17/08/2026
-:: स्त्री की अभिलाषा :: -
चाह नहीं मैं सुरबाला बन ,
किसी का पथ भटकाऊ ।
चाह नहीं प्रेमिका बन ,
' मीरा बाई ' कहलाऊ ।
चाह नहीं मृत पति के साथ,
जल कर 'सती ' कहलाऊ ।
चाह नहीं देवदासी बन,
किसी की रखैल कहलाऊ ।
मुझे ब्याह कर ले जाना,
ए मानव के राज हंस ।
जिसे ' वीर ' बना सकू ,
वो हो मेरा ' अंश ' ।
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