28/06/2026
#छोटाबांस #रादौर बागड़ी–भाट एक हैं।(दो बागड़ीयों की पुरानी तस्वीर जिसमें वह छोटाबांस के उन भाटो के घर जा रहे हैं जो हमारे सैकड़ों युवाओं के #हत्यारे हैं)
आज हमें खुशी है कि रादौर में जो विचारधारा स्थापित करने के लिए हमने प्रयास किया था वह #विचारधारा काफी हद तक अब रादौर में स्थापित हो चुकी है।
नशे के खिलाफ कार्य करने से बड़ा लक्ष्य था रादौर के लोगों को #जागरूक करके नशे के खिलाफ खड़ा करना, उसके लिए हमने निडर होकर इन #तस्करों की सच्चाई दुनिया के सामने रखी और जिन घरों में पुलिस नहीं घुसती थी उन घरों में तस्करों की #छाती पर रादौर की आम जनता को लेकर चढ़ा दिया। जिस नशे की बस्ती की आग में कोई तपना नहीं चाहता था हमने उसी आग के बीच कूदकर उस बस्ती में ऐसा #विस्फोटक तैयार किया जिसको #चिंगारी देने का काम यहां की आम जनता को करना था और जनता ने वह कर दिया।
आज भले कोई भी #श्रेय लेने के लिए आगे आता रहे हमें उससे कोई समस्या नहीं है। हर किसी ने अपनी अपनी #भूमिका भी निभाई है और आज भी निभा रहे हैं। बुराई के खिलाफ जब जन जन जागृत हो जाए फिर कोई भी समस्या बड़ी नहीं रहती। आज रादौर में नशे का मुद्दा हर किसी का अपना मुद्दा बना हुआ है, नशे का #भंडार बेचने वाली बस्ती को खाली करवाने के लिए आज पूरा रादौर #एकजुट नज़र आ रहा है।
अलग अलग पार्टी और संगठनों के लोगों के साथ साथ सभी प्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर एक छत के नीचे आ गए हैं और यह रादौर वासियों के लिए #सौभाग्य की बात है।
जैसा कि आपको बताया कि हमारा श्रेय लेने,अपनी फोटो खिंचवाने और अपना #गुणगान करने से अधिक हर मुद्दे की जड़ों में रहकर #सच्चाई खंगालने और जनता के सामने रखने का प्रयास रहता है। इसलिए आजकल बस्ती में अलग अलग समाज को लेकर चल रही #उलझनों पर अपनी प्रतिक्रिया रादौर वासियों के सामने रखना हमने अपना #कर्तव्य समझा।
लोग कह रहे हैं सबसे बड़े तस्कर सांसी यानि #भाट समाज के लोग हैं और #डेहा समाज के कुछ लोग भी नशा तस्करी के साथ साथ अन्य #अपराधों में पूरी तरह लिप्त रहते हैं।
लेकिन यह भी बात चल पड़ी है कि #बागड़ी समुदाय पूरी तरह निर्दोष है और उनको नाजायज सजा मिल रही है।
कोई कह रहा है उनको #प्लाट देने चाहिए, कोई कह रहा हमारे #फॉलोअर पूरे होते ही उनको 10,000 रुपए देंगे तो कोई नीचे नीचे उनकी विभिन्न प्रकार से #सहायता भी कर रहा है। हर कोई अपनी अपनी सोच और भूतकाल के #अनुभवों के हिसाब से बातें कर रहा है,कुछ अपने स्वार्थ की रोटियां सेकने का #अवसर ढूंढ रहे हैं।
लेकिन प्रिय #रादौरवासियों यहां पूरी सच्चाई आपको कोई नहीं बता सकता, चाहे कोई दिन रात बस्ती में #कैमरा उठाकर घूमे या अपने को इस अभियान का #सर्वेसर्वा बनाकर पेश करे लेकिन अंदर तक की #जानकारी किसी के पास नहीं होती।
बहुत दिनों से कुछ लोगों ने बागड़ी समाज के लोगों को लेकर एक धारणा बनाई हुई थी जिसपर हम टिप्पणी करने से इसलिए बच रहे थे कि प्रशासन को जो करना है वो तो करना ही है,तो अब क्यों फिर से जानकारी का पिटारा खोलकर जनता का भरोसा हर किसी से उठाएं।
लेकिन अब जिस प्रकार से कुछ लोगों ने निर्दोष निर्दोष का शोर मचाया हुआ है तो उन लोगों को सबसे पहले ये #फोटो देखनी चाहिए।
यह फोटो कुछ महीने पुरानी है और इस फोटो में दो बागड़ी समाज के व्यक्ति उस गली और घर में जा रहे हैं जहां भाट रहते हैं। अब कुछ लोग कहेंगे कि ऐसे तो किसी को किसी से भी काम पड़ सकता है।लेकिन अगर कोई बात न होती तो हम यह फोटो आपको न दिखाते और न और बातें बताते जो बताने जा रहे हैं।
बागड़ीयो के घर छोटाबाँस के पूरब में हैं और भाट के घर पश्चिम में।।।बीच में पूरी डेहा बस्ती।।।।तो फिर इनका एक दूसरे से क्या मेल होगा सोचिए।।।।
इनके कार्यक्षेत्र अलग हैं इनकी बोली इनका रहन सहन अलग फिर ये संबंध कैसा??
हम बताते हैं, आप लोग नहीं जानते लेकिन छोटाबांस के इन बागड़ी समाज के लोगों के छोटाबांस के ही हत्यारे भाट तस्करों के साथ पारिवारिक संबंध हैं।
आप छोटाबांस की जानकारी रखने वाले किसी व्यक्ति से पूछ सकते हैं कि कई सालों से भाट समाज के कुछ लोग बागड़ियो के घरों में रोज प्रतिदिन घंटों घंटों तक पड़े रहते थे, हुक्का गुड़गुड़ाते थे।
आज माहौल बदल गया तो दूर हैं लेकिन ये सत्य मानिए कि केवल बागड़ी समाज ही नहीं बल्कि और भी अलग अलग समाज (डेहों से भी अलग)के लोगों ने उस समय करोड़ों रुपए की बहती नदी में हाथ धोए।।
किसी ने रेड के समय इनको शरण दी, किसी ने लाखों करोड़ों का माल छुपाने में सहायता की तो किसी ने अपनी छोटी सी दुकान से स्मैक का नशा करने वाले युवाओं को सिल्वर पन्नी foil paper और अन्य सामग्री बेचकर दुकान बड़ी कर ली।
वहां पूरी तरह दूध का धुला कोई नहीं है बेशक आज के माहौल को देखते हुए बनावटी चादर ओढ ली है।
निश्चित रूप से बस्ती में अधिकतर लोग बेकसूर हैं लेकिन जिस प्रकार अलग अलग समाज को पूरी तरह क्लीन चिट दी जा रही है इसपर रादौर वासियों को फिर से विचार करना चाहिए।
यह फोटो केवल एक नमूना है इससे अलग भी दूसरे समाज के कुछ लोगों के भाट हत्यारों के साथ सीधे संबंध के अनेकों सबूत उपलब्ध हो जाएंगे। लेकिन हमें बिना बात के विवाद को बढ़ाने का कोई शौंक नहीं है।अगर इनकी पिछले कुछ सालों की CDR कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकाले जाएं तो बागड़ी और भाट एक दूसरे के कितने नजदीक रहे हैं यह सत्य सबके सामने अपने आप आ जाएगा।
इसलिए आप सब लोग किसी किसी के कहने पर और जो फॉलोअर बढ़ने पर बागड़ियो को 10,000 देने की बात कह रहे हैं उनकी बातों पर ज्यादा ध्यान न दें।
इनके साथ जो होगा वह भगवान पर और नगर पालिका पर छोड़ दीजिए। भगवान किसी निर्दोष को कभी दंड नहीं देते,बिना पूरा सत्य जाने किसी की पैरवी मत कीजिए।
धन्यवाद
जय हिंद 🇮🇳