10/07/2026
1880 से 1920 के बीच भारत सिर्फ़ अपने नक़्शे पर नहीं था। वह रेल की पटरियों पर था, स्टीमबोट के डेक पर था, गिरमिटिया काग़ज़ों में था, अमेरिका के खेतों में था, शिकागो के मंच पर था, और उन स्कूलों की देहरी पर था जहां सावित्रीबाई फुले जैसी स्त्रियां जाति और पितृसत्ता से लड़ रही थीं।
भारत की कहानी के इस 20वें एपिसोड में हम देखते हैं कि कैसे लाखों भारतीय घर से निकले - कोई रोज़गार के लिए, कोई तीर्थ के लिए, कोई शिक्षा के लिए, कोई बंधुआ मज़दूरी में, कोई युद्ध के मैदानों में, और कोई अपने अधिकारों की तलाश में।
यह एपिसोड पंडिता रमाबाई, आनंदीबाई जोशी, रोकेया सखावत हुसैन, स्वामी विवेकानंद, ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले, आयोथी थास, गिरमिटिया मज़दूरों, भारतीय सिपाहियों, रेल यात्रियों और उन अनगिनत लोगों की कहानी है, जिनकी आवाजाही ने भारत को भीतर से बदल दिया।
यह कहानी सिर्फ़ प्रवास की नहीं है। यह शिक्षा, जाति, श्रम, स्त्री-अधिकार, समुद्र, रेल, बीमारी, टीके और पहचान की भी कहानी है।
दोपहर बाद आज चार बजे से Equal Tales Storyline के यूट्यूब चैनल पर यह कहानी स्ट्रीम होगी। तब तक आप यूट्यूब पर जाएं और Equal Tales Storyline सर्च करके अब तक के सारे एपिसोड देख सकते हैं।