25/05/2026
--- ::: नकाब और घूंघट ::: ---
नकाब छोड़ , घूंघट हटा ,
तालीम को सुदृढ बना ,
पुरुष प्रधान को हटाकर ,
मानवता प्रधान बना ।
मुख देता है परिचय ,
योग्यता देती पहचान ,
यौवना घूंघट हटाकर ,
स्वयं को दे रही सम्मान ।
वीरांगनाए छा रही ,
जल , थल और गगन पर ,
तब क्यो मुख छिपाए ,
अपने देश की अस्मिता पर ।
नादानियां है धर्मो की ,
कुरीतियों मे बंधा समाज ,
फरफरा रही चिड़िया पिंजरे मे ,
अब किस सदी की आस ।
' रजिया ' बनी सुल्ताना ,
' मनु ' बनी झांसी की रानी ,
समय कह रहा ' हे नारी ' ,
अब तुम्हारी है बारी ।।।।
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