30/09/2025
इंसान 'छोटा जहान' (आलम-ए-सगीर) क्यों है?
इंसान कायनात (ब्रह्मांड) का केंद्र क्यों है?
यह लेख तसव्वुफ़ (सूफ़ीवाद) के विचारों पर आधारित है, जिसे मुफ्ती सैयद मेहताब आलम ने लिखा है।
'निहायतुल अरबी फ़ी फ़ुनूनिल अदब' नामक किताब में लिखा है कि ज्ञानियों (हकमा) ने इंसान को 'आलम-ए-सगीर' यानी 'छोटा जहान' कहा है।
| इंसान का अंग | तुलना (किससे) | वजह (उदाहरण) |
|---|---|---|
| सर | आसमान/आकाश | - |
| चेहरा | सूरज (आफ़ताब) | जैसे सूरज के बिना कायनात नहीं, वैसे चेहरे के बिना इंसान नहीं। |
| अक्ल (बुद्धि) | चाँद (मेहताब) | जैसे चाँद का नूर घटता-बढ़ता है, वैसे ही अक्ल भी कम-ज़्यादा होती है। |
| पाँचों इंद्रियाँ (स्वाद, सूंघना, देखना, सुनना, छूना) | घूमने वाले ग्रह (कवाकिब-ए-सय्यारा: बुध, शुक्र, बृहस्पति आदि) | - |
| इंसान के विचार | स्थिर तारे (नजूम-ए-साबित) | - |
| आँसू | बारिश | - |
| आवाज़ | बिजली की कड़क | - |
| हँसना | बिजली की चमक | - |
| पीठ | ज़मीन/खुश्की (सूखा) | - |
| पेट | समंदर (सागर) | - |
| गोश्त (मांस) | ज़मीन (मिट्टी) | - |
| हड्डियाँ | पहाड़ | - |
| बाल | वनस्पति (पेड़-पौधे) | - |
| अंग/हिस्से | देश/इलाके (अकालीम) | - |
| रगें | नदियाँ/नहरें | - |
खुद में झाँकने का महत्व
कुरान करीम में अल्लाह ने फ़रमाया है:
> "तो अपनी जानों में ग़ौर और फ़िक्र क्यों नहीं करते?"
>
लेख के अनुसार, जो व्यक्ति इस 'छोटे जहान' (खुद इंसान) में गहराई से सोचता है, उस पर 'बड़े जहान' (पूरी कायनात) के राज़ खुल जाते हैं। इंसान में ऐसे कमाल और राज़ छिपे हैं, जिन्हें जान लेने वाला हर लिहाज़ से दूसरों से खास हो जाता है।
यही वजह है कि हदीस पाक में कहा गया है:
> "जिसने अपने आप को पहचान लिया, उसने अपने रब को पहचान लिया।"
>
इसका मतलब है कि इंसान के अपने वजूद में लाखों निशानियाँ हैं जो एक और अकेले अल्लाह की पहचान और उसकी सत्ता का सबूत हैं।
इंसान केंद्र क्यों है?
जब इंसान अपनी असली हक़ीक़त को जान लेता है, तो वह समझ जाता है कि:
* वह फ़रिश्तों के सजदे के लायक क्यों था?
* अल्लाह ने मासूम फ़रिश्तों को इंसान को सजदा करने का हुक्म क्यों दिया?
जब यह राज़ खुलता है, तो वह यह भी जान जाता है कि अल्लाह ने क्यों फ़रमाया:
> **"मैं अपनी शान के लायक न आसमान में समाता हूँ और न ज़मीन में, बल्कि बंदा-ए-मोमिन (सच्चे ईमान वाले) के दिल में समा जाता हूँ।"
>
इससे उसे "मोमिन का दिल अल्लाह का अर्श (सिंहासन) है" की हक़ीक़त समझ में आती है।
निष्कर्ष
जब इंसान 'आरिफ़' (अल्लाह को जानने वाला) बन जाता है, तो वह जान जाता है कि पूरी कायनात का केंद्र इंसान ही क्यों है।
वजह: इंसान में आसमान और ज़मीन के बनाने वाले (अल्लाह) के वो राज़ छिपे हैं जो किसी और मख़लूक़ (सृष्टि) में नहीं रखे गए। और जो इन राज़ों को जितना ज़्यादा जानता है, वह उतना ही बेहतरीन और मुकम्मल माना जाता है।