28/02/2026
कर्मपथ पर चलने वाले व्यक्ति के आत्मसंघर्ष, तिरस्कार और आत्ममंथन को अभिव्यक्त करती हुई ये कविता है । अपनों की चुनौती, व्यंग्य और संदेह के बीच आत्मनिर्माण का संकल्प लेता हुआ कवि क्या कहना चाहता है? पढ़िए इस कविता में! https://www.writerspouch.org/post/कर्मपथ