, लेकिन 4.68 लाख में सिर्फ़ 2.50 लाख लौटाया गया और बाकी 2.18 लाख हड़प लिए गए।
जब रक्षक ही लेन–देन में शामिल हो जाएं, तो आम आदमी कहाँ जाए?
सोचिए… भरोसा करें तो करें किस पर? 👇👇
गाजीपुर : नौकरी दिलाने के नाम पर हुई 22.78 लाख की ठगी के मामले में पुलिस की न सिर्फ गंभीर लापरवाही उजागर हुई है, बल्कि ठगी के 2.18 लाख रुपये पीड़ित को न देकर सांठ-गांठ कर स्वयं हड़प लिया। मामला उजागर होने पर सीओ सिटी शेखर सेंगर ने शहर कोतवाली के साइबर थाना के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार मिश्र और दीपक कुमार के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराया है।
सीओ सिटी ने बताया कि भांवरकोल के भेलमपुर निवासी नीरज कुमार से तरूण ग्लोबल सोलूशन, मुम्बई महाराष्ट्र एवं कंपनी के मैनेजर ने नौकरी दिलाने के नाम पर 22 लाख 78 हजार 605 रुपये की ठगी कर लिया। जब धोखे का पता चला तो नीरज ने ने 26 सितंबर 2024 को कोतवाली के साइबर थाने में मामला दर्ज कराया था।
बताया कि ठगी की जानकारी होने के बाद ठगी के रुपये जिस खाते में गए थे। उसे फ्रीज कर दिया गया। जांच में पाया गया कि डेबिट फ्रीज रुपये 7,86,935.52 में से फ्राड का 468868 रुपये पाया गया। इतना पीड़ित को मिलना चाहिए, लेकिन नहीं मिला। आवेदक ने प्रार्थना पत्र देकर बताया कि 31 अक्टूबर 2024 को निरीक्षक अशोक कुमार मिश्र और आरक्षी दीपक कुमार ने उसके पिता जगदीश को साइबर थाना बुलाया और दो लाख 50 हजार रुपये नगद वापस किया गया। जबकि नगद रुपये वापस नहीं किया जाता है। डेबिट फ्रीज धनराशि में फ्राड का 2 लाख 18 हजार 868 रुपये होने के बावजूद संबंधित बैंक धारक के खाते को अनफ्रीज कर दिया गया। तत्कालीन निरीक्षक और आरक्षी ने न सिर्फ नियमों का उल्लंघन किया, बल्कि संबंधित से सांठ-गांठ करके खाते से धन निकासी भी किया गया।उसका एक हिस्सा दो लाख 50 हजार रुपये शिकायतकर्ता को दिया गया, जबकि शेष राशि को हड़प लिया गया। मामला उजागर होने के बाद सीओ सिटी ने दोनों खिलाफ शहर कोतवाली में एफआइआर दर्ज कराया है। कोतवाल महेंद्र सिंह ने बताया कि एफआइआर दर्ज कर जांच की जा रही है।