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युग परिवर्तन : युग बदले, देवता बदले, पर कहानियां अमर रहीं | 🔱✨ग्रीक, नॉर्स, मिस्री, भारतीय और दुनिया की पौराणिक कथाओं का संग्रह। देवताओं के युद्ध, राक्षसों के रहस्य, और सभ्यताओं की अमर गाथाएं - सरल हिंदी में। युग बदले, कहानियां बाकी हैं । Follow करें 🔱✨

1. महाभारत शुरू होने से पहले क्या हुआ ?महाभारत से पहले घटी वह घटना जिसने इतिहास बदल दिया 🏆✨   जहाँ से कुरुक्षेत्र के बीज...
21/07/2026

1. महाभारत शुरू होने से पहले क्या हुआ ?
महाभारत से पहले घटी वह घटना जिसने इतिहास बदल दिया 🏆
✨ जहाँ से कुरुक्षेत्र के बीज बोए गए
📝 😲 क्या आप जानते हैं महाभारत युद्ध से पचहत्तर वर्ष पहले ही उसके सूत्र बंध चुके थे ? हस्तिनापुर के राजा शांतनु और देवी गंगा के असाधारण विवाह से इसकी नींव पड़ी । महाभारत के आदिपर्व के अनुसार गंगा ने अपने सात नवजात पुत्रों को जल में प्रवाहित कर दिया था, यह आठ वसुओं का शापमोचन था । आठवें पुत्र देवव्रत ही भीष्म बने, जिन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य की भीषण प्रतिज्ञा ली, जिसने अंततः कुरुवंश में उत्तराधिकार का गहरा अंधकार भर दिया ।

03/07/2026

गंगा का वचन और देवव्रत के भविष्य का | अध्याय : 99 |

Story 3अध्याय : 99गंगा का वचन और देवव्रत के भविष्य का उद्घोषनियति का निर्णय करुणा के साथ भी अपरिवर्तित रहता है ।शाप मिलन...
02/07/2026

Story 3
अध्याय : 99
गंगा का वचन और देवव्रत के भविष्य का उद्घोष
नियति का निर्णय करुणा के साथ भी अपरिवर्तित रहता है ।

शाप मिलने के बाद वसु गंगादेवी के पास पहुँचे और विनती की, “जब हम मनुष्य रूप में जन्म लें, तब हमें अपने जल में प्रवाहित कर शीघ्र मुक्त कर देना ।” गंगा ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और राजा शान्तनु से कहा, “इसी कारण मैंने अपने पुत्रों को जन्मते ही जल में समर्पित किया ।” फिर बोलीं, “केवल द्यौ ही आपके पुत्र देवव्रत के रूप में दीर्घकाल तक पृथ्वी पर रहेगा । वह गांगेय नाम से प्रसिद्ध होगा और गुणों में आपसे भी बढ़कर होगा ।” इतना कहकर गंगा शिशु को साथ लेकर अंतर्धान हो गईं ।

02/07/2026

महर्षि वसिष्ठ का शाप और द्यौ का विशेष दण्ड | अध्याय : 99 |

Story 2अध्याय : 99महर्षि वसिष्ठ का शाप और द्यौ का विशेष दण्डऋषि का क्रोध देवताओं के वैभव से भी अधिक प्रबल सिद्ध हुआ ।महर...
02/07/2026

Story 2
अध्याय : 99
महर्षि वसिष्ठ का शाप और द्यौ का विशेष दण्ड
ऋषि का क्रोध देवताओं के वैभव से भी अधिक प्रबल सिद्ध हुआ ।

महर्षि वसिष्ठ जब फल-मूल लेकर आश्रम लौटे तो नंदिनी और उसका बछड़ा कहीं दिखाई नहीं दिए । बहुत खोजने पर भी वे न मिले । तब दिव्य दृष्टि से उन्हें ज्ञात हुआ कि वसुओं ने ही उनका अपहरण किया है । क्रोध में उन्होंने कहा, “मेरी कामधेनु का हरण करने वाले सभी वसु मनुष्य योनि में जन्म लेंगे ।” पश्चात्ताप करते वसु क्षमा माँगने पहुँचे । तब महर्षि बोले, “सात वसु एक-एक वर्ष में मुक्त होंगे, पर द्यौ दीर्घकाल मनुष्यलोक में रहेगा, संतानहीन होगा और पिता के हित में स्त्री-सुख का त्याग करेगा ।”

02/07/2026

नंदिनी गौ की इच्छा और वसुओं द्वारा उसका | अध्याय : 99 |

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