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06/26/2026

का अमर महल पैलेस वर्ष 1975 में संग्रहालय में बदला। यह डोगरा राजवंश की कला और शाही परिवार की दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह है। एक पुस्तकालय भी है। प्रदर्शनियाँ भी हैं, लेकिन नूतनता की कमी है।

06/26/2026

बकरवालों की जीवनशैली में ही उनका रहस्य छिपा है। लेकिन कुछ बकरवालों ने अपनी पारंपरिक ज़िंदगी को पीछे छोड़ दिया है। अब वे विकास की मुख्य धारा के राही हैं।
यहाँ सुनें एक पूंछी बकरवाल का अनुभव- और प्रधानमंत्री के बारे में उनकी राय-

23 साल पुरानी बातचीत ने अब किताब का स्वरूप ले लिया है। यह बातचीत श्री गोविंदाचार्य और राय साहब के बीच हुई थी। अब दस्तावे...
05/11/2026

23 साल पुरानी बातचीत ने अब किताब का स्वरूप ले लिया है। यह बातचीत श्री गोविंदाचार्य और राय साहब के बीच हुई थी। अब दस्तावेज बन चुकी है। 23 अप्रैल 2003 की इस बातचीत में इतिहास है। राजनीति का दावपेंच है। आपातकाल का सच और उससे जुड़े द्वंद हैं। भविष्यवाणी है, जो एक-एक कर सच साबित हो रही है।

गोविंदाचार्य भारतीय राजनीति में ऐसे बिरले उदाहरण हैं, जिनमें लोगों की जिज्ञासा बनी हुई है। हालांकि उन्होंने स्वयं को दलीय राजनीति से परे कर लिया है। इसके बावजूद लोग-बाग पूछते पाए गए कि क्या गोविंदाचार्य भाजपा में आ रहे हैं? इससे इतना तो साफ हो गया कि गोविन्दाचार्य को लेकर कयासों में ही जिज्ञासु लोगों ने अपना समय बर्बाद किया है।

किताब को पढ़कर वे इस निष्कर्ष तक पहुंच जाएंगे। यह पुस्तक विषय के दो मर्मज्ञ के बीच होती बातचीत का नजीर है।

04/29/2026

बकरवाल समाज के लोग अब चढ़ाई करने लगे हैं और एक-एक कर मैदानी इलाके को पीछे छोड़ना शुरू कर दिया है। उनका अगला ठिकाना हिमालय की चोटियां हैं, जहाँ वे अपने माल-मवेशियों के साथ उन्मुक्त जीवन का आनंद लेने वाले हैं।
जम्मू-कश्मीर के इस घुमंतू समुदाय की विचित्र दुनिया है। हर वर्ष हजारों भेड़-बकरियों के साथ वे मौसमी प्रवास पर निकलते हैं, जहाँ हिमालय उनका इस्तक़बाल करने को बेताब रहता है। कुदरत ने भी ग़ज़ब का संयोग बनाया है। हिमालय के इस क्षेत्र में धीरे-धीरे बर्फ पिघलती जाती है और उसके नीचे से उभर आता है- चारागाह का अथाह मैदान! फिर यहाँ आबाद हो जाती है- बकरवालों की पूरी दुनिया! जहाँ रहते हैं, वे और उनके मवेशी।
हिमालय की इस रहस्यमयी दुनिया का मौन कोई तोड़ता है तो वह है- बकरवालों के गीत, जो युगों-युगों से इन वादियों में गूँजते रहते हैं। इन गीतों में उनके पुरखों की थाती है। संस्कृति का भंडार है। जीवन संघर्ष की गाथा है, उसके अलग-अलग रंग हैं। रीति-रिवाज है। ठहरकर कोई देखे तो और भी बहुत कुछ है।

04/27/2026

प्रोफेसर शेखर पाठक का परिचय यह है कि उन्होंने अपना जीवन हिमालय की खोज में बिताया है। उन्होंने छोटे-छोटे कदमों से हिमालय की लंबी और ऊँची यात्रा की है। आज पहाड़ और वे एक दूसरे के पर्याय हैं।

जर्मनी से तीन ज्योग्राफर ने 1854-56 के बीच हिमालय की यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने 700 से अधिक चित्र बनाए। जैसा हिमालय को देखा, वही चित्र में दिखाया। उन्हीं 700 चित्रों में 72 चित्र इस प्रदर्शनी में लगे हैं। कोई चाहे तो आईआईसी एनेक्सी में हिमालय को देख सकता है।

04/25/2026

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 : प्रवासी बंगालियों की नजर में सूबे का चुनाव दिलचस्प मोड़ पर है। लेकिन इस लड़ाई में कांग्रेस कहीं नहीं है। सुनें खरी-खरी!

‘ऑपरेशन सिंदूर’ हमारी सेना के शौर्य का प्रतीक है। इस दौरान नागरिक प्रशासन ने जिस कर्तव्य-निष्ठा और साहस का परिचय दिया, व...
04/21/2026

‘ऑपरेशन सिंदूर’ हमारी सेना के शौर्य का प्रतीक है। इस दौरान नागरिक प्रशासन ने जिस कर्तव्य-निष्ठा और साहस का परिचय दिया, वह अभूतपूर्व था। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों ने भी अपना कर्तव्य निभाया। वे सेना और नागरिक प्रशासन के साथ खड़े रहे।
वह “शौर्य दिवस” अपने साल पूरे करने जा रहा है। एक सुखद संयोग है कि राजौरी जिला प्रशासन ने ऑपरेशन सिंदूर पर केंद्रित एक म्यूजियम का निर्माण किया है, जो शहीद हुए एडीसी डॉ. राज कुमार थापा के नाम पर है।

डॉ. थापा के आवास को ही ऑपरेशन सिंदूर के स्मारक व संग्रहालय का स्वरूप दिया गया है। यह ऑपरेशन सिंदूर का पहला संग्रहालय है, जो धीरे-धीरे आकार ग्रहण कर रहा है। इसके बनने की कहानी दिलचस्प है। उसपर अलग से बात होगी।

04/10/2026

11 अप्रैल, 2026 से जम्मू कश्मीर को नशा-मुक्त करने का अभियान शुरू हो रहा है। अगले 100 दिनों तक चलने वाले इस अभियान को जन-जन तक पहुँचाने की पहल सूबे के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने की है।
उन्होंने राज्य के सभी शिक्षाविदों, खिलाड़ियों, जन प्रतिनिधियों और समाज के सभी वर्गों के लोगों से इस अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया है, ताकि सूबे की युवा पीढ़ी किसी बाह्य षड्यंत्र से मुक्त होकर अपने उज्जवल भविष्य का निर्माण करने में सफल हो।

तो आएँ हमसब मिलकर नशा मुक्त समाज की शपथ लें ।

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