27/08/2026
गोल्डन फॉरेस्ट जमीन विवाद में पत्रकारों पर मुकदमे का मामला गरमाया
हरक सिंह रावत के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया एसपी कार्यालय का घेराव, निष्पक्ष जांच की मांग
देहरादून। गोल्डन फॉरेस्ट की जमीन और कथित कब्जे से जुड़े विवाद में पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। पत्रकारों का आरोप है कि जमीन से जुड़े सवालों और कथित कब्जे को लेकर आवाज उठाने के बाद उन्हें ही मुकदमे में फंसा दिया गया। इसी मामले को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के नेतृत्व में एसपी कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और पत्रकारों की शिकायतों को भी गंभीरता से सुनने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि किसी पत्रकार के खिलाफ शिकायत है तो कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन किसी भी पक्ष को सुने बिना कार्रवाई किए जाने से कई सवाल खड़े होते हैं।
जमीन विवाद से शुरू हुआ मामला
बताया जा रहा है कि मामला गोल्डन फॉरेस्ट की जमीन तथा फौजी से संबंधित बताई जा रही जमीन पर कथित कब्जे और उसे अन्य लोगों को बेचे जाने के आरोपों से जुड़ा है। पत्रकारों की ओर से इस मामले को उठाते हुए संबंधित अधिकारियों को शिकायत एवं ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया गया था।
पत्रकारों का आरोप है कि जमीन संबंधी शिकायतों की जांच करने के बजाय पूरे विवाद को दूसरी दिशा में ले जाया गया और लेनदेन से जुड़े मामले को कथित रूप से ब्लैकमेलिंग के प्रकरण में बदलकर पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पत्रकारों का पक्ष पर्याप्त रूप से नहीं सुना। उनका कहना था कि जमीन से जुड़े मूल आरोपों की निष्पक्ष जांच किए बिना पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई किया जाना उचित नहीं है।
कांग्रेस ने मांग की कि पूरे मामले में संबंधित जमीन के दस्तावेजों, स्वामित्व, कथित कब्जे और बिक्री से जुड़े तथ्यों की जांच की जाए तथा सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएं।
तहसील प्रशासन को भी दिया गया था ज्ञापन
पत्रकारों का कहना है कि गोल्डन फॉरेस्ट की जमीन तथा कथित कब्जे और बिक्री के संबंध में तहसील प्रशासन को पहले ही ज्ञापन देकर मामले से अवगत कराया गया था। मांग की गई थी कि जमीन के दस्तावेजों और पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।
आरोप है कि शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई और इसके बजाय पत्रकारों को ही मुकदमे में फंसा दिया गया। इसी को लेकर कांग्रेस ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ एसपी कार्यालय का घेराव किया।
हरक सिंह रावत के नेतृत्व में प्रदर्शन
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे डॉ. हरक सिंह रावत और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई। उनका कहना था कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति को प्रभाव, दबाव या राजनीतिक पहुंच के आधार पर संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
कांग्रेस ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मुकदमे की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और यदि किसी प्रकार की साजिश या झूठे मुकदमे के तथ्य सामने आते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
अब जांच पर टिकी निगाहें
पूरे मामले के बाद कई सवाल सामने हैं—
क्या गोल्डन फॉरेस्ट की संबंधित जमीन के दस्तावेजों की जांच होगी?
क्या कथित कब्जे और जमीन की बिक्री के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या पत्रकारों की ओर से पूर्व में दिए गए ज्ञापनों पर कार्रवाई की गई थी?
क्या पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में उनके पक्ष को पूरी तरह सुना गया?
इन सवालों के जवाब अब पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
फिलहाल गोल्डन फॉरेस्ट जमीन विवाद और पत्रकारों पर दर्ज मुकदमे को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस ने एस एस पी कार्यालय घेराव के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन पूरे प्रकरण की जांच किस दिशा में आगे बढ़ाता है और संबंधित पक्षों के आरोपों एवं दावों की सच्चाई क्या सामने आती है।
नोट: खबर में उल्लेखित आरोप संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच का विषय है। संबंधित अन्य पक्षों का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा 🔥