18/06/2026
भारत की कहानी के इस एपिसोड में हम अकबर, मुग़ल साम्राज्य, राजपूतों, फ़तेहपुर सीकरी, संस्कृत-फ़ारसी अनुवाद, इबादत-ख़ाना, दक्कन, बीजापुर, इब्राहिम आदिल शाह, मलिक अंबर और ग़ेब्रियल की कहानी को एक नये नज़रिये से देखते हैं।
इतिहास अक्सर बादशाहों के नाम से याद रखा जाता है, लेकिन साम्राज्य सिर्फ़ ताज से नहीं बनते। वे मज़दूरों के हाथों से बनते हैं, गठजोड़ से बनते हैं, उन स्त्रियों से बनते हैं जो राजपूत महलों से मुग़ल दरबार तक पहुंचती हैं, उन अनुवादकों से बनते हैं जो संस्कृत को हिंदी में सुनाते हैं और हिंदी को फ़ारसी में लिखते हैं।
इस एपिसोड में हम देखते हैं कि अकबर के दौर का भारत सिर्फ़ युद्ध और ताज का भारत नहीं था। यह फ़तेहपुर सीकरी के लाल पत्थरों पर उकेरे मज़दूरों के नामों का भारत था। यह वृंदावन के गोविंददेव मंदिर का भारत था। यह इबादत-ख़ाना की बहसों का भारत था। यह बीजापुर के रंगीन बाज़ारों, दखनी गीतों, सरस्वती और नौरस की दुनिया का भारत था। और यह मलिक अंबर जैसे पूर्व ग़ुलाम की असाधारण उठान और ग़ेब्रियल जैसे आदमी की दुखद गुमनामी का भारत भी था।
यह एपिसोड भारत के उस इतिहास को सामने लाता है, जहां साधारण और असाधारण जीवन एक-दूसरे में गुंथे हुए हैं।
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