Salman Ahmad Khan

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08/06/2026

मौत का रेगिस्तान: सहारा की वो खौफनाक कहानी जिसे सुनकर रूह कांप जाए! 😢

​क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि इस दुनिया की सबसे भयानक और दर्दनाक मौत क्या होगी? शायद "प्यास" से तड़प-तड़प कर दम तोड़ देना।

​उत्तरी अफ्रीका के कई देशों में फैला सहारा डेजर्ट, जो दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे क्रूर हॉट डेजर्ट माना जाता है, हाल ही में एक बेहद दर्दनाक हादसे का गवाह बना।

​नाइजर के रास्ते सहारा रेगिस्तान को पार कर रहे मासूम लोगों से भरा एक ट्रक अचानक बीचों-बीच खराब हो गया। चारों तरफ सिर्फ तपती रेत, झुलसा देने वाली गर्मी और दूर-दूर तक पानी की एक बूंद नहीं।

​नाकाम कोशिश: उन लोगों ने तपती धूप में ट्रक को ठीक करने की पूरी कोशिश की, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।
​खत्म होती उम्मीदें: देखते ही देखते उनका पीने का पानी पूरी तरह खत्म हो गया।

​जिंदगी और मौत की जंग: 51 लोगों के उस समूह में से सिर्फ 2 लोग किसी तरह हिम्मत जुटाकर वहां से पैदल निकले और अपनी जान बचाने में कामयाब रहे।

​अंजाम: बाकी के 49 लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तड़पते हुए उसी तपते रेगिस्तान में हमेशा के लिए सो गए।
​यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रकृति के सामने इंसान कितना बेबस है, और जिस पानी को हम रोज़ यूं ही बर्बाद कर देते हैं, वो किसी के लिए जिंदगी की आखिरी उम्मीद होता है।

"फ़बि-अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान"
"तो तुम अपने परवरदिगार की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?"
— सूरह अर-रहमान

22/05/2026
23/04/2026

🤢

06/04/2026

Celebrating my 10th year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉

एक और मुसलमानों की इबादत गाह को निशाना बनाया गया
07/01/2026

एक और मुसलमानों की इबादत गाह को निशाना बनाया गया

04/01/2026

इस्लाम को बदनाम करने की सबसे बड़ी वजह बाहरी नहीं, अंदरूनी दीमक हैं।

आजकल कुछ लोग टीवी डिबेट्स में इस्लाम के नाम पर ऐसी भाषा और व्यवहार दिखा रहे हैं जो न सिर्फ मज़हब की तौहीन है बल्कि पूरी उम्मत के लिए शर्मनाक भी। ये बागड़बिल्ले किस हैसियत से इस्लाम के ठेकेदार बन बैठे हैं?

ना इल्म, ना तहज़ीब, बस चीख़-पुकार और कीचड़ उछालना। क्या यही है इस्लाम की नुमाइंदगी?

इन डिबेट्स से न इस्लाम को फायदा है, न कौम को। सिर्फ नफरत और ग़लतफहमियाँ फैलती हैं।

जरूरत है कि समाज के ज़िम्मेदार लोग आगे आएं, और इन जाहिल नुमाइंदों से दूरी बनाएँ। इस्लाम इल्म, तहज़ीब और अमन का मज़हब है — इसे तमाशा न बनने दें।

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