08/13/2026
कभी गौर किया है…
एक महिला सबकी जरूरत समझ लेती है,
बिना कहे सबकी परेशानी समझ लेती है…
लेकिन उसकी परेशानी कौन समझता है? 🥺
वो घर में सबकी पसंद का खाना बनाती है,
सबकी खुशी में खुश होती है,
सबके दुख में साथ खड़ी रहती है…
लेकिन जब वो खुद थक जाती है,
तो अक्सर कह देती है—
“कुछ नहीं हुआ… मैं ठीक हूँ।” 💔
क्योंकि उसे डर होता है…
कहीं उसकी थकान को शिकायत न समझ लिया जाए,
कहीं उसकी इच्छा को स्वार्थ न कह दिया जाए।
लेकिन सुनिए…
थक जाना कमजोरी नहीं है।
अपने लिए वक्त माँगना स्वार्थ नहीं है।
और अपनी खुशी चाहना कोई गलती नहीं है। ❤️
वो माँ है, पत्नी है, बेटी है, बहन है…
लेकिन इन सब रिश्तों से पहले
वो खुद भी एक इंसान है।
उसे भी कभी बिना किसी वजह के हँसने दीजिए…
कभी उसके सपनों की बात कीजिए…
और कभी बस इतना कह दीजिए—
“आज घर की चिंता छोड़ो…
आज सिर्फ अपने लिए जियो।” 🌸
क्योंकि जो महिला सबके चेहरे पर मुस्कान लाती है,
उसकी मुस्कान की जिम्मेदारी भी हमारी है। ❤️