21/08/2026
श्रीवृषभानुसुते वन्द्ये, श्रीराधा-मञ्जुश्यामे शुभे।
कीर्तिते भुवनत्रय्ये कृष्णप्राणप्रिये सदा।।
अर्थ: वृषभानु जी की दोनों वंदनीय और कल्याणकारी पुत्रियों—राधा और मंजुश्यामा—की मैं वंदना करता हूँ, जो तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं और सदैव श्री कृष्ण को प्राणों से भी प्यारी हैं।
🌹हरे मुरारे मधुकैटभारे गोपाल गोविन्द मुकुन्द शौरे ।🙏
यज्ञेश नारायण कृष्ण विष्णु निराश्रयं मां जगदीश रक्ष ॥🌹
*वृन्दावन इक सुन्दर जोरी।*
*खेलत जहाँ तहाँ बंशीवट, नन्दनन्दन वृषभानु किशोरी ॥*
*भुवन चतुर्दस की सब सुषमा, इन दोउन पर डारी भोरी।*
*स्याम सुभग वर कंचन गौरी, मनहुँ तड़ित घन माहिं बहोरी ॥*
*जै श्रीभट कहाँ लौं बरनौं, रसना एक नाहिं लख कोरी।।*
*श्री भट्ट जी कहते हैं कि वृन्दावन में श्री श्यामा-श्याम की एक अत्यंत सुंदर जोड़ी विराजमान है, जो बंशीवट के निकट निरंतर विहार (क्रीड़ा) करती है। चौदह लोकों की समस्त सुंदरता इन दोनों पर न्योछावर है। सांवले कृष्ण और गोरी राधा ऐसे लगते हैं मानो बादलों के बीच बिजली कौंध रही हो।*