Top Naat & Bayaan Status

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03/10/2025

संगमरमर का दिल

#ईश्वरीय_प्रेम_जीवन_का_उद्देश्य 63

‏‎إن كنت صخرة أو حجر مرمر عندما تلحق بصاحب قلب تصبح جوهراً

"यदि तुम चट्टान या संगमरमर हो, तब भी जब तुम एक सच्चे दिलवाले की संगति में आते हो, तो तुम एक रत्न बन जाते हो।"

❗ रूमी ❗

आग में रहने से लोहा आग बन जाता है।
गधों में रहने से असली घोड़ा भी गधा बन जाता है।

उसी प्रकार:
* बे-दिल जब दिलवाले से मिलेगा,
* काला दिल जब सफेद दिल से मिलेगा,
* पत्थर दिल जब फूल दिल की संगत में बैठेगा,
तो वह दिल भी सफेद दिल और फूल दिल बन जाएगा।
दिल चुपके से चुराया जाता है और चुपके से चोरी करता है।
इसलिए, अल्लाह के वलियों (संतों) की संगत में बैठें ताकि आपके दिलों की सफाई होती रहे।
✍️ #सैयद_मेहताब_आलम

02/10/2025
इंसान 'छोटा जहान' (आलम-ए-सगीर) क्यों है?इंसान कायनात (ब्रह्मांड) का केंद्र क्यों है?यह लेख तसव्वुफ़ (सूफ़ीवाद) के विचारो...
30/09/2025

इंसान 'छोटा जहान' (आलम-ए-सगीर) क्यों है?
इंसान कायनात (ब्रह्मांड) का केंद्र क्यों है?
यह लेख तसव्वुफ़ (सूफ़ीवाद) के विचारों पर आधारित है, जिसे मुफ्ती सैयद मेहताब आलम ने लिखा है।
'निहायतुल अरबी फ़ी फ़ुनूनिल अदब' नामक किताब में लिखा है कि ज्ञानियों (हकमा) ने इंसान को 'आलम-ए-सगीर' यानी 'छोटा जहान' कहा है।
| इंसान का अंग | तुलना (किससे) | वजह (उदाहरण) |
|---|---|---|
| सर | आसमान/आकाश | - |
| चेहरा | सूरज (आफ़ताब) | जैसे सूरज के बिना कायनात नहीं, वैसे चेहरे के बिना इंसान नहीं। |
| अक्ल (बुद्धि) | चाँद (मेहताब) | जैसे चाँद का नूर घटता-बढ़ता है, वैसे ही अक्ल भी कम-ज़्यादा होती है। |
| पाँचों इंद्रियाँ (स्वाद, सूंघना, देखना, सुनना, छूना) | घूमने वाले ग्रह (कवाकिब-ए-सय्यारा: बुध, शुक्र, बृहस्पति आदि) | - |
| इंसान के विचार | स्थिर तारे (नजूम-ए-साबि‍त) | - |
| आँसू | बारिश | - |
| आवाज़ | बिजली की कड़क | - |
| हँसना | बिजली की चमक | - |
| पीठ | ज़मीन/खुश्की (सूखा) | - |
| पेट | समंदर (सागर) | - |
| गोश्त (मांस) | ज़मीन (मिट्टी) | - |
| हड्डियाँ | पहाड़ | - |
| बाल | वनस्पति (पेड़-पौधे) | - |
| अंग/हिस्से | देश/इलाके (अकालीम) | - |
| रगें | नदियाँ/नहरें | - |
खुद में झाँकने का महत्व
कुरान करीम में अल्लाह ने फ़रमाया है:
> "तो अपनी जानों में ग़ौर और फ़िक्र क्यों नहीं करते?"
>
लेख के अनुसार, जो व्यक्ति इस 'छोटे जहान' (खुद इंसान) में गहराई से सोचता है, उस पर 'बड़े जहान' (पूरी कायनात) के राज़ खुल जाते हैं। इंसान में ऐसे कमाल और राज़ छिपे हैं, जिन्हें जान लेने वाला हर लिहाज़ से दूसरों से खास हो जाता है।
यही वजह है कि हदीस पाक में कहा गया है:
> "जिसने अपने आप को पहचान लिया, उसने अपने रब को पहचान लिया।"
>
इसका मतलब है कि इंसान के अपने वजूद में लाखों निशानियाँ हैं जो एक और अकेले अल्लाह की पहचान और उसकी सत्ता का सबूत हैं।
इंसान केंद्र क्यों है?
जब इंसान अपनी असली हक़ीक़त को जान लेता है, तो वह समझ जाता है कि:
* वह फ़रिश्तों के सजदे के लायक क्यों था?
* अल्लाह ने मासूम फ़रिश्तों को इंसान को सजदा करने का हुक्म क्यों दिया?
जब यह राज़ खुलता है, तो वह यह भी जान जाता है कि अल्लाह ने क्यों फ़रमाया:
> **"मैं अपनी शान के लायक न आसमान में समाता हूँ और न ज़मीन में, बल्कि बंदा-ए-मोमिन (सच्चे ईमान वाले) के दिल में समा जाता हूँ।"
>
इससे उसे "मोमिन का दिल अल्लाह का अर्श (सिंहासन) है" की हक़ीक़त समझ में आती है।
निष्कर्ष
जब इंसान 'आ‍रिफ़' (अल्लाह को जानने वाला) बन जाता है, तो वह जान जाता है कि पूरी कायनात का केंद्र इंसान ही क्यों है।
वजह: इंसान में आसमान और ज़मीन के बनाने वाले (अल्लाह) के वो राज़ छिपे हैं जो किसी और मख़लूक़ (सृष्टि) में नहीं रखे गए। और जो इन राज़ों को जितना ज़्यादा जानता है, वह उतना ही बेहतरीन और मुकम्मल माना जाता है।

30/09/2025

नबी करीम ﷺ के साथियों का अटूट ईमान और बेमिसाल दौलत

"मैं दावे से कहता हूँ कि आप पूरी दुनिया छान मारें, लेकिन मेरे प्यारे नबी ﷺ के वफ़ादार सहाबियों (साथियों) जैसा कोई दूसरा नहीं मिलेगा!"

यह बात उनकी दौलत और ईमान दोनों की महानता को दर्शाता है, जिसे कोई दूसरा छू भी नहीं सकता।

حضرت عبدالرحمن بن عوف رضی اللہ عنہ के इंतकाल के बाद, उनकी चार पत्नियों में से हर एक को विरासत के आठवें हिस्से में 340 किलो सोना मिला। (अल्लाह अकबर कबीरा!)

आज की कीमत के हिसाब से यह लगभग 6 अरब 29 करोड़ 34 लाख रुपये हर एक पत्नी को विरासत में मिले।

यह सिर्फ आठवां हिस्सा था! विरासत को बच्चों में बांटने के लिए सोना काटते-काटते लोगों के हाथ ज़ख़्मी हो गए थे।

आप अंदाज़ा लगाइए कि क्या आज कोई इतना अमीर है?

अल्लाह की राह में बेमिसाल खर्च
वह अल्लाह की राह में बहुत ज़्यादा खर्च करते थे।
* कहा जाता है कि उन्होंने एक ही दिन में 31 गुलामों को आज़ाद किया।

* उन्होंने नबी ﷺ के ज़माने में आधा माल (4 हज़ार दीनार) खर्च किया, फिर चालीस हज़ार खर्च किए।

* उन्होंने अल्लाह की राह में पाँच सौ घोड़े और फिर पाँच सौ सवारियाँ खर्च कीं।

* उन्होंने उम्मत की माताओं (امہات المؤمنین) के लिए एक बाग़ वक्फ़ (दान) किया, जो 4 लाख (दीनार या दरहम) में बिका।

* उन्होंने पचास हज़ार दीनार अल्लाह की राह में खर्च किए।
सहाबा-ए-बदर के लिए वसीयत
उन्होंने यह भी वसीयت की कि जो असहाब-ए-बदर (बद्र की लड़ाई में शामिल सहाबी) ज़िंदा हैं, उनमें से हर एक को चार हज़ार दीनार दिए जाएँ।

* उस समय 100 असहाब-ए-बदर ज़िंदा थे।

* 4 हज़ार दीनार का मतलब आज के दौर में 17 किलो सोना है, जिसकी कीमत लगभग 31 करोड़ 46 लाख 70 हज़ार रुपये बनती है।

* उन्होंने 100 सहाबियों में से हर एक को इतनी बड़ी रकम दी। (अल्लाह अकबर कबीरा!)
यही वह असली मोहब्बत और भाईचारा है जिसका ज़िक्र क़ुरान में है।{رُحَمَاءُ بَيْنَهُمْ}

यानी: "वो आपस में बहुत रहमदिल हैं।"
इसलिए मैं कहता हूँ कि तुम पूरी दुनिया में ढूँढ लो, लेकिन मेरे नबी ﷺ के जानसारों जैसा एक भी न ढूँढ पाओगे!
اللہ ان سے راضی ہوا اور وہ اللہ سے راضی ہوئے۔

"बाप अपने दिल को चूम नहीं सकता, तो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने उसके दिल का टुकड़ा बेटी की सूरत में अता फ़रमा दिया, जिसे वो जी भ...
29/09/2025

"बाप अपने दिल को चूम नहीं सकता, तो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने उसके दिल का टुकड़ा बेटी की सूरत में अता फ़रमा दिया, जिसे वो जी भर के चूमता है।"

एक पिता अपने दिल को तो नहीं चूम सकता, इसलिए अल्लाह ने उसे बेटी के रूप में अपने दिल का टुकड़ा दे दिया, जिसे वह जी भरकर प्यार करता है और चूमता है।
(सैयद महताब आलम)

चिंता मत करो.जब तुम मुश्किल में होते हो, तो अल्लाह तुम्हारे लिए तंग रास्तों से भी एक खुला रास्ता बना देगा. बस, धीरज रखो....
26/09/2025

चिंता मत करो.
जब तुम मुश्किल में होते हो, तो अल्लाह तुम्हारे लिए तंग रास्तों से भी एक खुला रास्ता बना देगा. बस, धीरज रखो.
यह अजीब है कि जब हमारा मालिक अल्लाह है, तब भी हम निराश हो जाते हैं. हमारा मालिक, हमारा रब, हर चीज़ पर शक्ति रखता है और हम उसके बंदे हैं. बस उसे पुकारो, और वह सब कुछ ठीक कर देगा.
जब हम चारों ओर से परेशानियों से घिर जाते हैं, तब अल्लाह की रहमत का बादल आकर सुकून की बारिश करता है.
अगर वह चाहे, तो पत्थर से भी फूल उगा सकता है.
अगर वह चाहे, तो हमारी परेशानियों का कारण बनने वालों को ही उन परेशानियों का हल करने वाला बना सकता है.

Aashikan-E-Garib Nawaz Ko Chati Sharif Mubarak
06/01/2025

Aashikan-E-Garib Nawaz Ko Chati Sharif Mubarak

29/11/2024

AAP Sabhi Ko Hamare Group Ki Traf Se Jumma Mubarak

💞💞💞💞💞

🌹🌹 Ek SALAM To Banta Hai,
24/11/2024

🌹🌹 Ek SALAM To Banta Hai,

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